Thursday, December 06, 2018

तीन दिवसीय इको क्लब मास्टर ट्रेनर्स कार्यशाला 3 days workshop for Eco club master trainers

तीन दिवसीय इको क्लब मास्टर ट्रेनर्स कार्यशाला 3 days workshop for Eco club master trainers
रिपोर्ट: दर्शन लाल बवेजा, जामुन इको क्लब,
राजकीय वमावि कैम्प, यमुनानगर
उद्घाटन सत्र
चंडीगढ़ स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (सेक्टर 12) में 4 से 6 दिसंबर 2018 तक तीन दिवसीय 'स्कूल इको क्लब मास्टर ट्रेनर्स हरियाणा' (नेशलन ग्रीन क्रॉप्स) की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।  इस कार्यशाला का आयोजन पर्यावरण एवं
डॉ आर के चौहान
जलवायु परिवर्तन विभाग, हरियाणा द्वारा किया गया।  इस कार्यशाला में हरियाणा के सभी 22 जिलों से 2-2 मास्टर ट्रेनर्स का भाग लेना प्रस्तावित था। कार्यशाला का उद्घाटन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के जॉइन्ट डायरेक्टर डॉक्टर श्री आर. के. चौहान ने किया। श्री चौहान ने अपने उद्घाटनीय संबोधन में राज्य भर के विभिन्न जिलों से पधारे मास्टर ट्रेनर्स से आव्हान किया कि 'आओ विद्यालयों में स्थापित इको क्लब्स को पर्यावरण संरक्षण के मजबूत स्तंभ के रूप में एक शक्तिशाली एजेंसी के रूप में तैयार किया जाए', उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से कहा कि वह अपने जिले में विद्यालयों स्थित इको क्लब्स को और अधिक शक्तिशाली बनाने का प्रयास करें ताकि विद्यार्थियों को उनकी इस मौजूदा उम्र में ही पर्यावरण संरक्षण की महत्ता के बारे में पता चल सके। अब क्योंकि पृथ्वी का भविष्य उनके लिए और उनके ही हाथों में है। सभी उपस्थितों को यह भी संदेश दिया कि आपके द्वारा पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत घर से ही की जा सकती है। हम सब  मात्र घरेलू कूड़े को ही अलग अलग करके सूखा व गीला में बाँट कर व उसका उचित निपटान करके पर्यावरण संरक्षण में बेहतरीन योगदान कर सकते हैं। श्री चौहान ने यह भी बताया कि आज भारत में पर्यावरण प्रदूषण के आंकड़े, स्वीकार्य मानकों की तुलना में काफी खतरनाक स्थिति पर है। इस स्थिति में हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। इस सब के लिए विद्यालय के बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है और यह जिम्मेदारी आपको दी जाती है कि आप अपने अपने जिले में स्थापित 250 इको क्लब्स के माध्यम से हरियाणा राज्य को पर्यावरण मित्र व हराभरा बनाने में सहयोग करें। श्री चौहान ने कहा कि 'जुनून पैदा करो, मुहिम चलाओ फिर देखो कैसे नहीं बचती  है धरती'
श्री एन के झिंगन
चंडीगढ़ से ही एनवायरमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट श्री एन के झिंगन ने प्रशिक्षुओं को शनिवार हमारा पर्यावरण दिवस की गतिविधियों बारे बताया।  साथ ही यह भी बताया कि उनकी सोसायटी ने चंडीगढ़ के सेक्टर-7 में 3000 पौधे लगाए और उनकी शत-प्रतिशत उत्तरजीविता भी सुनिश्चित की। अपने वक्तव्य में उन्होंने घग्गर नदी में चलाए गए स्वच्छता अभियान के बारे में विस्तार से बताया। यह भी बताया कि इस पावन कार्य के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा परंतु उनके सहयोगियों ने हार नहीं मानी और घग्गर नदी में से तमाम कचरा निकाल कर नदी को साफ करके साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय के आगे पर्यावरण प्रदूषण कहीं नहीं टिक सकता।
डॉ रविन्द्र
चंडीगढ़ स्थित पीजीआई से आमंत्रित रिसोर्स पर्सन डॉ रविंद्र खेवाल ने प्रदूषित जल व सेनिटेशन के बारे में अपने विचार व शोध कार्य को प्रस्तुत किया। डॉ रविन्द्र ने बताया कि विश्व मे बहुत जल्द ही शुद्ध पेयजल की भयंकर कमी होने वाली है। जहाँ हम भारतीय अपने शुद्ध जल के स्रोतों को दूषित करने पर लगे हुए हैं और वहां दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात अंटार्टिका से पानी मंगवाने के लिए प्रयास कर रहा है। किसी देश के विकास एवं पर्यावरण जागरूकता का आकलन का आकलन इस बात से किया जाता है कि उस देश में 5 वर्ष से कम बच्चों के जीवित रहने का प्रतिशत कितना है? उन्होंने कहा कि बच्चे यदि अपने हाथों को ही अच्छी तरह धोना सीख जाए तो वह काफी हद तक बीमारियों से बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमें शुद्ध जल प्राप्त करने के लिए हर हालत में पर्यावरण प्रदूषण को दूर भगाना होगा अन्यथा जल्द ही हम अशुद्ध वायुमंडल के साथ साथ अशुद्ध जल पर भी आ जॉएँगे।
रिसोर्स पर्सन डॉ भाविका शर्मा ने अपने वक्तव्य में विद्यालय के मौजूदा प्रदूषक स्टेटस को बदल कर  'शून्य कचरा विद्यालय' (जीरो वेस्ट स्कूल) बनाने की तैयारियों हेतु प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि सिर्फ हम अपनी कार्यशैली में थोड़ा-थोड़ा परिवर्तन करके ही अपने विद्यालय को 'जीरो वेस्ट स्कूल' बना सकते हैं। डॉ शर्मा ने विद्यालयों में कंपोस्ट बिन लगाने की सलाह दी लगाने की सलाह दी।
डॉ के सुरेश
राजीव गांधी नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर यूथ डेवलपमेंट चंडीगढ़ के कॉर्डिनेटर डॉक्टर के0 शेखर ने अपने वक्तव्य में युवाओं के व्यवहार के संदर्भ के में बहुत से उदाहरण देते हुए देश को उनसे पर्यावरण संरक्षण उपेक्षाओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि शायद ही कोई युवा अपनी मुख्य पसन्दों (मेन पैफरेंसिज) में पर्यावरण संरक्षण को पहला स्थान देता हो। यदि समाज के युवाओं अंदर इस तरह की जागृति आ जाए कि कि युवा अपनी सभी प्राथमिकताओं में पहले स्थान पर पर्यावरण संरक्षण को रखे तो उस दिन इस देश को हरा-भरा और पर्यावरण खुशहाल बनाने से कोई नहीं रोक सकता। डॉ शेखर ने होस्ट संस्थान के बारे में व संस्थान द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमो के बारे में भी विस्तार से बताया।
रिसोर्स पर्सन डॉ रनजीत कौर ने अपने प्रस्तुतीकरण में उपस्थित प्रशिक्षुओं को मेडिशनल प्लांट्स व जियो टैगिंग के बारे में प्रशिक्षित किया। उन्होंने बताया कि हम कोई भी किसी प्रकार की अद्भुत पर्यावरणीय हलचल या परिवर्तन अपने आसपास देखते हैं तो हमें उसे जियो टैगिंग के द्वारा वैश्विक रूप से जरूर बताना चाहिए। उनकी इस गतिविधि से उनके पर्यावरण जागरूक होने का प्रमाण मिलेगा। यह भी हो सकता है कि वो किसी नई वैरायटी या कोई लुप्त प्रायः स्पीशीज का पता लग सके। उन्होंने एंड्रॉयड एप्प व वेब पर गूगल अर्थ पर समसपुर स्कूल की लाइव जियो टैगिंग करके उक्त प्रशिक्षण दिया। डॉ कौर ने बताया कि जियो टैगिंग की अन्य भी बहुत सी एप्स है जिस पर आम आदमी भी अपने द्वारा खोजे गए किसी पेड़ पौधे या वनस्पति को टैग कर सकता है। हमें इस प्रकार की प्रैक्टिस में जरूर शामिल होना चाहिए ताकि हम अपनी विशाल व विलक्षण भारतीय प्राकृतिक संपदा को पहचान सकें व बचा सके।
डॉ राधेश्याम शर्मा
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन विभाग के साइंटिस्ट डॉ राधेश्याम शर्मा ने प्लास्टिक प्रदूषण व उससे बचाव के बारे में प्रशिक्षण दिया। उन्होंने अपने द्वारा किए गए कुछ नवाचारी प्रयोगों का भी जिक्र किया। डॉ शर्मा पानी व भोज्य पदार्थों की पैकिंग में प्लास्टिक के प्रयोग को एकतरफा नकार दिया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक और से होने वाले कैंसर व अन्य रोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमें प्लास्टिक को पूरी तरह से ना कहना होगा। उन्होंने प्लास्टिक पेट-बॉटल्स की हानियों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए कि हम प्लास्टिक के स्थान पर अन्य विकल्पों का प्रयोग करें।
श्री नरेश कुमार
विभाग के इको क्लब नोडल अधिकारी श्री नरेश कुमार जी ने बताया कि हमें विद्यालयों में 'सिंगल यूज़ प्लास्टिक एंड पॉलिथीन' को पूर्णतया नकारना होगा/रोकना होगा। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष हजारों टन पॉलिथीन का प्रयोग बच्चे अपनी कॉपी-किताबों पर जल्द बांधने के लिए कर देते हैं। जबकि अन्य बहुत से वैकल्पिक तरीकों से भी कॉपी-किताबों को बचाया जा सकता है।  इससे बहुत से बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा जो जिल्दसाजी का काम करते हैं। पहले जमाने जरूरतमंद बच्चे जिल्द चढ़ा कर साल भर का पढ़ाई का खर्चा निकाल लेते थे। आजकल विद्यार्थियों में सिंगल यूज पेनो का प्रयोग का रिवाज़ हैं और फिर इंक खत्म होने पर उन्हें फेंक देते हैं। इन्हें यूज एंड थ्रो पेन कहते हैं। इस प्रकार के पेनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।  जिन पेन्स में फिर से नया रिफिल डाला जा सके ऐसे पेनो का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने ऐसे बहुत से टिप्स दिए जिससे विद्यालय को 'सिंगल यूज़ प्लास्टिक' से मुक्त किया जा सके। प्रशिक्षुओं ने इस नई जानकारी से बहुत कुछ सीखा। प्रशिक्षुओं ने कहा कि यह वह बातें है जिन पर कभी उनका ध्यान ही नहीं गया कि हम केवल ऐसी प्रैक्टिसिस अपना कर पर्यावरण संरक्षण
में अपना बेहतर योगदान दे सकते हैं।
मैड़म अनया पूनम G
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन विशेष रूप से पधारें मैडम अनया पूनम जी ने अपने ओजस्वी व क्रांतिकारी विचारों से प्रशिक्षुओं को अवगत करवाया, उन्होंने बताया कि हमें अपने देश को फिर से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर ले जाने के लिए अथक प्रयास करने होंगे। हमें एक ऐसी चैन बनानी होगी कि हम अच्छी पर्यावरणीय गतिविधियों को एक हाथ से दूसरे हाथ में लेकर आगे बढ़ाएं। हमें अपनी इस चैन में एक भी कमजोर कड़ी की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति होनी चाहिये। पर्यावरण संरक्षण, नशा-मुक्ति व नैतिकता का विकास करना केवल किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है, इसके लिए सभी को प्रयास करने होंगे अन्यथा हमारा जीना इस धरती पर बहुत मुश्किल हो जाएगा।
मैड़म सोनल ढांडा
डायरेक्टोरेट सेकेंडरी एजुकेशन हरियाणा  पंचकूला से पहुंची इको क्लब नोडल अधिकारी मैडम सोनल ढांडा ने निदेशालय की तरफ से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया। उन्होंने पौधागिरी में लगाए गए पौधों की जियो टैगिंग की ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत की और उन्होंने कहा कि हरियाणा में दो लाख चौबीस हजार पौधे रोपे गए।  जिनकी मॉनिटरिंग जियो टैगिंग द्वारा की जाएगी, पौधा लगाने वाले विद्यार्थी को उसकी देखरेख के लिए कुछ वित्तीय सहायता देने का भी प्रयास है जो सीधे उनके खातों में जाएगा। इससे विद्यार्थियों के अंदर पौधा लगाने व उसकी देखरेख करके उसे वृक्ष बनाने की कोशिशें बलवती होगी। मैडम सोनल ने उपस्थित मास्टर ट्रेनर्स को निर्देश दिये कि वह जिले के जो भी पूर्व पेंडिंग उपयोगिता प्रमाण पत्र है उनको जल्द भिजवाए।  डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के द्वारा जो वित्तीय सहायता इको क्लब्स को दी जानी है उसके लिए खाता संख्या संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराएं ताकि इको क्लब्स को दी जाने वाली वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थी तक पहुंचाई जा सके।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षुओं ने अपने विचार/जिज्ञासाऐं प्रशिक्षकों व अधिकारियों के समक्ष रखी। उन्होंने अपने जिलों में इको क्लब्स द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गये कार्यों के बारे में सभी उपस्थितों को बताया।
कार्यक्रम के समापन वक्तव्य में फिर से डॉक्टर आर के चौहान जो कि विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर है ने कुछ खास जिम्मेदारियां अध्यापकों को सौंपी कि न्यूनतम तौर पर वे यह कार्य जिले के हर विद्यालय में करवा दें। जिनमें मुख्य थे! स्कूल में इको क्लब के नाम का बोर्ड, बैनर या वॉल राइटिंग अवश्य होनी चाहिये, हर विद्यालय में एक कंपोस्ट पिट अवश्य होनी चाहिये, विद्यालय एनर्जी ऑडिट भी करे जिसका उन्होंने प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालय को जीरो वेस्ट की ओर ले जाना है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में स्वनिर्मित पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए वे विभिन्न स्थानीय कंपनियों के सीएसआर भी आमंत्रित कर सकते हैं जिसके लिए विभाग भी उनकी सहायता करेगा। वे इन सीएसआर के द्वारा विद्यालय को पर्यावरणीय सुदृढ़ता प्रदान कर सकते हैं। डॉक्टर चौहान ने हर भविष्य में हर डिस्ट्रिक्ट से सबसे अच्छे इको क्लब चुनने की योजना पर भी प्रकाश डाला और उन्होंने यह भी कहा कि हर जिले में स्कूलों के इको क्लब प्रभारियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक-एक कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए प्रस्ताव शीघ्र मंगवायें जाएंगे। भविष्य में विद्यार्थियों के लिए भी पर्यावरण भ्रमण कराए जाने की योजना है।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर राधेश्याम शर्मा ने हरियाणा भर से पधारे सभी मास्टर ट्रेनर्स का धन्यवाद किया।
प्रतिभागिता/सम्मान पत्र
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ आर के चौहान ने अपने सहयोगीयों के साथ मिलकर सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
विभिन्न जिलों से आये प्रतिभागी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दर्शन लाल बवेजा, दीपक कुमार शर्मा, तरुण गेरा, रविंद्र कुमार, सतबीर सिंह, राजेंद्र अग्निहोत्री, सुरेंद्र कुमार, रोहताश, चित्रा, कृष्णा देवी, अशोक कुमार, आनंद पाल,जसविंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह, अशोक कुमार, चंद्र प्रकाश, सुरेंद्र मिगलानी, मोहन लाल मुंजाल, शेर मोहम्मद, सुरेंद्र कुमार, प्रकाशवीर, कुलदीप सिंह, जगबीर सिंह, आनंद वर्मा, अनिल कुमार, शरद पाल सिंह आदि ने जिला मास्टर ट्रेनर्स का  प्रशिक्षण प्राप्त किया।
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Incharge Jamun Eco Club
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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Sunday, October 28, 2018

विज्ञान का लोकप्रियकरण Popularization of Science


विज्ञान का लोकप्रियकरण Popularization of Science
पहला बैच 22-23 अक्टूबर
विज्ञान अध्यापकों के लिए दो दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम डाइट तेजली में
जिले के सभी छह ब्लॉक के कक्षा छह से दस तक पढ़ाने वाले राजकीय विद्यालयों के विज्ञान अध्यापकों के लिए प्रमोशन ऑफ साइंस नाम से एक विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन तेजली स्थित जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में जारी है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में  खंड  सढौरा,  सरस्वती नगर व बिलासपुर के 50 विज्ञान अध्यापकों को शामिल किया गया। दूसरे चक्र में  रादौर, जगाधरी  व छछरौली  ब्लॉक के 50 विज्ञान अध्यापक भाग लेंगे। 
डाईट के प्राचार्य श्री सुरेश कुमार
इस प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के प्रधानाचार्य श्री सुरेश कुमार जी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में सभी विज्ञान अध्यापकों से आव्हान किया कि वह बच्चों  को विज्ञान विषय गतिविधि आधारित करके पढ़ायें और अपना पूरा प्रयास करें कि जिले में विज्ञान शिक्षा का समुचित प्रचार-प्रसार हो सके। अध्यापक विज्ञान शिक्षण को रुचिकर बनायें। संस्थान के अध्यापक प्रशिक्षण अधिकारी श्री अशोक राणा, श्री संजीव कुमार व प्रवक्ता श्री दुष्यंत चहल ने कार्यक्रम का संचालन किया। 
वरिष्ठ प्रवक्ता श्री सुरेंद्र अरोड़ा
संस्थान के वरिष्ठ प्रवक्ता श्री सुरेंद्र अरोड़ा ने व श्री तेज पाल वालिया ने अध्यापकों को विद्यार्थी आकलन परीक्षण (सैट) व डैशबोर्ड से संबंधित जानकारी दी। द्वारा विज्ञान अध्यापकों ने विज्ञान शिक्षण की बारीकियों को समझा।
बनाने में बहुत मददगार साबित होगा। 
दूसरा चरण 2nd Round
25- 26 अक्टूबर 2018
संस्थान के प्रधानाचार्य श्री सुरेश कुमार ने बताया कि प्रमोशन ऑफ साइंस नाम से यह कार्यक्रम एससीईआरटी गुड़गांव व समग्र शिक्षा के तत्वाधान में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विज्ञान अध्यापकों ने विज्ञान शिक्षण की गतिविधि आधारित परियोजना आधारित शिक्षण विधियों को समझा। 
संचालन, श्री दुष्यंत 
कार्यक्रम में संस्थान के प्रधानाचार्य श्री सुरेश कुमार प्रशिक्षण विंग के अधिकारी अशोक राणा डॉक्टर संजीव कुमार श्री तरसेम कुमार व वरिष्ठ प्रवक्ता श्री सुरेंद्र अरोड़ा, प्रवक्ता दुष्यंत चहल, तेजपाल वालिया सहित मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा, निधि बंसल, स्वीटी सिंघाल व खेमलाल ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को विज्ञान शिक्षण की इन नवाचारी तकनीकों से अवगत कराया।  अक्टूबर और नवंबर के पाठ्यक्रम को गतिविधि आधारित करके पढ़ाने संबंधित प्रशिक्षण दिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी नियमित अध्यापकों के साथ अतिथि अध्यापकों को भी शामिल किया गया आगामी कार्यक्रम दिसंबर व फरवरी महीने में कराए जाएंगे।
दूसरा बैच 25-26 अक्टूबर
जिले के एक सौ विज्ञान अध्यापकों को दिया प्रशिक्षण
जिला अध्यापक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में दो बैच में जिले के सभी खंडों के कुल सौ विज्ञान अध्यापकों को विज्ञान शिक्षण की नवाचारी तकनीकों से रूबरू कराया गया।
मास्टर ट्रेनर्स
जिले के कुल 100 विज्ञान अध्यापक इस प्रशिक्षण को प्राप्त कर रहे हैं जो कि 2 चरणों मे चलेगा। प्रशिक्षु विज्ञान अध्यापकों को भौतिकी, रसायन व जीव विज्ञान की विभिन्न विज्ञान गतिविधियों को करना सिखाया गया व उन पर चर्चा की गई। प्रशिक्षुओं ने अपनी फीडबैक में लिखा कि इस तरह का कार्यक्रम उनके द्वारा करवाये गए विज्ञान शिक्षण को रुचिकर
दिन के समय की जा सकने वाली खगोलीय गतिविधियां
विज्ञान विषय विशेषज्ञ के तौर पर मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा, खेम लाल,  निधि बंसल व स्वीटी सिंघाल ने अध्यापकों को 
अक्टूबर व नवंबर में पढ़ाए जाने वाले
 
प्रतिभागी अभ्यास करते हुए
विज्ञान के पाठ सजीव व उनका परिवेश, गति एवं दूरियों का मापन, प्रकाश,  मृदा, जीवो में श्वशन, गति एवं समय, विद्युत धारा और इसके प्रभाव, वन हमारी जीवन रेखा, जंतुओं में जनन, किशोरावस्था की ओर, बल तथा दाब, तारे और सौर परिवार व वायु-जल प्रदूषण पाठ से संबंधित विज्ञान गतिविधियां करके दिखायी। व उपस्थित विज्ञान अध्यापकों के साथ उन पर चर्चा भी की गई।  कार्यक्रम के दौरान विज्ञान अध्यापकों के बीच में एक साइंस क्विज का भी आयोजन किया गया। जिसमें सभी 50 अध्यापकों को शामिल किया गया। पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा विज्ञान पर आधारित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का संचालन दर्शन बवेजा, निधी बंसल, स्वीटी ने किया। 
दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक ने सभी प्रतिभागियों को क्विज़ बनाने की बारीकियां समझाई।  
मीडिया में


दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुनानगर, हरियाणा 

Monday, August 20, 2018

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस National Deworming Day


राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, बच्चों को कृमिनाशक गोली खिलाई गयी।

बच्चों की रोग मुक्त रखना ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का एकमात्र उद्देश्य : डॉ कुलदीप सिंह सीएमओ
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर विद्यालय के  1600 बच्चों को दी गयी एल्बेंडाजोल की चबा कर खाएं जाने वाली गोली।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प यमुनानगर में  राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह व वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ सुनील कुमार ने अपनी टीम सहित अपने हाथों से विद्यार्थियों को कृमिनाशी एल्बेंडाजोल की टेबलेट खिलाई।
इस अवसर पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया। इस सेमिनार में विद्यालय के विज्ञान क्लब, इको क्लब, एनएसएस, एनसीसी कैडेट्स व स्काउट-गाइड ने भाग लिया। इस विचारगोष्ठी व अभियान का शुभारम्भ विद्यालय के प्रधानाचार्य  परमजीत गर्ग ने किया।  
बच्चों को संबोधित करते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार बताया कि देश भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नेशनल डीवार्मिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में विद्यालय के बच्चों को फरवरी व अगस्त महीने में  कृमिनाशक एलबेंडाजॉल की चबा कर खाएं जा सकने वाली एक एक गोली दी जाती है।  जिससे वो पेट के कीड़ों से बचे रहेंगे। आज जो बच्चे छूट गए हैं उनको 27 अगस्त को यह दवाई दी जायेगी। 
जिला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री कुलदीप सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि बच्चो में इनसे संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक होता है। इनसे सभी आयु वर्गों  बड़े या बच्चे, सभी को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है।  
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विद्यार्थियो को जिनकी आयु 1 वर्ष से 19 वर्ष तक है को कृमिनाशक गोलियां खिलाई जा रही है। अभी विशेषकर गोलकृमी एस्केरिस की दवाई दी जा रही है जिसको खाने से बच्चे इस कृमि के अटैक से बचे रह सकते हैं। कुपोषित बच्चे के पेट में कृमि होने की अधिक संभावना होती है। सीएमओ ने बच्चों को पैकेट बंद पापड़, चिप्स व स्नेक्स खाने से परहेज करना चाहिये।
डॉ बुलबुल ने  बच्चों को पेट में पाए जाने वाले कीड़ों (कृमियों) के कारण, हानियों व उनसे बचाव के उपायों बारे जागरूक किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन हिंदी प्रवक्ता अरुण कुमार कहैरबा ने किया।
विद्यालय के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने पेट के कीड़ो बारे विस्तार बताया। 
क्या होते हैं पेट के कीड़े?
पेट के कीड़े असल में परजीवी होते हैं जो हमारे शरीर में रह कर शरीर से ही अपना पोषण पाते हैं। गोल कृमि (एस्केरिस), फीता कृमि, हुकवार्म, लिवेरफ़्लूक, पिनवार्म, फाइलेरिया वार्म सब  परजीवी हैं जो जीवों के शरीर में रह कर अपना पोषण करते हैं और फलस्वरूप अन्य जीवों को बीमार कर देते हैं।
इनके सक्रमण के कारण।
खुले में मल त्याग, भोजन से पहले हाथों का अच्छे से ना धोया जाना, सब्जी फलों को बिना धोये खाना, नंगे पैर चलना, दूषित जल को पीना, भोजन को ढ़क कर न रखना  आदि बहुत से कारण हैं जिस वजह से इन कृमियों के अंडे मानव शरीर में पहुँच जाते हैं। जीवों के मल के साथ इनके अंडे शरीर के बाहर आते है और फिर विभिन्न माध्यमों से अन्य जीवों के शरीर में पहुँच जाते हैं।  बाजार में बिना ढके खाद्य पदार्थ भी धूल मिट्टी के कारण इनके अण्डों से दूषित हो जाते हैं। खुले में रखे पदार्थों को नहीं खाना चाहिए।
संक्रमण के लक्षण
इन कृमियों से पीड़ित बच्चों को आम तौर एनिमिक पाया जाता हैं। इनमे खून की कमी होती है। ये पेट के कीड़े ही बच्चों में खून की कमी और एनिमिया का कारण बनते है। खुराक लेने के बाद भी बच्चे कमजोर व पीतवर्ण लगते हैं। कुपोषित, चिड़चिड़ा व्यवहार प्रकट करते हैं।
दो आवश्यक क्रियाकलाप
बच्चों में कुछ भी खाने से पहले साबुन से हाथ धोने की आदत को विकसित किया जाना जरूरी है। सब्जियों को अच्छे से धोकर पका कर खाना चाहिए। फलों को भी धोकर खाना चाहिए।
इस अवसर पर प्रवक्ता अरुण कुमार कैहरबा, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ बुलबुल , राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम के डॉ राजकुमार, डॉ गीता सागर कुमार फार्मासिस्ट, कमलेश एएनएम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य मिशन के काउंसलर सज्जन कुमार, डॉ मधु राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के जिला समन्वयक अरुण कुमार मौके पर उपस्थित रहे।
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
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Monday, August 13, 2018

पर्शिड उल्कापात (Perseid Meteor Shower)

पर्शिड उल्कापात (Perseid Meteor Shower)
अगर आसमान साफ रहा तो आज की रात आसमान में टूटते तारों की बारिश देख पाएंगे........हम लोग
दर्शन लाल बवेजा
क्या होती हैं उल्कायें?
आसमान में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का (मेटयोर) और साधारण बोलचाल में 'टूटते तारे' (मेटीयोराइट) कहते हैं। उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं। पूरी पृथ्वी से प्रत्येक रात्रि को उल्कापात अनगिनत संख्या में देखा जा सकता हैं, किंतु इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या अत्यंत अल्प होती है। वास्तव में इनका तारे ओर उसके टूटने से कोई सम्बन्ध नही होता, टूटता तारा इसका प्रचलित नामकरण है।
क्यों जल जाती हैं उल्कायें?
बाह्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हुए इनकी स्पीड 20 किलोमीटर प्रति सेकंड होती हैं। इतनी अधिक स्पीड पर वायुमंडल की गैसों के साथ रगड़ (घर्षण) के कारण ये गर्म होकर लालतप्त हो जाती हैं और भस्म होकर विलीन हो जाती हैं। यदि कोई बचकर पृथ्वी पर गिर जाये तो उसे उल्कापिंड का नाम मिलता है।
उल्कापात की महत्वपूर्ण तिथियां।
1992 में एक पुच्छल तारा (स्विफ्ट टटल) हमारे सौरमंडल में आया था और उल्काओं के रूप में बहुत सा मलबा पृथ्वी की कक्षा में छोड़ गया था। अब जब भी पृथ्वी इस कॉमेट के मलबे में से गुजरती है तो बिखरी पड़ी ये उल्कायें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाती हैं। है। इस साल चार बार ये नजारा देखने को मिलेगा परन्तु 12-13 अगस्त को पर्शिड उल्कापात का नजारा अद्भुद होगा।  इसके बाद 21 अक्टूबर ओरिओनियड, 16 नवंबर लिओनियड व 15 दिसंबर को जेमिनियड उल्कापात (मेटियोर शॉवर)
का दुर्लभ अवसर दृश्यमान होगा।
आज रात पर्शिड उल्कापात (Perseid Meteor Shower) देखने का सुनहरी अवसर है। इस उल्कापात को अर्ध रात्रि के बाद ययाति तारामंडल की ओर देख सकते हैं।  आज रात जब पृथ्वी स्विफ्ट टटल पुच्छल तारे (Swift tuttle comet) के द्वारा छोड़े मलबे के मध्य गुज़रेगी। एक घंटे में 60 से 100 तक  उल्काये देखी जा सकती है। दावा 200 उल्कापात प्रति घंटे का भी किया जाता है।
समय व दिशा(एल्टीट्यूड) चार्ट इस प्रकार रहेगा।
रविवार 11:30 pm 32°North-northeast 5.9°
सोमवार 12:30 am 33°North-northeast 13.7°
सोमवार 1:30 am  32°North-northeast 21.5°
सोमवार 2:30 am  30°North-northeast 29.1°
सोमवार 3:30 am  25°North-northeast 35.8°
सोमवार 4:30 am  17°North-northeast 41.0°
सोमवार 5:30 am  7°North 44.2°
सोमवार 6:30 am  356°North 44.7°
गत कईं मौकों की खगोलीय घटनाएं देखने का सुअवसर बादलों व खराब मौसम की भेंट चढ़ जाता है। आज रात भी शायद ऐसा ही हो।
दर्शन लाल बवेजा

Monday, July 30, 2018

स्कूल में वर्षामापी से मापी वर्षा Rain Gauge

मानकीकृत वर्षामापी यंत्र से वर्षा मापना सीखा।
 
वर्षामापी यंत्र जानकारी
विद्यार्थियों ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प के प्रांगण में सुबह दो घंटे में 15.7 एमएम वर्षा रिकार्ड की।
सीवी रमन विज्ञान क्लब, जामुन इको क्लब, हनिबी नेटवर्क, सृष्टि डॉट ऑर्ग व हरियाणा विज्ञान मंच के सदस्यों ने विज्ञान प्रसार नेटवर्क नोयडा (साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट नई दिल्ली गवर्मेंट आफ इंडिया की ऑटोनोमस बॉडी) द्वारा प्रदत्त मानकीकृत वर्षामापी यंत्र से वर्षा को मापना सीखा।
वर्षा का मापन
 विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा के नेतृत्व में प्रेरणा, हर्षिता, रितिका, नाजिश, सुहानी, साईमा, पूजा, अंजली, नेहा पांडे, दिव्या, विकास, सौरभ, सुमित, सौरव छात्र-छात्राओं ने वर्षा को मापा।
क्या है वर्षामापी यंत्र?
किस स्थान पर कितनी वर्षा हुई है, इसे मापने के लिए एक यंत्र काम में लाया जाता है, जिसे वर्षामापी यंत्र कहते हैं। यह एक प्लास्टिक का बेलनाकार बर्तन होता है जिसका व्यास 20 सेमी और इसकी ऊंचाई 50 सेमी होती है। इसके भीतर  एक मापक बेलन रखा जाता है।  इसे एक निश्चित समय में तथा निश्चित स्थान पर वर्षा में रखकर गिरे पानी की मात्रा को माप लिया जाता है।
छात्र विकास सैनी
वर्षामापी कई तरह का होता है। अलग अलग तरीके से समझने के लिए वर्षा  इंच, सेंटीमीटर या मिलीमीटर में मापी जाती है। इसकेे ऊपर एक कीप लगी रहती है। वर्षा का पानी कीप द्वारा बोतल में भर जाता है तथा बाद में पानी को मापक स्लेंडर द्वारा माप लिया जाता है। इस यंत्र को खुले स्थान में रखते हैं, ताकि वर्षा के पानी के कीप में गिरने मे किसी प्रकार की रुकावट न हो। और यह भी ध्यान रखा जाता है की आसपास कोई भवन या ऊंचा वृक्ष न हो जो वर्षा के गिरने में रुकावट बने।
'विद्यालय वर्षा का मापन' गतिविधि से बच्चों में अपने मौसम और जलवायु को समझने की दक्षता विकसित होती है। अध्यापक का फर्ज होता है की वह अपने विद्यार्थियों को प्रत्येक उस गतिविधि से परिचित करवाये जो उसको प्रकृति को समझने व आत्मसात करने का मौका दे।
वर्षा की पैमाइश से वर्षा के प्रकार
भारी वर्षा हेवी रेन - 8mm प्रति घंटा से अधिक वर्षा को भारी वर्षा कहा जाता है।
सामान्य वर्षा- 2mm से अधिक 8 mm से कम
फुहार या शावर- 2mm प्रति घंटा से कम
*खास
1mm वर्षा का मतलब एक वर्ग मीटर पर एक लीटर पानी।
अखबारों में

Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger, Sristi Mitra,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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विज्ञान पर्यावरण पारितोषिक वितरण Awards for Science and Environment


विज्ञान पर्यावरण पारितोषिक वितरण Awards for Science and Environment
विज्ञान व पर्यावरण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को किया सम्मानित
एडवोकेट डीपी गोयल शिक्षा सम्मान व श्री रामनारायण पर्यावरण मित्र सम्मान की शुरआत हुई
बाल विज्ञानी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प में विज्ञान एवं पर्यावरण प्रश्नोत्तरी, साइंस मॉडल मेकिंग, साइंस डाक्यूमेंटेशन
व इनोवेटिव आइडिया प्रतियोगितायें आयोजित करवाई गई।
इन प्रतियोगिताओं को विज्ञान प्रसार नोयडा, सी वी रमन विज्ञान क्लब यमुनानगर, हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक, जामुन इको क्लब, सृष्टि अहमदाबाद, हनिबी नेटवर्क अहमदाबाद व राष्ट्रीय नवप्रवर्तन फाउंडेशन  के सौजन्य से करवाया गया। 
नवप्रवर्तनशील छात्र सौरव
विद्यालय में विज्ञान व शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए 'एडवोकेट श्री डी पी गोयल शिक्षा सम्मान'  व पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए 'श्री रामनारायण पर्यावरण मित्र सम्मान' की शुरुआत की गयी। इस समान के अंतर्गत विजेता विद्यार्थी को स्मृति चिन्ह व मैरिट प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाएगा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री परमजीत गर्ग ने सभी विजेताओं को सम्मानित किया व शुभकामनाएं दी। प्रतियोगिताओं के समन्वयक विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व निर्णायक के रूप में राकेश मल्होत्रा, चंद्रशेखर व संतोष रानी रहे। साइंस मॉडल मेकिंग, इनोवेटिव आइडिया व विज्ञान पर्यावरण प्रश्नोत्तरी में अरुण, बिट्टू, खुशी, ज्योति, मनीष, सहिल व मोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
नेहा, काजल, रेखा, अर्चना, गायत्री, सौरभ, राजन ने द्वितिय स्थान प्राप्त किया।
अंजली, प्रदीप कौर, अनिता, माही, रिहाना, अरुण, सूर्यप्रकाश व सीमा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
पुरस्कार व प्रमाणपत्र पा कर बच्चो के चेहरों पर खुशी की कोई सीमा नही थी। मौके पर रोहताश राणा, दर्शन बवेजा, अनुराधा रीन, दलीप दहिया, रजनी शर्मा, राकेश मल्होत्रा, चंद्रशेखर, जीपी सिंह, मंजू शर्मा, वीरेंद्र कुमार, नरेश शर्मा, सुखजीत सिंह, ममता शर्मा, पंकज मल्होत्रा, आशीष रोहिला, मीनाक्षी, पूनम, शशि, मनदीप, अर्चना काम्बोज मौजूद रहे।
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पौधागरी Paudhagri

पौधागरी Paudhagri
विद्यार्थियों को पौधे वितरित करके वृक्षारोपण के लिए किया प्रेरित
पौध वितरण
आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प मे वृक्षारोपण करके वनमहोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर जामुन इको क्लब, एन एस एस यूनिट-2, एन सी सी व सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों ने भाग लिया। समारोह में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री परमजीत गर्ग ने सभी विद्यार्थियों, अध्यापको व एसएमसी सदस्यों से   पर्यावरण संरक्षण की अपील की व अपने हाथों से 300 विद्यार्थियों को सिरस, कनेर, गुड़हल, जमोया, नीम, गुलमोहर, अर्जुन के पौधे वितरित किये। विद्यार्थियों ने भी
सम्बोधन
संकल्प लिया कि वो इन पौधों को रोपित करके उनका पालन पोषण करेंगें।
इस अवसर पर विज्ञान अध्यापक, इको क्लब व विज्ञान क्लब  प्रभारी दर्शन लाल बवेजा ने विद्यार्थियों  से कहा कि  प्रत्येक व्यक्ति को जीवन काल में कम से कम पांच पौधे अवश्य लगाना चाहिए और उनकी जिम्मेवारी तब तक लेनी  चाहिए तब तक कि वह वृक्ष न बन जाएं।
हिंदी प्रवक्ता अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि मनुष्य ना जाने कितने दानपुण्य के कार्य करता है परन्तु वह  यह नहीं जनता कि एक ऐसा दानपुण्य भी है जिस के अंतर्गत हम यदि प्रतिवर्ष एक पौधा लगाएं और उस को पेड़ बनने तक पहुंचा दे तो उसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ का हिसाब नहीं लगाया जा सकता वो इतना अधिक होता है।
एनएसएस प्रभारी आलोक कुमार ढ़ोंडियाल ने पुराणों के प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि जिस दम्पत्ति  पुत्र नहीं हैं, उनके लिए वृक्ष ही पुत्र हैं। वृक्षारोपण करने वाले व्यक्ति के लौकिक-पारलौकिक कर्म वृक्ष ही करते रहते हैं। एक अन्य प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि यदि कोई अश्वत्थ: (पीपल) वृक्ष लगाता है तो वही उसके लिए एक लाख पुत्रों से भी बढ़कर है।
मौलिक विद्यालय मुख्याध्यापक दलीप सिंह ने बच्चों को बताया कि सराय व पियाऊ बनवाना भी जनसेवा के काम है परन्तु वो कभी बंद हो सकते हैं और टूट भी सकते हैं परन्तु मार्ग मे लगाया गया एक भी छायादार वृक्ष सदा सदा पथिको को छाया फल फूल प्रदान करता रहेगा। 
मौके पर अरुण कुमार, आलोक कुमार, दलीप सिंह दहिया, रोहताश राणा, राकेश मल्होत्रा, आशीष रोहिला, चंद्रशेखर, सुखजीत सिंह, ज्ञान सिंह, मंजू शर्मा, अनुराधा रीन ने भी पौधारोपण किया।
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Saturday, July 14, 2018

ग्रेफाईट की विद्युत् चालकता The electrical conductivity in graphite

ग्रेफाईट की विद्युत् चालकता The electrical conductivity in graphite 
ग्रेफाईट एक अधातु है। उसकी विद्युत् व उष्मीय चालकता कक्षा सात में पढ़ाई जाती है। इसके लिए पहले ग्रेफाईट की चालकता ज्ञात करने के लिए गतिविधि बनायी गयी।  
आवश्यक सामग्री- ग्रेफाईट यानी कच्ची पेन्सिल दोनों तरफ से छिली गयी, कनेक्शन तार, एक बैटरी कनेक्शन कैप के साथ, प्लाई बोर्ड या हार्ड बोर्ड का पीस, बल्ब या एलईडी , आफ आन स्विच, पोस्टर टेप। 
सिद्धांत- ग्रेफाईट एक अधातु है और वो कार्बन का अपररूप है कार्बन में मुक्त सयोंजकता के कारण उसमे विद्युत् का चलन होता है। 
बनाने की विधि- हार्डबोर्ड पर बैटरी को कनेक्शन कैप लगा कर पोस्टर टेप से चिपका लेते है बैटरी के एक ध्रुव से एलईडी या टार्च का बल्ब का एक सिरा, बल्ब के दुसरे सिरे से आन आफ स्विच का एक पिन, स्विच के दूसरे पिन को पेंसिल के एक सिरे से निकले ग्रेफाईट पर कनेक्शन तार से कस देते हैं। 
बैटरी के दुसरे ध्रुव को कनेक्शन तार से पेन्सिल के दूसरे सिरे से कस देते हैं
इस प्रकार से परिपथ तैयार हो जाता है। आवश्यकता अनुसार लेबलिंग, सजावट कर लेते हैं
स्विच को ऑन करने पर देखते हैं कि ग्रेफईट से विद्युत प्रवाहित होती है जिसका पता बल्ब के जलने (चमकने) से लगता है। 
कक्षा 8 का छात्र 
कक्षा 8 के विद्यार्थी 

द्वारा :- दर्शन लाल बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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