Saturday, December 30, 2017

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया Circumference of Earth Experiment

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया Circumference of Earth Experiment
(23 सितम्बर 2017 को)
सी वी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया गया
अर्जुन पार्क सरोजिनी कालोनी में सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्य क्लब प्रभारी दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक के नेतृत्व में एकत्र हुए और उन्होंने पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग से सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में लंबवत खड़ी छड़ी जिसे नोमोन कहते हैं की परछायी को नाप कर विभिन्न गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। 

क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 23-24 सितम्बर इक्विनॉक्स के दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन व रात बराबर होते हैं और आज के बाद दिन छोटे और रात लंबी होनी शुरू हो जाती हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं। 
अगला प्रयोग 21-22 दिसम्बर को किया जाएगा। 
आज के प्रयोग में पार्थवी, पालक, पारस, अर्श, अनुष्का, अंशिका राणा, दृष्टि, संयम, सृष्टि, अंशिका शर्मा ने भाग लिया। 





Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
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विज्ञान का लोकप्रियकरण Popularization of Science


विज्ञान का लोकप्रियकरण Popularization of Science
डाइट तेजली में अध्यापकों को विज्ञान पढ़ाने के आसान तरीके सिखाये गए
कार्यक्रम के अंतर्गत हरियाणा राज्य में विज्ञान के लोकप्रियकरण ये लिये प्रयास किये जा रहें हैं। 
सर्व शिक्षा अभियान, एससीईआरटी गुडगाँव, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, जिला शिक्षा/मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय यमुनानगर, के सयुंक्त तत्वाधान में प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापको का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) तेजली में हुआ। जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में कार्यक्रम अधिकारी डाक्टर संजीव कुमार व प्रभारी दुष्यंत चहल के साथ मास्टर ट्रेनर्स दर्शन लाल बवेजा, निधि बंसल ने इस ट्रेनिग की शुरुआत की।
जिला यमुनानगर के चयनित टीजीटी विज्ञान अध्यापकों को संबोधित करते हुए प्रवक्ता दुष्यंत चहल ने विज्ञान अध्यापकों से गतिविधि आधारित शिक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम समन्वयक डाक्टर सुरेश कुमार ने विज्ञान अध्यापकों को शिक्षण के दौरान विज्ञान कक्ष व विज्ञान किट्स के भरपूर उपयोग के लिये प्रेरित किया। 
आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा ने ध्वनि उत्पादन, संचरण व विस्तारण संबंधित प्रयोग करके दिखाए गए। 
जिसमे ध्वनि कम्पन से उत्पन्न होती है, ध्वनि संचरण लिए माध्यम की आवशयकता, ध्वनि का तारत्व व विस्तारण, प्रतिध्वनि, पराश्रव्य ध्वनि, आवर्त्ती, आवर्तकाल, ध्वनि का परावर्तन आदि को सरल विज्ञान प्रयोगों के द्वारा समझाया व जीवन में इनके उपयोगों को उल्लेखित किया। मास्टर ट्रेनर प्रवक्ता रसायन निधि बंसल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रशिक्षुओं से पत्तियों के शिरा विन्यास, पौधों की जड़ों के प्रकार, अमल क्षार लवण जांच, उदासीनीकरण अभिक्रिया संबंधित प्रयोग करवा कर देखे।
इस कार्यक्रम में इंद्रजीत सिंह, अमित वर्मा, अनिल कुमार, सुरजीत सिंह गिल, गुरुप्रीत सिंह, अनिल शर्मा, मंजीत कौर, मनदीप कौर, संजय, अनिता वर्मा, परवीन कुमारी, परीक्षा गर्ग, किरण लता, पवन, हरविंदर कौर, दीपक शर्मा, अमृत पाल सिंह आदि विज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया।


Darshan Lal Baweja
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गर्म होने पर जल अणुओं का ऊपर उठाना Heating of molecules of liquid

गर्म होने पर जल अणुओं का ऊपर उठाना Heating of molecules of liquid
गतिविधि का नाम: गर्म होने पर जल अणुओं का ऊपर उठाना।
आवश्यक सामग्री: 2 काँच की डेक्स्ट्रोज/ग्लूकोज वाली खाली बोतले, रबर कार्क बोरर, पानी गर्म व सामान्य, पोटैशियम परमेगनेट या लाल रंग दो दो फीट के 2 प्लास्टिक के पाइप के टुकड़े आदि
सिद्धांत/नियम: जब किसी तरल को गर्म किया जाता है, उसका तापमान बढ़ता है। अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, आणविक गति बढ़ जाती है और द्रव के अणु ऊपर की ओर उठते है।
प्रयोग विधि: 1. बोतलों की रबर स्टॉपर में पहले से ही मौजूद दो दो सुराखों को पाइप जितना बड़ा कर लेते हैं ताकि पाइप के टुकड़े उन सुराखों में से आरपार जा सकें।
2. नीचे वाली बोतल में गर्म व रंगीन पानी भरो ऊपर की जाने वाली बोतल में सामान्य ताप का रंगहीन पानी भरे व रबर स्टॉपर कस लें।
3. ठंडे पानी की बोतल को ऊपर ले जाये।
4. हम देखते हैं कि नीचे वाली बोतल से गर्म व रंगीन पानी किसी भी एक पाइप से ऊपर की ओर जाने लगता है और दूसरे पाइप से ऊपर वाली बोतल से सामान्य ताप वाला पानी नीचे वाली बोतल में शिफ्ट होना शुरू हो जाता है।
5. ऐसा पानी के गर्म किये जाने पर उसके अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाने के कारण हुआ होता है और वे ऊपर की बोतल में चढ़ने लगते हैं जबकि ठंडे पानी के अणु नीचे गति करने लगते हैं।
दर्शन लाल बवेजा, विज्ञान अध्यापक

Darshan Lal Baweja
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Thursday, December 28, 2017

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला 25 NCSC Resources person's training workshop

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला यमुनानगर 25 NCSC Resources person's training workshop 
(जुलाई 2017 में आयोजित हुई)
डॉ विजय दहिया
प्रधानाचार्या शशि बाठला
व्यक्तिगत व समुदायिक स्वच्छता को जागरूक करते प्रोजेक्ट बनाएं बाल विज्ञानी : डॉ विजय दहिया
विज्ञान परियोजनाओं के माध्यम से बच्चे स्थानीय समस्याओं का हल निकालने का प्रयास करें : शशि बाठला
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (एन सी एस सी) की एकदिवसीय अध्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित हुई और यह विज्ञान सम्मेलन अक्टूबर माह में होगा।
मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की गाइड टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप आयोजित हुई जिसमे जिले के निजी व राजकीय विद्यालयों के 80 विज्ञान अध्यापकों और प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में विभिन्न विषयों के रिसोर्स पर्सन्स ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को ‘टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीकी और नवाचार’ विषय पर अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रशिक्षित किया। 
विद्यालय की प्रधानाचार्या शशि बाठला ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से विज्ञान प्रोजेक्ट बनाने से बच्चे अपने आसपास की सामान्य व गंभीर समस्याओं से रूबरू होते हैं और वो उनका हल निकलने का प्रयत्न करते हैं जिससे वो विज्ञान को नजदीकी से समझ पाते हैं। विज्ञान प्रोजेक्ट करने से बच्चों के सर्वांगीण विकास को बल मिलता है। 
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सिविल हस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजय दहिया ने उपस्थित अध्यापकों को स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर दहिया ने बताया कि स्वस्थ शरीर धनदौलत से भी बड़ी आवश्यकता है। व्यक्तिगत स्वच्छता, उचित पोषण, मानसिक प्रसन्नता के साथ साथ सामुदायिक स्वच्छता भी महत्वपूर्ण आवश्यकता है। 
डाक्टर दहिया ने अध्यापकों से बच्चों को सीवरेज ड्रेनेज ओर वाटर सप्लाई पाइप्स की पुनर्व्यवस्था पर परियोजना बनाने का आव्हान भी किया। 
 दर्शन लाल बवेजा
मुख्याध्यापक प्रदीप सरीन
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया की हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक द्वारा आयोजित इस विज्ञान सम्मेलन में बालक अपने परियोजना शोधपत्रों को साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आज यह आव्हान किया की प्रत्येक विज्ञान अध्यापक/ प्राध्यापक को विज्ञान शिक्षण के साथ साथ विज्ञान संचारक भी बन जाना चाहिए। देश को विज्ञान चेतना की अति आवश्यकता है। शिक्षण को मात्र रोजगार का साधन मत बनाएं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए विज्ञान को जन आन्दोलन बनाएं और विज्ञान संचार की मुहीम से जुड़ें। गौरव कुमार ने ने टिकाऊ विकास और कृषि विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट करवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया की मिटटी की जांच, फसल चक्र, कीट पाठशाला, मांगअनुरूप फसल उत्पादन, कीटनाशकों के आर्गेनिक विकल्पों, फ़ूड प्रोसेसिंग, देसी खाद, बीजों की वेरायटी और सामूहिक खेती पर बच्चों को परियोजनाएं तैयार करवाने की बहुत आवश्यकता है। 
मंडेबरी के राजकीय उच्च विद्यालय के मुख्याध्यापक प्रदीप सरीन ने खाद्य व कृषि विषय पर अपना व्यख्यान दिया। आवश्यकतानुसार और भूख मिटाने जितना भोजन ही थाली में ले ताकि भोजन व्यर्थ न जाये। 
बुड़िया से प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा ने प्राकृतिक संसाधन और टिकाऊ विकास विषय पर बच्चो से प्रोजेक्ट बनवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खनिज भंडारों और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और संवर्धन करने की आवश्यकताओं पर बल दिया। 
तेजली से गणित अध्यापक श्रीश कुमार शर्मा ने टिकाऊ विकास में परम्परागत तरीकों और देशज विधियों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने गत वर्ष के एक प्रोजेक्ट का वर्णन भी किया। 
गत वर्ष की विजेता ग्रुप लीडर प्रभनूर कौर कक्षा आठ ने अपनी टीम के साथ एक परियोजना की प्रस्तुती दी जिससे उपस्थित अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने की बारीकियां पता लग सकी। 
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदीप सरीन, आर पी गांधी, दीपक शर्मा, दीपिका , राकेश कुमार, ममता वर्मा, मंजू आर्या, पूजा कालरा, छाया सैनी, विशाल, मनदीप कौर, अभिषेक वर्मा, हरदीप सिंह, सोनू, निधि बंसल स्मृति शर्मा आदि मौजूद रहे।








Monday, July 03, 2017

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला कुरुक्षेत्र में हुई, 25 NCSC Resources person's training workshop kurukshetra

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला कुरुक्षेत्र में हुई। 25 NCSC Resources person's training workshop kurukshetra.
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2017 की राज्य स्तरीय (क्लस्टर-2) रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला कुरुक्षेत्र पेनोरमा साइंस सेंटर में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का उद्घाटन साइंस सेंटर पेनोरमा के प्रोग्राम कोर्डिनेटर श्रीनिवास महतो ने किया। श्री महतो ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह जानकर मुझे बहुत खुशी हुई है कि विज्ञान संचार के क्षेत्र में हरियाणा विज्ञान मंच उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। विज्ञान मंच से जुड़े अध्यापको को चाहिए कि वे अपने विद्यार्थियों के साथ साथ समाज के लिए भी विज्ञानोत्थान का कार्य करें। सेंटर के शैक्षणिक अधिकारी जितेंद्र कुमार ने विभिन्न जिलों से पधारे अध्यापको का साइंस सेंटर में स्वागत किया।
हरियाणा विज्ञान मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी व कार्यकारिणी के सदस्य श्री के के मलिक ने ऊर्जा उपविषय पर प्रशिक्षण देते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि बच्चे ऐसे प्रोजेक्ट बना कर लाएं जिससे ऊर्जा संरक्षण के लिए कोई ठोस हल निकलता हो। लोग अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाएं। इन सोलर सिस्टम की कोस्ट कम हो। हमारा सिस्टम नही ही चाहता कि इस तरह की इस तरह के उपाय लोगों तक पहुंचे इसलिए ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों को बहुत महंगा बना कर रख छोड़ा गया है।
करनाल से डॉक्टर पवन कुमार ने कहा कि एनसीएससी के मुख्य उददेश्यों को यदि सही मायनों में प्राप्त करना है तो इससे संबंधित सभी गतिविधियां समय पर शुरू की जाए। समय की कमी के कारण प्रोजेक्ट कार्य बाधित होता है और उसमें गुणवत्ता नही आ पाती है।
हरियाणा विज्ञान मंच के श्री सतबीर नागल ने गत वर्ष राज्य के प्रतिभागियों की राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित उपलब्धियों ओर कमियों से प्रतिभागियों को अवगत करवाया। कमियों को दूर करने के टिप्स दिए और हरियाणा के प्रदर्शन की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि हमारे राज्य के प्रदर्शन और परियोजनाओं की गुणवत्ता में बहुत सुधार आया है जो बाल वैज्ञानिकों और मार्गदर्शक अध्यापकों की मेहनत व लगन के कारण ही सम्भव हो सका है।
कुरुक्षेत्र जिला समन्वयक श्री राजपाल पांचाल ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और इस आयोजन का कुरुक्षेत्र में करवाने के लिए विज्ञान में मंच का धन्यवाद किया।
करनाल से श्री राजेन्द्र सिंह ने कृषि के क्षेत्र में दी जाने वाली संब्सिडियों ओर उन योजनाओं की उपयोगिताओं की सच्चाई व दिखाए गए आंकड़ों पर परियोजना करने के सुझाव दिए जिनसे इन सब्सिडी खोरों की असलियत उजागर हो सके।
जींद से रोहताश मालिक ने सस्टेनबल डेवलपमेंट की आवश्यकता ओर इसकी इम्प्लीमेंटेशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में टिकाऊ विकास को मद्देनजर रखते हुए योजनायें बनाना और उनको लागू करना अति आवश्यक है। उन्होंने गावं निधाना की कीट पाठशाला का जिक्र किया ओर बताया कि पेस्टिसाइड से कीटों को मार देने की तुलना में कीटों का ज्ञान होना किसान के लिए ज्यादा हितकारी है। इस ज्ञान से उसे मित्र और शत्रु कीटों का अंतर पता चलेगा। वास्तव में कीट अज्ञानता के चलते किसान व खेत मजदूर को पत्तो पर कीट/सुराख देखते ही डर जाता हैं और कीटनाशक के जंजाल में फस जाता है। कृषि इसीलिए भी महंगी हो गई है कि उसकी कीट अज्ञानता के चलते उसने अनावश्यक खरचे बढ़ा लिए हैं इसलिए किसानों, ग्रामीणों, गृहणियों व बच्चों को कीट ज्ञान होना अनिवार्य है।
यमुनांनागर से सुमन शर्मा ने कहा की स्टेट लेवल पर एक एक्सपर्ट का पैनल होना चहिये जिनसे बाल वैज्ञानिकों ओर मार्गदर्शक अध्यापको को प्रोजेक्ट पर काम करते समय आने वाली समस्याओं का निवारण किया जा सके।
कैथल के जिला समन्वयक श्री जयवीर सिंह ने बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट्स में एक्सपेरिमेंटल काम को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। पानीपत से एक मार्गदर्शक अध्यापक ने अपने जिले के 3 ऐसे प्रोजेक्ट का जिक्र किया जिसमे प्रशासन, एमएलए ओर स्थानीय निकायने संज्ञान लिया ओर उसका हल निकाला।
यमुनानगर से जिला शैक्षिक समन्वयक श्री गौरव कुमार ने बाल विज्ञान कांग्रेस में समुदाय की प्रतिभागिता और उनके सहयोग को बढ़ाने व उनको भी इस गतिविधि में इन्वॉल्व करने बारे अपने विचार रखे। अम्बाला से राकेश भारद्वाज ने कहा कि अध्यन के लिए बाहर से मेटीरियल ओर एक्सपर्ट बुलाये जाने चाहिए ताकि अन्य प्रदेशों में हो रहे परियोजना कार्य का भी ज्ञान हो सके। रोहतक से श्री आजाद सिंह बखेता ने कहा कि एक्स बाल वैज्ञानिक प्रतिभागी भी गाइड टीचर का काम करें।
जींद से श्री परवीन कुमार कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस में जिला स्तर पर अत्याधिक प्रतिभागिता ओर गुणवता विषय पर अपने विचार सांझा किये। उनका कहना था कि जिले से अत्याधिक प्रतिभागिता करवाने से और अधिक गुणवत्ता निकल कर सामने आने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अधिक से अधिक टीम्स को जिला स्तर पर भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
अपने वक्तव्य में सोनीपत के जिला समन्वयक के रूप में श्री के के मालिक ने कहा कि अच्छे प्रोजेक्ट बनवाने के लिए अध्यापकों से होमली एनवायरमेंट बना कर उनसे संपर्क किया जाए और उन्हें बच्चों से एक बेहतरीन प्रोजेक्ट बनवाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने क्वांटिटी को क्वालटी के आगे नकार दिया जिस पर दो जिला समन्वयकों की बाते परस्पर विरोधी हो गयी। इस मुद्दे पर बाद में चर्चा होगी कह कर टाल दिया गया।
पानीपत से आये जिला समन्वयक श्री श्रीकांत ने बताया कि अध्यापक को खुद अपनी भरपूर उर्जा का प्रयोग विद्यालयों के जीर्णोद्धार की लिए लगाये और फिर बच्चों की ऊर्जा का भी भरपूर उपयोग लें।
प्रधानाचार्य श्री रमेश कुमार ने गत वर्ष के दो बेस्ट परियोजनाओं को एक्सप्लेन किया। इसके बाद इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई।
एनसीएससी के राज्य समन्वयक श्री अजमेर सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर जाते हुए रेलवे में आने वाली दिक्कतों को रखा, जिसमे यह मांग की गई कि इस प्रकार की राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भाग लेने जाने वाले प्रतिभागियों को रेलवे टिकट रिजर्वेशन में कुछ छूट मिलनी चाहिए।
राज्य सह-संयोजक श्री कृष्ण कुमार वत्स ने पीपीटी के जरिये एक (बेस्ट 15 में से ) परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने प्रोजेक्ट मैथडोलोजी पर पावर पाइंट प्रजेंटेशन द्वारा विस्तार से समझाया।
दिवस 2
कार्यशाला के दूसरे दिन सभी जिलों को ग्रुप्स में बाट कर किसी भी टॉपिक पर प्रोजेक्ट बनाने के लिए काम दिया गया। लगभग दो घंटे के समय मे जिलावार अध्यापको और समन्वयकों ने आपसी चर्चा के जरिये मुख्य विषय, उपविषय को समझा। उन्होंने दो घण्टे में एक परियोजना तैयार की जिसमे काल्पनिक टीम ने अमुक स्थानपर परियोजना कार्य किया और काल्पनिक आंकड़ों के साथ सम्पूर्ण परियोजना का खाका तैयार किया। इस गतिविधि से नवागन्तुक अध्यापको को एक ही प्रयास से परियोजना पर काम करना आ गया। इस गतिविधि में अनुभवी अध्यापको ने विशेष मदद की।
तत्पश्चात इन परियोजनाओं को सिस्टेमेटिक तरीके से प्रस्तुत किया गया। कुछ परियोजनाएं जो समक्ष आयी इस प्रकार थी।
कुरुक्षेत्र टीम ने जीवन शैली उपविषय के अंतर्गत यंगस्टर्स ओर बच्चों पर मोबाइल और ऐप्स के प्रयोग से बिगड़ती आदतों की हानियों पर परियोजना प्रस्तुत की गई। इस परियोजना की समाप्ति पर बहुत चर्चा हुई और इस परियोजना को समयानुकूल बताते हुए बेहतर परियोजना करार दिया गया। एक अन्य प्रतिभागी ने धान की बिजाई पर एक नवाचारी परियोजना प्रस्तुत की गई। एक्सपेरिमेंटल टाइप की इस परियोजना की इम्प्लीमेंटेशन पर बहुत से प्रतिभागियों को संदेह था परंतु प्रस्तुतकर्ताओं द्वारा आगामी दिनों में इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने की तसल्ली पर सभी को संतोष करना पड़ा।
जब से जजमेंट टीम में कृषि वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ी है तब से प्रतिभागियों ने राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में पिछले 4-5 वर्षों से कृषि संबंधित परियोजनाओं की बाढ़ ही ला दी है। अधिकांश परियोजनाएं जो प्रस्तुत की गई पेस्टिसाइड, वर्मी कम्पोस्ट, वर्मी वाश, आर्गेनिक खेती ओर खरपतवार पर ही टिकी नजर आई।
जिला यमुनांनागर की टीम ने गांव चमरोड़ी में सौर ऊर्जा आधरित विद्युत उत्पादकता की संभावना एवं भविष्य विषय पर एक काल्पनिक परियोजना प्रस्तुत की। इस परियोजना को जिला समन्वयक दर्शन लाल ने प्रस्तुत किया और कहा कि परियोजना वही बेहतर होती है जो समय पर शुरू हो और अपने अंजाम तक भी पहुंचे। उन्होंने परियोजना में बताया कि गावों में लोग अपने घरों में सोलर विद्युत पैनल लगवा रहे हैं और वें ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों के बारे में सोच रहे हैं।
कार्यशाला के दौरान सभी जिलों के प्रोजेक्ट्स पर खुल कर चर्चा हुई और कुल मिला कर यह गतिविधि कार्यशाला को सम्पूर्णता की ओर ले जाती प्रतीत हुई। जिला समन्वयकों की बैठक में राज्य स्तरीय आयोजन, वित्त, शैक्षणिक समिति (कोर ग्रुप्स) के पुनर्गठन, बैठक, निर्णायकों ओर रिसोर्स पर्सन्स का चयन व जिला व राज्य स्तरीय आयोजन में काम का बटवारा आदि बिंदुओं पर चर्चा और निर्देशन कार्य सम्पन्न हुआ।
अंत मे प्रतिभागियों को कुरुक्षेत्र पेनोरमा और साइंस सेंटर को देखा। पेनोरमा में विभिन्न विज्ञान प्रयोगों को देख कर अच्छा लगा और उनसे बहुत कुछ नवाचारी सीखने को मिला।
इस प्रकार यह कार्यशाला सम्यन्न हुई और सभी जिला समन्वयक व अध्यापक नई ऊर्जा के साथ कुछ बेहतर कर दिखाने के जज्बे से अपने अपने घर को रवाना हुए।
रिपोर्टकर्ता: दर्शन लाल बवेजा
जिला समन्वयक एन सी एस सी हरियाणा विज्ञान मंच जिला यमुना नगर
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Saturday, July 01, 2017

खगोलीय परावर्तक दूरदर्शी निर्माण कार्यशाला Astronomical telescope refracting type making workshop

खगोलीय परावर्तक दूरदर्शी निर्माण कार्यशाला भोपाल मध्यप्रदेश में सम्पन्न Astronomical telescope refracting type making workshop, Bhopal 
आकाशीय घटनाओं और सूर्य, चाँद व तारों ने सदा से मनुष्य को आकर्षित किया है। इनको निकटता से जानने के लिए एक टेलिस्कोप की जरूरत पड़ती है।
 इस आवश्यकता समझते हुए विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग, भारत समय समय पर विज्ञान संचारकों, शौक़ीन खगोल प्रेमियों ओर विज्ञान क्लबों के प्रतिनिधियों के लिए टेलिस्कोप निर्माण की शुल्क सहित व निशुल्क कार्यशालाओं का आयोजन करवाता रहता है।
इसी कड़ी में भोपाल की मध्य प्रदेश विज्ञान सभा के संगोनी कलाँ परिसर में विगत 20 जून से नेशनल कौंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन, नई दिल्ली व विज्ञान प्रसार के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय खगोलीय दूरबीन निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
कार्यशाला गत 29 जून को सम्पन्न हुई।
                     
यमुनानगर से दर्शन लाल बावेजा व गौरव कुमार,
एन आई टी, कुरुक्षेत्र से प्रज्ज्वल चौहान, फरीदाबाद से श्रेया चावला
इस कार्यशाला में हरियाणा राज्य के यमुनानगर से दर्शन लाल बावेजा व गौरव कुमार, एन आई टी, कुरुक्षेत्र से प्रज्ज्वल चौहान, फरीदाबाद से श्रेया चावला, झारखण्ड राज्य के देवघर से डॉ प्रदीप कुमार सिंह देव व देवेन्द्र चरण द्वारी, राँची से योगेन्द्र कुमार, गढ़वा से आलोक कुमार चौधरी, लोहरदग्गा से ब्रजेश पाठक, नई दिल्ली से राजीव चौरसिया व कविता सनसंवाल, मध्य प्रदेश राज्य के शाजापुर से अजीत सिंह, पन्ना से अनुराग चौरसिया,
 सिवनी से आयुष पटेल, देवास से पराग दूबे, इंदौर से दिनेश विश्वकर्मा, ग्वालियर से डॉ दीप्ती गौर, छिंदवाड़ा से संदीप चावक, भोपाल से सुनील धनगर,  गुजरात राज्य के भावनगर से हर्षद जोशी व हितोर्थी बोरादे, राजकोट से अब्दुल भाई शेरसदा, महाराष्ट्र राज्य से अर्चना जगताप, उत्तर प्रदेश राज्य के औरैया से ब्रजेश दीक्षित तथा गोंडा से राजेश मिश्रा का चयन हुआ था जो इस कार्यशाला में दिनरात मेहनत करके अपना अपना टेलिस्कोप बना रहे हैं।
                   
कार्यशाला में प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में  पुणे के आयुका खगोलीय संस्थान के तुषार पुरोहित एवम् मप्र विज्ञान सभा द्वारा आमंत्रित टेलिस्कोप निर्माण विशेषज्ञ मुकेश सतंकर, अनिल धिमानी व विज्ञान प्रसार से विपिन सिंह रावत ने अपनी प्रशिक्षक भूमिका अदा की।
                  कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला में विज्ञान प्रसार के समन्वयक वैज्ञानिक डॉ अरविन्द सी राणाडे ने कहा कि इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को अपने हाथों से टेलिस्कोप का 125एमएम दर्पण बनाने, ऑब्जेक्ट फाइंडर फिटिंग, मैग्नीफायर फिटिंग, पेंट व पार्ट्स असेम्बलिंग का मौका दिया जाएगा जिससे वो दूरदर्शी बनाने की बारिकियों को सीख सकेंगें। यह दूरदर्शी बच्चों और समाज में खगोलीय घटनाओं बारे वैज्ञानिक सोच पैदा करने में मददगार साबित होगी।
सदियों से ब्रह्माण्ड मानव को आकर्षित करता आ रहा है। इसी आकर्षण ने खगोल वैज्ञानिकों को ब्रह्माण्डीय प्रेक्षण और ब्रह्माण्ड अन्वेषण के लिए प्रेरित किया। मनुष्य ने तारों के सूक्ष्म रहस्यों तथा ब्रह्माण्ड के विभिन्न आकाशीय पिंडों के आकार, गति, स्थिति, आकृति इत्यादि के बारे में  दूरबीन की सहायता से ही जाना हैं।
                 मप्र विज्ञान सभा के महासचिव एस आर आजाद ने कहा कि वर्षों से हमारा संस्थान मुख्यरूप से आदिवासी ओर ग्रामीण इलाकों में वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लेते हुए उनको रोजगार हेतु प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये कार्यरत है। मप्र विज्ञान सभा गत 18 वर्षों से मध्यप्रदेश के स्कूली बच्चों के लिए खगोलीय ओलिंपियाड का भी आयोजन सफलतापूर्वक कर रहा है जिससे अब भारत के सभी राज्यों के बच्चों और अध्यापकों को जोड़ने की योजना है। इसी विज्ञान सभा के विज्ञान संचार समन्वयक आशिष पारे ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न विज्ञान जागरूकता तथ्यों की जानकारी दी।
                     
कार्यक्रम के दौरान एरीज, नैनीताल से आये खगोल वैज्ञानिक श्री आर के यादव व जवाहर प्लेनेटोरिम, इलाहाबाद के निदेशक डॉ रवि किरण ने दूरबीन के संबंध ने जानकारी दी कि वर्ष 1609 में इटली के महान वैज्ञानिक गैलेलियो गैलिली ने हैंश लिपरशे द्वारा दूरबीन के आविष्कार के पश्चात् स्वयं इस यंत्र का पुनर्निर्माण किया और पहली बार खगोलीय प्रेक्षण में इसका उपयोग किया। दोनों रिसोर्स पर्सन्स ने दूरबीन के सम्बन्ध में और कई जानकारियाँ दी ।
                 
प्रतिभागियों में हरियाणा राज्य के यमुनानगर स्थित सी वी रमन विज्ञान क्लब के समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने कहा कि इस कार्यशाला में चारो ट्रेनर्स ने विस्तार पूर्वक सैद्धान्तिक और प्रायोगिक रूप से टेलिस्कोप निर्माण में जीजान से अपनी अपनी भूमिका अदा की, जिसके लिए वो आयोजकों ओर प्रशिक्षकों के धन्यवादी हैं।
                     यह दूरबीन बनाने के बाद क्लब समन्वयक को यह दूरबीन इस आशय के साथ सौपी गयी कि वो इसकी मदद से बच्चों और समाज को खगोलीय अवलोकन व जानकारियां प्रदान करने में इसका भरपूर उपयोग करेंगें। इससे संबंधित एक अंडरटेकिंग भी प्रतिभागियों से ली गई है।
समस्त कार्यशाला के दौरान उपकरणीय, भोजन, आवास, परिवहन व्यय का वहन आयोजको द्वारा किया गया।
in news




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Tuesday, March 21, 2017

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग Circumference of Earth Experiments

विज्ञान क्लब सदस्यों ने किया पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग
विषुव वर्ष का वह समय होता है, जब सूर्य विषुवत रेखा पर दोपहर के समय ऊर्ध्वाधर होता है। इस समय दोनों गोलार्द्धों में समान प्रकाश एवं ऊर्जा प्राप्त होती है। पृथ्वी पर दिन तथा रात की अवधि भी समान हो जाती है। यह स्थिति वर्ष में दो बार आती है। 20-21 मार्च तथा 23 सितम्बर इसकी दो प्रमुख तिथियाँ हैं। इस दिन सूर्य इस दिन एकदम पूर्व से उदय होकर एकदम पश्चिम में छिपता भी हैे यह दिन खगोल की भाषा में इक्विनॉक्स कहलाता है।
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर 17 जगाधरी में सी वी रमन विज्ञान क्लब व कल्पना चावला विज्ञान क्लब यमुना नगर के सदस्यों व ने सयुंक्त रूप से क्लब प्रभारी दर्शन लाल, गौरव वलिया व विकास पुंडीर  विज्ञान अध्यापकों के नेतृत्व में विषुव (इक्विनॉक्स) के अवसर पर पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग किया व सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में छड़ी ( नोमोन) की परछायी को नाप कर गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 20 मार्च के दिन इक्विनॉक्स यानी विषुव होता है इस दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन व रात बराबर होते हैं और आज के बाद दिन लम्बे और रात छोटी होनी शुरू हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं।
अगला प्रयोग 23 सितम्बर को किया जाएगा।
आज के प्रयोग में एकता, कावेरी, अलीशा, मिताली, याशिका, तुषार, अमित, नमन, भविष, ओजस्वी, अमित भारद्वाज ने भाग लिया।
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Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
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