Monday, May 20, 2013

मई महीना विज्ञान गतिविधियों के नाम May month of science activities

मई महीना विज्ञान गतिविधियों के नाम May month of science activities

विज्ञान के कम लागत के प्रयोग 
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर मे कक्षा तत्परता कार्यक्रम आयोजित करवाए जा रहे हैं। इन गतिविधियों मे सी वी रमण विज्ञान क्लब के दर्शन लाल व सोनिया शर्मा ने विज्ञान के कम लागत के प्रयोग करके दिखाए गये। इन प्रयोगों की खास बात यह थी कि ये सारे माडल वेस्ट पदार्थों से बनाए गए थे। इन प्रयोगों मे बच्चों को भौतिकी मे विधुत, चुम्बकत्व, गति, आघूर्ण, बल, गुरुत्व, आवेश, वायु दबाव, बरनौली, पास्कल, आर्कमिडिज, न्यूटन, प्रकाश का अपवर्तन, प्रकाश का परावर्तन, प्रकाश का विक्षेपण, विधुत मोटर व डायनमो, विधुत फ्लस्क, आवेश विसर्जन, घर्षण, चलचित्र, पम्प, ध्वनि की उत्पत्ति एवं संचरण आदि सिद्धांतों नियमों के नवाचारी प्रयोग करके दिखाये।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि शिक्षा विभाग ने राज्य के विद्यालयों में प्रवेश उत्सव के दौरान सभी छात्र छात्राओं में पठन-पाठन के प्रति रूचि उत्पन्न करने के लिए कक्षा तत्परता कार्यक्रम (सीआरपी) लागू किया है। कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न उपयोगी गतिविधियां करवाए जाने के आदेश हैं। शिक्षकों को प्रवेश उत्सव के बाद संजिदगी से कक्षा तत्परता कार्यक्रम कार्यक्रम को चलाने आदेश दिए गए हैं। सीआरपी के तहत पहली कक्षा से लेकर बारहवी कक्षा तक के लिए विभाग ने विशेष मॉड्यूल तैयार करवाए गए हैं 
इन खास माड्यूल्स के दो दो सेट विद्यालय मुखियाओं को उपलब्ध करा दिए गए है। बच्चों के सार्वागीण विकास के तहत उन्हें विज्ञान, बैंक प्रणाली, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डाक घर, अल्प बचत, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामुदायिक सहयोग भावना का विकास, रुचिकर गणितीय गतिविधियां, योगा, प्रकृती भ्रमण, जल संरक्षण के तरीके, कीटनाशियों व उर्वरकों के प्रयोग की हानियाँ, बेस्ट आउट आफ वेस्ट, दैनिक क्रियाकलापों के वैज्ञानिक सिद्धांत समझना, सुलेख, कथा लेखन, पेंटिंग, क्ले मोडलिंग, जीवन रक्षा गुर, प्राथमिक चिकित्सा, किताबों पर जिल्द बाँधना व ठोस कचरा प्रबंधन का सैद्धांतिक व प्रयोगात्मक ज्ञान दिया जा रहा है।
विज्ञान प्रदर्शों का प्रदर्शन किया।
क्लब सदस्यों ने विभिन्न वैज्ञानिक नियमों और सिद्धांतों को दर्शाते विज्ञान माडलो को बनाया और उनका प्रदर्शन किया
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर मे कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत आज कक्षा छह से दस तक के विद्यार्थियों ने अपने द्वारा बनाए गए विज्ञान प्रदर्शों का प्रदर्शन किया।  \
विद्यालय के बच्चे कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत बहुत उत्साह से भाग ले रहे हैं और उनको सभी विषयों मे बहुत कुछ नया नया सीखने को मिल रहा है। तीन चार दिनों के अभ्यास मे ही बच्चे विज्ञान गतिविधियों मे अभूतपूर्व परिणामों का प्रदर्शन कर रहे है। 
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व सोनिया शर्मा के मार्ग दर्शन मे अरुण व शिवम ने आज्ञाकारी गेंद बना कर घर्षण को समझा। लवली ने यांत्रिक ऊर्जा को दिखाता कम्पन पंखा बनाया। विशु ने रदरफोर्ड का प्रयोग का प्रदर्श बनाया। मीनू ने सिगरेट के दुष्प्रभाव दिखाता श्वशन तंत्र का वर्किंग माडल बनाया। ज्योति ने वायु दिशासूचक, योगेश ने चुम्बकत्व व सोनिया ने विधुत मोटर का वर्किंग माडल बनाया।
निशा ने विधुत प्रेरण पर और पारुल ने वायु दबाव को दर्शाता माडल बनाया। केशव ने सोलर हाउस व अंजू ने राकेट का माडल बनाया। महक ने होवरक्राफ्ट व दिव्या ने उत्प्लावन बल को समझाता प्रदर्श बना कर अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
प्रधानाचार्य ने सभी अध्यापकों के कक्षा तत्परता कार्यक्रम  का निरीक्षण किया और बच्चो के काम को सराहा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बच्चो मे बहुत क्षमताएं होती है बस उन्हें अवसर और मार्ग दर्शन की कमी रहती है यदि इन बच्चों को उचित प्लेटफार्म व अवसर प्रदान किया जाए तो ये भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं और कक्षा तत्परता कार्यक्रम  इस मार्ग मे एक सार्थक पहल है। 
प्रकृति अवलोकन से ज्ञानार्जन किया विद्यार्थियों ने
अलाहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के क्लब सदस्यों ने कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत अपने विज्ञान अध्यापकों दर्शन लाल बवेजा और सोनिया शर्मा के साथ प्रकृति अवलोकन के जरिये ज्ञानार्जन किया। कक्षा नवम व दशम के छात्र छात्राओं को समूहों मे बाँट कर स्थानीय प्राकृतिक स्थलों बगीचों, खेतों व यमुना नहर के किनारे के जंगलात का भ्रमण करवाया गया। इन प्राकृतिक स्थलों के अवलोकन से विद्यार्थियों ने बहुत कुछ सीखा और प्रकृति को प्रत्यक्ष अवलोकन से जाना।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बताया कि इन स्थलों पर बच्चे बहुत बार गए होंगे परन्तु अपने अध्यापको के साथ विस्तार से पेड़ पौधों, मिट्टी आदि के बारे मे जान कर वो प्रकृति व मनुष्य के बीच गहरे नाते को जान पाए। उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञान एक ऐसा विषय है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अवलोकन के जरिए सिद्धांतों का प्रमाणों के साथ मिलान पर आधारित है। अध्यापक पाठ्यक्रम की जटिलताओं और पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए निर्धारित समय सीमा से बँधे होते हैं इसलिए अध्यापक विज्ञान जैसे विषय को भी पढ़ाने के लिए निर्देशात्मक शैली अपनाते हैं जो कि प्रश्न उत्तर की रट्टा विधि पर आधारित होती है  इस प्रणाली मे पाठ पढ़ाने में  एवं उसकी तैयारी करवाने अध्यापक को ज्यादा वक्त नहीं लगता। निर्देशात्मक शैली  से बच्चे ज्ञान तो अर्जित करते हैं लेकिन वे इस ज्ञान का उचित उपयोग करना नहीं सीख पाते।
क्या हैं प्रकृति अवलोकन के उद्देश्य
इस प्रकृति अवलोकन के उद्देश्यों बारे अवगत कराते हुए सोनिया शर्मा ने बताया कि बच्चों को अपने आसपास की चीजों के साथ खुद का व समाज का सरोकार विकसित करने में बच्चों की मदद करना है। अवलोकन के माध्यम से बच्चे सूक्ष्मता से परीक्षण करने में सक्षम होते हैं ताकि वे प्रकृति को और बेहतर ढंग से समझ सकें। बच्चे प्रकृति को अपने पाठ्यक्रम के साथ प्रमाणिक तौर पर वर्गीकरण व विविधता को जोड़ कर देख सकें।
बच्चो ने प्रकृति अवलोकन से क्या सीखा
प्रधानाचार्य नरेंद्र धींगडा ने कक्षा तत्परता कार्यक्रम मे निरीक्षण के दौरान बच्चों से पूछा कि उन्होंने क्या क्या सीखा तो कपिल, अंशुल, हिमांशु आदि विद्यार्थियों बताया कि प्रकृति अवलोकन से उन्होंने सीखा कि जहाँ भी और जब भी सम्भव हो सके हमे  पौधे लगाने चाहियें। हम अपने घर खेत खलिहान मे अपने लिए एक सुन्दर-सा किचन गार्डेन बनाएंगे। किचन गार्डेन करेला, सरसों, बैंगन, टमाटर, नीबू, मिर्च, मेथी, करी पत्ता एवं मीठा नीम जैसे पौधे उगाएंगे। हम  स्कूल के अध्यापकों से सूचना और मार्गदर्शन हासिल करके गाजर घास उन्मूलन अभियान चलायेंगें व पर्यावरण संरक्षण करेंगें। प्रवक्ता संजय शर्मा ने बच्चों की तत्परता को देखते हुए कहा कि अध्यापकों के प्रयासों के कारण प्रतीत होता है कि विद्यार्थियों ने प्रकृति के साथ अपना गहरा रिश्ता स्थापित कर लिया है यह बहुत ही सराहनीय प्रयास है।
अखबारों की सुर्ख़ियों मे विज्ञान गतिविधियां 


















Thursday, April 18, 2013

भारतीय भौतिकी शिक्षक संघ का सालाना सम्मेलन Annual Convention-IAPT RC1

भारतीय भौतिकी शिक्षक संघ का सालाना सम्मेलन  Annual Convention-IAPT RC1

उद्घाटन समारोह
भारतीय भौतिकी शिक्षक संघ दिल्ली व हरियाणा का सालाना सम्मेलन राष्ट्रीय बाल भवन नई दिल्ली मे 15 अप्रैल 2013 को सम्पन्न हुई। उद्घाटन समारोह का प्रारम्भ दीप प्रज्वलन से हुआ। भारतीय विज्ञान एकादमी के प्रमुख प्रोफेसर कृष्ण लाल ने अपने उद्घाटन भाषण मे सर्वप्रथम भारतीय भौतिकी शिक्षक संघ के संस्थापक सदस्य प्रोफेसर वेदरत्न जी को श्रद्धांजली समर्पित की व प्रो. वेदरत्न स्मारक व्याख्यान दिया। दिवंगत प्रो. वेदरत्न के लिए एक मिनट का मौन भी रखा गया। उद्घाटन समारोह मे मंचासीन प्रोफेसर कृष्ण लाल, प्रोफेसर के. सी. ठाकुर, डा. ओ.पी. शर्मा, श्री शेर सिंह व श्रुति बोध अग्रवाल ने भी संबोधित किया सम्मेलन के दौरान प्रोफेसर वेदरत्न जी के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

शोध पत्र प्रस्तुत करते प्रतिभागी
यमुनानगर से प्रोफेसर के. सी. ठाकुर, दर्शन बवेजा, श्रीश कुमार इस सम्मेलन मे गए। इस सम्मेलन मे भौतिकी मे नयी खोजें व भौतिकी शिक्षण मे नवाचार विषयों पर शोध पत्र पढ़े गए। यहां आयोजित एक अन्य स्पर्धा मे भौतिकी के अध्यापको ने नवाचारी शिक्षण विधियां प्रस्तुत की व पुरस्कार प्राप्त किये। इस सम्मेलन मे अध्यापकों व विज्ञान के क्षेत्र की बहुत सी उपकरण निर्माता संस्थाओं ने अपने द्वारा निर्मित नवाचारी भौतिकी प्रयोगात्मक उपकरणों का प्रदर्शन किया। यहां पर उपस्तिथ भौतिकी के अध्यापको ने इन नये नये उपकरणों से प्रयोग करने सीखे 
इस सम्मेलन मे आये भौतिकी के अध्यापको  को प्रमाणपत्र व नवाचारी विज्ञान पुस्तके प्रदान की गयी

Leser Ray Kit
यहां पर आयी एक उपकरण निर्माता कम्पनी Indosaw के विशेषज्ञ कुछ नवाचारी भौतिकी के उपकरण प्रदर्शित कर रहे थे इनके सभी उपकरण  अंतर्राष्ट्रीय मानकों व गुणवत्ता वाले थे  इन उपकरणों मे से एक ऐसा उपकरण था जो कि पहली बार देखा, इस उपकरण से नेत्र के दूर व निकट दृष्टि दोष और उनका लेंसों से निवारण लेजर किरण द्वारा समझाया गया था। इस उपकरण की सहयता से सामान्य नेत्र की बनावट व उससे प्रतिबिम्ब का बनना व दोष युक्त नेत्र के रेटिना से आगे या पीछे प्रतिबिम्ब का बनना लेजर किरणों के माध्यम से दिखाया जाता था। इसी उपकरण मे दोष युक्त नेत्र को उचित उत्तल या अवतल लेंस के द्वारा दोषमुक्त भी करके दिखाया गया था। इस उपकरण मे चुम्बकीय व्यवस्था के कारण श्यामपट की तरह से भी प्रयोग किया जा सकता है और मेज पर लिटा कर भी प्रयोग करके दिखाया जा सकता है। 
इसी उपकरण जिस का नाम Leser Ray Kit है, इससे पांच प्रयोग किये जा सकते हैं। 

१.    मानव नेत्र की कार्य प्रणाली व दृष्टि दोष

२.    फोटोग्राफिक कैमरा का सिद्धांत

३.    गैलीलियो दूरदर्शी व पैरीस्कोप

४.    केपलर टेलीस्कोप का सिद्धांत

५.    गोलाकार विपथन (spherical aberration)

मानव नेत्र की कार्य प्रणाली व दृष्टि दोष
इस एक उपकरण से कक्षा आठ, दस व बारह के प्रकाशिकी के प्रयोग करवाए जा सकते हैं। 

इस उपकरण व अन्य उपकरणों की अधिक जानकारी इस साईट पर उपलब्ध है। 




इस सम्मेलन मे पंजाब से आये श्री एम एस मारवाह जी ने भी अपने द्वारा विकसित भौतिकी के विधुत, चुम्बकत्व, गति, आघूर्ण, बल, गुरुत्व, आवेश, वायु दबाव, बरनौली, पास्कल, आर्कमिडिज, न्यूटन, प्रकाश का अपवर्तन, परावर्तन, विक्षेपण, विधुत मोटर, डायनमो, विधुत फ्लस्क, आवेश विसर्जन आदि सिद्धांतों नियमों के नवाचारी प्रयोग करके दिखाये। 
in news