Friday, June 26, 2020

सूर्यग्रहण का अद्भुद नजाराAmazing view of solar eclipse

सूर्यग्रहण का अद्भुद नजाराAmazing view of solar eclipse
बाल वैज्ञानिकों ने लिया सूर्यग्रहण का अद्भुद नजारा
15 खुद के बनाये उपकरणो से अवलोकन किया वलयाकार सूर्यग्रहण।
सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों ने क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा के मार्गदर्शन में आज वलयाकार सूर्यग्रहण का नजारा अपने हाथों से बनाये गए 15 विभिन्न नवाचारी उपकरणों से दिखाया।
कर्नाटका भारत ज्ञान विज्ञान समिति व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक ने इस कवरेज को पूरे भारत के कार्यकर्ताओं के साथ लाईव साँझा भी किया।
बाल वैज्ञानिकों में पार्थवी, प्राची, रमन धींगड़ा, यश, नमन, सक्षम आहूजा, रितेश ओबराय, अंशवी बाल वैज्ञानिको ने टेलिस्कोप प्रतिबिम्बित विधि से सूर्य का प्रतिबिंब, गेंद दर्पण प्रेक्षेपक, सौर फिल्टर नेत्र, सुरक्षित सौर प्रक्षेपक, छलनी छाया उपकरण, बायनाकुलर प्रक्षेपक, बॉक्स कैमरा, पिन होल कैमरा, अनियमित छिद्रों से प्रक्षेपण व वृक्ष छाया प्रतिबिम्ब विधियों से सूर्यग्रहण का अवलोकन करके सबको आश्चर्य चकित कर दिया। इस अवसर पर बाल वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने का प्रयोग भी किया।
विज्ञान संचारक बवेजा ने बताया कि जहां एक तरफ सभी सूर्यग्रहण को बहुत  बड़ा डर मान कर घरों में दुबके पड़े थे वही वे बाल वैज्ञानिक दुनिया को दिखा रहे थे कि भारत अब अंधविश्वास की बेड़ियों से निकल कर नए वैज्ञानिक परिवेश में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर एक सोच नई सोच संस्था के संस्थापक शशी गुप्ता ने बताया कि सूर्य ग्रहण के अवसर पर बहुत से लोग अंधविश्वास के कारण इस खगोलीय ओर भूगौलिक घटना का आनन्द लेने से महरूम रह जाते है शशी ने बताया सूर्य ग्रहण एक खोगोलिय घटना है सूर्यग्रहण के समय किसी ग्रह का हमारे जीवन और देश पर कोई विपरीत प्रभाव नही पड़ता बल्कि पूरा विश्व के वैज्ञानिक इस खोगोलिय घटना का उत्सुकता से इंतज़ार करते है उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण के समय सूर्य को नंगी आंखों से देखने से बचना चाहिए और सूर्य ग्रहण के न होने पर भी हमे नंगी आंखों को से सूर्य को निरन्तर देखने से बचना चाहिये।
इस अवसर पर क्लब सहयोगी विकास ढींगरा ने बताया कि आज वे सब भी इस दुर्लभ खगोलीय घटना को किसी अंधविश्वास के साथ न जोड़ कर वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ अवलोकन कर पाये। पहले से ही समाज में बहुत सी कुरीतियां व्याप्त है कि सूर्य या चन्द्र ग्रहण को देखने से किसी अशुभ या अनहोनी घटना का आगमन होता है। सभी भय जगाने वाली प्रचलित मान्यताओं से इतर यह सामान्य तौर पर होने वाली खगोलीय घटना ही है इसके मद्देनजर उन्होंने परिवार सहित इसके सुरक्षित अवलोकन का नज़ारा लिया।
पूरी कवरेज़ का वीडियो
Darshan Lal Baweja

Wednesday, June 17, 2020

21 जून को वलयाकार सूर्यग्रहण Annular Solar Eclipse on June 21, 2020

21 जून को वलयाकार सूर्यग्रहण Annular Solar Eclipse on June 21, 2020
वलयाकार सूर्यग्रहण Annular Solar
21 जून को वलयाकार सूर्यग्रहण 
यमुनानगर में बेहतरीन नजारा रहेगा।
इस सूर्यग्रहण के चरम पर सूर्य 'आग के गोले -रिंग आफ फायर' की तरह चमकेगा। 
यमुनानगर में 98.95% नज़ारा होगा।
सी वी रमन विपनेट विज्ञान क्लब सचिव, हरियाणा विज्ञान मंच के जिला समन्वयक व विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि जो सूर्यग्रहण 21 जून को लग रहा है इस प्रकार के सूर्यग्रहण को वलयाकार, कुंडलाकार सूर्य ग्रहण या कंकनाकार सूर्यग्रहण प्रकार का कहा जाता है। वलयाकार सूर्यग्रहण तब लगता है जब चँद्रमा सामान्य की तुलना में धरती से उतनी अनुपातिक दूरी पर हो जाता है कि वह पूरी तरह सूर्य को ढक नही पता। वलयाकार सूर्यग्रहण में चंद्रमा के बाहरी किनारे से निकलता सूर्य का प्रकाश सुनहरी कंगन की तरह काफ़ी चमकदार नजर आता है। सूर्य तीव्र अग्नि ज्वाला के  वलय जैसा दिखेगा। सूर्य का मध्य भाग चँद्रमा की छाया से ढका होगा जबकि बाह्य वृत्ताकार भाग से प्रकाश निकलेगा।
सूर्य ग्रहण का दृश्यपथ
पूर्ण सूर्य ग्रहण कभी भी कभी भी पूरे गोलार्ध में एक साथ दिखाई नही दे सकता, इसकी भी एक सीमा होती है। यह दो सौ पचास किलोमीटर चौड़ी पट्टी में ही दिखाई देगा और पट्टी की लंबाई कभी भी एक हजार किलोमीटर से अधिक नहीं हो सकती औऱ चौड़ाई 270 किलोमीटर से अधिक नही हो सकती। हरियाणा में इसका अधिकतम नजारा मुख्यतः पश्चिम से पूर्व की तरफ 'अधिकतम ग्रहण पट्टी' में ऐलनाबाद, सिरसा, रतिया, जाखल, पेहवा, कुरूक्षेत्र, लाडवा व यमुनानगर सर्वश्रेष्ठ रहेगा। यमुनानगर के बाद बेहट से होता हुआ उत्तराखंड के देहरादून से अगस्त्यमुनि फिर जोशीमठ से जाकर भारत की सीमा से बाहर हो जाएगा।
ग्रहण पथ
यमुनानगर सूर्यग्रहण समय सारणी
यमुनानगर में प्रात: 10 बज कर 22 से सूर्यग्रहण शुरू होगा, 12 बज कर 03 मिनट पर अधिकतम (98.95%) नजारा रहेगा जबकि 01 बज कर 48 मिनट पर सूर्यग्रहण समाप्त हो जाएगा। 
विद्यालय न खुलने के स्थिति में घर पर ही सुरक्षित अवलोकन का प्रशिक्षण। 
सेफ सोलर फिल्टर
 से अवलोकन
श्री बवेजा ने बताया कि इस बार 21 जून के वलयाकार सूर्यग्रहण को करोना का ग्रहण लग गया अन्यथा उनके क्लब की बहुत बड़ी योजना थी कि किसी विद्यालय या कालेज में बड़ा सूर्य उत्सव मनाया जायेगा।
सी वी रमन विपनेट साइंस क्लाब सरोजिनी कालोनी व हरियाणा विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद कैम्प सरकारी स्कूल के विज्ञान क्लब सदस्य जनवरी से ही  बहुत उत्साहित थे व  उन्होंने अवलोकन की तैयारियां शुरू कर  दी थी। इस बार तो समय को कुछ और ही रंग दिखाना था। अब उन्हें घर से ही सुरक्षित अवलोकन करना होगा। इसके लिए उनको प्रशिक्षित किया जा रहा है।
सूर्यग्रहण के प्रकार।
दर्शन लाल बवेजा ने सूर्यग्रहण के बारे में बताया कि सूर्यग्रहण तीन प्रकार से होता है। पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण, दूसरा वलयाकार सूर्य ग्रहण एवं तीसरा आंशिक सूर्य ग्रहण।
सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य एवं पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो वह सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक आने से रोक लेता है। जिससे सूर्य चंद्रमा के पीछे ढक जाता है और हम पृथ्वीवासी सूर्य के प्रकाश को नहीं देख पाते। पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति में तो चंद्रमा सूर्य को पूरा ढक लेता है और ग्रहण के समय एकदम रात जैसा अंधेरा हो जाता है। आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के कुछ भाग को ढकता है और वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढ़क पाता जिस कारण सूर्य के स्थान पर एक कंगन की तरह रोशनी का रिंग दिखाई देता है। इसे ही वलयाकार या कुंडलाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
कैसे करें अवलोकन सूर्यग्रहण के नजारे का?
सूर्य ग्रहण अवलोकन से नहीं डरना चाहिए लेकिन इसके लिए सुरक्षित साधनों का प्रयोग करना चाहिए जैसे "सुरक्षित सौर दृश्यक' (सेफ़ सोलर फिल्टर), फिल्टर युक्त दूरबीन से, सूर्य के प्रतिबिंब को दूरबीन की मदद से स्क्रीन पर लेकर, बॉक्स में फोकस करने व लाइव टेलीकॉस्ट के विभिन्न चैनल्स आदि तरीकों से अवलोकन कर सकते हैं।





याद रहे हमे भूलकर भी सूर्य का नग्न आँखोँ से नहीं अवलोकन करना चाहिये वरना आंखों में गंभीर स्थाई दोष उत्पन्न हो जाएगा।
खगोलविदों व अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण।
विज्ञान अध्यापक बवेजा का कहना है कि सूर्यग्रहण का अवसर जहां वैज्ञानिको के लिए 'नए शोध' के द्वार खोलता वहीं अंधविश्वासियों के लिए 'भय का व्यपार' के अवसर उत्पन्न करता है। सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है जिसके अवलोकन का आनन्द लेना चाहिए। खगोलीय घटना को लेकर अंधविश्वास में न रहे। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को किसी अंधविश्वास के साथ न जोड़ कर देखें। समाज में बहुत सी कुरीतियों व्याप्त है कि सूर्य या चन्द्र ग्रहण को देखने से किसी अशुभ या अनहोनी घटना का आगमन होता है। सभी भय जगाने वाली प्रचलित मान्यताओं से इतर यह सामान्य तौर पर होने वाली खगोलीय घटना ही है इसके सुरक्षित अवलोकन का आनन्द लें।
यह विज्ञान प्रसार द्वारा जारी वीडियो देखें।
 

यहाँ आप सूर्यग्रहण अवलोकन की विभिन्न विधियों के वीडियो देख सकते हैं।









पंजाब केसरी की खबर में.....

Darsha lal Baweja

Saturday, May 30, 2020

विद्युत के सुचालक और कुचालक पदार्थ  Good and Bad conductor of electricity
आवश्यक सामग्री:  जांचने के लिए विद्युत परिपथ, एक बज़र, एक एलईडी, एक स्विच, एक बैटरी, सम्पर्क तारें  व बहुत सा सामान जिसमें हम सुचालक व कुचालक गुणों को जांचना चाहते हैं। (जैसे कांच, कागज, धातु, अधातु, मिश्रधातु, पानी, नमक का घोल इत्यादि।)
क्यों/ कैसे: विद्युत के सुचालक पदार्थ जो होंगे वो परिपथ को पूरा कर देंगे और कुचालक पदार्थ जो होंगे वो परिपथ को पूरा नही कर पायेंगे।
प्रयोग विधि: विज्ञान पढ़ाते समय धातु, अधातु व मिश्र धातु पाठ में धातु अधातु व मिश्र धातु के एक विशिष्ट गुणों की चर्चा होती है जिनमे एक गुण है विद्युत के सुचालक एवं कुचालक।
परिपथ का चित्र मैंने साथ संलग्न किया हुआ है। इसके अनुसार किसी लकड़ी के पीस के ऊपर या हार्ड बोर्ड पर परिपथ तैयार कर लेते हैं। परिपथ की दोनों सिरों के सम्पर्क तार जो की स्वतंत्र हैं से स्विच ऑन करने के बाद, उन तारों से हम जिस भी वस्तु को टच करेंगे अगर वह विद्युत की सुचालक होगी तो बज़र आवाज करेगा और एलईडी चमकने लगेगी अगर वस्तु कुचालक होगी तो ना बज़र बजेगा और ना ही एलईडी चमकेगी। यहां जो भी सुचालक वस्तु है वो परिपथ को पूर्ण (Close) कर देती है और कुचालक वस्तु परिपथ को पूरा नहीं करती। इस उपकरण का एक यह भी लाभ है कि हम इससे तरल पदार्थों की विद्युत सुचालक व कुचालक गुणों की जांच भी कर सकते हैं। यह परिपथ बनाना बहुत आसान है और यह बहुत महंगा भी नहीं है इस परिपथ की सहायता से हम किसी भी वस्तु के सुचालक और कुचालक का गुण पता लगा सकते हैं।
अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा

नमक का विलयन विद्युत का सुचालक Salt Solution is a good conductor of electricity


Salt Solution is a good conductor of electricity नमक का विलयन विद्युत का सुचालक
आवश्यक सामग्री:  एक बैटरी,  एक बजर, एक एलईडी, एक स्विच, संपर्क तारें,  पानी, नमक, एक बीकर या कोई भी कांच का पात्र।
क्यों/कैसे? नमक को जब पानी में घोला जाता है तो वह सोडियम और क्लोराइड में टूट जाता है इस कारण नमक का घोल आयनों की उपस्थिति के कारण विद्युत का सुचालक बन जाता है।
Sodium Chloride is an ionic compound which consists of Sodium ion and Chloride ion. In solid form bond between these two is very strong. But in water the ions become free and move randomly. These ions are charge carriers and thus responsible for electricity conduction.
प्रयोग विधि: बैटरी, एलईडी, बजर व स्विच को परिपथ के अनुसार तैयार कर लेते हैं। एक बीकर थोड़ा सा जल लेकर उसमें 1 ग्राम नमक घोल लेते हैं। स्विच को ऑन कर के परिपथ के दोनों सिरों के तार को पानी में डूबते हैं तो हम देखते हैं कि एलईडी प्रकाश देती है वह बजर आवाज उत्पन्न करता है। ऐसा क्यों होता है ? नमक को पानी में घोलने पर वह सोडियम व क्लोराइड में विभक्त हो जाता है। यह आयन युक्त जल विद्युत का सुचालक हो जाता है। इसमें परिपथ में बजर लगाने का मकसद यह है कि यदि इस उपकरण को कोई दिव्यांग (दृष्टिहीन) विद्यार्थी प्रयोग करना चाहे तो वह बजर की आवाज सुनकर नमक के घोल का सुचालक होना या कुछ अलग होने का पता लगा सकता है।
अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।

द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा

Tuesday, May 26, 2020

कंचा गिराओ गिलास में MARBLE (TOY) AND CUP

कंचा गिराओ गिलास में MARBLE (TOY) AND CUP
आवश्यक सामग्री: एक प्लास्टिक की गेंद ,एक कंचा (बंटा), एक कप।
सिद्धांत :  Centripetal force ,Well of Death (मौत का कुआँ)
जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर चलती है, तो उस पर कोई बल एक वृत्त के केंद्र पर कार्य करता है, इस बल को अभिकेंद्रीय बल कहते हैं। किसी पिण्ड के तात्क्षणिक वेग के लम्बवत दिशा में गतिपथ के केन्द्र की ओर लगने वाला बल अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal force) कहलाता है।
विधि : प्लास्टिक की गेंद को एक चोथाई (1/4) काट  लेते है मेज पर कागज रख कर उस पर एक कंचा व एक कप रख कर, करना ये है कि गेंद से उठा कर कंचे को कप में डालना है।
शर्ते ये है कि विधि: प्लास्टिक की गेंद को एक चोथाई (1/4) काट  लेते है मेज पर कागज रख कर उस पर एक कंचा व एक कप रख कर, करना ये है कि गेंद से उठा कर कंचे को कप में डालना है।
शर्ते ये है कि :
1. गेंद का कट वाला हिस्सा सदा जमीन की  तरफ ही रहना चाहिए  2. कोई चालाकी नहीं ।
1.  गेंद का कट वाला हिस्सा सदा जमीन की  तरफ ही रहना चाहिए  2.  कोई चालाकी नहीं 
                   
 अब करना ये है कि गेंद के कटे हुऐ हिस्से को कंचे के ऊपर रख हाथ से गेंद को गोल गोल हिलाते है  इस से कंचा गेंद की दीवार  के  साथ परिक्रमा करने लगता है जैसे मौत के कुँए के खेल में मोटर सायकिल घुमती है। अब अपने हाथ को धीरे धीरे कप के ऊपर ले आते है और घुमाना रोक देते है अब कंचा कप में गिर जायेगा। 
अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा।
  

Sunday, May 24, 2020

बहु परावर्तन Multiple Reflection

बहु परावर्तन ( Multiple Reflection) 
आवश्यक सामग्रीदो समतल दर्पण ,ब्लैक टेप ,गत्ता
सिद्धांत: प्रकाश का परावर्तन
बनाने की विधि: कार्य विधि: 4 वर्ग इंच के
दो समतल दर्पण लेकर उन को उन्ही के नाप के बराबर गत्ते/कार्ड के टुकडो पर टेप की सहायता से चिपका लेते है फिर उन्हें किताब की तरह  खोल के खड़ा कर देते है कोई वस्तु जैसे एक रूपये का सिक्का या पेन की कैप समतल दर्पणों के आगे रख देते है जैसे जैसे दोनों दर्पणों के बीच कोण कम करते जाते है वस्तु के प्रतिबिम्ब बढ़ते जाते है।
प्रतिबिम्बों की संख्या= (360/दोनों दर्पणों के बीच का कोण)-1
When the angle between the mirrors is 90°, the number of images is (360/90°)-1 = 4-1 = 3.
अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।
द्वारादर्शन बवेजाविज्ञान अध्यापकयमुना नगर,हरियाणा।




Friday, May 22, 2020

सोडियम धातु की जल से क्रिया Reaction of Sodium and Water

सोडियम धातु की जल से क्रिया Reaction of Sodium and Water
जब भी सोडियम धातु का जिक्र आता है तो याद आता है यह वो धातु है जो पानी मे आग लगा देती है जी हां सही सुना है आपने।
 सोडियम अत्यंत सक्रिय यानी क्रियाशील धातु है ये खुली नहीं रखी जा सकती इसको मिट्टी के तेल (केरोसिन) मे रखी जाती है। हवा मे खुला रखा जाने पर यह आक्सीजन से क्रिया कर लेती है और आक्साईड बनाती है। सामान्यतः धातुएँ कठोर होती हैं परन्तु सोडियम अपवाद है यह इतनी नरम होती है की यह धातु चाकू से भी कट जाए।
vanderkrogt.net
सोडियम धातु को चाकू से काटा जा सकता है।
सक्रिय धातु होने के कारण बहुत समय तक सोडियम धातु का निर्माण करना आसानी से  नहीं  हो सका। 1807  में इंग्लैंड के एक वैज्ञानिक डेवी ने द्रव सोडियम हाइड्राक्साइड के वैद्युत अपघटन द्वारा इस तत्व का सर्वप्रथम निर्माण किया।
सोडियम की जल से क्रिया सम्पूर्ण हो जाने के बाद जो राख जैसा पदार्थ बचता है उसके जलीय विलयन में फिनोफ्थलिन के दो बूंदें  डालने से घोल का रंग गुलाबी हो जाता है अर्थात यह घोल क्षारीय प्रकृति का है। यदि सोडियम धातु के छोटे से टुकड़े को पानी में डाला जाये तो अभिक्रिया के उपरान्त सोडियम हाइड्रोआक्साईड NaOH क्षार बनता है और हाइड्रोजन गैस बनती है।
2 Na + 2 H2         2 NaOH + H2
आज सोडियम धातु की जल से क्रिया का प्रयोग किया गया पहले बच्चो को सोडियम धातु से परिचित करवाया गया फिर प्रयोग किया गया। 
सोडियम धातु से बहुत से चमत्कार कर के कईं दशको से मदारी जादूगर और तथाकथित सयाने अपनी रोजी रोटी चला रहें हैं मदारी लकड़ियों, हड्डियों नारियल, हवन कुण्ड पानी छिड़क कर आग लगाने का चमत्कार इसी धातु तत्व सोडियम की मदद से ही करते हैं।
इस प्रयोग को देखने के बाद कम से कम यह बच्चे इन तथाकथितों के झांसे मे नहीं आयेंगे.
यही मकसद होता है किसी देश मे वैज्ञानिक चेतना के प्रसार का जिस के लिए विज्ञान संचारक दिन रात विज्ञान संचार का काम करते हैं।
देखें यह वीडियो जिस मे सोडियम की जल से क्रिया दिखाई गयी है।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, 
यमुना नगर, हरियाणा
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धातु, अधातु व मिश्र धातु के नमूने, Metal, Nonmetal and Alloy


धातु, अधातु व मिश्र धातु के नमूने, Metal, Nonmetal and Alloy
धातु, अधातु व मिश्र धातु को नमूनों से जानो क्या होते हैं ये?
विद्यार्थियों को समय रहते धातु, अधातु और मिश्र धातु का ज्ञान देना बहुत जरूरी है। हालांकि इससे संबंधित पाठ्यपुस्तक में सामग्री है परंतु फिर भी विद्यार्थी किसी भी वस्तु को धातु कह देते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को धातुओं के नमूने दिखाकर धातुओं व मिश्रधातुओं से परिचित कराया गया। इसके लिए मैंने एक एल्बम नुमा डेमोंसट्रेशन तैयार किया।
जिसमे एल्युमिनियम, एंटीमनी, कॉपर, कैडमियम, आयरन, निकिल, मैग्नीशियम, लैड, टिन, जिंक, गोल्ड व सिल्वर धातुओं के नमूनों को शामिल किया। साथ ही मिश्र धातुओं के बारे में भी बताया कि जब दो या दो से अधिक धातुओं या एक अधातु को मिलाकर समांगी मिश्रण तैयार किया जाता है उसे मिश्र धातु कहते हैं। 
मिश्र धातुओं के नमूनों के रूप में मैंने विद्यार्थियों को टाँका (सोल्डर), वाइट मेटल, पीतल (ब्रास), टाइपराइटर के अक्षर की मिश्रधातु, स्टेनलेस स्टील (एस एस), फेरिटिक स्टेनलेस स्टील (एफ एस एस), बेल मेटल, यूरेका, एल्युमीनियम हार्ड, जर्मन सिल्वर, गिलेट (क्युप्रो-निकिल), निकिल-ब्रास आदि मिश्र धातुओं के नमूने दिखाये। साथ ही इन मिश्र धातुओं से बनी विभिन्न वस्तुएं भी दिखाई। जिनमें मुख्यतः रिपब्लिक इंडिया के पुराने व आधुनिक सिक्के दिखाएं जो विभिन्न मिश्र धातुओं से बनाए जाते हैं। बच्चे धातुएं, मिश्र धातुएं उन से बने हुए सिक्के व आसपास ही उनसे बनी अन्य वस्तुओं को देखकर बहुत प्रसन्न हुए। यह सब उनके लिए बिल्कुल नई चीज थी। 
अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा।

Tuesday, May 19, 2020

नाचती गेंद Dancing Ball

नाचती गेंद Dancing Ball
आवश्यक सामग्री: एक फुट का पाइप का टुकड़ा या स्ट्रॉ, एक छोटी हल्की गेंद (पिंगपोंग)
क्यो व कैसे?: बर्नोली का सिद्धांत, गति बढ़ी-दबाव घटा, Speed increased-Pressure decreased
कार्य विधि: इस गतिविधि में हम एक हल्की व छोटी प्लास्टिक की गेंद लेते हैं। गेंद का आकार टेबलटेनिस की गेंद जितना होना चाहिए। एक लेवल पाइप का टुकड़ा या कोल्ड ड्रिंक पीने वाला स्ट्रा लेते हैं यह स्प्रिंगदार होना चाहिए, जिसकी गर्दन ऊपर से मुड़ जाती है। 6 इंच स्ट्रॉ काटकर हम उसे समकोण पर मोड़ लेते हैं। सेलो टेप चिपकाकर उसे समकोण पर ही स्थिर कर लेते हैं।
अब उस मुड़ी हुई स्ट्रॉ का लंबे वाला सिरा मुंह में डालते हैं और ऊपर वाले सिर पर उस गेंद को पकड़ कर एक समान रूप से फूंकते हैं और गेंद को छोड़ देते हैं। गेंद उस पाइप के ऊपरी सिरे पर ऊपर-नीचे गति करती है। बच्चे यह देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें बताया गया कि नीचे से हवा गेंद को ऊपर उठाती है गेंद के नीचे  बर्नोली का सिद्धांत, गति बढ़ी-दबाव घटा, Speed increased-Pressure decreased के कारण ऊपर से लगने वाला लंबवत वायु दबाव उस गेंद को फिर से नीचे धकेल देता है। बच्चों से बरनोली सिद्धांत का भी जिक्र किया गया जिस कारण यह गेंद ऊपर नीचे नाच दिखाती है। अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा।


Monday, May 18, 2020

तैरते पेपर क्लिप्स Floating paper clips

तैरते पेपर क्लिप्स Floating paper clips
आवश्यक सामग्री:  एक कांच का बर्तन, पानी, 5-6 रंग-बिरंगे पेपर क्लिप्स। 
क्यों व कैसे ?: पृष्ठ तनाव के कारण (पृष्ठ तनाव किसी द्रव की सतह का वह गुण है जिसके कारण यह प्रत्यास्थ की तरह फ़ैल जाती है या सिकुड़ जाती है अर्थात प्रत्यास्थता का गुण प्रदर्शित करती है।)
कार्य विधि:  एक कांच के पात्र में पानी ले लेते हैं। 5-6 पेपर क्लिप में से कोई एक पेपर क्लिप उठाकर उसके लंबे वाली भुजा खोलकर L के जैसा एक कैरियर स्टैंड बना लेते हैं। जिस पर हम एक पेपर क्लिप को रखते हैं और सावधानीपूर्वक बिल्कुल पानी की सतह के समानांतर नीचे ले जाते हम देखते हैं कि केरियल स्टैंड नीचे चला जाता है और वह पेपर क्लिप पानी के ऊपर तैरने लगता है। पेपर क्लिप की दोनों भुजाओं के बीच में खाली स्थान होता है। जिसमें एक तानित जल झिल्ली बन जाती है जो पृष्ठ तनाव के कारण बनती है। इसलिए पेपर क्लिप पानी में तैरने लगता है। इसी प्रकार हम एक सुई को भी पानी में तैरा सकते हैं। पृष्ठ तनाव के कारण द्रव अपने पृष्ठ (सतह) का क्षेत्रफल न्यूनतम करने की कोशिश करते हैं। कई बार देखते हैं कि छोटे-छोटे कीट (इंसेक्ट) की पानी की सतह के ऊपर आराम से अपने पैर फैला कर तैर रहे होते हैं। वह भी पृष्ठ तनाव के कारण होता है। पृष्ठ तनाव एक बल (द्रव के भीतर का अणु संसंजक बल के कारण अपने पड़ोसी अणुओं के द्वारा आकर्षित होता है। द्रव का ऊपरी पृष्ठ/ सतह स्वतंत्र होता है, जिसे स्वतंत्र पृष्ठ कहा जाता है) होता है जो पेपर क्लिप को डूबने नहीं देता। बच्चे इस गतिविधि को बहुत एंजॉय करते हैं आनंद लेते हैं व पानी के ऊपर पेपर क्लिप्स तैरा कर देखते हैं। 
नोट: अगर पेपर क्लिप न हो तो सेफ्टीपिंस यानी बकसुआ को भी तैरा कर द्वखिये।
अगर आप को इस गतिविधी का वीडियो देखना हो तो यहाँ देख सकते हैं।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा।

Saturday, May 09, 2020

कौन सी मोमबत्ती पहले बुझेगी Which candle will be extinguished first

कौन सी मोमबत्ती पहले बुझेगी Which candle will be extinguished first.
नोट: यह गतिविधि करके देखने के बाद ज्यादा समझ आएगा।
आवश्यक सामग्री: तीन मोमबत्तियाँ समान मोटाई की  (छोटी, मध्यम, बड़ी), एक काँच का जार या बेलजार, माचिस।
 कारण: कार्बन डाई आक्साइड गैस हवा से भारी होती है और जलने के लिए वायु की आवश्यकता व आक्सीजन की अनिवार्यता।
कार्य विधि: तीनो आकार की मोमबत्तियाँ एक पंक्ति में क्रमवार लगा लेते है, उन्हें जला लेते है फिर काँच का जार चित्रानुसार उल्टा कर के उन मोमबत्तियों के उपर रख देते है। 

अब क्या आप बता पायेंगे कि कोन सी मोमबत्ती पहले बुझेगी??
सब कहेंगे छोटी वाली परन्तु कुछ कहेंगे कि तीनों एक साथ बुझेंगी
परन्तु ये क्या ??

ये क्या न तो तीनों एक साथ बुझी और न ही छोटी पहेले बुझी!
सब से पहले बड़ी फिर मध्यम और फिर छोटी मोमबत्ती बुझी!
ऐसा क्युं ?? :  ऐसा इसलिए कि कार्बन डाई आक्साइड गैस हवा से भारी होती है। तीनों मोमबत्तियों के एक साथ जलने पर आक्सीजन की खपत शुरू होती है। उपर की आक्सीजन(वायु) नीचे से आई ऊष्मा के कारण नीचे भागती है और ऊपर बड़ी मोमबत्ती के चारों और कार्बन डाई आक्साइड गैस का घेरा बनना शुरू होता है जो उस की आक्सीजन की पूर्ति को रोकता है। लेकिन नीचे वाली सब से छोटी मोमबत्ती को अंत तक आक्सीजन मिलती रहती है।

एक सर्वमान्य व्याख्या: जलती लौ  से पैदा हुइ वायु गरम होने के कारण उसका घनत्व  ( Density ) कम होने के कारण जार के उपर जमा होती रहेगी और जमा होते होते उसका लेवल उपर से नीचे की और आता जायेगा. जैसे उसका लेवल बडी मोमबत्ती तक आयेगा तो बडी मोमबत्ती को बुझा देगा क्योंकि गरम हवा मे ओक्सीजन की कमी रहेगी. तब तक छोटी मोम्बत्तीयो को नीचे की ठन्डी हवासे ओक्सीजन मिलती  रहती है. धीरे धीरे गरम हुइ हवा उपर से नीचे की और आती जायेगी और  मोमबत्तीया बुझती जायेगी। यहां वायु का तापमान और उसकी घनता का रीलेशन बायल्स के  नियम के अनुसार काम करता है। समान तापमान मे कार्बन डाईक्साइड हवा से भारी रहती है परतु गरम CO2 हवा से हलकी होने के कारण उपर जमा  हो के नीचे की और भागती  है।
अगर वीडियो देखना हो तो यहां देखा जा सकता है।
इस के कई कारण  बताये जाते है मेरे द्वारा लगाई गयी कक्षाओं में यह  प्रयोग गर्मागर्म बहस का मुद्दा रहता है कोई नया कारण समझ में आता हो तो कृपया टिप्पणी में डाल दे।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा। 

Tuesday, May 05, 2020

Covid-19 quiz

ये एक क्विज़ बनाई है जरा try कीजिये।
इस क्विज़ में भाग लीजिये और कोविड-19,  करोना वायरस से उपजे इस रोग बारे जागरूकता का संचार कीजिए।

कोरोना/कोविड-19  जागरूकता क्विज़ में भाग जरूर लें।
बचाव में ही सुरक्षा है।
घर रहें वेवजह बाहर ना जायें।
                   ¿यहाँ क्लिक करें या नीचे
https://forms.gle/KszPVAdKVnhNRvby8
इस लिंक पर क्लिक करें।
स्कोर भी साथ ही देखें।
गलत जवाब देने पर सही जवाब भी देखें।
प्रस्तुति:
Darshan Baweja 

Friday, May 01, 2020

टिक-टिकी बनाओ Tik-Tiki


टिक-टिकी बनाओ Tik-Tiki
ढ़क्कन बटन की टिक-टिकी
आवश्यक सामग्री:
 एक कोल्डड्रिंक काँच वाली बोतल का
ढक्कन (क्राउन), धागा, कमीज़ पर लगाने वाला बटन, रबर बैंड।
सिद्धांत: दो वस्तुुुओं के टकराने (कम्पन्न) से ध्वनि उत्तपन होना।
बनाने की विधि: कार्य विधि:  एक काँच  वाली कोकाकोला की बोतल का धातु का ढक्कन (क्राउन) लें।
एक कमीज़ पर लगाने वाला बटन लें।
बटन के एक छिद्र में रबर बैंड में पिरोलें।बटन के दुसरे सुराख़ में एक 12 इंच
(1 फीट) लम्बा धागा पिरो कर गांठ लगा  लें। रबर बैंड को बोतल क्राउन कैप के पीछे गांठ लगा कर बांधदेंं। 
अब धागे पर 1-1इंच के बाद गांठे लगा दे |चित्रानुसार दोनों को पकड़ लो, अंगूठे और ऊँगली से धागे को पकड़ कर पीछे खीचो और 
छोड़ो।
बटन बारबार क्राउन से टकराएगा और
टिक-टिक की ध्वनि पैदा करेगा। तुम खुश होंगे और बड़े परेशान .......
अगर बनाने की विधि का वीडियो देखना चाहते हो तो यहां देख लें।

द्वारा: दर्शन लाल बवेजा, विज्ञान
अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा।

Thursday, April 30, 2020

सिक्के का गिलास में गिरना Drop Coin in to Tumbler

सिक्के का गिलास में गिरना Drop Coin in to Tumbler
आवश्यक सामग्री:  एक कांच का बर्तन
(गिलास), एक 5 रूपये का सिक्का, एक कार्ड पेपर का वर्गाकार टुकड़ा, प्लास्टिक का स्केल, रबर बैंड।
सिद्धांत:  जड़त्व का सिद्धांत (ला  ऑफ़ इनर्शिया), न्यूटन का प्रथम नियम।
कार्य विधि: एक कार्ड पेपर(शादी का निमंत्रण पत्र) का वर्गाकार टुकड़ा गिलास उपर रखो फिर उस पर एक 5 रूपये का सिक्का रखो। 
कार्ड पेपर के टुकड़े को जोर से फ्लिक करो (फिल्क मतलब जैसे कैरम बोर्ड के गोटी को मारते है) अब हम देखते है हार्ड पेपर का वर्गाकार टुकड़ा तो आगे की और गिरता है और 5 रूपये का सिक्का गिलास में गिरता है। बार बार अभ्यास करने से  प्रयोग होने लगेगा फिर १,२ रुपयों के सिक्को से भी इसे कर के देखो।
इस प्रयोग को करवाते हुए अक्सर यह देखा जाता है कि बच्चे उंगली से फ्लिक करते समय चूक जाते हैं तो उनकी गतिविधि को सफलता पूर्वक करने की प्रतिशतता कम हो जाती है। विद्यार्थियों के समक्ष यह प्रयोग करते समय उन्होंने एक और तरीका सुझाया जिसे नवाचारी तरीके के रूप में इस प्रयोग में शामिल कर लिया गया।  गिलास के साथ एक स्केल (प्लास्टिक का स्केल) रबर बैंड के साथ लगा लेते हैं। अब हमें कार्ड को उंगली से फ्लिक नहीं करना बल्कि स्केल को पीछे खींच कर छोड़ देना है जो कार्ड से टकराएगा और सिक्का गिलास में गिर जाएगा। यह प्रयोग नवाचारी विधि के रूप में सम्मिलित कर लिया गया है।

द्वारा: दर्शन लाल बवेजा, विज्ञान 
अध्यापक, यमुनानगर, हरियाणा

Tuesday, April 28, 2020

दोनो गेंद आयें पास पास Both balls come close
आवश्यक सामग्री: एक लकड़ी या पाइप का टुकड़ा, 2 छोटी गेंदे(भार में हल्की), धागा, सेलोटेप।
सिद्धांत: बर्नोली का सिद्धांत गति बढ़ी-दबाव घटा, Speed increased-Pressure decreased. 
कार्य विधि:  एक पाईप या लकड़ी के टुकड़े पर एक 1 फुट के दो धागे 4 या 6 इंच दूरी पर सेलो टेप से चिपका लेते हैं। इन धागों के निचले सिरे पर सेलोटेप या फेवीक्विक या फेविकोल की मदद से दो छोटी-छोटी(भार में हल्की) गेंदे चिपका लेते हैं। अब हमारी गतिविधि तैयार है। एक हाथ से लकड़ी या पाइप को पकड़ने पर दोनों गेंदे नीचे लटकती नजर आएंगी। दोनों गेदों के बीच की जगह में से मुंह द्वारा फूंक मारने से हम देखते हैं दोनों गेंदे पास-पास आ जाती है। जब गेंदों के बीच से हवा तेजी से गुजरती है तो दोनों गेंदों के बीच कम दबाव का क्षेत्र बनता है और गेंदों के दूसरी तरफ सामान्य दबाव का क्षेत्र गेंदों को अंदर की तरह पुश करता है।
द्वारा: दर्शनलाल बवेजा, विज्ञान 
अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा 

Monday, April 27, 2020

छ्लनी से पानी रुका water stopped by Sieve

छ्लनी से पानी रुका  water stopped by Sieve

आवश्यक सामग्री: एक आटा छानने की छलनी, पानी, काँच का बर्तन (गिलास)
सिद्धांत:  वायु दबाव, पृष्ठ तनाव।
कार्य विधि: एक कांच के ग्लास (टंबलर) में पानी भर पानी भरकर उसे छलनी की जाली के ऊपर हथेली की सहायता से रख देते हैं। हम देखते हैं कि पानी नीचे नहीं गिरता पानी छलनी के छोटे-छोटे सुराखो में एक झिल्ली (पृष्ठ तनाव के कारण) बनाता है। यह झिल्ली पिछले प्रयोगों की तरह कागज व कपड़े का काम करती है। गिलास के 
अंदर और बाहर के वायु दबाव में अंतर के कारण पानी नीचे नहीं गिरता।
नोट: यह गतिविधि चाय छानने की छलनी से भी की जा सकती है।
द्वारा: दर्शनलाल बवेजा, विज्ञान 
अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा 

Sunday, April 26, 2020

पानी का नीचे न गिरना-2 (न्यू) air pressure activity new

पानी का नीचे न गिरना-2 (न्यू) air pressure activity new  
पानी का नीचे न गिरना-2 (न्यू) air pressure experiment new
कपड़े से रोका पानी।
सिद्धांत- वायुमंडलिय दबाव (Atmospheric Pressure)
आवश्यक सामग्री-कांच का बर्तन(गिलास), एक सूती रुमाल, पानी।
बनाने की विधि–कार्य विधि--
गिलास में पानी लो।
एक सूती रुमाल लो।
रुमाल को मध्य से पहले से ही पानी से गीला कर लें।
सूती रुमाल को जकड़ कर ग्लास के मुहँ पर लपेट दो। चित्रानुसार सावधानीपूर्वक गिलास को उल्टा कर दो।
सूती रुमाल पानी को नीचे नहीं गिरने देगा, पानी की अलग-अलग मात्रा ले कर इस प्रयोग का मजा लो।
इस गतिविधि का वीडियो भे देख सकते हैं यहां पर।
द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा

Saturday, April 25, 2020

पानी का नीचे न गिरना Air Pressure Activity

  पानी का नीचे न गिरना Air Pressure Activity  

आवश्यक सामग्री - कांच का बर्तन    (गिलास),   मोटे कागज का वर्गाकार टुकड़ापानी।
कारणवायु  दबाव डालती है। Air Pressure. 
कार्य विधि: गिलास में पानी लोअब मोटे कागज के वर्गाकार टुकड़े को गिलास के मुँह पर रख कर हथेली से सहारा देते हुए गिलास को पानी समेत सावधानीपूर्वक उल्टा कर दो और सावधानीपूर्वक ही  अपनी 
हथेली भी कागज से हटा लो।देखो क्या हुआ? मोटे कागज का वर्गाकार टुकड़ा पानी को नीचे नहीं गिरने देगा। पानी की अलग-अलग मात्रा ले कर इस    एक्टिविटी का मजा लो।

विडियो भी देख सकते हो इस गतिविधि का आप।
                

द्वारा: दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा।