Monday, January 14, 2019

प्रगतिशील व नवाचारी कृषक धर्मबीर काम्बोज Innovative and Progressive Farmer Dharmavir Kamboj

श्री धर्मबीर काम्बोज
 योग्यता कभी शिक्षा की मोहताज नहीं होती। शिक्षा जहां एक तरफ मनुष्य के लिए आवश्यक है वहीं यदि मनुष्य हुनरमंद है तो वह भी समाज में अपना एक उच्च स्थान बना सकता है। इस बात को सच करते हुए हरियाणा राज्य के जिले यमुनानगर के गांव दामला में रहने वाले श्री धर्मवीर कंबोज ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। प्रगतिशील कृषक के रूप के रूप में पहचाने जाने वाले श्री धर्मवीर कंबोज ने अपने जीवन काल में में बहुत कठिनाइयों का सामना किया लेकिन अंततः वह कामयाब हुए।
वर्कशॉप
आज उनके द्वारा बनाई गई 'बहुद्देशीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन' कईं देशों में भी सप्लाई होती है। आज उनके पास 'मल्टीपर्पज फूड प्रोसेसिंग मशीन' बनाने की खुद की एक वर्कशॉप है। कभी खुद रोजगार के लिए देश की राजधानी में मेहनत-मजदूरी करके परिवार का गुजारा चलाने वाले श्री धर्मवीर कंबोज आज 20 से 30 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से ना जाने कितने ही किसान उनसे प्रशिक्षण प्राप्त करके अपना स्वयं का रोजगार उत्पन कर रहे हैं। श्री धर्मवीर कंबोज जड़ी बूटियां और गैर परंपरागत कृषि करने के भी विशेषज्ञ है।
जड़ीबूटियों का फार्म
उनका कहना है कि 'किसान को केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर बाजार में अपने सामान के साथ खुद उतरना पड़ेगा, तभी हालात बदलेंगे' उन्होंने अपने खेतों में घीक्वार (एलोवेरा), स्टीविया, पांच प्रकार की तुलसी, दो प्रकार का लहसुन, स्ट्राबेरी व आँवला, मशरूम सहित अन्य बहुत से औषधीय पौधे भी लगाए हुए हैं।
प्रसंस्करण के बाद उत्पाद
वह उस समय पर जब स्थानीय किसान को कृषि उपज का सही मूल्य नहीं मिलता तो वह उनसे उचित मूल्य पर उनके कृषि उत्पाद खरीद कर उनका प्रसंस्करण करके डिब्बा बंद कर लेते हैं या बहुत से कृषक अपनी उपज को उनसे खाद्य संस्करण मशीन में प्रोसेस करवा लेते हैं। उनका कहना है कि किसानों को खुद का भाग्यविधाता खुद ही बनना होगा क्योंकि खेती और मार्केट को समझने वाला हर आदमी कहता है, खेती में कमाई करनी है तो अनाज नहीं उसको प्रोडक्ट बनाकर बेचो।
तुलसी के भगत
श्री कंबोज की खाद्य प्रसंस्करण मशीन को 'नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन' द्वारा मान्यता प्राप्त है। उनकी पूर्व मशीन में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के वैज्ञानिकों द्वारा सुधार करके जो नई मशीन तैयार करवाई है वह 100 प्रकार के कार्य कर लेती है। जिनमें मुख्यत सभी फलों का और सब्जियों का जूस निकालना, एलोवेरा का जूस निकालना, एलोवेरा जेल बनाना, मिक्स फलों का जूस निकालना, फ्रूट जेल/कैंडी बनाना, आँवला का जूस निकालना, आँवला कैंडी बनाना, स्ट्रॉबेरी कैंडी/जैम बनाना, जामुन-पपीता-आम जैसे फलों का संस्करण करना, ब्लैक गार्लिक यानी काला लहसुन बनाना, अदरक का प्रसंस्करण, ड्राई मशरूम, तुलसी का अर्क निकालना, गुलाब का अर्क निकालना व अन्य जिस भी पत्ते फूल या फल का अर्क निकालना हो वह कार्य भी यह मशीन कुशलता पूर्वक कर लेती है।
नव डिज़ाइन वाली मशीन
श्री काम्बोज अपनी मशीन के द्वारा विभिन्न फलों की कैंडी तैयार करते हैं। उनकी वर्कशॉप में जापान, इंग्लैंड, कीनिया, इटली, जिम्बाब्वे व नेपाल इत्यादि देशों से प्रतिनिधि समय समय पर समय पर आते रहते हैं जो उनसे बहुत प्रभावित होते हैं। श्री कंबोज का कहना का कहना है कि देश का किसान सिर्फ उपज उत्पादन करना और फिर उसे मंडियों में ले जाकर ओने ओने पौने दामों में बेचना ही सीखा है। यदि देश का किसान अपनी उपज को प्रोसेस कर ले ले तो उसे 10 से 50 गुना  अधिक मुनाफा सकता है। बहुत से किसान, टमाटर, लहसुन, प्याज, गोभी, मूली, गाजर, आलू जैसी फसलों को सड़कों के किनारे फेंक देता है क्योंकि कभी-कभी उसके पास इतना भी रेट नहीं आता कि वह उन्हें ट्रांसपोर्टेशन खर्च ही निकाल कर मंडियों तक ले जा सके। ऐसी स्थिति में यदि किसान अपनी उपज को प्रोसेस करके डिब्बा बंद करके रख ले तो वह उसे महंगे दामों पर बेच सकता है। उदाहरण के तौर पर श्री कंबोज ने बताया कि यमुनानगर के रादौर क्षेत्र में टमाटर की पैदावार बहुत अधिक होती है और यहां का टमाटर सीधा दिल्ली की मंडी में जाता है। रादौर बेल्ट के मशहूर टमाटर दिल्ली से फिर आगे देश में बहुत दूर-दूर तक जाते हैं। लेकिन बहुत अधिक संख्या में जब किसान टमाटर की खेती करते हैं तो टमाटर का उचित मूल्य नहीं मिल पाता ऐसी स्थिति में बहुत बार में टमाटर की उपज को फेंक देते हैं या खेत में ही हल से जोत देते हैं। उन्होंने अपनी मशीन के द्वारा टमाटर को सुखा (ड्राई) करके दिखाया। 1 किलो ग्राम साबुत टमाटर एक छोटे से जार में आ गए। उन्होंने बताया कि जब टमाटर 60 से 80 रुपये किलोग्राम तक पहुंच जाता है तब यह टमाटर जो 'फूड प्रोसेसिंग मशीन' यूनिट के द्वारा ड्राई करके संरक्षित किया गया है उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मशीन द्वारा प्रसंस्करण से टमाटर की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और टमाटर का वही स्वाद आता है। इसी तरह से श्री कंबोज ने अपनी मशीन के द्वारा और भी बहुत सी चीजों को प्रोसेस करके चंद रुपए किलोग्राम के माल को हजारों रुपये किलोग्राम का माल बना दिया।
श्रीमति काम्बोज के साथ
आइए जानते हैं श्री कंबोज जी के जीवन के बारे में, श्री कंबोज गांव में रहने वाले बहुत ही सीधे-साधे व नेक दिल इंसान हैं वह अपने घर आए हुए हर व्यक्ति का पूरा आदर सत्कार करते हैं और उनको बहुत खुशी से अपनी वर्कशॉप, अपनी उपलब्धियां, अपने सर्टिफिकेट, अपनी ट्राफियां दिखाते हैं। अपने परिवार से भी उनकी मुलाकात करवाते हैं फिर वह उनको अपने खेतों की तरफ ले जाते हैं और जो-जो जड़ी-बूटियां उन्होंने उगाई हुई हैं उनके बारे में विस्तार से बताते हैं। श्री काम्बोज के सुपुत्र श्री प्रिंस काम्बोज भी इस कार्य में उनका सहयोग करते हैं। वह वर्कशॉप, मशीनों के आर्डर  व सप्लाई के कार्य को देखते हैं। श्री धर्मवीर कंबोज को पूर्व राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा पाटिल, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, श्री प्रणब मुखर्जी व वर्तमान राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। श्री कंबोज राष्ट्रपति भवन में 20 दिन तक महामहिम राष्ट्रपति के मेहमान बनकर भी रह चुके हैं। वह हर वर्ष राष्ट्रपति भवन में लगने वाले इनोवेशन फेस्टिवल मैं अपनी मशीन की डेमोंसट्रेशन करते हैं। अपने द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट को प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग राष्ट्रीय इन्नोवेशन फाउंडेशन, हनी-बी नेटवर्क, सृष्टि, ज्ञान सहित बहुत से सरकारी ग़ैरसरकरी संस्थानों के साथ जुड़े हुए हैं।
श्री कांबोज हरियाणा के प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय हिसार के बोर्ड के भी सदस्य हैं। श्री धर्मवीर कंबोज एक प्रगतिशील किसान के रूप में पूरे देश में मशहूर हैं। बहुत से राज्यों के कृषि विभाग उनकी सेवाएं समय समय पर लेते रहते हैं। उन्हें अपने राज्यों में आमंत्रित करते हैं और वहां के कृषकों को प्रशिक्षित करवाते हैं। श्री कंबोज देश के लगभग सभी कृषि मेला और इंडस्ट्रियल प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए जाते हैं श्री धर्मवीर कंबोज खुले दिल से किसानों को व बेरोजगार व्यक्तियों को इस मशीन के द्वारा खाद्य प्रसंस्करण करना सिखाते हैं। वास्तव में देखा जाए तो श्री धर्मवीर कंबोज एक जमीन से जुड़े हुए किसान ही हैं जिनमें अभिमान लेश मात्र मात्र भी नहीं है। हमें उनसे मुलाकात करके व उनके जड़ी बूटियों के फार्म में भ्रमण करके बहुत सीखने को मिला। मैं उनका तहेदिल से शुक्रिया करता हूं कि उन्होंने अपना कीमती समय हमें दिया।
रिपोर्ट:-
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Incharge Jamun Eco Club
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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Saturday, January 12, 2019

दूरदर्शी कार्यशाला Telescope workshop #iau00

IAU, Logo(1919-2019)
टेलीस्कोप बनाओ अवलोकन करो कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों को टेलीस्कोप बनाना व उससे अवलोकन करना सिखाया गया।
सी वी रमन विपनेट साइंस क्लब सरोजिनी कालोनी यमुनानगर ने अंतरराष्ट्रीय  खगोलीय संगठन की शतकीय वर्षगांठ के अवसर पर अपने दूसरे दिन के आयोजन में 'खुशी उन्नति केंद्र' सरोजिनी कालोनी में पढ़ने आने वाले बच्चों को
टेलिस्कोप बनानी सिखायी। इस कार्यशाला में दर्शन लाल बवेजा व गौरव कुमार मुख्य रिसोर्स पर्सन रहे। यहां बच्चो ने खुद अपने हाथों से टेलिस्कोप बनाई व उससे अवलोकन भी किया।
Logo
क्लब  के लिए इस टेलीस्कोप कार्यशाला की  व्यवस्था प्राध्यापिका एवं समाज सेविका डॉ0 अलका शर्मा ने की। डॉ0 अलका शर्मा उन्नति खुशी केंद्र की जनरल सेकेट्री व इस संस्था के प्रेजीडेंट श्री गौरव चौधरी हैं।
उन्होंने बताया कि खुशी उन्नति केंद्र अपने मुख्य उद्देश्य 'पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया' के अंतर्गत यमुनानगर में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा पाने के लिए प्रेरित करते हैं।
खुशी उन्नति केंद्र ने बहुत से स्कूल न जाने वाले बच्चों को आसपास के स्कूलों में दाखिल करवाया व उनकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था की है। अब वह बच्चे नियमित विद्यालय जाते हैं शाम को केंद्र के स्वयंसेवियों से पढ़ने सीखने के लिए आते हैं।
खुशी उन्नति केंद्र की टीम में बहुत से स्वयंसेवक बच्चों को विभिन्न विषयों की पढ़ाई, योगा, नवोदय कोचिंग व उनका होमवर्क भी करवाते हैं
जिनमे सरिता मित्तल, नीलम कांबोज, जसवंत कौर, पारस त्यागी, विशाल कंबोज, अनुप्रिया, भूमिका, प्रीति,  ईशा भट्ट, शुभ, लोकेश, सुमन मेहता व अन्य हर रोज इन बच्चों को पढ़ाते हैं विभिन्न शिक्षण सहायक गतिविधियां करवा कर उनका मनोबल बढ़ाते हैं ताकि उन्हें शिक्षा के प्रति लगाव हो सके और वह भविष्य में शिक्षा के माध्यम से अपना रोजगार उत्पन्न कर सकें।
In newspapers
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Incharge Jamun Eco Club
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
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Friday, January 11, 2019

अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन के 100 वर्ष 100 Years of IAU


'आई ए यू सौ घंटे खगोलीय गतिविधियां' के अंतर्गत मापी पृथ्वी की परिधि।
अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन के
Logo, IAU
एक सौ वर्ष पूरे होने पर सी वी रमन विपनेट साइंस क्लब यमुनानगर के सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया।
सरोजिनी कालोनी स्थित अर्जुन पार्क में क्लब सदस्य पार्थवी, पलक, पारस, पुष्टि, जैकी व प्रियंका ने मार्गदर्शक अध्यापक व क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा के मार्गदर्शन में यह प्रयोग किया।
बवेजा ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन के गठन की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर वैश्विक स्तर पर विभिन्न खगोलीय गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विश्व के सभी देशों के बच्चे, शौकिया व पेशेवर खगोलविद भाग ले रहे हैं।
इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी यूनियन के बारे में बताते हुए बवेजा ने कहा कि पेशेवर खगोलशास्त्रियों का एक संगठन है। इसका केंद्रीय सचिवालय पेरिस, फ्रांस में है। इस संघ का ध्येय खगोलशास्त्र के क्षेत्र में अनुसन्धान और अध्ययन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। जब भी ब्रह्माण्ड में कोई नई वस्तु पाई जाती है तो खगोलीय संघ द्वारा दिए गए नाम ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होते हैं।अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ का संगठन 1919 में किया गया था। तब बहुत से अन्य खगोलीय संगठनों को इसमें विलय कर दिया गया। इसके पहले अध्यक्ष फ़्रांसिसी खगोलशास्त्री बैंजामिन बैलौद थे। 100 घंटे खगोलीय गतिविधियों के नाम प्रतियोगिता के अंतर्गत विश्व भर में एक सौ घंटे विभिन्न आयोजन किये जायेंगे। विज्ञान क्लब सदस्य भी इस आयोजन में 13 जनवरी तक भाग लेंगे।
#100hoursofastronomy
#iau100
11.1.2019
C V Raman Vipnet Science Club
Arjun Park, Sarojani Colony, Yamunanagar India
Gnomon= 45 cm
Shadow= 57 cm
Latitude:30° 8'22.99"N
Longitude: 77°16'27.81"E
ie
Latitude: 30.07N
Longitude: 77.17E
Guided by
Darshan Lal Baweja of C V Raman Science Club Yamuna Nagar
Members: Parthvi, Palak, Paras, Pushti, Priyanka, Jivisha(Jaicky)
In newspaper
Reporter
Darshan Lal Baweja 

Monday, December 31, 2018

2019 की खगोलीय घटनायें Astronomy events in 2019


ग्रहण, पारगमन, उल्कापात, ब्लूमून व  सुपरमून जैसी खगोलीय घटनाओं से बीतेगा वर्ष 2019, नए वर्ष का खगोलीय घटनाओं का पञ्चाङ्ग 2019
नये वर्ष का आगाज खगोलीय गतिविधियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। पूरे साल जो खगोलीय घटनाएं घटित होने वाली है उनका जिक्र करते हुए सी वी रमन साइंस क्लब यमुनानगर के समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि नए साल की शुरुआत में ही उल्कापात देखने का नजारा मिलेगा 3 और 4 जनवरी को आकाश में उल्कापात का नजारा देखने को मिलेगा। जिसमें लगभग 40 उल्कायें प्रति घंटा की दर से पृथ्वी की ओर बढ़ेंगी।  6 जनवरी को पहले नये चंद्र उदय उदय के साथ धूमिल आकाशगंगा व धूमिल तारा संकुल देखे जा सकते हैं। 5 जनवरी को आंशिक सूर्य ग्रहण है जिसे है जिसे पूर्वी एशिया और उत्तरी प्रशांत महासागर में देखा जा सकेगा।
सबसे गजब नजारा 21 जनवरी को पूर्ण चंद्रग्रहण का होगा जिसे लगभग पूरी दुनिया में देखा जा सकेगा। 22 जनवरी को तो सबसे चमकदार ग्रह शुक्र और बृहस्पति का युग्मन यानी दोनों बहुत पास पास होंगे। यह भी अद्भुत नजारा होगा लेकिन इसे अल सुबह ही देखा जा सकेगा। उत्तरी भारत में धुंध कोहरा ना हो तो इस नजारे का आनंद अल सुबह के आकाश में लिया जा सकेगा।
19 फरवरी को पूर्णिमा पर सुपरमून का नजारा पेश आएगा। जिसमें चंद्रमा 30% अधिक चमकदार वह 14% सामान्य से बड़ा दिखेगा। 27 फरवरी को शाम के क्षैतिज आकाश में बुध ग्रह का बढ़ाव पेश आएगा। इस दिन बुध ग्रह सूर्यास्त के बाद अधिकतम ऊंचाई पर दृश्यमान होगा।  20 मार्च को विषुव (ईक्विनॉक्‍स्‌) होगा जिस दिन सैद्धांतिक रूप से दिन और रात 12-12 घंटे के यानी बराबर होंगे।  21 मार्च को फिर चंद्रमा सुपरमून रूप में नजर आएगा इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होगा। 22 मार्च को मेरीट्स उल्कापात का नजारा होगा जिसमें उल्कापात की तरह 20 उल्का प्रति घंटा होगी। 6 व 7 मई को फिर से उल्कापात का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें उल्कापात की दर 60 उल्कायें प्रति घंटा सबसे अधिक होगी। 18 मई को पूर्णमासी के दिन फिर से सुपरमून का नजारा देखने को मिलेगा। यह एक अद्भुत नजारा होता है और 1 साल में तीन बार सुपरमून की स्थिति आए यह बहुत ही दुर्लभ खगोलीय घटना होती है। 10 जून को हमारी यानी पृथ्वी की बृहस्पति से निकटता होगी। जिसका अद्भुत नजारा दूरदर्शी से लिया जा सकता है।
21 जून को अयनांत को सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन में प्रवेश करेगा। यह सबसे लंबा दिन होता है और सूर्य इस दिन से उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और राते लंबी होने का आगाज करता है। 2 जुलाई को सूर्य ग्रहण होगा परंतु यह है हम भारत मे नहीं देख पाएंगे। अर्जेंटीना और चिली में यह आंशिक रूप से कुछ समय के लिए देखा जा सकता है वो सूर्यास्त के समय से कुछ ही पहले बस। 9 जुलाई से शनि ग्रह पृथ्वी से निकटतम दूरी पर होगा और खगोलशास्त्री इसे व इसके छल्ले को छोटी परावर्तक दूरदर्शी से भी देख सकते हैं। 16 जुलाई को आंशिक चंद्रग्रहण होगा जो सारे यूरोप, अफ्रीका, मध्य एशिया व हिंद महासागर में देखा जा सकता है। 28 व 29 जुलाई को फिर से उल्कापात का नजारा 20 उल्का प्रति घंटा की दर से देखने को मिलेगा। उल्कापात अभी 12 और 13 अगस्त को भी होगा जिसकी दर 60 उल्का प्रति घंटा रहेगी। 9 सितंबर को नेपच्यून ग्रह पृथ्वी के साथ सीध में होगा। 23 सितंबर को विषुव (ईक्विनॉक्‍स्‌) के दिन फिर से दिन और रात बराबर हो जायेंगे जिनकी अवधि 12-12 घंटे रहेगी। 28 अक्टूबर को यूरेनस पृथ्वी के नजदीक होगा।
11 नवंबर को बुध ग्रह का संक्रमण होगा। बुध ग्रह सूर्य के समक्ष से गुजरेगा जो पृथ्वी से देखने पर सूर्य के मुखड़े पर काली बिंदी के रूप में गुजरता हुआ नजर आएगा।
यह बहुत अद्भुत नजारा होता है। नवंबर 24 से फिर दो चमकदार ग्रह शुक्र और बृहस्पति शाम के समय आकाश में चमकते हुए नजर आएंगे। साल 2019 के आखिरी महीने में 13 में 14 दिसंबर को वर्ष का सबसे बड़ा उल्कापात देखने को मिलेगा। जिसमें उल्कापात की दर 120 उल्का प्रति घंटा रहेंगी। इस उल्कापात में टकटकी लगाकर आकाश में देखते रहने से लगभग सभी को उल्कापात यानी टूटते तारे का नजारा देखने को मिल सकता है। इस प्रकार साल 2019 खगोल प्रेमियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण वर्ष रहने वाला है। खगोलशास्त्री इन सब घटनाओं के अवलोकन के लिए विभिन्न प्रकार की तैयारियां करने के लिए कमर कस चुके हैं। खगोलीय गतिविधियों के अंतर्गत आकाश दर्शन व खगोलीय घटनाओं का नजारा लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इनमें से बहुत सी ऐसी खगोलीय घटनाएं होती है जो मनुष्य के जीवन काल में केवल एक बार घटित होती है इसलिए हमें हमेशा खगोलीय गतिविधियों के अंतर्गत इस खगोलीय घटनाओं का आनंद लेना चाहिए। इससे मनुष्य अंधविश्वासों से दूर होता है और उसका ज्ञान वर्धन होता है।  सीवी रमन साइंस क्लब यमुनाननगर के सदस्यों ने इस वर्ष अधितर गतिविधियों को करवाने का इंतजाम किया है ताकि नगर के बच्चे इन खगोलीय घटनाओं का आनंद ले सके।
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Darshan Lal Baweja
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पांच दिवसीय उच्च प्राथमिक विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला Five days upar primary Science Teachers Training Program


विज्ञान अध्यापक खाली हाथ भी कक्षा में एक संसाधन व्यक्ति होता है - बवेजा
तेजली स्थित जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में जगाधरी खण्ड के विद्यालयों विज्ञान अध्यापकों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला चल रही है। यह कार्यशाला एससीईआरटी, गुरुग्राम के तत्वाधान में समग्र शिक्षा के अंतर्गत लगायी गयी है। इस कार्यशाला का उद्घाटन डाइट के प्रधानाचार्य श्री सुरेश कुमार ने किया। कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ प्रवक्ता श्री सुरेंद्र अरोड़ा एवं संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभारी व वरिष्ठ प्रवक्ता श्री अशोक राणा, डॉ संजीव कुमार ने किया।
कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर के रूप में श्री सुनील बाठला, श्री राजीव खुराना एवं श्रीमती अंजू नय्यर ने अध्यापकों को  रसायन, भौतिकी एवं जीव विज्ञान विषय पर उच्च प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाने के लिए विभिन्न नवाचारी विज्ञान गतिविधियों द्वारा प्रशिक्षित किया। पाँच दिनो तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रतिभागी अध्यापक भी नवऊर्जा के साथ अपना योगदान दे रहे हैं।
इसी कड़ी में कैंप के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने  गीतांजलि पुन्नू विज्ञान अध्यापिका कुंजल जट्टान व सुभाष काम्बोज पांसरा के सहयोग से अपने एक नए प्रोजेक्ट से अध्यापकों को रूबरू कराया। बवेजा का कहना है कि यदि अध्यापक खाली हाथ भी कक्षा में जाता है तो वह खुद में एक रिसोर्स पर्सन है। अध्यापक को अपने शिक्षण कार्य में  विभिन्न नवाचारी गतिविधियों को शामिल करते हुए पढ़ाना चाहिए व विद्यार्थियों को भी इसमें सम्मिलित करना चाहिए। विज्ञान पढ़ने और रटने का विषय कम व हाथ से करके देखने का विषय अधिक है।
उन्होंने प्रशिक्षु विज्ञान अध्यापकों को पचास  विभिन्न विज्ञान गतिविधियां करनी सिखायी जिसके लिए उन्हें किसी खास विज्ञान उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ी। कक्षा में विद्यार्थियों के बस्ते व आसपास से सामान एकत्र करके सभी पचास पाठ्यक्रम आधारित विज्ञान गतिविधियों को करके दिखाया।
जिनमें मुख्यतः वायु दबाव की गतिविधि कार्ड से पानी रोकना, रुमाल से पानी रोकना से पानी रोकना, पानी के आयतन का अनुमान लगाना, मिट्टी में वायु होती है, स्प्रे पंप कैसे काम करता है, पानी में पेंसिल का मुड़ना, प्रकाश का अपवर्तन, कागज पर बने तीर का घूम जाना, फूक मारने पर दो कागजों का आपस में नजदीक आना, कागज की स्ट्रिप का ऊपर उठना, कागज की अपनी ओर खींचने पर गिलास का नीचे न गिरना, जड़त्व गतिविधि में बस के चलने रुकने पर में यात्रियों के आगे पीछे गिरने में जड़त्व का सिद्धांत, सेंटर आफ ग्रेविटी गुरुत्व केंद्र, स्थिर वैद्युत आवेश में कागज के टुकड़ों का आवेश में कागज के टुकड़ों का आवेशित स्केल व पैन की ओर आकर्षित होना, नियंत्रण एवं समन्वय गतिविधि में कार्ड को न पकड़ पाना, पानी में स्याही की की बूंद डालकर संवहन धाराएं दिखाना व अणुओं की टक्कर, जड़ों के प्रकार, शिरा विन्यास, हृदय गति की गणना, नब्ज को खोजना व गणना, ध्वनि में कागज व पैन की कैप की सीटी बनाना, भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन, सूर्य की धूप में सात रंगों की पट्टी स्पेक्ट्रम का देखना का देखना, किताब का क्षेत्रफल, दाब बल व क्षेत्रफल में संबंध, ठोस वस्तुओं में ध्वनि संचरण, हथेलियों को रगड़ने से घर्षण द्वारा ऊष्मा उत्पन्न होना, मानव शरीर की विभिन्न संधियों को पहचानना, दंत संरचना समझना व दांतों की देखभाल करना, पारदर्शी अपारदर्शी व पारभासी वस्तुओं की पहचान करना, किये गये कार्य को परिभाषित करना, दूरियों के मापन में अनुमान लगाना, कक्षा में धातु व मिश्र धातु की पहचान करना, पैन की कैप से निर्वात निर्वात को समझाना, विज्ञान की किताबों में महत्वपूर्ण शब्दों को ढूंढना संबंधित गतिविधि, हथेली में छेद हो जाना, धातुओं द्वारा ऊष्मा का अवशोषण, दो कॉपियों का अलग ना होना, अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी का हेल्थ प्रोफाइल बनाना, विभिन्न कपड़ों के रेशो को पहचानना, सिक्के का गिलास में गिरना और विभिन्न चश्मों में लगने वाले लेंसों की पहचान करवाना जैसी पाठ्यक्रम आधारित गतिविधियां करवाई गयी। जिससे यह सिद्ध हो गया कि उचित प्रशिक्षण के बाद कक्षा में विज्ञान विषय में रुचि उत्पन्न करने के लिए अध्यापक खुद स्थानीय संसाधन एकत्र कर विभिन्न विज्ञान गतिविधियां करवा सकता है। प्रशिक्षण में उपस्थित विज्ञान अध्यापकों ने इन गतिविधियों को अपने पास नोट किया और साथ साथ उन्हें करके भी देखा। 
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन सभी प्रतिभागियों को पृथ्वी की परिधि नापने का  मशहूर इरेटोस्थनीज प्रयोग करन सिखाया गया। जिसमें उन्हें  नून टाइम की गणना करना और पृथ्वी की परिधि नापना सिखाया गया।
इस गतिविधि में अध्यापकों ने बहुत रुचि ली। उनका भूगोल, खगोल सम्बन्धित ज्ञान भी बढ़ा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद अध्यापक इन गतिविधियों को अपने अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों समक्ष करके अपने विज्ञान शिक्षण को और अधिक रुचिकर बनाएंगे। प्रशिक्षण अधिकारी श्री अशोक राणा ने ने बताया कि अध्यापक के लिए समय समय पर ऐसे प्रशिक्षण की बहुत आवश्यकता है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अध्यापकों को अपडेट करने वह तरोताजा करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
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