Thursday, September 29, 2016

प्रमोशन आफ साइंस Promotion of Science

प्रमोशन आफ साइंस  Promotion of Science
प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम में विज्ञान अध्यापकों ने सीखी नवाचारी शैक्षिक तकनीकें
सर्व शिक्षा अभियान, एससीईआरटी गुडगाँव, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय यमुनानगर के सयुंक्त तत्वाधान में प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापको का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) तेजली में हुआ। जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में कार्यक्रम अधिकारी गीता ढींगरा व प्रभारी प्रेमलता बक्शी के साथ मास्टर ट्रेनर्स दर्शन लाल बवेजा, आस्था श्रीवास्तव, विजय शर्मा व जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील काम्बोज ने इस ट्रेनिग की शुरुआत की।
आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में मास्टर ट्रेनर आस्था श्रीवास्तव विज्ञान अध्यापिका ने प्रशिक्षु अध्यापको और प्राध्यापको को जीव विज्ञान की टीएलएम स्थानीय उपलब्ध साधनो का प्रयोग करते हुए बनवाई। 
मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा ने संवहन धाराओं का बनना, ताप बढ़ने पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा का बढ़ना, द्रव में द्रव का विलयन, टिंडल प्रभाव व ओम का नियम से सम्बंधित नवाचारी प्रयोग करके दिखाए। जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील काम्बोज ने गुरुत्व व गुरुत्वाकर्षण बल, सदिश व अदिश राशियाँ, चाल, वेग व दूरी से सबन्धित प्रयोग और पृथ्वी की गतियों, दिनरात का बनना, पृथ्वी पर ऋतुओं का बदलना से सम्बंधित सैद्धांतिक ज्ञान दिया। विजय शर्मा ने रसायन विज्ञान के तहत पीने के पानी की जांच करके दिखाई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रशिक्षुओं ने स्वयं तैयार विज्ञान नवाचारी गतिविधियों का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षु अध्यापकों ने हारबेरियम फ़ाइल, स्क्रैप बुक, प्रैक्टिकल फ़ाइल, कम लागत की टीएलएम, चार्ट्स और मॉडल्स का प्रदर्शन किया।
समूह चर्चा के द्वारा आगामी विज्ञान कार्यक्रमों में भाग लेने की योजना बनायी।
इस कार्यक्रम सुशील स्याल, जितेंदर कुमार, प्रेम दत्त शर्मा, सुरेंदर कुमार, विरेन्द्र कुमार, कश्मीरी लाल, अमृत बेदी, सतीश कुमार, संजय कुमार, संजीव काम्बोज, राकेश मोहन, रुस्तम अली, सुधीश पाल, गीतांजली पुन्नू, मंजू वर्मा, ओमप्रकाश, राजेन्द्र झांब, मुकेश आर्य,सुरजीत गिल आदि विज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया। 
और फोटोग्राफ्स 









 Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
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पृथ्वी की परिधि नापी Circumference of Earth

पृथ्वी की परिधि नापी Circumference of Earth

सीवी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने मापी पृथ्वी की परिधि
सरोजिनी कालोनी स्थित अर्जुन पार्क में सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्य क्लब प्रभारी दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक के नेतृत्व में एकत्र हुए और उन्होंने   पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग से सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में छड़ी की परछायी को नाप कर गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। इनके समानांतर स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर 17 और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर के विद्यार्थियों ने भी अध्यापकों दर्शन लाल, गौरव वालिया, विकास पुंडीर के मार्गदर्शन में यह प्रयोग दोहराया।
क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 23 सितम्बर के दिन इक्विनॉक्स यानी शरद विषुव होता है इस दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन व रात बराबर होते हैं और आज के बाद दिन छोटे और रात लंबी होनी शुरू हैं और उत्तर भारत में शरद ऋतू के आगाज की आहट हो जाती है।
अगला प्रयोग दिसंबर 22 को किया जाएगा।
आज के प्रयोग में इतेश, निखिल, वंशिका, मुस्कान, पारस बत्रा, पार्थवी, पलक बत्रा, नमन श्रीवास्तव, दृष्टि, अवनि, अर्श, काजल, आकाशदीप, कावेरी, अलीशा, राघव, मयंक, नमन, वरुण, केशव, अर्श सैनी ने भाग लिया।
और फोटोग्राफ्स









  Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
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Saturday, September 03, 2016

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला 24th NCSC Workshop for Teachers

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला 24th NCSC Workshop for Teachers
विज्ञान गतिविधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक - अनीता काम्बोज
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न,यह बाल विज्ञान सम्मेलन अक्टूबर में होगा  
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल सेक्टर 17 जगाधरी में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की गाइड टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप आयोजित हुई जिसमे जिले के निजी व राजकीय विद्यालयों के 80 विज्ञान अध्यापकों और प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में राज्य भर से आये विभिन्न विषयों के रिसोर्स पर्सन्स ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को ‘टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीकी और नवाचार’ विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट बनाने के लिए ट्रेंड किया। 
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग द्वारा प्रायोजित इस विज्ञान सम्मेलन में बालक अपने शोधपत्रों को साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आव्हान किया की प्रत्येक विज्ञान अध्यापक/प्राध्यापक को विज्ञान शिक्षण के साथ साथ विज्ञान संचारक भी बन जाना चाहिए। देश को विज्ञान चेतना की अति आवश्यकता है। शिक्षण को मात्र रोजगार का साधन मत बनाएं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए विज्ञान को जन आन्दोलन बनाएं और विज्ञान संचार की मुहीम से जुड़ें।
विद्यालय की प्रधानाचार्या अनीता काम्बोज ने उपस्थित अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान के विभिन्न प्रोजेक्ट बनाने से बच्चे अपने आसपास की सामान्य व गंभीर समस्याओं से रूबरू होते हैं और वो उनका हल निकलने का प्रयत्न करते हैं जिससे वो विज्ञान को और नजदीकी से समझते पाते हैं। विज्ञान के प्रोजेक्ट करने से बच्चों के सर्वांगीण विकास का बेहतर पोषण होता है। प्रधानाचार्या ने हर जिले में सार्वजनिक विज्ञान पुस्तकालयों, वाचनालयों और प्रयोगशालाओं की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की हरियाणा में एक साइंस सिटी जैसा विज्ञान संग्राहलय और विज्ञान केंद्र होना चाहिए जहां बच्चों को उनकी विज्ञान सम्बंधित सभी जिज्ञासाओं का जवाब मिल सके।     
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सिविल हस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजय दहिया ने स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर दहिया ने बताया कि व्यक्तिगत स्वच्छता जितनी आवश्यक है उतनी ही आवश्यक सामुदायिक स्वच्छता भी है। समाज और कारपोरेट दोनों वर्गो को चाहिए कि चिकित्सा के सामुदायिक केन्द्रों में आवश्यक सहूलियतों को बढ़ावा देने के लिए कोंट्रीब्यूट्री विधि अपनायें। हस्पतालों को जो सुविधाएं चाहिए, स्कूलों को जो आवश्यकताएं है उनको दान या सहयोग से पूरा करें। ग्रामीण आपसी सहयोग से गांव के बीमार व्यक्तियों को आपातकालीन जैसी स्थिति में जिला स्तर या पीजीआई तक पहुंचाने की व्यवस्था कर सकते हैं जिससे बीमार की जान को बचाया जा सके। उन्होंने अध्यापकों को व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता पर सर्वे और प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट बनवाने के लिए प्रेरित किया और टिकाऊ विकास के तहत हस्पतालों और स्कूलों के भवनों की मुरम्मत को कारसेवा जैसे सामुदायिक सहयोग वाले तरीके से हल किया जाए और इसके लिए स्थानीय समितियां बने सम्बन्धित प्रोजेक्ट बच्चो को बनवाये जाए।       
हिसार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डाक्टर महावीर नरवाल ने टिकाऊ विकास और कृषि विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट करवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया की मिटटी की जांच, फसल चक्र, कीट पाठशाला, समयानुसार व मांगनुसार फसल उत्पादन, कीटनाशकों के आर्गेनिक विकल्पों, फ़ूड प्रोसेसिंग, देसी खाद, बीजों की वेरायटी और सामूहिक खेती पर बच्चों को परियोजनाएं तैयार करवाने की बहुत आवश्यकता है।   
डी ए वी गर्ल्स कालेज से डाक्टर ईनाम मुहम्मद ने खाद्य व कृषि विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर ईनाम ने दालों और तिलहन की फसलों के लिए माहौल तैयार करने सम्बंधित हरियाणा को चार जोन में बाँट कर बहुत ज्ञानवर्धक कृषि बटवारा प्रस्तुत किया। उनके अनुसार बच्चे किसानो को प्रेरित करें कि अब गैर परम्परागत खेती को अपनाना समय की मांग है और किसान देश/विदेश का कृषि पर्यटन के तहत भ्रमण करें और कृषी नवाचार को अपनाएँ।   
हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सचिव व एनसीएससी के राज्य सयोंजक श्री सतबीर नागल ने विज्ञान को बच्चों की पहुँच तक लाने में राष्ट्रिय बाल विज्ञान सम्मेलन के उद्देश्यों को अध्यापकों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस को महज प्रतियोगिता बनाकर ना देखा जाए आवश्यकता है कि इस इवेंट का प्रयोग बच्चों को विज्ञान के निकट लाने और विज्ञान को बच्चों की पहुँच तक लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने बाल विज्ञान कान्ग्रेस की नियमावली से भी अध्यापक प्रशिक्षुओं को अवगत करवाया। श्री नागल ने बताया कि हरियाणा विज्ञान मंच एक वोलियेंटरी साइंस पोपुलराईजेशन संस्था है जो आपसी सहयोग से हर फिल्ड के एक्सपर्ट विद्वानों की स्वेच्छिक सेवायें लेकर एक बेहतर वैज्ञानिक माहौल तैयार करने के लिए कार्यरत है जिससे कि मानवता की भलाई हो सके।    
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील कुमार काम्बोज ने आपदा प्रबंधन विषय पर प्रोजेक्ट बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि 14-15 जुलाई व उसके बाद की दो बरसातों ने यमुनानगर के हालात दो तीन घंटों के लिए आपातकालीन प्राकृतिक हालातों जैसे बना दिए थे जिससे लिए समाज और सम्बन्धित महकमे हतप्रभ रह गए और सोचने पर मजबूर हो गए कि भविष्य में किसी बड़ी आपदा से वो कैसे लड़ पायेंगे। उन्होंने बच्चों को शहर के बेहतर व नवाचारी मास्टर प्लान पर बच्चों को प्रोजेक्ट करवाने का आव्हान किया जिससे कि बच्चे अपनी समस्याओं का बेहतर हल प्रदान कर सकें।      
रसायन विज्ञान के अध्यापक गौरव वालिया ने ऊर्जा टिकाऊ विकास के संदर्भ में अपना व्यख्यान दिया। उन्होंने ऊर्जा के नवीकरणीय साधनों के उपयोग और दैनिक जीवन में ऊर्जा की कटौती करने पर प्रोजेक्ट वर्क करवाने के लिए अध्यापकों को प्रशिक्षित किया। 
प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा ने प्राकृतिक संसाधन और टिकाऊ विकास विषय पर बच्चो से प्रोजेक्ट बनवाने का प्रशिक्षण दिया। 
उन्होंने नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खनिज भंडारों और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और एनरिच करने की आवश्यकताओं पर बल दिया। 
उन्होंने कहा कि उतना खोदो, उतना काटो, उतना दोहो की आने वाली पीढ़ियाँ भी उन नेमतों  का उपयोग कर सकें जो प्रकृति ने सबके लिए बराबर प्रदान की हैं। 
मनुष्य अपने भविष्य को कब्रासीन न कर पाए ऐसे प्रयास किये जायें। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर प्रोजेक्ट करवाने सम्बन्धित प्रशिक्षण प्रदान किया।  
गणित अध्यापक श्रीश कुमार शर्मा ने टिकाऊ विकास में परम्परागत तरीकों और देशज विधियों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया की खाद्यानो के भंडारण, जल के उचित भंडारण, कम जल की खेती के देशज उपाय, खाद्य पदार्थों की गुणवता और उसमे मिलावट के देशी तरीके, दादी माँ के नुस्खे  और रसोईघर को बनाओ ओषधालय, आत्मरक्षा के देशज तरीके, गणनाओं के परम्परागत तरीकों पर बच्चों को परियोजनाएं बनवाने के लिए अध्यापक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया।  
गत वर्ष की विजेता ग्रुप लीडर श्रेया केसवानी ने अपनी टीम के साथ एक परियोजना की प्रस्तुती भी दी जिससे उपस्थित अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने की बारीकियां पता लग सकी।
 इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदीप सरीन, जरनैल सिंह सांगवान, डाक्टर विजय त्यागी, सुरेन्द्र गोयल, प्रोफेसर के सी ठाकुर, आर पी  गांधी, राजकुमार धीमान, दीपक शर्मा, विकास पुंडीर, ज्योतिका डांग, अश्वनी गर्ग, दीपिका देशवाल, राकेश कुमार, मंजू आर्या, पूजा कालरा का सहयोग सराहनीय रहा।   
अखबारों में  




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हरियाणा राज्य विज्ञान संवर्धन कार्यक्रम Promotion of Science in Haryana State Program

हरियाणा राज्य विज्ञान संवर्धन कार्यक्रम Promotion of Science in Haryana State Program 
प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापकों को दिया प्रशिक्षण 
सर्व शिक्षा अभियान, एससीईआरटी गुडगाँव, श्रीराम फाउंडेशन व आईबीएम के सयुंक्त तत्वाधान में प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापको का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में हुआ। जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में कार्यक्रम अधिकारी गीता ढींगरा व प्रभारी प्रेमलता बक्शी के साथ मास्टर ट्रेनर्स दर्शन लाल बवेजा, आस्था श्रीवास्तव व जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील काम्बोज ने इस ट्रेनिग की शुरुआत की।
आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में मास्टर ट्रेनर आस्था श्रीवास्तव विज्ञान अध्यापिका ने प्रशिक्षु अध्यापको और प्राध्यापको को जंतु और पादप कोशिका के शिक्षण सम्बन्धित नवाचारी विधि से अवगत करवाया। 
मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा ने साइफन, बलो का संतुलन, जैव विविधिता, ठोस द्रव व गैसों में संपीडन, जलीय व स्थलीय भंवर का बनना और ठोस वस्तुओं का आयतन ज्ञात करने सम्बंधित नवाचारी प्रयोग करके दिखाए। 
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील काम्बोज ने परमाणु संरचना, लार्ज हेड्रान कोलाईडर प्रयोग द्वारा प्राप्त अभी तक के निष्कर्षों सम्बंधित ताज़ा ज्ञान से प्रशिक्षुओं को अपडेट किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रशिक्षुओं ने स्वयं तैयार विज्ञान नवाचारी गतिविधियों का प्रदर्शन किया। विज्ञान अध्यापक राकेश कुमार ने अंतः दहन इंजन की कार्यप्रणाली और उसमे सम्मिलित नवाचार को विस्तार से समझाया। तीसरे व अंतिम चरण में विज्ञान अध्यापकों को जैव विविधता से सम्बंधित पोस्टर दिए गए। इन पोस्टरों को प्रशिक्षु अध्यापको द्वारा समूह चर्चा विधि से प्रदर्शित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं को आगामी विज्ञान प्रदर्शनियों के आयोजन सम्बंधित एडवांस सूचना दी गयी। कक्षा छह से दस तक के मासिक टेस्टों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार व मासिक पाठ्यक्रम और प्रयोगात्मक कार्यों को सम्पन्न करवाने के के टिप्स दिए गए।
इस कार्यक्रम कश्मीरी लाल, अमृत बेदी, सतीश कुमार, रोमियो शर्मा, संजय कुमार, राकेश कुमार, राकेश मोहन, रुस्तम अली, सुधीश पाल, सुभाष काम्बोज, गीतांजली पुन्नू, मंजू वर्मा, ओमप्रकाश, राजेन्द्र आदि विज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया।

अखबारों में 

Darshan Lal Baweja
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Saturday, July 16, 2016

राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का प्रशिक्षण कार्यशाला State Level Workshop

राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस की प्रशिक्षण कार्यशाला
14-15 जुलाई को आयोजित हुई विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क,

हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग व हरियाणा विज्ञान मंच के सयुंक्त तत्त्वाधान में हरियाणा में 24वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन का बिगुल बज उठा है। 14 15 जुलाई को जाट भवन रोहतक में हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक द्वारा राज्यस्तरीय संसाधन व्यक्ति हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिले से इस कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने के लिए विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल, प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा व गौरव कुमार वालिया ने भाग लिया। 
इस कार्यशाला में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विज्ञान संचारक डी रघुनन्दन, सतबीर नागल,
वेदप्रिय, डाक्टर रणवीर सिंह दहिया, डाक्टर महावीर सिंह नरवाल, दीपा कुमारी, कृष्ण वत्स सहित अन्य रिसोर्स पर्सन्स ने सभी आठों उपविषयों पर प्रशिक्षण दिया।
जिला समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि राज्य भर से आये जिला समन्वयकों और अध्यापकों ने सभी उपविषयों व संभावित परियोजनाओं पर विचार विमर्श किया। इस बार का बालविज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय " टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार" है. जिसमे आगे आठ उपविषय है।
टिकाऊ विकास, स्वपोषी विकास या समग्र विकास, विकास की वह अवधारणा है जिसमें विकास की नीतियां बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इससे मानव की न केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति हो,वरन् लम्बे समय तक मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। टिकाऊ विकास वास्तव में विकास की वह अवस्था है जिसमें मानवीय मूल्यों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रभावितों की पीड़ा को दूर करते हुए समाज में आर्थिक समानता व लम्बे समय तक प्रयोग में आने वाले आधारभूत ढाँचे से है।
डी रघुननंदन ने बताया कि किसी शहर के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुदृढ़ व्यवस्था का होना उस शहर के लिये सस्टेनेबल डेवलपमेंट है। जिस कारण लोग निजी वाहनों की निर्भरता से बचेंगें और अधिक यातायात के दुष्प्रभावों जैसे प्रदूषण, दुर्घटना आदि से भी महफूज़ रहेंगे। प्रोफेसर दीपा कुमारी ने ऊर्जा के टिकाऊ संसाधनों पर अपने विचार रखे, जिसमें बहुत सी गैर परम्परागत सतत् विकास की परियोजनाओं पर विमर्श हुआ। 
डॉक्टर महावीर सिंह नरवाल ने कृषि में सस्टेनेबल डेवलॅपमेंट के अंतर्गत कीट पाठशाला के प्रणेता दिवंगत डॉक्टर सुरेन्द्र दलाल के कार्यों पर प्रकाश डाला कि उन्होने किसानो को कीट पाठशाला के अंतर्गत इन्सेक्ट लिटरेसी में इतना ज्ञान दिया गया कि अब उन गावों के किसान (पुरूष, महिला व बच्चे) खेत मे कीटो और पत्तों में सुराख देख कर डरते नहीं हैं उन्हें पता हैं कि इस कीट का प्रकृत्तिक शत्रु इसे स्वत ही समाप्त और देगा और अगर अब कीटनाशक का छिड़काव किया तो वो मित्र व शत्रु दोनों को समाप्त कर देगा। कीट पाठशाला के अंतर्गत कीट साक्षरता कम लागत का टिकाऊ विकास है जो अनुभव हस्तांतरण के अंतर्गत पीढ़ियों तक वितरित और समृद्ध होगा। वेदप्रिय जी ने महत्त्वपूर्ण बिन्दुओ को उठाते हुए टिकाऊ विकास की अवधारणा को समझाया। डॉक्टर आर एस दहिया ने अपने वक्तव्य में बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में टिकाऊ विकास की बहुत आवश्यकता है। जहां 2000 कर्मचारियों की आवश्यकता है वहां 500 के स्टाफ से काम चलाया जा रहा है और स्वास्थ्य कर्मी काम के दबाव में है जबकि उसका सीधा सम्बन्ध लोगों की जिंदगियों से जुड़ा है। सतबीर नागल और कृष्ण वत्स ने बाल विज्ञान कांग्रेस के आयोजन और नियमो सम्बंधित बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।
प्रवक्ता सुमन शर्मा व गौरव कुमार ने बताया की गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष के टोपिक में बाल वैज्ञानिकों के पास परियोजना को करने के लिए विस्तृत दायरा है। जिला स्तरीय अध्यापक कार्यशाला का आयोजन अगस्त में किया जाना प्रस्तावित है। कार्यशाला में राज्य भर से जिला समन्वयकों और अध्यापकों ने भाग लिया।
Darshan Lal Baweja
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