Monday, October 31, 2011

विज्ञान चिट्ठाकारी: विज्ञान शिक्षण-अधिगम की एक अभिनव तकनीक Science Blogging: an innovative technique for Teaching-Learning of Science


Science Blogging: an innovative technique for Teaching-Learning of Science
विज्ञान चिट्ठाकारी: विज्ञान शिक्षण-अधिगम की एक अभिनव तकनीक

प्रस्तावना:-
साइंस ब्लॉगिंग यानि कि विज्ञान चिट्ठाकारिता विज्ञान को हर विद्यार्थी, शिक्षक और जन सामान्य तक पहुँचाने का एक नया तरीका है। साइंस ब्लॉगिंग ने विज्ञान प्रचार के वैश्विक प्रयासों में एक नयी स्फूर्ति भर दी है। वैसे अंग्रेज़ी भाषा में तो विज्ञान के लिए बहुत कुछ है परन्तु अंतर्जाल की दुनिया में हिन्दी व अन्य क्षेत्रीय भाषा में अभी हाल ही में इस नवाचारी तकनीक का पदार्पण हुआ है। इस तकनीक का इस्तेमाल कुछ ही विज्ञान लेखक कर रहे हैं। निसंदेह विज्ञान शिक्षण-अधिगम और विज्ञान संचार के क्षेत्र में यह अभिनव प्रयास अंतर्जाल (इंटरनेट) के जरिये ही संभव हुआ है। आज का युग इंटरनेट का युग है। संचार के समस्त साधनों में अति उन्नत तकनीक है ये अंतर्जाल का महाजाल जिसका फैलाव विश्वव्यापी है। इंटरनेट की पहुँच आज जन सामान्य तक हो चुकी है और दुनिया में इसके उपयोगकर्ता बहुत तेजी से बढ़ रहें हैं। आज कोई यदि ज्ञान की खोज में निकलता है तो वो पुस्तकालय के साथ साथ इंटरनेट को भी प्राथमिकता देने लगा है। तो फिर ऐसे में विज्ञान शिक्षा क्यूँकर पीछे रहे आज हर घर हर विद्यालय में शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों अंतर्जाल के माध्यम से विज्ञान शिक्षण-अधिगम की बुलंदियों को छू सकते हैं। इंटरनेट ने तो पिछले एक दशक से भी कम समय में विज्ञान संचार के तरीके में क्रान्ति ला दी है परन्तु हिन्दी विज्ञान चिट्ठाकारिता 2007-08 से ही प्रकाश में आई और आते ही द्रुतगति से फैली। आज हिन्दी में विज्ञान चिट्ठाकारिता के अच्छे-खासे लेखक और पाठक हैं। हिन्दी माध्यम के साथ साथ अंग्रेज़ी और क्षेत्रीय भाषाओं के भी पाठक विज्ञान चिट्ठों पर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं। आजकल विज्ञान शोध, कोचिंग, मार्गदर्शन (व्यवसायिक व शैक्षणिक) जैसे कार्य अंतर्जाल पर किये जा रहे हैं। शोधकर्ता अपने शोधपत्र और संदर्भ सूची भी खुली चर्चा के लिए ऑनलाइन रखते हैं। अंतर्जाल पर लिखी गई वैयक्तिक डायरियाँ ही ब्लॉग (हिन्दी नाम चिट्ठा) कहलाती हैं। इन चिट्ठों का लेखन, सम्पादन, प्रकाशन का कार्य खुद लेखक (चिट्ठाकार) द्वारा ही होता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इस में कम्प्यूटर का अधिक ज्ञान आवश्यक नहीं है। मात्र 5-6 दिनों के प्रशिक्षण के बाद कोई भी शिक्षित व्यक्ति चिट्ठाकारी शुरू कर सकता है। हिन्दी में टाइप ना जानते हुए भी आजकल सॉफ्टवेयर की मदद से रोमन स्टाइल में हिन्दी लिखी जा सकती है।
सारणी संख्या-1
चिट्ठाकारिता के शब्दों की परिभाषाएँ
ब्लॉग (चिट्ठा) = वेब + लॉग
ब्लॉगर (चिट्ठाकार) = वह व्यक्ति जिस का कोई ब्लॉग हो और वो ब्लॉगिंग (चिट्ठाकारी) करता हो। 
ब्लॉगरोलिंग (चिट्ठाभ्रमण) = एक के बाद एक ब्लॉग देखते रहने की प्रक्रिया।
फॉलो करना (अनुसरण करना) = इस प्रक्रिया में कोई भी जी-मेल या अन्य  उपयोक्ता अमुक ब्लॉग का  प्रशंसक बन सकता है।
ऍग्रीगेटर (संकलक/संग्राहक) =  ऐसी वेबसाइट जो कि विषय आधारित चिट्ठों और उन की पोस्टों को संकलित करके एक जगह दिखाती है।
आर आर ऍस (फीड) = इस सुविधा के जरिये चुने गए चिट्ठों की नयी प्रकाशित पोस्टों को चिट्ठे तक जाए बिना ही सीधे ही प्राप्त किया जा सकता है।          

विज्ञान चिट्ठाकारिता (साइंस ब्लॉगिंग) की आवश्यकता क्यों?
विज्ञान शिक्षण के क्षेत्र में नित नई चुनौतियों के मद्देनजर विज्ञान संचार के लिये यह आवश्यक हो जाता है कि विज्ञान संचारक, संचार के प्रत्येक उस उन्नत व नवाचार माध्यम को चुने जिसके जरिये वो विज्ञान के प्रत्येक ज्ञानपिपासु और जनसामान्य तक पहुँच सके। इन्फॉर्मेशन टैक्नोलोजी (I.T.) के द्वारा आज इस मकसद में कामयाबी प्राप्त हो चुकी है। जब कोई हिन्दी माध्यम में शिक्षा ग्रहण करने वाला पूर्व माध्यमिक या माद्यमिक स्तर का छात्र किसी विज्ञान जानकारी और विज्ञान प्रदर्शनी के लिए मॉडल बनाने के लिए अंतर्जाल तक पहुँचता है तो उसे विभिन्न  वेबसाइटों पर सम्बन्धित ज्ञान का भण्डार मिलता है परन्तु सब कुछ अंग्रेजी में, ऐसी स्तिथि में उसे भाषा माध्यम की दिक्कत पेश आती है।
विज्ञान ब्लॉगिंग शुरू करने के उद्देश्य:-
1.    विज्ञान शिक्षा का प्रचार प्रसार।
2.    विज्ञान क्लब गतिविधियों को जन सामान्य तक पहुँचाना।
3.    विज्ञान मॉडल बनाने की विधियों को हिन्दी में प्रचारित करना।
4.    विज्ञान अध्यापक होने के नाते समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना।
5.    विज्ञान को सरल और मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करना।
6.    अंतर्जाल पर हिन्दी में विज्ञान प्रचार करना।
7.    क्लब गतिविधियों का संचालन और लिखित संग्रह तैयार करना व विश्व समुदाय तक अपनी गतिविधियाँ पहुँचाना।
8.    विज्ञान सूचनाओं की तत्क्षण रिपोर्टिंग।
इसलिए मैंने (दर्शन लाल) व मेरी सहयोगी श्रीमती इंदु अरोड़ा ने मिल कर 2 वर्ष पूर्व  सी॰ वी॰ रमन विज्ञान क्लब के बैनर तले हिन्दी विज्ञान चिट्ठाकारी शुरू की और 3 विज्ञान ब्लॉग शुरू किये जिन की सिलसिलेवार जानकारी निम्न सारणी में है।
सारणी संख्या-2
क्रम सं॰
विज्ञान ब्लॉग का नाम
विज्ञान ब्लॉग का वेब-पता
विज्ञान ब्लॉग का विवरण

1
विज्ञान गतिविधियाँ
Science Activities

www.sciencedarshan.in
इस ब्लॉग में विज्ञान माडल, विज्ञान पहेली, विज्ञान गतिविधियों, विज्ञान समाचार, विज्ञान जोक्स, विज्ञान सूचनाएँ, विज्ञान प्रयोग, अंधविश्वासों की वैज्ञानिक व्याख्या, विज्ञान रिपोर्टिंग आदि विषय शामिल हैं।
2
क्यों और कैसे विज्ञान में
http://kk.sciencedarshan.in
इस विज्ञान ब्लॉग में विज्ञान सम्बन्धी क्यों और कैसे का जवाब उदाहरणों और वीडियो के जरिये बहुत ही आसान और मनोरंजक तरीके से दिया जाता है।
3
हर रोज एक प्रश्न
http://darshansandbox.blogspot.com
इस ब्लॉग में रोजाना एक विज्ञान प्रश्न पूछा जाता है जिस का जवाब पाठकों को देना होता है। यदि वे जवाब ना दे सकें तो अगले दिन इसका जवाब विस्तार से दिया जाता है। 


इन विज्ञान ब्लॉगों पर अंतर्जाल से पाठक 5 प्रकार से आते हैं।
१.      विषय वस्तु को खोजते हुए पाठक जो कि गूगल सर्च जैसे सर्च इंजन से आते हैं।
२.     नियमित ब्लॉगर जो कि प्रतिदिन अपने पसंदीदा ब्लॉगरों के ब्लॉगों पर जाते हैं।
३.   ब्लॉग के अनुसरणकर्ता, लाइव रीडर, ऍग्रीगेटर फीड और इमेज सर्चर (फोटो का पीछा करते हुए)।
४.     संदर्भ सूचना से।
५.    अन्य ब्लॉगों से लिंक के जरिए।
६.      ब्लॉग संचालक के निमंत्रण पर।
७.    अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों से।
ब्लॉगों से प्राप्त आँकड़े (30-09-2011 तक): सारणी संख्या-4

नोट: उक्त आँकड़े www.blogger.com द्वारा निःशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं।     
आँकड़ों का विश्लेषण:-
विज्ञान गतिविधियाँ चिट्ठे पर प्रतिमाह औसत 1950 पाठक आते हैं और इस ब्लॉग की प्रतिमाह पोस्ट अद्यतन की औसत 8 है यानि कि महीने में 8 बार नयी जानकारी से ब्लॉग को अपडेट किया गया कुल 33105 पाठक ब्लॉग पर आये और उन्होंने कुल 805 दोतरफा संवाद के जरिये अपनी राय दी और जिज्ञासात्मक प्रश्न किये। इस विज्ञान चिट्ठे के 110+548+160 अनुसरणकर्ता हैं।
आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह विज्ञान ब्लॉग हिन्दी के उत्तम ब्लॉगों से एक है।
क्यों और कैसे चिट्ठे पर प्रतिमाह औसत 1000 पाठक आते हैं और इस ब्लॉग की प्रतिमाह पोस्ट अद्यतन की औसत 3 है यानि कि महीने में 3 बार नयी जानकारी से ब्लॉग को अपडेट किया गया। कुल 12005 पाठक ब्लॉग पर आये और उन्होंने कुल 241 दोतरफा संवाद के जरिये अपनी राय दी और जिज्ञासात्मक प्रश्न किये। इस विज्ञान चिट्ठे के 54+548+160 अनुसरणकर्ता हैं।
आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह विज्ञान ब्लॉग भी हिन्दी के उत्तम ब्लॉगों से एक है।
हर रोज़ एक प्रश्न ब्लॉग पर प्रतिमाह औसत 1167 पाठक आते हैं और इस ब्लॉग की प्रतिमाह पोस्ट अद्यतन की औसत 31 है यानि कि महीने में 31 बार (हर रोज़ एक बार) नयी जानकारी से ब्लॉग को अपडेट किया गया। कुल 3500 पाठक ब्लॉग पर आये और उन्होंने कुल 307 दोतरफा संवाद के जरिये अपनी राय दी और जिज्ञासात्मक प्रश्न किये। इस विज्ञान चिट्ठे के 110+548+160 अनुसरणकर्ता हैं।
आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह विज्ञान ब्लॉग भी हिन्दी के उत्तम ब्लॉगों से एक है।
परम्परागत विज्ञान संचारक बनाम साइंस ब्लॉगर:-
परम्परागत विज्ञान संचार से तात्पर्य है कि संचारक पहले किसी विज्ञान प्रशिक्षण में भाग नई जानकारियाँ हासिल करेगा या फिर विज्ञान पत्रिकाएँ, जर्नल और अन्य सामग्री खरीद कर खुद को अपडेट करेगा और फिर लाभार्थियों को बुला कर विज्ञान संचार करेगा, परन्तु अब अंतर्जाल ने इस अपडेशन को आसान बना दिया है। विज्ञान चिट्ठाकार घर बैठे इंटरनेट पर उपलब्ध विश्वस्तरीय पत्रिकाओं ‘नेचर’ व ‘साइंस’ या अन्यत्र शोध-पत्रों को पढ़ कर अतिशीघ्र सूचनाओं को आसान भाषा यहाँ तक की क्षेत्रीय भाषा में भी अपने पाठकों तक पहुँचा रहा है।
अत: स्पष्ट है कि पारम्परिक विज्ञान संचारकों की तुलना में विज्ञान चिट्ठाकार अधिक ‘अप-टू-डेट’ है।
साइंस ब्लॉगिंग विज्ञान संचारकों के लिए वरदान है। 
विज्ञान संचारकों की विज्ञान शिक्षा के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। छात्र आमतौर पर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर विज्ञान शिक्षा से बचना चाहता है क्योंकि यह खर्चीली और कठिन पढ़ाई मानी जाती है।
ऐसी स्थिति में विज्ञान संचारक अपने प्रेरणादायक लेखों से विद्यार्थियों को प्रेरित कर सकता है और रुचिपूरक समाचारों से शोधकर्ताओं की नई-नई खोजों के समाचार दे कर छात्रों की रूचि को विज्ञान शिक्षा के लिए बढ़ा सकता है।
अंतर्जाल पर कुछ बेहतरीन हिन्दी विज्ञान चिट्ठे:-
अंतर्जाल पर अंग्रेजी के प्रभुत्व को टक्कर देती हिन्दी विज्ञान चिट्ठाकारी नित नये आयामों को छू रही है। बहुत से मानुष निस्वार्थ विज्ञान-प्रचार मुहिम को समृद्ध करने में ब्लॉगिंग के जरिए अपने ब्लॉगों पर हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भषाओं में विज्ञान संचार में जुटे हैं। यहाँ कुछ विज्ञान संचारकों ने अपने विज्ञान संगठन भी बना रखे हैं जिस के द्वारा वे दूर-दूर के और  विदेशों तक के विज्ञान ब्लॉगरों को सामुदायिक चिट्ठे पर महत्वपूर्ण विज्ञान लेखों को प्रकाशित करने के लिए अपने साथ जोड़े हुए हैं।
कुछ महत्वपूर्ण विज्ञान ब्लॉग (हिन्दी वाले):- सारणी संख्या-4
          नाम विज्ञान चिट्ठा
                    वेब पता (URL)
साईब्लॉग
विज्ञान विश्व
तस्लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया
मीडिया डॉक्टर
क्यों और कैसे
विज्ञान गतिविधियाँ
ई-पण्डित (सूचना प्रौद्योगिकी)
अंतर्राष्ट्रीय रसायन वर्ष-2011
सर्प संसार
गणित और विज्ञान
अंतरिक्ष
स्वास्थ्य सब के लिए
पर्यावरण डाइजैस्ट
शोध या सर्वे
ना जादू ना टोना
विज्ञान चर्चा
वायेजर
खेती बाड़ी
Starts with a bang
Hindi Science Fiction
Ram ram bhai
Science blogs
Mera samast

उपरोक्त सूची हिन्दी तथा अंग्रेज़ी के कुछ ही ब्लॉगों का संग्रह है जब कि इनकी संख्या बहुतायत में है।
कुछ हिन्दी विज्ञान ब्लॉगों के मुख्य पृष्ठों के चित्र यहाँ दिए जा रहे हैं ताकि विज्ञान ब्लॉगों को पहचानने में आसानी हो सके। 
चित्र संख्या - 1
क्यों और कैसे विज्ञान में ब्लॉग का मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र .......
चित्र संख्या–
हर रोज एक प्रश्न ब्लॉग के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ...
चित्र संख्या – 3
 साईब्लॉग के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ...


चित्र संख्या –

तस्लीम के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ...
चित्र संख्या – 5
सबाई के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ... 
चित्र संख्या –


उपर्युक्त चित्र देख कर स्पष्ट होता है कि विज्ञान चिट्ठे ब्लॉगर डॉट काम पर या फिर वर्डप्रैस द्वारा बनाये जा सकते हैं।
ब्लॉगर.कॉम पर ब्लॉग बनाना पूर्णतया निःशुल्क एवं बिलकुल ही सरल है तथा कम्प्यूटर का सामान्य ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति इसे स्वयं बना सकता है। ब्लॉग की सामग्री तो गूगल के सर्वर पर निःशुल्क होस्ट होती है तथा डोमेन नेम वैकल्पिक है। आप चाहें तो अपना ब्लॉग पता ब्लॉगर पर http://myblogname.blogspot.com जैसा रहने दे सकते हैं या फिर स्वयं का डोमेन नेम लेकर http://myblogname.com जैसा सैट सकते हैं। यदि आप अपने ब्लॉग के डिजाइन पर अधिक नियन्त्रण चाहते हैं तथा ब्लॉग को प्रोफैशनल लुक देना चाहते हैं तो वर्डप्रैस का प्रयोग करें। वर्डप्रैस सॉफ्टवेयर (http://wordpress.org) स्वयं तो निःशुल्क है लेकिन इसके लिये डोमेन नेम तथा वेब होस्टिंग अनिवार्यतः चाहिये होती है। डोमेन नेम 500-800 रूपये प्रति वर्ष तथा वेब होस्टिंग लगभग 1000 रुपये प्रतिवर्ष का खर्च है। दोनों चीजों का इकट्ठा पैकेज लेने पर कम में भी पड़ जाती हैं।
विज्ञान संचारकों को जल्द से जल्द अब अपने-अपने विज्ञान चिट्ठे बना कर एक मुहिम छेड़ देनी चाहिये। 
विज्ञान चिट्ठाकारों को निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए।
ब्लॉग का नाम अलग और अच्छा सा रखना चाहिए। अच्छा सा नाम रखने से विज्ञान प्रेमी के साथ-साथ आम जन भी चिट्ठे की ओर आकर्षित होगा तथा नियमित पाठक एवं टिप्पणीकार बन जाएगा।
ध्यान रहे कि ब्लॉग नाम की पुनरावृत्ति ना हो। यह सुनिश्चित करने के लिये कि वाँछित नाम का ब्लॉग पहले से नहीं है, आप गूगल सर्च करके देख सकते हैं। कुछ नाम ऐसे हो सकते हैं जैसे ‘विज्ञान प्रवाह’, ‘विज्ञान सलिल’, ‘विज्ञान गंगा’, ‘भारतीय विज्ञान’, ‘विज्ञान प्रकाश’, ‘निहारिका’ आदि नाम रख सकते हैं।
विज्ञान चिट्ठे को ब्लॉग संकलक (ऍग्रीगेटर) से जोड़ कर ब्लॉग के पाठकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
संदर्भ:-
·         डॉ॰ अरविन्द मिश्रा, विज्ञान संचार का नया नजरिया, पृष्ठ-14 विज्ञान प्रगति–फरवरी 2010
·         विकिपीडिया पर विज्ञान पेज (http://hi.wikipedia.org/विज्ञान)
·         http://www.scidev.net/en/ (ऑनलाइन विज्ञान मैगजीन)
·         आरम्भिक विज्ञान कोश (गूगल पुस्तक ; लेखक - गोविन्द झा)
·         बाल ज्ञान-विज्ञान ऍन्साइक्लोपिडिया (गूगल पुस्तक; लेखक - राजेन्द्र कुमार राजीव)
·         विज्ञान शिक्षण (गूगल पुस्तक;  लेखिका - डॉ शशिकिरण पाण्डेय)
·         उपकार सामान्य विज्ञान (गूगल पुस्तक; लेखक - नार्थ डाकोटा)
·         विज्ञान का आनन्द (गूगल पुस्तक; लेखक - विश्वनाथ तिवारी)
·         पियर्सन सामान्य अध्ययन (गूगल पुस्तक; संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के लिये उपयोगी)
·         उपकार सामान्य ज्ञान (गूगल पुस्तक; हिन्दी में)
·         विज्ञान प्रसार - भारत सरकार के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 1989 में स्थापित एक स्वायत्तशासी संस्था, विज्ञान प्रसार का जालघर
·         विज्ञान विश्व - विज्ञान की नित नयी जानकारी अन्तर्जाल में उपलब्ध कराने वाला हिन्दी चिट्ठा (ब्लॉग)
·         भारत में विज्ञान की उज्जवल परम्परा (भारत का गौरव)
·         विज्ञान शब्दावली (गूगल पुस्तक; हिन्दी में)
·         विज्ञान गतिविधियाँ (मास्टर दर्शन लाल बवेजा का हिन्दी ब्लॉग)
·         भारत का वैज्ञानिक चिन्तन (प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में वैज्ञानिक चिन्तन की गौरवशाली परम्परा को रेखांकित करता हिन्दी चिट्ठा)
·         विज्ञान में क्यों और कैसे (मास्टर दर्शन लाल बवेजा का हिन्दी विज्ञान ब्लॉग)
·         ई-पण्डित (सूचना प्रौद्योगिकी एवं हिन्दी ब्लॉगिंग/कम्प्यूटिंग सम्बन्धी जानकारियों से भरपूर चिट्ठा) - http://epandit.shrish.in
·         विज्ञान तथा तकनीकी शब्दावली आयोग का जालघर - यहाँ हिन्दी-अंग्रेजी वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली खोजी जा सकती है।
·         संवादसेतु-विज्ञान (हिन्दी चिट्ठा)

द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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7 comments:

  1. आपका ब्लॉग भारतीय ब्लॉग संकलक "हमारीवाणी" में सम्मिलित है, परन्तु आपने हमारीवाणी क्लिक कोड अपने ब्लॉग पर नहीं लगाया है. हमारीवाणी में पोस्ट प्रकाशित करने के लिए हमारी वाणी क्लिक कोड से उत्पन्न लोगो पर क्लिक करना आवश्यक होता है.

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    छठपूजा की शुभकामनाएँ!

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  3. कमाल की कलम चलाई है आपने, सांइस ब्लागर्स को एक जगह एकत्रित कर दिया। यह पोस्ट बुकमार्क कर रहा हूँ।

    आभार

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  4. बहुत सराहनीय प्रयास हैं आपके.

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  5. आपने सचमुच एक शोध प्रबंध की भूमिका ही लिख दी मानो! बधाई !

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  6. बेहतरीन आलेख, हॉल ऑफ़ फ़ेम में रखे जाने योग्य।

    निश्चय ही विज्ञान चिट्ठाकारिता का भविष्य उज्जवल है।

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  7. धन्यवाद जी , विज्ञान िवश्व पर आज कल दैनिक ४५० के आस पास हिट आ रही है, किसी समय ये आंकड़े दहाई में थे।

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