Sunday, March 02, 2014

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर कार्यक्रम National Science Day Celebrations

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day Celebrations 
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आज विज्ञानी सी वी रमन को किया याद 
‘वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा’  है इस साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर इस वर्ष दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय मुरथल हरियाणा जिला सोनीपत मे भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। हरियाणा विज्ञान मंच के निमंत्रण पर क्लब की तरफ से विज्ञान मंच के बैनर तले कम लागत के विज्ञान प्रयोगों का कार्नर लगाया गया इसके अलावा चमत्कारों का पर्दाफाश, विज्ञान मंच के प्रकाशनों का स्टाल व विशेष आमंत्रण पर पधारे प्रगति विज्ञान संस्था के श्री दीपक शर्मा व रोहणी गोले ने भी पृथ्वी की परिधि और हाइड्रोराकेट्री के माडलों का प्रदर्शन किया। समारोह के दौरान विज्ञान पेंटिंग प्रतियोगिता, विज्ञान माडल प्रदर्शनी, सेमिनार, रोबोटिक मुकाबलों का भी आयोजन किया गया।
कम लागत के विज्ञान प्रयोग
इन सब कार्यक्रमों के अलावा आयोजन विश्वविद्यालय मे होबी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था जहां पर विवि के छात्र छात्राओं द्वारा अपनी विभिन्न हाबिज़ को प्रकट करती प्रदर्शनी लगाईं हुई थी जिसमे २-२ छात्र छात्राओं ने Coin Collection सिक्के के संग्रह को प्रदर्शित किया हुआ था। उन्होंने विभिन्न देशों के व भारतीय प्राचीन व आधुनिक सिक्कों का संग्रह प्रदर्शित किया हुआ था जो कि काफी सराहा गया।हरियाणा विज्ञान मंच से सतबीर नागल, दीपा कुमारी, वेदप्रिय, ब्रह्मदेव, दर्शन लाल, अजय कुमार व प्रगति विज्ञान संस्था मेरठ से दीपक शर्मा व रोहिणी गोले ने शिरकत की व अपने हुनर से बालकों मे विज्ञान संचार  किया व वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने मे सम्मिलित प्रयासों को बढ़ावा दिया।
 चमत्कारों का पर्दाफाश
रामन  का नोबल पुरस्कार प्राप्त करना भारत की शान था          
कईं सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों और शासकों द्वारा दी गयी  गुलामी से प्रभावित रहा भारत देश का वासी जो कि प्राचीन काल मे विज्ञान और गणित का जन्मदाता व अग्रणी रहा था, उस दिन गर्वित अनुभव कर रहा था जब 28 फ़रवरी 1928  को ‘रामन प्रभाव’ की खोज हुई थी। इसी खोज के लिए वैज्ञानिक सी वी रमन वर्ष उन्नीस सौ तीस मे भौतिकी के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किये गये थे। ब्रिटिश शासित देश के लिए यह और भी बड़े सम्मान की बात थी कि उनसे पहले उस समय तक एशिया मे भी किसी वैज्ञानिक को भौतिकी मे नोबल पुरस्कार नहीं मिला था। आज स्थानीय सरोजिनी कालोनी मे सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर एक बैठक का आयोजन किया गया और मौजूदा दौर मे भारत मे वैज्ञानिक तरक्की और प्रतिभा पलायन पर रोक विषय  पर चर्चा की गयी।
 पृथ्वी की परिधि और हाइड्रोराकेट्री
कब मनाया जाता है राष्ट्रीय विज्ञान दिवस ?
1928 को सर सी वी रमन ने अपनी खोज की घोषणा की थी उसी यादगार दिन को मानाने के उद्देश्य वर्ष 1986 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार राष्ट्रीय परिषद के परामर्श पर भारत सरकार ने प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा’ रखा गया है। जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना व उनमे और जनमानस मे वैज्ञानिक नजरिया व सोच उत्पन्न करने प्रति उत्साह का संचार करना है।

राकेट लौन्चिंग 
क्या है रमन प्रभाव ?
रामन प्रभाव के बारे मे विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा ने बताया कि रामन प्रभाव मे यह होता है कि मोनोक्रोमेटिक प्रकाश किरण जब ठोस, द्रव या गैस के पारदर्शक माध्यम से गुजारी गयी और तब इसके विचलन अध्ययन करने पर पता चला कि मूल प्रकाश की किरणों के अलावा भी स्थिर अंतर पर कुछ बहुत क्षीण  तीव्रता की किरणे भी उपस्थित होती हैं। इन किरणों को रमन-किरणे नाम दिया गया। ये किरणे माध्यम के पार्टिकल्स के घूर्णन व कंपन के कारण मूल प्रकाश मे से ऊर्जा में घटत या बढ़त होने से उत्पन्न होती हैं। और इस खोज को रामन इफेक्ट नाम दिया गया रसायन, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, और कम्युनिकेशन के क्षेत्र मे अन्य खोजों और आविष्कारों मे सहायता मिली। इस खोज के इतने   वर्षों बाद भी  ‘रामन इफेक्ट’  दुनिया भर की आधुनिक प्रयोगशालाओं में ठोस,  द्रव और गैसों के अध्ययन के लिए उपयोग किया जा रहा है
रोबोटिक मुकाबलों का नजारा 
कैसे उत्पन्न  हो वैज्ञानिक सोच? 
भारत जैसे विविधिता परिपूर्ण देश मे जहां का शिक्षा व रोजगार के अवसरों बटवारा समरूप नहीं है भागौलिक व सियासी विविधता परिपूर्ण देश मे विभिन्न धर्म व मतमतान्तरों के चलते अंधविश्वासों से दूर हट कर पूर्ण वैज्ञानिक सोच युक्त हो पाना बहुत कठिन था परन्तु हमारे वैज्ञानिकों और संचारकों ने सभी मर्यादाओं के अंतर्गत किसी को भी बिना ठेस पहुंचाए बहुत हद जनता को वैज्ञानिक सोच के नज़दीक ला दिया है परन्तु फिर भी कभी कभी देखने को मिलता है कि व्यवसायीकरण के इस दौर मे धार्मिक अंधविश्वास का प्रचार भी हावी हो जाता है परन्तु अब कोई भी अंधविश्वास अधिक दिनों तक नहीं जम पाता है और यही समाज मे वैज्ञानिक चेतना का विकास दर्शाता है।
इस अवसर पर विभिन्न  बच्चो ने निबंध लेखन, पेंटिंग, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, विज्ञान सेमीनार और विज्ञान प्रदर्शनी आदि के माध्यम से अपनी क्षमता और और वैज्ञानिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
                                                        रिपोर्ट: दर्शन लाल बवेजा 
अखबार मे : पंजाब केसरी


2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ट्रेन छूटे तो २ घंटे मे ले लो रिफंद, देर हुई तो मिलेगा बाबा जी का ठुल्लू मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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