My Name on Mars

Saturday, March 16, 2019

14 मार्च का अद्भुत संयोग, 14th march the Amazing coincidence

विज्ञान गणित के लिए खुशी गमी का मिला जुला दिन है 14 मार्च
गणितीय स्थिरांक पाई पर की चर्चा और वैज्ञानिकों को किया याद
विज्ञान एवं गणित के लिए खास है 14 मार्च का दिन
पाई दिवस
सरोजिनी कालोनी स्थित सीवी रमन साइंस क्लब के सदस्यों ने 14 मार्च की विज्ञान,  तकनीकी व गणित के क्षेत्र में मिली-जुली उपलब्धियों पर चर्चा की गयी। क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा व क्लब सदस्यों ने स्टीफन हॉकिंग्स को उनकी पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उसके बाद अल्बर्ट आइंस्टीन को उनके जन्मदिन पर याद किया। बवेजा ने कल्ब सदस्यों को स्टीफन हॉकिंग्स व अल्बर्ट आइंस्टाइन के जीवन और उनकी वैज्ञानिक क्षमताओं व उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया।  आज ही के दिन 'पाई (π) दिवस' भी मनाया जाता है पाई गणित में एक स्थिरांक को कहते हैं जो किसी वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात होता है। गणित के सवाल करते हुए हमने पाई 22/7 का प्रयोग बहुत बार किया है। 14 मार्च जिसे हम 14-3 कह सकते हैं जो 3.14 दो दशमलव अंकों तक पाई के मान को प्रकट करता है इसलिए आज के दिन 14 मार्च को पाई दिवस के रूप में मनाया जाता है। विज्ञान, गणित व तकनीकी के क्षेत्र में स्टीफन हॉकिंस अल्बर्ट आइंस्टाइन और पाई के योगदान पर चर्चा करके क्लब सदस्यों ने ज्ञानार्जन लिया।  क्लब की इस बैठक में पार्थवी, अंशिका, ग्रेसी, हिमांशी, पलक, पारस, जीविशा, पुष्टि, छवि, बाणी, संयम, अर्श, परणिका आदि क्लब सदस्यों ने भाग लिया।
अखबारों में
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Incharge Jamun Eco Club
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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Tuesday, January 29, 2019

एक दिवसीय विज्ञान स्वभाव कार्यशाला, Scientific Temperament Workshop

एक दिवसीय विज्ञान स्वभाव कार्यशाला का आयोजन टेरी कुरुक्षेत्र में हुआ।
कुरुक्षेत्र स्थित टेरी पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों व अध्यापकों के लिए 'एक दिवसीय विज्ञान स्वभाव कार्यशाला' का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों व अध्यापकों ने भाग लिया।
इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं अध्यापकों में साइंटिफिक टेम्परामेंट विकसित करना व विज्ञान शिक्षा के प्रति रुचि उत्पन्न करना था। टेरी कुरुक्षेत्र व आसपास वैज्ञानिक चेतना के विकास से संबंधित बहुत सी गतिविधियों का आयोजन करता रहता है। 
कार्यशाला के पहले चरण में ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से मशहूर रिसोर्स पर्सन श्री जितेंद्र भटनागर ने विभिन्न गतिविधियों के जरिए तथाकथित चमत्कारों का पर्दाफाश किया। उन्होंने हवन कुंड में अग्नि प्रकट होना, अग्निस्नान, सम्मोहन व आग खाना जैसे बहुत से अन्य चमत्कारों के पीछे के विज्ञान को प्रायोगिक रूप से समझाया।
दूसरे चरण में यमुनानगर के विज्ञान अध्यापक एवं विज्ञान संचारक दर्शन लाल बवेजा ने विद्यार्थियों व अध्यापकों को कम व शून्य लागत के विज्ञान प्रयोग करने सिखाये। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी अपने आसपास से ही उपलब्ध सामग्री का प्रयोग करके पाठ्यक्रम आधारित आधारित विभिन्न गतिविधियों को कर सकता है।
विद्यार्थियों ने इन प्रयोगों को सीखने में अपने हाथ से करके देखने में बहुत रुचि दिखाई। उन्हें इन विज्ञान गतिविधियों को करने में 'सीखने का आनंद' प्राप्त हुआ। बच्चे बहुत उत्साहित थे कि उनको इतने साधारण प्रयोग सीखने को मिल रहे हैं कि जो बिना किसी उपकरण के साधारण उपलब्ध सामान के किये जा सकते हैं।
कार्यशाला के तीसरे चरण में यमुनानगर के गौरव कुमार ने दिन के समय की जा सकने वाली खगोल विज्ञान की गतिविधियों को करना सिखाया। उन्होंने टेलीस्कोप से अवलोकन करना व प्रारंभिक टेलीस्कोप बनाना सिखाया। परावर्तक दूरदर्शी की रचना व सिद्धांत को समझाया।
इस कार्यशाला के आयोजन में इंडियन रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन इरादा कुरुक्षेत्र का विशेष योगदान रहा। कार्यशाला में इरादा के सचिव श्री राजपाल पांचाल ने अपने संबोधन में बताया कि विज्ञान ही मनुष्य में खोजी प्रवृत्ति व दूरदर्शिता उत्पन्न करता है। वैज्ञानिक नजरिए के होने से व्यक्ति अंधविश्वासों के जंजाल में नहीं फंसाता। इस एक दिवसीय साइंस प्रमोशन वर्कशॉप में में सभी रिसोर्सेज इरादा द्वारा उपलब्ध कराए गए थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राजेश गुप्ता जो एक जाने माने माने वैज्ञानिक एवं उद्योगपति है उन्होंने गत दिनों आयेजित टेरी ओलंपियाड में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार, सम्मान चिन्ह व प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि उनकी कामयाबी का राज उनका साइंटिफिक टेम्परामेंट ही है आज वह जिस मुकाम पर पहुंचे हैं उसमें उनकी उनके वैज्ञानिक स्वभाव का बहुत बड़ा योगदान रहा है। टेरी कुरुक्षेत्र के चीफ एडवाइजर डॉ0 एमपी गुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि आज तकनीकी का युग है जो व्यक्ति तकनीकी में दक्ष है वही नये भारत का निर्माण करेगा इसलिए सभी विद्यार्थी अपने आप को तकनीकी दक्ष बनाने का प्रयास करें। संस्थान के एकेडमिक डायरेक्टर प्रोफेसर विवेक शर्मा ने बतया कि आने वाले दिनों में विज्ञान शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए टेरी द्वारा बहुत सी प्रतियोगिताएं एवं गतिविधियों करवाने जा रहा है। उन्होंने बताया कि टेरी कुरुक्षेत्र पूरे हरियाणा में विशेष आयोजन करेगा जिससे विज्ञान शिक्षा का प्रचार प्रसार हो सके। मौके पर टेरी कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर डॉ0 सागर गुलाटी, सचिव इंजी0 आदित्य गुप्ता व संस्थान की चेयरपर्सन मैडम गरिमा ने कार्यक्रम में पधारने पर सभी अध्यापकों, रिसोर्स पर्सन व विद्यार्थियों का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों ने पृथ्वी की परिधि नापने का अंतर्राष्ट्रीय प्रयोग भी किया। इसके साथ ही उन्होंने सोलर नून ज्ञात करने का प्रयोग भी सीखा। विद्यालय के पांच विद्यार्थयों भारत, गगन, हरमन, नैंसी व स्नेहा ने अपने मार्गदर्शक दर्शन लाल बवेजा, गौरव कुमार व राजपाल पंचाल के दिशा निर्देशों अनुसार पृथ्वी की परिधि का प्रयोग करना सीखा।
इस प्रयोग में ब्राजील व फ्रांस देशों के स्कूली विद्यार्थी उनके पार्टनर रहे। विद्यार्थियों ने अपने स्टीक प्रेक्षण से पहली बार में ही एक प्रतिशत से कम त्रुटि के साथ पृथ्वी की परिधि नापी। इस उपलब्धि के लिए उन्हें संस्थान प्रशासन द्वारा बधाई दी गई।
 रिपोर्ट:-
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Incharge Jamun Eco Club
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
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Monday, January 21, 2019

बृहस्पति ओर शुक्र के संयोजन का अदभुत नजारा Venus-Jupiter conjunction on January 22

चूक न जाना बृहस्पति ओर शुक्र के संयोजन का अदभुत नजारा।
दर्शन लाल बवेजा....
         संयोजन तब होता है जब कोई ग्रह पृथ्वी के साथ कल्पित सीधी रेखा पर हो व कोई अन्य ग्रह उस ग्रह के नजदीक हो।
       
मंगलवार को आप जल्दी उठ कर पूर्व की ओर, क्षितिज के ठीक ऊपर, शुक्र और बृहस्पति ग्रह के संयोजन को देख सकते हैं। इसके के लिए आपको सूरज निकलने से एक घंटे पहले या  फिर 5 बजे आकाश की ओर देखना होगा। दोनों ग्रह नग्न आंखों से दिखाई देंगे। भारत सहित मध्य उत्तरी अक्षांश में रहने वाले लोग शुक्र और बृहस्पति का सर्वश्रेष्ठ नजारा देख सकते हैं। यह कोई दुर्लभ खगोलीय घटना नहीं है। यह हर 13 महीनों में होती है, इसमे दो ग्रह विशाल चमकदार गेंद की तरह दिखाई देंगे।
क्यों खास है ये वाला?
असल मे घटना साल में एक बार होती है परंतु वर्ष 2019 में यह दो बार घटित होगी। हम 24 नवंबर, 2019 को भी बृहस्पति और शुक्र का संयोजन देख सकते हैं इसलिए यह इस वर्ष खास है। इसलिए इसे देखने का मौका मत चूक जाना। हमें अभी नवंबर में भी यह खगोलीय घटना देखनी है।
इस सप्ताह देखने में भले ही दोनों ग्रह काफी पास पास  लग रहे हों पर हकीकत में, वे लाखो मीलों की दूरी पर ही हैं। शुक्र पृथ्वी से लगभग 46 लाख मील की दूरी पर और बृहस्पति पृथ्वी से 560 मिलियन मील की दूरी पर है ओर कमाल ये कि आकाश पर शुक्र, बृहस्पति की तुलना में ज्यादा बड़ा व चमकदार प्रतीत होता है। पृथ्वी के करीब होने के कारण ही शुक्र बड़ा दिखता है पर वास्तव में बड़ा तो है बृहस्पति, बृहस्पति हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और शुक्र की तुलना में 11 से अधिक गुना बड़ा है। शुक्र व बृहस्पति के संयोजन का कोई खास खगोलीय अनुसंधान महत्व नहीं है परंतु हमें इस प्रकार की खगोलीय घटनाओं को जरूर देखना चाहिए और आनंद उठाना चाहिए।  ये एक आकर्षक खगोलीय घटना है और देखने के लिए बेहद खूबसूरत अनुभव है। बच्चों के ज्ञान में वृद्धि होती है और उनकी रुचि खगोलविज्ञान में बढ़ती है इस रुचि को आगे बढ़ाते हुए वह भविष्य में  खगोलविज्ञान में अपना करियर भी बना सकते हैं। Venus-Jupiter conjunction on January 22.

Monday, January 14, 2019

प्रगतिशील व नवाचारी कृषक धर्मबीर काम्बोज Innovative and Progressive Farmer Dharmavir Kamboj

श्री धर्मबीर काम्बोज
 योग्यता कभी शिक्षा की मोहताज नहीं होती। शिक्षा जहां एक तरफ मनुष्य के लिए आवश्यक है वहीं यदि मनुष्य हुनरमंद है तो वह भी समाज में अपना एक उच्च स्थान बना सकता है। इस बात को सच करते हुए हरियाणा राज्य के जिले यमुनानगर के गांव दामला में रहने वाले श्री धर्मवीर कंबोज ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। प्रगतिशील कृषक के रूप के रूप में पहचाने जाने वाले श्री धर्मवीर कंबोज ने अपने जीवन काल में में बहुत कठिनाइयों का सामना किया लेकिन अंततः वह कामयाब हुए।
वर्कशॉप
आज उनके द्वारा बनाई गई 'बहुद्देशीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन' कईं देशों में भी सप्लाई होती है। आज उनके पास 'मल्टीपर्पज फूड प्रोसेसिंग मशीन' बनाने की खुद की एक वर्कशॉप है। कभी खुद रोजगार के लिए देश की राजधानी में मेहनत-मजदूरी करके परिवार का गुजारा चलाने वाले श्री धर्मवीर कंबोज आज 20 से 30 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से ना जाने कितने ही किसान उनसे प्रशिक्षण प्राप्त करके अपना स्वयं का रोजगार उत्पन कर रहे हैं। श्री धर्मवीर कंबोज जड़ी बूटियां और गैर परंपरागत कृषि करने के भी विशेषज्ञ है।
जड़ीबूटियों का फार्म
उनका कहना है कि 'किसान को केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर बाजार में अपने सामान के साथ खुद उतरना पड़ेगा, तभी हालात बदलेंगे' उन्होंने अपने खेतों में घीक्वार (एलोवेरा), स्टीविया, पांच प्रकार की तुलसी, दो प्रकार का लहसुन, स्ट्राबेरी व आँवला, मशरूम सहित अन्य बहुत से औषधीय पौधे भी लगाए हुए हैं।
प्रसंस्करण के बाद उत्पाद
वह उस समय पर जब स्थानीय किसान को कृषि उपज का सही मूल्य नहीं मिलता तो वह उनसे उचित मूल्य पर उनके कृषि उत्पाद खरीद कर उनका प्रसंस्करण करके डिब्बा बंद कर लेते हैं या बहुत से कृषक अपनी उपज को उनसे खाद्य संस्करण मशीन में प्रोसेस करवा लेते हैं। उनका कहना है कि किसानों को खुद का भाग्यविधाता खुद ही बनना होगा क्योंकि खेती और मार्केट को समझने वाला हर आदमी कहता है, खेती में कमाई करनी है तो अनाज नहीं उसको प्रोडक्ट बनाकर बेचो।
तुलसी के भगत
श्री कंबोज की खाद्य प्रसंस्करण मशीन को 'नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन' द्वारा मान्यता प्राप्त है। उनकी पूर्व मशीन में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के वैज्ञानिकों द्वारा सुधार करके जो नई मशीन तैयार करवाई है वह 100 प्रकार के कार्य कर लेती है। जिनमें मुख्यत सभी फलों का और सब्जियों का जूस निकालना, एलोवेरा का जूस निकालना, एलोवेरा जेल बनाना, मिक्स फलों का जूस निकालना, फ्रूट जेल/कैंडी बनाना, आँवला का जूस निकालना, आँवला कैंडी बनाना, स्ट्रॉबेरी कैंडी/जैम बनाना, जामुन-पपीता-आम जैसे फलों का संस्करण करना, ब्लैक गार्लिक यानी काला लहसुन बनाना, अदरक का प्रसंस्करण, ड्राई मशरूम, तुलसी का अर्क निकालना, गुलाब का अर्क निकालना व अन्य जिस भी पत्ते फूल या फल का अर्क निकालना हो वह कार्य भी यह मशीन कुशलता पूर्वक कर लेती है।
नव डिज़ाइन वाली मशीन
श्री काम्बोज अपनी मशीन के द्वारा विभिन्न फलों की कैंडी तैयार करते हैं। उनकी वर्कशॉप में जापान, इंग्लैंड, कीनिया, इटली, जिम्बाब्वे व नेपाल इत्यादि देशों से प्रतिनिधि समय समय पर समय पर आते रहते हैं जो उनसे बहुत प्रभावित होते हैं। श्री कंबोज का कहना का कहना है कि देश का किसान सिर्फ उपज उत्पादन करना और फिर उसे मंडियों में ले जाकर ओने ओने पौने दामों में बेचना ही सीखा है। यदि देश का किसान अपनी उपज को प्रोसेस कर ले ले तो उसे 10 से 50 गुना  अधिक मुनाफा सकता है। बहुत से किसान, टमाटर, लहसुन, प्याज, गोभी, मूली, गाजर, आलू जैसी फसलों को सड़कों के किनारे फेंक देता है क्योंकि कभी-कभी उसके पास इतना भी रेट नहीं आता कि वह उन्हें ट्रांसपोर्टेशन खर्च ही निकाल कर मंडियों तक ले जा सके। ऐसी स्थिति में यदि किसान अपनी उपज को प्रोसेस करके डिब्बा बंद करके रख ले तो वह उसे महंगे दामों पर बेच सकता है। उदाहरण के तौर पर श्री कंबोज ने बताया कि यमुनानगर के रादौर क्षेत्र में टमाटर की पैदावार बहुत अधिक होती है और यहां का टमाटर सीधा दिल्ली की मंडी में जाता है। रादौर बेल्ट के मशहूर टमाटर दिल्ली से फिर आगे देश में बहुत दूर-दूर तक जाते हैं। लेकिन बहुत अधिक संख्या में जब किसान टमाटर की खेती करते हैं तो टमाटर का उचित मूल्य नहीं मिल पाता ऐसी स्थिति में बहुत बार में टमाटर की उपज को फेंक देते हैं या खेत में ही हल से जोत देते हैं। उन्होंने अपनी मशीन के द्वारा टमाटर को सुखा (ड्राई) करके दिखाया। 1 किलो ग्राम साबुत टमाटर एक छोटे से जार में आ गए। उन्होंने बताया कि जब टमाटर 60 से 80 रुपये किलोग्राम तक पहुंच जाता है तब यह टमाटर जो 'फूड प्रोसेसिंग मशीन' यूनिट के द्वारा ड्राई करके संरक्षित किया गया है उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मशीन द्वारा प्रसंस्करण से टमाटर की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और टमाटर का वही स्वाद आता है। इसी तरह से श्री कंबोज ने अपनी मशीन के द्वारा और भी बहुत सी चीजों को प्रोसेस करके चंद रुपए किलोग्राम के माल को हजारों रुपये किलोग्राम का माल बना दिया।
श्रीमति काम्बोज के साथ
आइए जानते हैं श्री कंबोज जी के जीवन के बारे में, श्री कंबोज गांव में रहने वाले बहुत ही सीधे-साधे व नेक दिल इंसान हैं वह अपने घर आए हुए हर व्यक्ति का पूरा आदर सत्कार करते हैं और उनको बहुत खुशी से अपनी वर्कशॉप, अपनी उपलब्धियां, अपने सर्टिफिकेट, अपनी ट्राफियां दिखाते हैं। अपने परिवार से भी उनकी मुलाकात करवाते हैं फिर वह उनको अपने खेतों की तरफ ले जाते हैं और जो-जो जड़ी-बूटियां उन्होंने उगाई हुई हैं उनके बारे में विस्तार से बताते हैं। श्री काम्बोज के सुपुत्र श्री प्रिंस काम्बोज भी इस कार्य में उनका सहयोग करते हैं। वह वर्कशॉप, मशीनों के आर्डर  व सप्लाई के कार्य को देखते हैं। श्री धर्मवीर कंबोज को पूर्व राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा पाटिल, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, श्री प्रणब मुखर्जी व वर्तमान राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। श्री कंबोज राष्ट्रपति भवन में 20 दिन तक महामहिम राष्ट्रपति के मेहमान बनकर भी रह चुके हैं। वह हर वर्ष राष्ट्रपति भवन में लगने वाले इनोवेशन फेस्टिवल मैं अपनी मशीन की डेमोंसट्रेशन करते हैं। अपने द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट को प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग राष्ट्रीय इन्नोवेशन फाउंडेशन, हनी-बी नेटवर्क, सृष्टि, ज्ञान सहित बहुत से सरकारी ग़ैरसरकरी संस्थानों के साथ जुड़े हुए हैं।
श्री कांबोज हरियाणा के प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय हिसार के बोर्ड के भी सदस्य हैं। श्री धर्मवीर कंबोज एक प्रगतिशील किसान के रूप में पूरे देश में मशहूर हैं। बहुत से राज्यों के कृषि विभाग उनकी सेवाएं समय समय पर लेते रहते हैं। उन्हें अपने राज्यों में आमंत्रित करते हैं और वहां के कृषकों को प्रशिक्षित करवाते हैं। श्री कंबोज देश के लगभग सभी कृषि मेला और इंडस्ट्रियल प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए जाते हैं श्री धर्मवीर कंबोज खुले दिल से किसानों को व बेरोजगार व्यक्तियों को इस मशीन के द्वारा खाद्य प्रसंस्करण करना सिखाते हैं। वास्तव में देखा जाए तो श्री धर्मवीर कंबोज एक जमीन से जुड़े हुए किसान ही हैं जिनमें अभिमान लेश मात्र मात्र भी नहीं है। हमें उनसे मुलाकात करके व उनके जड़ी बूटियों के फार्म में भ्रमण करके बहुत सीखने को मिला। मैं उनका तहेदिल से शुक्रिया करता हूं कि उन्होंने अपना कीमती समय हमें दिया।
रिपोर्ट:-
Darshan Lal Baweja
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Incharge Jamun Eco Club
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Saturday, January 12, 2019

दूरदर्शी कार्यशाला Telescope workshop #iau00

IAU, Logo(1919-2019)
टेलीस्कोप बनाओ अवलोकन करो कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों को टेलीस्कोप बनाना व उससे अवलोकन करना सिखाया गया।
सी वी रमन विपनेट साइंस क्लब सरोजिनी कालोनी यमुनानगर ने अंतरराष्ट्रीय  खगोलीय संगठन की शतकीय वर्षगांठ के अवसर पर अपने दूसरे दिन के आयोजन में 'खुशी उन्नति केंद्र' सरोजिनी कालोनी में पढ़ने आने वाले बच्चों को
टेलिस्कोप बनानी सिखायी। इस कार्यशाला में दर्शन लाल बवेजा व गौरव कुमार मुख्य रिसोर्स पर्सन रहे। यहां बच्चो ने खुद अपने हाथों से टेलिस्कोप बनाई व उससे अवलोकन भी किया।
Logo
क्लब  के लिए इस टेलीस्कोप कार्यशाला की  व्यवस्था प्राध्यापिका एवं समाज सेविका डॉ0 अलका शर्मा ने की। डॉ0 अलका शर्मा उन्नति खुशी केंद्र की जनरल सेकेट्री व इस संस्था के प्रेजीडेंट श्री गौरव चौधरी हैं।
उन्होंने बताया कि खुशी उन्नति केंद्र अपने मुख्य उद्देश्य 'पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया' के अंतर्गत यमुनानगर में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा पाने के लिए प्रेरित करते हैं।
खुशी उन्नति केंद्र ने बहुत से स्कूल न जाने वाले बच्चों को आसपास के स्कूलों में दाखिल करवाया व उनकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था की है। अब वह बच्चे नियमित विद्यालय जाते हैं शाम को केंद्र के स्वयंसेवियों से पढ़ने सीखने के लिए आते हैं।
खुशी उन्नति केंद्र की टीम में बहुत से स्वयंसेवक बच्चों को विभिन्न विषयों की पढ़ाई, योगा, नवोदय कोचिंग व उनका होमवर्क भी करवाते हैं
जिनमे सरिता मित्तल, नीलम कांबोज, जसवंत कौर, पारस त्यागी, विशाल कंबोज, अनुप्रिया, भूमिका, प्रीति,  ईशा भट्ट, शुभ, लोकेश, सुमन मेहता व अन्य हर रोज इन बच्चों को पढ़ाते हैं विभिन्न शिक्षण सहायक गतिविधियां करवा कर उनका मनोबल बढ़ाते हैं ताकि उन्हें शिक्षा के प्रति लगाव हो सके और वह भविष्य में शिक्षा के माध्यम से अपना रोजगार उत्पन्न कर सकें।
In newspapers
Darshan Lal Baweja
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Friday, January 11, 2019

अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन के 100 वर्ष 100 Years of IAU


'आई ए यू सौ घंटे खगोलीय गतिविधियां' के अंतर्गत मापी पृथ्वी की परिधि।
अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन के
Logo, IAU
एक सौ वर्ष पूरे होने पर सी वी रमन विपनेट साइंस क्लब यमुनानगर के सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया।
सरोजिनी कालोनी स्थित अर्जुन पार्क में क्लब सदस्य पार्थवी, पलक, पारस, पुष्टि, जैकी व प्रियंका ने मार्गदर्शक अध्यापक व क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा के मार्गदर्शन में यह प्रयोग किया।
बवेजा ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन के गठन की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर वैश्विक स्तर पर विभिन्न खगोलीय गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विश्व के सभी देशों के बच्चे, शौकिया व पेशेवर खगोलविद भाग ले रहे हैं।
इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी यूनियन के बारे में बताते हुए बवेजा ने कहा कि पेशेवर खगोलशास्त्रियों का एक संगठन है। इसका केंद्रीय सचिवालय पेरिस, फ्रांस में है। इस संघ का ध्येय खगोलशास्त्र के क्षेत्र में अनुसन्धान और अध्ययन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। जब भी ब्रह्माण्ड में कोई नई वस्तु पाई जाती है तो खगोलीय संघ द्वारा दिए गए नाम ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होते हैं।अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ का संगठन 1919 में किया गया था। तब बहुत से अन्य खगोलीय संगठनों को इसमें विलय कर दिया गया। इसके पहले अध्यक्ष फ़्रांसिसी खगोलशास्त्री बैंजामिन बैलौद थे। 100 घंटे खगोलीय गतिविधियों के नाम प्रतियोगिता के अंतर्गत विश्व भर में एक सौ घंटे विभिन्न आयोजन किये जायेंगे। विज्ञान क्लब सदस्य भी इस आयोजन में 13 जनवरी तक भाग लेंगे।
#100hoursofastronomy
#iau100
11.1.2019
C V Raman Vipnet Science Club
Arjun Park, Sarojani Colony, Yamunanagar India
Gnomon= 45 cm
Shadow= 57 cm
Latitude:30° 8'22.99"N
Longitude: 77°16'27.81"E
ie
Latitude: 30.07N
Longitude: 77.17E
Guided by
Darshan Lal Baweja of C V Raman Science Club Yamuna Nagar
Members: Parthvi, Palak, Paras, Pushti, Priyanka, Jivisha(Jaicky)
In newspaper
Reporter
Darshan Lal Baweja