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Saturday, January 31, 2015

विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop

विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop
Science Kit
विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop
जिला स्तरीय विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में सम्पन्न हुई। इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले भर से आये तीस विज्ञान शिक्षको को एनसीआरटी द्वारा डिजाइन की गयी विज्ञान किट का प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया। इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन डाईट के प्रधानाचार्य श्री तेजपाल सिंह ने किया और इस कार्यशाला का संचालन संस्थान की प्रशिक्षण समन्वयक श्रीमती गीता ढींगरा ने किया। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर के रूप में विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व नरेंद्र सिंह (प्रवक्ता  रसायन) थे। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले के छह खण्डों से विभिन्न विद्यालयों से आये तीस विज्ञान अध्यापको ने भाग लिया। यह प्रशिक्षु अध्यापक अब इस कार्यशाला के तृतीय व अंतिम चरण में अपने अपने बलाक के शेष अध्यापको को प्रशिक्षण प्रदान करेंगें। कार्यशाला में एनसीआरटी द्वारा डिजाइन की गयी दोनों प्राथमिक व अपर प्राथमिक विज्ञान किट्स का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत यह किट्स विज्ञान शिक्षको को तीन वर्ष पूर्व उपलब्ध करवाई गयी थी, इन उपयोगी विज्ञान किट्स में यूजर मेनुअल के आभाव में विज्ञान शिक्षको को इस किट्स से सभी प्रकार की विज्ञान गतिविधियां करवाने में बहुत दिक्कत होती थी क्यूंकि यह विज्ञान किट्स सामान की सूची से भी वंचित थी जिस कारण इन किट्स में शामिल कुछ गैरपरम्परागत व नव डिजाइन किये गए उपकरणों के नाम तक विज्ञान शिक्षको को मालूम नहीं थे और निरिक्षण के दौरान इन उपयोगी किट्स के प्रयोग ना किये जाने के कारण पूछने पर विज्ञान शिक्षक बताते थे की इस किट का प्रशिक्षण उन्हें दिलवाया जाए तभी इन किट्स का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। यह विज्ञान किट विज्ञान पाठ्य पुस्तको में उपलब्ध सभी गतिविधियों को करवाए जा सकने के मद्देनजर डिजाइन की गयी थी परन्तु यूजर मेनुअल व सामान के नामो की लिस्ट के बगैर यह बहुउपयोगी किट विज्ञान कक्षों में बंद पडी थी।  
इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं के प्रथम चरण में एससीआरटी गुडगाँव में मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया गया जहां एनसीइआरटी और अन्य संस्थानों के विज्ञान किट्स एक्सपर्टस को आमंत्रित किया गया था। उसके बाद इस प्रशिक्षण कार्यशालाओं के द्वितीय चरण में जिला स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। बहुत ही उपयोगी व नवाचार से युक्त इन किट्स के प्रशिक्षण में एम टी दर्शन लाल व नरेंद्र सिंह ने योजनाबद्ध तरीके से पहले सभी प्रशिक्षुओं को इन दोनों किट्स में उपलब्ध करवाए गए उपकरणों के नामो व उनकी विशेषताओं से परिचित करवाया और फिर इन उपकरणों से किये जा सकने वाले विज्ञान प्रयोगों और विज्ञान गतिविधियों को सूचीबद्ध तरीके से अध्यापको को नोट करवाया।
सर्वप्रथम भौतिकी के प्रयोग व गतिविधियाँ करवाई गयी जिन में मुख्यतः प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन और विक्षेपण, विद्युत जनित्र,  विद्युत घंटी, विद्युत प्रेरण, विद्युत मोटर, स्थिर वैद्युत आवेश, चुम्बकीय बल रेखाएं, आयतन, घनत्व, आर्कमडीज का सिद्धांत, बर्नौली का नियम, बहु परावर्तन, चुम्बक के विभिन्न प्रकार, चुम्बकीय सुई, पृष्ठ तनाव आदि से सम्बंधित विभिन्न गतिविधियाँ करवाई गयी और साथ ही में रसायन विज्ञानं की गतिविधियों में डब्लू ट्यूब से कार्बन डाई आक्साइड गैस, हाइड्रोजन गैस का बनना व जल का वैद्युत अपघटन, उदासीनीकरण से सम्बंधित गतिविधियाँ व प्रयोग करवाए गए। जीव विज्ञान की गतिविधियों के अंतर्गत प्याज की झिल्ली की कोशिका, रन्ध्र व जंतु कोशिका की अस्थाई स्लाइडे बनानी सिखाई गयी व किट में उपलब्ध डाईशेक्सन माइक्रोस्कोप और सयुंक्त सूक्ष्मदर्शी के प्रयोग का भी अभ्यास करवाया गया।
इन सब के अलावा विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने कम लागत के विज्ञान प्रयोग, मेरा विज्ञान बाक्स, विज्ञान क्विज व पजल्स के माध्यम से भी विज्ञान शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण दिया। पावर पाइंट प्रस्तुतिकरण के द्वारा विज्ञान शिक्षण व विज्ञान संचार के विभिन्न नवाचारी पहलुओं से अध्यापको को रूबरू करवाया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान विज्ञान अध्यापको ने विज्ञान शिक्षण में प्रभावी सुधार विषय पर समूह चर्चा भी की जिस में निरंजन सिंह विज्ञान अध्यापक के सुझाव पर सभी विज्ञान अध्यापको ने सहमती प्रकट की जिस में कक्षा छह से दस तक विज्ञान विषय में प्रयोगात्मक कार्य करवाने के लिए प्रति सप्ताह तीन पीरियड दिए जाने की मांग राखी गयी।
विज्ञान अध्यापको को संबोधित करते हुए डाईट के प्रधानाचार्य श्री तेजपाल सिंह ने बताया की जिस प्रकार इलेक्ट्रॉन और सौरमंडल का कोई भी ग्रह चंद सेकंड भी अपनी गति को धीमा नहीं कर सकता और ना ही लेट हो सकता है ठीक उसी प्रकार अध्यापको को भी समय का पाबन्द होना चाहिए तभी समाज और शिक्षा का भला हो सकता है। जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी और जिला गणित विशेषज्ञ अनिल गुप्ता ने भी विज्ञान शिक्षको को संबोधित किया व विज्ञान की विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों व विज्ञान प्रदर्शनियों बारे अध्यापको को अवगत करवाया। जिला शिक्षा अधिकारी श्री उदय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बेहतर परीक्षा परिणामो के लिए शिक्षकों से सहयोग मांगा जिसके जवाब में अध्यापको ने भी उनको सहयोग देने का विश्वास जताया।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने अध्यापको को हॉट एयर बैलून का सिद्धांत समझाते हुए डाईट के मैदान में हॉट एयर बैलून उड़ा कर दिखाया। उन्होंने बताया की जब हवा को आग से गर्म किया जाता है तो हवा गर्म होकर हल्की हो जाती है व उपर उठती जिस कारण बैलून उपर उठता है,  अध्यापको ने इस बैलून को उड़ाने में सहयोग किया व अपने विद्यालय के बच्चों के समक्ष भी हॉट एयर बैलून गतिविधि को करवाए जाने की इच्छा जताई।
विज्ञान अध्यापको ने विज्ञान किट की गतिविधियों व प्रयोगों को अपने हाथ से करके देखा व उनका बार बार अभ्यास किया व अपने अपने विद्यालयों में इन किट्स के भरपूर उपयोग का आश्वासन दिया। इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में जिला भर से आये अध्यापको में खेम लाल, मुकेश, गुलशन, अमित, रवि, कश्मीरी लाल, सुशील, राकेशमोहन, संजीव, गिरीश, संजय, रुस्तम अली, सुरेन्द्र, विजय कुमार, परमजीत इंदरजीत सिंह, राजेश, आदेश, राजिंदर, विरेंदर, विपिन, स्वीटी, मधु मेहतासुमन, रंजना गुप्ताअनिता वर्मा, निरंजन सिंह आदि ने भाग लिया।