Saturday, July 14, 2018

ग्रेफाईट की विद्युत् चालकता The electrical conductivity in graphite

ग्रेफाईट की विद्युत् चालकता The electrical conductivity in graphite 
ग्रेफाईट एक अधातु है। उसकी विद्युत् व उष्मीय चालकता कक्षा सात में पढ़ाई जाती है। इसके लिए पहले ग्रेफाईट की चालकता ज्ञात करने के लिए गतिविधि बनायी गयी।  
आवश्यक सामग्री- ग्रेफाईट यानी कच्ची पेन्सिल दोनों तरफ से छिली गयी, कनेक्शन तार, एक बैटरी कनेक्शन कैप के साथ, प्लाई बोर्ड या हार्ड बोर्ड का पीस, बल्ब या एलईडी , आफ आन स्विच, पोस्टर टेप। 
सिद्धांत- ग्रेफाईट एक अधातु है और वो कार्बन का अपररूप है कार्बन में मुक्त सयोंजकता के कारण उसमे विद्युत् का चलन होता है। 
बनाने की विधि- हार्डबोर्ड पर बैटरी को कनेक्शन कैप लगा कर पोस्टर टेप से चिपका लेते है बैटरी के एक ध्रुव से एलईडी या टार्च का बल्ब का एक सिरा, बल्ब के दुसरे सिरे से आन आफ स्विच का एक पिन, स्विच के दूसरे पिन को पेंसिल के एक सिरे से निकले ग्रेफाईट पर कनेक्शन तार से कस देते हैं। 
बैटरी के दुसरे ध्रुव को कनेक्शन तार से पेन्सिल के दूसरे सिरे से कस देते हैं
इस प्रकार से परिपथ तैयार हो जाता है। आवश्यकता अनुसार लेबलिंग, सजावट कर लेते हैं
स्विच को ऑन करने पर देखते हैं कि ग्रेफईट से विद्युत प्रवाहित होती है जिसका पता बल्ब के जलने (चमकने) से लगता है। 
कक्षा 8 का छात्र 
कक्षा 8 के विद्यार्थी 

द्वारा :- दर्शन लाल बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
विज्ञानं संचार में अपना योगदान दें इस ब्लॉग के फालोअर बन कर  
उत्साहवर्धन करें। 
  

Tuesday, March 20, 2018

विश्व गौरैया दिवस World Sparrow Day

कैम्प के स्कूल में  'विश्व गौरैया दिवस' मनाया गया।
गौरैया के स्वागत के लिए लकड़ी का बर्ड हाउस विद्यालय प्रांगण में नीम के पेड़ पर  स्थापित किया गया।
क्लब सदस्य
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प में बीस मॉर्च को विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर जामुन ईको क्लब, हरियाणा विज्ञान मंच, सी वी रमन विपनेट विज्ञान क्लब के सदस्यों ने आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।
क्लब प्रभारी विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने क्लब सदस्यों को बताया एक छोटा सा पक्षी गौरैया (स्पैरो) लुप्तप्रायः होती जा रही है। उसको  के सन्दर्भ में और समाज में इसके प्रति जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से विश्व गौरैया दिवस विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है। मनुष्य ने अपनी प्रकृति विरोधी गतिविधियों से इस पक्षी को समाप्ति के कगार पर ला दिया है।
कौन सी चिड़िया है गौरैया?
एक छोटी सी चिड़िया जो सदियों से मनुष्य के साथ रहती आयी है को ही गौरैया नाम से बुलाते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस है व सामान्य नाम घरेलू गौरैया है। चाहे एशिया हो या यूरोप ये गौरेया रानी मनुष्य के साथ साथ हर जगह चली। इसके अतिरिक्त पूरे विश्व में अमरीका, अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और
आस्ट्रेलिया तथा अन्य मानव बस्तियों मे मनुष्य के साथ साथ इसने अपना भी घर बनाया।
गोरैया की 6 प्रजातियां हाउस स्पैरो, स्पेनिश स्पैरो, सिंड स्पैरो, रसेट स्पैरो, डेड सी स्पैरो और ट्री स्पैरो पाई जाती हैं।
इस लुप्त होती छोटी चिड़िया के लिए कक्षा छह के विद्यार्थियों ने प्रेम कुमार के नेतृत्व में एक परियोजना कार्य के अंतर्गत विद्यालय में नीम के पेड़ पर लकड़ी का बर्ड हाउस व अन्य पक्षियों के लिए जलपात्र व बाजरा पात्र स्थापित किये। इस अवसर पर कक्षा छह की मॉनिटर छात्रा दिव्या शर्मा व गगन शर्मा ने चिड़ियों को चुगाने के लिए पाँच किलोग्राम बाजरा दिया।
मौके पर मनीष, अरुण, सौरव, प्रेम, नाजिश, प्रिया, दिव्या, लोकबहादुर, विशाल, अरुण कुमार कैहरबा, सुरेश रावल व दिलीप दहिया मौजूद रहे।
महत्त्वपूर्ण बातें.......
आखिर गौरैया गयी कहाँ?
जैसे गिद्ध लुप्त हो गए वैसे ही गौरैया पर क्या संकट आया इस बारे पक्षी विज्ञानियों को ये कारण समझ आये।
लकड़ी का बर्ड हाउस
आजकल के सघन आबादी के आधुनिक बंद घरों में अब आंगन नही होते हैं इन घरों में गौरैया के रहने के लिए जगह नहीं बची है। पिसा पिसाया थैली वाला आटा ओर पैकेट बंद चावल लाने के कारण घर में अब न तो छतों पर गेहूँ ही सूखने डाली जाती हैं न ही धान कूटा जाता हैं जिससे उन्हें छत पर उन्हें अपना भोजन यानी दाने नही मिलते।
आधुनिक बन्द डिबिया जैसे घरों में उनके घुसने के लिए खुले रोशनदान नही रहे।
कृषि में कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ गया है जिसका असर गौरैया के खाद्य चक्र व  प्रजनन तंत्र पर पड़ रहा है।
मोबाइल टावर, तारों का जाल भी जिम्मेदार हैं।
डॉ0 राजीव कलसी 
डॉ राजीव कलसी के अनुसार
99 प्रतिशत कम  हो चुकी हैं गौरैया
मुकंद लाल नेशनल कालेज के प्रोफेसर व पक्षी विज्ञानी डाक्टर राजीव कलसी के  अनुसार यमुनानगर के शहरी क्षेत्र में गौरैया की मानव आबादी के साथ उसकी प्रतिभागिता में 99 प्रतिशत तक की कमी आ गयी है। वास्तव में 1980 से ही इनकी संख्या में कमी आना शुरू हो चुका था फिर भी इनके संरक्षण के उचित प्रयास नहीं किए गए। अब यमुनानगर जिले के मात्र कुछ ग्रामीण इलाकों की आबादी में इनका पाया जाना ही रिपोर्ट हुआ है। ऐसा रहा तो हो सकता है कि गौरैया इतिहास की चीज ही न बन जाए और भावी पीढ़ियों को गौरैया देखने को भी न मिले।
दर्शन लाल बवेजा
अखबारों में



 Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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Friday, March 02, 2018

विपनेट विज्ञान क्लबों का बधाई समारोह Felicitation programme for VIPNET Science Clubs

विपनेट विज्ञान क्लबों का बधाई समारोह
Felicitation programme for VIPNET Science Clubs

उद्घाटन सत्र
'बेशक देर हुई पर पर नजारा दमदार रहा'
कहावत को चरितार्थ करते हुए आखिर डॉ0 अरविंद सी रानाडे जी ने अपनी पहचान 'प्रतिबद्धता मतलब प्रतिबद्धता, Commitment mean Commitment'
को सिद्ध करते हुए विपनेट विज्ञान क्लबों से किये अपने दूसरे वायदे को पूरा किया।
कार्यक्रम आरम्भ में विज्ञान प्रसार के वैज्ञानिक-ई डॉ0 अरविंद सी रानाडे ने विपनेट क्लबों का विस्तृत ब्यौरा, पुनर्गठन प्रक्रिया की शुरुवात से लेकर अभी तक की तमाम समीक्षा प्रस्तुत की।
तत्पश्चात देश भर से आये क्लब समन्वयकों/ प्रतिनिधियों ने अपना, अपने क्लब का व क्लब गतिविधियों का संक्षिप्त परिचय दिया।
उद्घाटन संबोधन में विज्ञान प्रसार के डायरेक्टर
श्री चंद्रमोहन जी
श्री चंद्रमोहन ने अपने विज्ञान संचार संबंधित अनुभवों को आधार बनाते हुए प्रेरक तरीके से अपना वक्तव्य रखा। उन्होंने देश भर में फैले हुए 2400 विपनेट विज्ञान क्लबों की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपनेट विज्ञान क्लब समाज के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण उतपन्न करने की अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी योजनाबद्ध रूप से इस नेटवर्क को और प्रभावी बनाना होगा ताकि जन जन तक विज्ञान सुलभ हो सके। निदेशक महोदय ने विज्ञान प्रसार की विपनेट टीम को भी इस अवसर पर बधाई दी कि उन्होंने बहुत मेहनत से देशभर के विपनेट विज्ञान क्लबों को पुनः पंजीकृत करके उनका डाटाबेस तैयार किया और उनमे नवउर्जा का संचार किया।
पुराने मित्र 'कुछ विपनेटियन'
तत्पश्चात एन. सी. ई. आर. टी. के विज्ञान एवं गणित शिक्षा विभाग के विशेषज्ञों ने सरल व प्रभावी शिक्षण-अधिगम तकनीकों पर अपने विचार व शोध नतीजों को उपस्थित क्लब समन्वयकों/प्रतिनिधियों के साथ साँझा किये। प्रतिभागियों को एन. सी. ई. आर. टी. प्रांगण स्थित सांइस पार्क, हर्बल पार्क व शैक्षणिक किट्स विभाग का भ्रमण कराया गया।
साइंस पार्क
एन. सी. ई. आर. टी. के विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा इस विज्ञान पार्क में बहुत से कार्यशील विज्ञान मॉडल लगाए गए हैं। ये सभी जैसे आर्कमडीज पेंच, पेरिस्कोप, आघूर्ण, प्रतिध्वनि, दोलन, गति व त्वरण, अनुनाद, वृत्तीय गति, उत्तोलक आदि बहुत से नियमो/सिद्धांतों पर आधारित है व उनको समझने में सहायता करते हैं।
रत्ती/गुंजा के पौधे व बीज
हर्बल पार्क भी बहुत ज्ञानवर्धन करता है इसमें विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, शाकों, झाड़ियों, लताओं को उगाया गया है। जिनमे मुख्यतः कैम्फर तुलसी, लेमन ग्रास, रत्ती-गुंजा, चिकित्सीय पौधों व लुप्तप्राय नस्लों के पौधों ने सबको आकर्षित किया।
किट्स विभाग में विज्ञान, गणित समेत सभी विषयों की शैक्षणिक किट्स को देख कर सभी प्रतिभागी बहुत प्रभावित हुए। प्रतिभागियों को एन. सी. ई. आर. टी. के  विशेषज्ञ ने सालाना आयोजित जवाहर लाल नेहरू विज्ञान, पर्यावरण एवम गणित प्रदर्शनी का भी विस्तृत विवरण दिया। उन्होने विज्ञान प्रदर्शनियों के नवाचार प्रेरक व बच्चों में खोजी प्रवृति विकसित करने के योगदान पर भी प्रकाश डाला।
डॉ  कपिल त्रिपाठी
प्रतिभागियों को अपने संबोधन में विज्ञान प्रसार से ही साइंटिस्ट-e मि. कपिल त्रिपाठी ने अपने लंबे अनुभवों, आदिवासी क्षेत्रों में अपने काम व शोध के आधार पर प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर कहा कि विज्ञान की जोत को जन जन तक ले जाने के लिए आपको अपने अथक प्रयास करने होंगे।
डॉ अरविंद सी रानाडे
डॉ अरविन्द सी रानाडे ने क्लब केटागरी चयन प्रक्रिया व क्लब गतिविधि की रिपोर्ट्स सबमिशन प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए इनमे आये बदलावों को बताया। बहुत पेचीदा प्रक्रिया, वेब पोर्टल पर रिपोर्ट्स दर्ज करवाने संबंधित जटिलताओं व वर्ष के मध्य में नियमो के संशोधनों से आगामी नतीजों में भयंकर उलटफेर से कुछ प्रतिभागियों को मायूस होते देखा गया। क्लबों द्वारा किये गए काम को नियमों के पेंच में उलझ कर पिछड़ते देख कर अधिकारियों द्वारा सहानुभूति स्वरूप मौके पर कुछ ढ़ील तो दे दी गयी परन्तु जो 'चला गया वो तो गया', उसको वापिस न पा सकने का दुख हुआ। नियम ऐसे बने कि संशोधनों की गुंजाइश ही न हो अगर पड़े भी तो जो बड़े नुकसान में जा रहा हो उसे स्पेशल बेनिफिट दिया जाए परन्तु एक कहावत भी है सारे बाराती कभी राज़ी नही हो सकते।
क्लबों द्वारा किये गए काम को राष्ट्रीय पहचान देने व उनको एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से विज्ञान प्रसार द्वारा इस बधाई समारोह की शुरुआत से ही सभी उत्साहित नजर आए। उनमे नवउर्जा का संचार हुआ।
श्रीमति किंकिनि दासगुप्ता मिश्रा
प्रतिभागियों से विज्ञान प्रसार वेबपोर्टल में क्लब गतिविधि
रिपोर्टिंग प्रकिया को आसान व प्रभावी बनाने सम्बन्धित सुझाव मांगे गए।
बहुत से प्रभावी सुझाव आये जिन्हें आईटी सेल प्रमुख
 व साइंटिस्ट-एफ श्रीमति किंकिनि दासगुप्ता मिश्रा ने सहर्ष स्वीकारते हुए इन्हें जल्द लागू करने का आश्वासन दिया।
एक नई पहल करते हुए राज्यवार निष्क्रिय क्लबों
 को सक्रिय करने के लिए उपस्थित प्रतिभागियों में
से ही कुछ को क्लस्टर कोर्डिनेटर नियुक्त किया गया
 व उक्त वर्णित जिम्मेदारी दी गयी।
रिपोर्ट्स जमा करने की प्रक्रिया को और सरल बनाने व इनबॉक्स सुविधा देने का भी आश्वासन दिया गया।
दोपहर भोजन पश्चात चले सत्र में क्लब प्रतिनिधियों को अपने क्लब कार्यों, भविष्य की योजनाओं, उपेक्षाओं को कहने के लिए समय
श्री दर्शन लाल बावेजा
दिया गया। सर्वप्रथम सी वी रमन विपनेट प्लेटिनम-2017 विज्ञान क्लब HR-0006 यमुनानगर हरियाणा (सम्बद्धता 2003) के क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने अपना प्रस्तुतिकरण दिया।
उन्होंने Science Activities नामक क्लब के ब्लॉग द्वारा क्लब गतिविधियों के वैश्वीक प्रचार की सार्थकता को उचित सिद्ध किया।  उन्होंने ब्लॉग केे द्वारा क्लब  गतिविधियों के डॉक्युमेंटेशन के महत्त्व बारे बताया। क्लब गतिविधियों को सोशल मीडिया, ब्लॉग लेखन व माइक्रो ब्लॉगिंग के जरिये देश विदेश तक प्रचारित करने से क्लब को राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई है। उन्होंने बाकी सब से भी क्लब गतिविधियों को जन जन तक पहुंचाने के लिए अखबारो, पत्र-पत्रिकाओं व अंतर्जाल का भरपूर प्रयोग करने का आव्हान किया। उन्होंने बताया कि क्लब गतिविधियों के ब्लॉग व सोशल मीडिया पोस्ट्स को संज्ञान में लेते हुए क्लब को जिला स्तरीय विज्ञान अध्यापक प्रशिक्षण, जिला स्तरीय मेलों, महोत्सवों व विभिन्न जिला स्तरीय विज्ञान प्रतियोगिताओं के आयोजन में जिला प्रशासन व जिला विज्ञान विशेषज्ञ का रिसोर्स पर्सन के रूप में सहयोग करने के अवसर प्रदान किया गया। विभिन्न राज्यों के विज्ञान संचारकों के साथ भी काम करने का अवसर भी उनके क्लब की सोशल मीडिया पहचान ने ही दिया। संचार के हर आधुनिक तरीकों को इस्तेमाल करके ही हम विपनेट क्लब अपनी वैश्विक पहचान स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने आगामी राज्य स्तरीय सेमिनार व 11 सदस्यीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम की क्लब योजना प्रस्तुत की।
श्री हर्षद जोशी
तत्पश्चात भावनगर के प्लेटिनम विपनेट क्लब कल्याण रीजनल कम्युनिटी साइंस सेंटर के समन्वयक मि. हर्षद जोशी ने अपनी विभिन्न गति विधियों को ppt के जरिये सबके समक्ष रखा। बहुत प्रभावी तरीके से उन्होंने बड़ी बड़ी मांग करके आयोजको को हैरत में डाल दिया, आयोजको ने उनको आशवासन देकर संतुष्ट किया।
श्री राजेश मिश्रा
गोंडा यूपी के प्लेटिनम विपनेट रे आफ साइंस क्लब के समन्वयक मि. राजेश मिश्रा ने ppt के जरिये अपनी गत वर्षों की क्लब गतिविधियों को फोटोज के रूप में रखा। उन्होंने मोबाइल लायब्रेरी व लैब ऑन बाइक कांसेप्ट को रखा। आगामी सेमिनार व टूर कार्यक्रमो को बाद में बताने के लिए कहा।
डॉ0 चंद्रमौली जोशी
गुजरात से ही डॉ0 चंद्रमौली जोशी जो रमन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन विपनेट क्लब गोल्ड केटागरी सम्बद्ध आल इंडिया रामानुजम मैथेमेटिक्स क्लब संस्था राजकोट के प्रभारी भी हैं उन्होंने विज्ञान व गणित संचार के लिए प्रतिभागियों के समक्ष बड़ी बड़ी ऑफर रखी। उन्होंने देश-विदेश में फैले अपने विशाल नेटवर्क का भी जिक्र किया। विभिन्न पुस्तकों के प्रकाशन, किट्स डिजायनर व टीचर ट्रेनिंग कार्यक्रमो का लंबा अनुभव आयोजको व प्रतिभागियों के समक्ष रखा। इसके बाद गोल्ड, सिल्वर व ब्रॉन्ज केटागरी के प्रतिभागियों को भी उनकी बात कहने का अवसर दिया गया।
3 प्लेटिनम क्लब
अंतिम सत्र में प्रतिभागियों को केटागरी अनुसार पुरस्कार व बधाई/सम्मान/ प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
इतने भारी भारी पुरस्कार लेकर सभी प्रतिभागी गौरवान्वित अनुभव कर रहे थे।
कार्यक्रम के प्रभावी संचालन में विपिन सिंह रावत, पवन भाटी, बबिता, राज जी द्वारा की  मेहनत, उनके कुशल कार्यक्रम निर्देशन में झलक रही थी।
समूह चित्र यादगार चित्र

कार्यक्रम के अंत मे समूह फोटो के बाद सभी निरन्तर व प्रभावी विज्ञान संचार के वायदे के साथ अपने अपने गंतव्यों को रवाना हुए।
एक प्रतिभागी की कलम से........
क्लब ब्लाग के लिए रिपोर्ट, द्वारा: दर्शन लाल बवेजा (VP-HR006)

Darshan Lal Baweja
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Monday, February 26, 2018

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रतियोगिताएं National Science Day Celebrations

विज्ञान एवं पर्यावरण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
क्या हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण उतपन्न करने में अपना बेहतर योगदान कर रहे हैं? - बवेजा
28 फरवरी को मनाया जाता हैं राष्ट्रीय विज्ञान दिवस : 
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2018 गतिविधियों के अंतर्गत विभिन्न विज्ञान कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विद्यालय में विज्ञान सेमिनार, प्रश्नोत्तरी  व विज्ञान मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता शुभारंभ प्रधानाचार्य श्री परमजीत गर्ग ने किया। सेमिनार में सी वी रमन विज्ञान क्लब, विक्रम साराभाई विज्ञान क्लब, जामुन इको क्लब, हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यकर्ताओं, एन एस एस व एन सी सी के सदस्यों भाग लिया। यहां एक विज्ञान एवं पर्यावरण क्विज का भी आयोजन किया गया जिसमें 81 बच्चों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस भारत के महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन की महान खोज जो 'रमन प्रभाव' के नाम से जानी जाती है की उद्घोषणा तिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 
सभी प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी को पुरस्कारों व प्रमाणपत्रों से सम्मानित किया जाएगा।
पर्यावरण क्विज का भी आयोजन किया गया जिसमें 81 बच्चों ने भाग लिया।
लेकिन क्या हम इस कर्तव्य की पूर्ति कर रहे है? बवेजा ने कहा कि विज्ञान अध्यापक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम बच्चों और उनके अभिभावकों को अंध्विश्वासों और हानिकारक रूढ़िवादी गतिविधियों से बचाये और उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करें व समाज को सही दिशा प्रदान करें।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस भारत के महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन की महान खोज जो 'रमन प्रभाव' के नाम से जानी जाती है की उद्घोषणा तिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

मौके पर विद्यालय के अध्यापक प्राध्यापक अरुण कैहरबा, सेवा सिंह, आलोक ढोंढियाल, अनुराधा रीन, चंचल रानी, रजनी शर्मा, दिलीप सिंह, जी पी सिंह, ममता शर्मा, मंजू शर्मा, सरिता काम्बोज, वंदना रानी, चंद्रशेखर, पंकज मल्होत्रा, राकेश मल्होत्रा, वीरेंद्र कुमार, धर्मपाल राठौर, श्याम कुमार, सुरेश रावल, अर्चना काम्बोज, मोनिका, शशि बाला, पूनम, मीनाक्षी, संतोष, ज्ञान चंद, ओमप्रकाश, नरेश शर्मा, अनिल गुप्ता, विपिन कुमार, सचिन सिंगला भी मौजूद रहे।

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Wednesday, February 21, 2018

उपग्रहीय तकनीकी से भू-प्रेक्षण पर कार्यशाला Workshop on Satellite Technology

उपग्रहीय तकनीकी से भू-प्रेक्षण पर कार्यशाला Workshop on Satellite Technology
जिला शिक्षा अधिकारी यमुनानगर
अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में तरक्की व करियर की अपार संभावनाएं- आनन्द चौधरी
सेटेलाइट टेक्नोलॉजी पर एकदिवसीय कार्यशाला व प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी।
डॉ मनोज यादव वरिष्ठ वैज्ञानिक
हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, हिसार के  वैज्ञानिकों ने दिया प्रशिक्षण।
विद्यालय के बच्चों व अध्यापकों में अंतरिक्ष विज्ञान में जागरूकता उत्पन्न करने व उन्हें उपग्रहीय तकनीकियों से वाकिफ करवाने के उद्देश्य से एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला  'उपग्रहीय तकनीकी से भू-प्रेक्षण' का आयोजन शहीद नवीन वैद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक मॉडल टाउन में किया गया।
यह कार्यशाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), हरियाणा स्पेस एप्लिकेशन सेंटर हिसार, हरियाणा विज्ञान एवं तकनीकी विभाग पंचकूला व जिला शिक्षा विभाग यमुनानगर के सयुंक्त तत्वाधान में आयोजित हुई। कार्यशाला का उद्घाटन जिला विज्ञान विशेषज्ञ विशाल सिंघल व जिला गणित विशेषज्ञ मोमन राम (कार्यक्रम संयोजक) ने किया।
प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम चरण में हारसेक, हिसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मनोज यादव ने उपस्थित विज्ञान व भूगोल प्राध्यापकों, विद्यार्थियों को सेटेलाइट तकनीक व उनके अनुप्रयोगों से परिचित करवाया। डॉ मनोज यादव ने पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के जरिये जीपीएस सिस्टम, रिमोट सेन्सिंग, मौसम-जलवायु मोनीटरण, अंतरिक्ष अन्वेषण, उपग्रहीय सैन्य सहायता, भारतीय मंगलयान कार्यक्रम, सेटेलाइट नेविगेशन, उपग्रह प्रक्षेपन एवं दूरसंचार के क्षेत्र में सेटलाइट टेक्नोलॉजी बारे प्रशिक्षण दिया। डॉ यादव ने अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित
जिला विज्ञान विशेषज्ञ
कार्यशाला के दूसरे चरण में एक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में 97 बच्चों ने भाग लिया। प्रश्नोत्तरी में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम व उपग्रह अनुप्रयोगों से सम्बन्धित प्रश्न पूछे गए।
इस अवसर पर एक वादविवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 22 प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्यों द्वारा सेटेलाइट तकनीकी मानवता के लिए वरदान विषय के पक्ष एवम विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किये।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में आर्यन रावमा विद्यालय बुढ़िया ने प्रथम, सिमरन शिव ओम हरि ओम पब्लिक स्कूल ने द्वितीय, याचना राकवमा विद्यालय यमुनानगर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वादविवाद प्रतियोगिता में सलीम राविमा विद्यालय व सोनाली एस डी पब्लिक स्कूल जगाधरी ने प्रथम, याचना राकवमा विद्यालय यमुनानगर  व तन्नू सोनाली एस डी पब्लिक स्कूल जगाधरी ने द्वितीय व रजत विद्यावन्ति पब्लिक स्कूल व आर्यन रावमावि बुढ़िया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जिला शिक्षाअधिकारी श्री आनन्द चौधरी व प्रधानचार्य डॉ सुनील काम्बोज ने विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। जिला शिक्षा अधिकारी आनन्द चौधरी ने अपने धन्यवाद संबोधन में कहा कि हारसेक हिसार व इसरो द्वारा इस कार्यशाला को यमुनानगर जिले में करवाने के लिए जिला शिक्षा विभाग उनका आभार व्यक्त करता है और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम यमुनानगर में करवाये जाने के लिए निमंत्रण देता है।  हिंदी प्रवक्ता अरुण कुमार कैहरबा ने उपस्थित प्राध्यापकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों व आयोजको के लिए धन्यवाद धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा।
कार्यक्रम में विशाल सिंघल, जयकुमार गोयल, सुभाष कालीरमन व दर्शन लाल बवेजा ने निर्णायक मंडल में अपनी भूमिका अदा की।
कार्यक्रम में हरियाणा स्पेस एप्लिकेशन सेंटर हिसार से सहायक वैज्ञानिक डॉ कपिल रोहिल्ला , अंकुर शर्मा व तकनीकी सहायक नंद लाल व जिले भर से 26 विद्यालयों के तीस प्राध्यापक भी मौजूद रहे।
अखबारों में



                   
Darshan Lal Baweja
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