Monday, August 30, 2010

नाटक द्वारा विज्ञान संचार Science Drama

नाटक द्वारा विज्ञान संचार Science Drama 
नाटक संचार  का एक सशक्त माध्यम है नाटकों द्वारा लोगो को जल्द से जल्द प्रेरित किया जा सकता है नाटक द्वारा कही गई बात जल्द समझ आती है क्युंकि  नाटक को देख कर समझने वाले  यानी दर्शक को ज्यादा पढ़ा लिखा होना जरूरी नहीं है नाटक अनपढ़ ,कम पढेलिखे और शिक्षित सब को समझ आने वाली कला है |
नाटकों  से विज्ञान संचार और अंधविश्वास निवारण :-नाटक कला द्वारा जन मानस  को कोई भी विषय जैसे अंधविश्वास ,कन्या भ्रूण हत्या ,दहेज प्रथा ,बाल विवाह ,टीकाकरण ,जनसंख्या वृद्धि ,निरक्षरता आदि को आराम से समझाया जा सकता है |
नाटक लोगो के जेहन मे समस्या के प्रति सीधा वार करते है बशर्ते की नाटक के कलाकार जिवंत किरदार अदा करे और नाटक की स्क्रिप्ट जानदार हो ,नाटक की स्क्रिप्ट सत्य घटना पर और कथा/कहानी प र  आधरित हो सकती है बस स्क्रिप्ट किसी व्यक्ति विशेष और जाति को सीधे सीधे हिट ना करती  हो|
नाटक के संवाद सरल और लोकल भाषा मे हो तो अच्छा है अब माना  हम नाटक तो भोजपुरी भाषा मे तैयार करते है और उस को प्रस्तुत करते है हरियाणा के किसी गांव  मे तब इस स्तिथि  मे वो नाटक मनोरंजन तो करेगा पर उद्देश्य की प्राप्ति के पथ से भटक जाएगा | इस लिए नाटक की भाषा वहीं  की  हो जहाँ उस का प्रस्तुतिकरण  किया जाना हो |
नाटक के कलाकार समय समय पर जनमानस के बीच वास्तविकता मे भी समस्या को डिस्क्स करे लिखी-लिखाई स्क्रिप्ट से अमुक स्थान की समस्या भिन्न हो सकती है |
आज क्लब सदस्यों एवं स्कूल के छात्रों को स्वाध्याय ग्रुप के छात्रों ने कथित धर्म बाबा के  द्वारा फैलाए गये आडम्बरों का निवारण करता एक शानदार नाटक दिखाया गया |
युवा  निर्देशक संदीप जी  के  निर्देशन मे तैयार सब  छात्रों ने अंधविश्वास को दूर भागता एक नाटक देखा और बाबा के कारनामों का  पर्दाफाश होता देखा और भविष्य मे इन बाबा ,मोलवियों ,सयानो ,कलन्दरों के जाल मे ना फसने  की शिक्षा ली |
नाटक की स्क्रिप्ट जोरदार थी और विज्ञान संचार को जन सामान्य के शब्दों संचारित कर पाने मे सक्षम थी 
झलकियां :-

      
 छात्रों ने कोई फोर्मल कोस्टयूम  नहीं पहन रखा था उन्होंने साधरण यूनिफ़ोर्म मे ही परफोर्मेंस दी| आवाज़ इतनी साफ़ और शशक्त थी कि कोई साऊंड सिस्टम की भी जरूरत नहीं पड़ी | नाटक शत प्रतिशत अंधविश्वास निवारण और विज्ञान संचार पर बेस्ड था |

स्कूल के छात्रों  और आध्यापको  ने
नाटक का आनंद लिया और यह सीखा की किसी भी घटना को चमत्कार नहीं मानना है कोई भी चमत्कार संभव नहीं है हर चमत्कार के पिछे कोई ना कोई वैज्ञानिक नियम या सिद्धांत काम करता है जिस का लाभ उठा कर बाबे टाईप लोग अन्य को मूर्ख बना जाते  है |  
नाटककारों की टीम का ग्रुप फोटो,
इनमे से कोई भी व्यवसायिक नाटक कलाकार नहीं है सब नोकरी पेशा/किसान/विद्यार्थी आदि है 
प्रस्तुति :-सी. वी. रमण साईंस क्लब ,यमुना नगर ,हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा   

Tuesday, August 24, 2010

जीवन रक्षक पेटियां मॉडल Life Belts/Life Jackets

जीवन रक्षक पेटियां मॉडल Life Belts/Life Jackets 
सही ही कहा गया है आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है  |
बाड़ ग्रसित  इलाको मे जान बचाने के लिए नए नए तरीकों का प्रयोग किया गया है  |
जीवन रक्षक पेटियां नम्बर -1
खाली प्लास्टिक की बोतलों को रस्सी से बांध कर बनाई गई जीवन रक्षक पेटी
बोतलों के ढक्कन फेवी क्विक से चिपका दिए गये है इस जीवन रक्षक पेटी को सीने से कस कर  बाँध कर पानी मे डूबने से बचा जा सकता है|
 जीवन रक्षक पेटियां नम्बर -2
इस माड्ल मे छात्र बता रहे है कि एक पैजामा ले कर उसका कमर की तरफ का हिस्सा नाडे से कस कर बाँध दे और फिर उस मे थर्मोकोल के टुकड़े या खाली ढक्कन बंद लीक प्रूफ प्लास्टिक की बोतले डाल कर पैरों वाले सिरे भी बांध दे | इस जीवन रक्षक पेटी को सीने से कस कर  बाँध कर पानी मे डूबने से बचा जा सकता है| 
जीवन रक्षक पेटियां नम्बर -3

लोकी/घीया  जिसकी सब्जी बनती है हाँ वही तो जब बीज बनने के लिए बेल पर ही छोड़ दी जाती है तो वो इतनी बड़ी बड़ी और सख्त हो जाती है उन का प्रयोग जीवन रक्षक पेटी के रूप मे इन छात्रों के गावं मे  किया जाता है इन पर वाटर प्रूफ पेंट कर के काफी लंबे समय तक सहेज कर भी रखा जा सकता है 
 इस जीवन रक्षक पेटी को सीने से कस कर  बाँध कर पानी मे डूबने से बचा जा सकता है| 
एम् सील लगा कर इन्हें लीक प्रूफ बना दिया गया है| 
बाड़  आने के समय सदैव पहले जान बचने का प्रयत्न करना चाहिये |
ऊँचाई के स्थान की और जाना चाहिए वहाँ तक जाने के लघुतम मार्ग का खाका / योजना पहले से ही सोच कर रखना चाहिए 
ऊपर दिखाये गए जीवन रक्षक पेटियों के मॉडल विद्यार्थीयों द्वारा जांचे परखे गये है लेकिन आप द्वारा बनाये गए को पहले जाँच ले ताकि वो वक्त पड़ने पर धोखा ना दे दे |
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साईंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा-- दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर, हरियाणा  
 

 
 

         


Friday, August 20, 2010

क्लब गतिविधियाँ -विभिन्न दिवस मानना Club Activities

क्लब गतिविधियाँ - विभिन्न दिवस मानना Club Activities
आज  सी. वी. रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने अक्षय उर्जा दिवस मनाया |
आज श्री राजीव गाँधी जी के जन्म दिन पर अक्षय उर्जा दिवस मनाया जाना लोकप्रिय श्री राजीव गाँधी को प्रेम पूर्वक समर्पण मना जाता है |
दिवसों के मनाये जाने के लाभ:- समय समय पर बच्चों व बड़ों को साथ ले कर विभिन्न दिवसों को मनाया जाना बहुत ही ज्ञानवर्धक होता है | निम्न लिखे गए  दिवस मनाने से जागरूकता का संचार होता है और उस के दूरगामी लाभ भी होते है |
विज्ञान संचार के अंतर्गत मनाये जाने वाले दिवस:-
12 जनवरी -राष्ट्रीय युवा दिवस National Youth Day

  2 फरवरी-विश्व नमभूमि दिवस World Wetland Day
 28 फरवरी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day
   21 मार्च -विश्व वानिकी दिवस   World Forestry Day
  7 अप्रैल - विश्व स्वास्थ्य  दिवस  World Health Day 
  22 अप्रैल -विश्व धारा दिवस World Earth Day 
 22 मई-अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस 
  5 जून -विश्व पर्यावरण दिवस World Environment Day

11 जुलाई -विश्व जनसँख्या दिवस World Population Day 
20 अगस्त -अक्षय उर्जा दिवस (दैनिक जागरण अखबार मे ) 
 जारी है .......
क्लब  सदस्यों ने आज एक अक्षय  उर्जा पर एक परिचर्चा मे भी भाग लिया |
 परिचर्चा के मुख्य बिंदु जिन पर चर्चा की गई |
*उर्जा के वर्तमान साधन 
*उर्जा के वर्तमान साधनों पर जनसँख्या का दबाव 
*उर्जा के गैर परम्परागत साधनों पर विचार 
*सौर उर्जा 
*पवन उर्जा 
*पन उर्जा  
*ज्वारीय उर्जा 
*भू-तापीय उर्जा 
*सागर तरंग उर्जा 
* Ocean thermal energy conversion (OTEC or OTE)
*उर्जा संरक्षण
इस प्रकार विद्यालय  या समुदाय मे विभिन्न दिवस मना कर जागरूकता एवं विज्ञान संचार किया जाता है 
 नोट :- यह  अगस्त 2010 तक की गतिविधियों का अति संक्षिप्त ब्योरा है 
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साईंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा-- दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर, हरियाणा  



   

Monday, August 16, 2010

आओं पर्यावरण संरक्षण पर पोस्टर बनायें Posters ideas

आओं पर्यावरण संरक्षण पर पोस्टर बनायें Posters ideas
पोस्टर  का महत्व जागरूकता संचार मे बहुत ज्यादा है समय समय पर स्कूल मे एवं अन्य संस्थाओं द्वारा विभिन्न मुद्दों पर पोस्टर बनाओ प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है 
स्टुडेंट्स को पोस्टर्स को बनाने के लिए कुछ टिप्स देते है |
१. पोस्टर दिए गए विषय को प्रकट करता हो |
२. पोस्टर मे चित्र नाम मात्र हो और संदेश आकर्षक हो |
३.पोस्टर देखते ही आम आदमी को विषय समझ आ जाये अर्थार्त पोस्टर ज्यादा पेचीदा ना हो |
४ . ज्यादा चटक रंगों का प्रयोग करने से बचे |
५.कम शब्दों मे आधिक संदेश प्रसारित हो |
६.जागरूकता पोस्टर मे वर्णन की जरूरत नहीं होती है |
७. कोई विवादास्पद बात या चित्र ना बनाएँ |
८.पोस्टर मे पृष्ठ रंगीन होना चाहिये |
९.कल्पना की बजाए वास्तविकता अनिवार्य है |
१०. पोस्टर पर किसी व्यक्ति विशेष या देवी देवताओं के चित्र ना बनायें|
आओं मेरे द्वारा संग्रहीत कुछ आदर्श पोस्टर पर्यावरण संरक्षण पर देखें |
यह पोस्टर प्रतियोगिताओं एवं सेमिनार्स के दोरान चुन चुन के  एकत्र किये गए है |
इन्हें देख कर पोस्टर बनाने की बारीकियों को समझे |

देखे ये भी                  








































अब इन पोस्टर्स को देख कर अंदाज़ा लगाना आसान होगा 
ऊपर के पोस्टर भुवनेश्वर से एकत्र किये गये है |
पोस्टर बनाने से सम्बिन्धत सुझाव ज़रूर दे |

अल्पना वर्मा  जी के अनुसार
आप ने अच्छा संग्रह किया है..आप ने जो बिंदु बताये हैं ,सभी अच्छे हैं ..उनमें मैं
आप के द्वारा सुझाए निम्न बिंदु से आंशिक सहमत हूँ-
१-चित्र कम से कम हों..
-----
मेरे ख्याल से चित्रों की कम या ज्यादा संख्या ..पोस्टर के विषय अनुरूप हो ..यहाँ आप ने पर्यावरण विषय लिया है तो उस में भी
चित्र एक पोस्टर में चित्र अधिक हैं[क्रमांक नहीं दिखा ] मगर वह उसकी थीम के अनुरूप है ..
------
हाँ यह ज़रुरी है कि छात्र प्रयास करें कि कम से कम चित्र और कम से कम शब्द कह कर अपना सन्देश प्रभावी ढंग से दे सकें..
-उदाहरण -हवा ही मौत बन गई ..पोस्टर बहुत अच्छा है ..नूतन और मौलिक लगा...जिस में छात्र की वर्तनी [डूबेगा' को नज़रंदाज़ करें ]तो ..रंगों /चित्रों/शब्दों के कम से कम और रोचक तरीके से सन्देश कहा गया है.
-----इन पोस्टरों को किस आयु /कक्षा वर्ग के छात्रों ने बनाया है वह भी जानकारी मिलती तो अच्छा था.
अच्छी पोस्ट .
 हाँ यह भी कहना चाहती हूँ कि पोस्टर का पृष्ठ रंगीन ही हो यह भी ज़रुरी नहीं अगर सिर्फ सफ़ेद चार्ट पर पेंसिल शेड्स ये स्केच से काला सफ़ेद संयोजन हो तो भी कई बार पोस्टर आकर्षित और अलग दिखते हैं.
-मेरे विचार में -प्रस्तुति सरल,रोचक ,तथ्यों पर आधारित जानकारी लिए प्रभावी हो ,स्लोगन/सन्देश सरल भाषा में हो और एक आम आदमी के ज़हन में सीधा उतर जाए .वही सफल पोस्टर माना जायेगा.
:)

प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा

Friday, August 13, 2010

क्या?? भार भ्रम भी होता है ? Weight Illusion ?

क्या?? भार भ्रम भी होता है ? Weight Illusion ? 
जी  हाँ चकित मत होईये ,दृष्टी भ्रम की ही तरह ही होता है  भार भ्रम भी  
हमारी आँखे धोखा खा जाती है 
ठीक उसी प्रकार हमारा दिमाग/मांसपेशियाँ भी भार का सही हिसाब नहीं लगा सकता  
दिमाग/मांसपेशियाँ को धोखा देना आसान है भार के मामले मे 
आईये एक साधारण प्रयोग से समझने की कोशिश करें की क्या होता है भार भ्रम ? 
आवश्यक सामग्री :- दो खाली एलुयूमिनियम की सोफ्ट ड्रिंक केन ,थोडा एकदम सूखा रेत ,ब्राऊन सेलो टेप   
प्रयोग विधि :- एक केन खली और दूसरी केन मे फुल्ल रेत भर लो |   दोनों केन्स को ब्राऊन सेलो टेप से चित्रानुसार एक दम बंद कर दो यानी कवर कर दो |
अब किसी अन्य व्यक्ति को बुला कर उस के दोनों हाथों मे अलग अलग दोनों केन्स रख दो |
वो आसानी से बता देगा की एक भारी है और दूसरी हलकी है वजन मे 

1. अब उस के  केवल एक हाथ मे  नीचे  भारी और उस के ऊपर हलकी वाली केन रखते  है 

2. फिर  तुरंत उस के उसी हाथ मे नीचे हलकी  और उस के ऊपर भारी  वाली केन रखते  है

अब उस व्यक्ति से ये पूछो कि उस को कौन  सी बार हाथ पर आधिक भार लगा ??

निसंदेह वो दूसरी बार यानी नीचे हलकी  और उस के ऊपर भारी वाली बार को ही ज्यादा भारी बताएगा 
हालाकि वो व्यक्ति भी जनता है कि दोनों बार भार तो बराबर ही था |
ये है भार भ्रम का प्रयोग  
खुलासा :- जब भारी केन नीचे और हलकी केन ऊपर होती है और फिर जब हलकी केन नीचे और भारी  केन ऊपर होती है तो दिमाग को यही पर भार भ्रम हो जाता है
क्योंकि भारी केन नीचे होने पर मांसपेशियाँ आधिक भार उठा रही होती है परन्तु जब स्तिथि बदल कर हलकी केन नीचे रखी जाती  है तो मांसपेशियाँ आधिक भार उठाने के लिए तैयार नहीं होती है क्योंकी हथेली पर हलकी केन है जबकि मष्तिष्क को पता होता है की अगली केन जो रखी जानी  है वो भारी है 
इसीलिए हो जाता है भार भ्रम 

प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा

Wednesday, August 11, 2010

बनायें अपना वर्षामापी Rain Gauge

बनायें अपना वर्षामापी Rain Gauge
आज स्कूल के विद्यार्थीयों/क्लब मेम्बर्स  ने आपनी बनाई रेन गेज से वर्षा के परिमाण  को मापा  इन्होने एक कीप ले कर उस के नीचे एक प्लास्टिक की खोखली गेंद को उल्टा कर के प्लास्टिक वेल्ड कर दिया 
गेंद  लगाने के पीछे  यह मकसद था कि कीप की बाहरी दीवारों पर जो पानी गिरेगा वो मापक सिलेन्डर मे नहीं गिरेगा | वर्षा रुकने पर पानी का  माप लिया और कुछ आवश्यक गणनाये करने के बाद मिली मीटर मे हुई वर्षा की  माप का पता लगा लिया |
जानकारी हेतु ,ये बच्चे स्कूल वैदर मोनेटरिंग का प्रोजेक्ट कर रहे है जिस मे ये 
१.वर्षा मापी 
२.वायु दाब मापी
३.सूर्य की तीव्रता
४.पवन की दिशा
५.पवन का वेग
६.आद्रता मापन
7.सन डायल के उक्त प्रयोग करेंगे  |
क्यु ना पहले ये जाना जाए कि वर्षामापी यंत्र है क्या ?
जानिए :-
वर्षामापी (rain gauge या udometer या pluviometer) एक ऐसी युक्ति है जो वर्षा की मात्रा की माप करता है। मौसमविज्ञानी इसका बहुत उपयोग करते हैं।
सन् १६६२ ई में ब्रिटेन के क्रिस्टोफर रेन ने पहला टिपिंग बकेत वर्षामापी tipping-bucket rain gauge विकसित किया ।
वर्षा की माप मिलीमीटर में की जाती है। इसका सिद्धान्त बहुत सरल है। इसके लिये एक चौड़े मुंह का बर्तन प्रयोग में लाया जाता है जिसका पेंदी से लेकर उपर तक का क्राससेक्शन समान हो। इसको ऐसी जगह पर रख दिया जाता है जहाँ वर्षा का जल बिना किसी व्यवधान के इसमें गिरता रहे। किसी निर्धारित समयावधि में इसमें एकत्र द्रव पानी की उँचाई ही उस अवधि में वर्षा की माप कहलाती है।
कई तरह के वर्षामापी उपयोग में आते हैं। इनमें चिन्हांकित बेलन (graduated cylinder), भाराधारित वर्षामापी weighing gauges टिपिंग बकेट वर्षामापी tipping bucket gauges तथा भूमिगत गड्ढे buried pit collectors शामिल हैं।
हमने  कैसे बनाया ?
हमने चिन्हांकित बेलन (graduated cylinder) विधि का प्रयोग किया |












प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा






Saturday, August 07, 2010

लकड़ी का घोंसला चिड़िया के लिए बनाये Making Of Bird Nest Box

लकड़ी का घोंसला चिड़िया के लिए बनाये Making Of Bird Nest Box
 विज्ञान प्रदर्शनी ,विज्ञान प्रोजेक्ट वर्क ,बर्ड लविंग होबी के लिए बच्चे यह (मोडल) बना सकते है | 
आप के घर की छत पर या आंगन मे या शहरों के मकानों की बालकनी मे आप आपना लकड़ी का घोंसला चिड़िया के लिए बनाये और उस को स्थापित करे ,कुछ दिनों बाद उस मे एक सुंदर सी चिड़िया आपना बसेरा बना लेगी और फिर सुबह सुबह आप उस की ची ची से जगा करेंगे और आप को मज़ा आयेगा |
आवश्यक  सामग्री एवं बनाने की विधि  :- लकड़ी , पार्टिकल बोर्ड या प्लाई बोर्ड से चित्रानुसार नाप के अनुसार कारपेंटर से आपने घर ,स्कूल ,पार्क ,लान के लिए चिड़िया का लकड़ी का घोंसला  बनवाये , बनाने की प्रकिया मे आप कारपेंटर के पास खड़े रहें और उस को काम करते हुए देखें और आपनी समझ विकसित करें | 


   







नोट :-अंतिम दो चित्र  इस जगह से(साभार) लिए गये  है अधिक जानकारी के लिए देखें  
समय समय पर अपने बनाये घोसले पर नज़र रखें  |

प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा

Wednesday, August 04, 2010

बाढ़ रहत टिप्स Flood Rescue

बाढ़ रहत टिप्स Flood Rescue
आजकल भारत मे वर्षा के कारण बाढ़ आ रही है छात्र आपदा प्रबंधन के अंतर्गत अपनी विज्ञान प्रदर्शनी मे या विज्ञान क्लब के माध्यम से बाढ़ रहत टिप्स का माड्ल बना कर जागरूकता संचार कर सकते है |
बच्चे  आपने माडल के दवारा बता सकते है कि
बाढ़ आने के संभावित एरीया के लोगों को निम्न सामान   तैयार रखना चाहिये |

प्राथमिक  चिकित्सा बक्सा 
कोई  एक एंटीसेप्टिक जैसे डिटोल ,सेवलान 
दर्दनिवारक/पीड़ानाश्क  गोली जैसे क्रोसिन ,डिस्प्रिन , डीक्लोविन 
बैंडेज ,कोटन (रूई), पट्टी ,ओईनटमेंट ,मूव ,खांसी की दवाई ,कुनीन ,आयोडेक्स आदि 
अन्य समान की सूची
भुने चने,चीनी, गुड,चावल,नमक,दलीया,आट्टा आदि
रोशनी के लिए 
माचिस ,टॉर्च ,बत्ती दिया ,लालटेन ,लेम्प,रेडियो  आदि 
और  किसी ऊँचे स्थान की और जाने के सुरिक्षित रास्ते ध्यान  मे रखने चाहियें |
 
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा


अल्पना वर्मा जी का सुझाव ,
इसमें एक ओ आर एस के घोल का पैकेट और साफ़ पानी की बोतल भी जोड़ी जा सकती हैं.