Sunday, March 27, 2016

पृथ्वी की परिधि circumference of earth experiment

सी वी रमण विज्ञान क्लब सदस्यों ने नापी पृथ्वी की परिधि
विषुव समय-बिंदु पर  दिन और रात्रि की अवधि लगभग बराबर होती हैं।
मार्च विषुव 20 मार्च के दिन सी वी रमण विज्ञान क्लब सरोजिनी कालोनी के सदस्यों को स्थानीय अर्जुन पार्क में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया। 
मौके पर इंजीनियर सौरभ कौशल, इंजीनियर राघव व विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने क्लब सदस्यों को तापमान, आद्रता, समुद्रतल से उंचाई, अक्षांश ज्ञात करना, जीपीएस प्रणाली, सेटेलाईट कार्यप्रणाली, साधारण व जटिल इलेक्ट्रोनिक्स परिपथ, इरैटोस्थनीज विधि, उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं आदि की सैद्धान्तिक जानकारियाँ दी।
दर्शन लाल ने बताया कि इस प्रयोग को करने के लिए जमीन पर लंबवत खड़ी नोमोन (शंकु यंत्र) की परछायी को पांच पांच मिनट के अंतराल पर नाप कर दर्ज किया जाता है। छड़ी की परछायी जब घटते-घटते न्यूनतम हो जाती है तो उसे माप लेते हैं और त्रिकोणमिति के सूत्रों की सहायता से सूर्यकोण ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद विशेष प्रकार की गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर ली जाती है।
आगामी  तीन दिनों में नेशनल कालेज आफ पोलिटेक्निक जगाधरी, स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल सेक्टर सत्रह जगाधरी, होली मदर पब्लिक स्कूल जगाधरी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रादौर, राजकीय कन्यावरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पुरानी सब्जीमंडी स्कूलों के विद्यार्थी करेंगें।
इस अवसर पर आंचल, अंजली, अवनीत, सोनाक्षी, सिमरन, सिद्धार्थ, प्रमात, रोनक, प्रतीक, निश्चय, अवनी, काजल, पार्थवी, संयम, रणंजय कटारिया, दृष्टि काम्बोज, छवी, अनुष्का, जयोतिका, सुबुही सहगल, विकास पुंडीर, गौरव वालिया प्रतिभागियों ने यह प्रयोग करना सीखा और सम्बंधित गणनाएं भी की। 
अखबारों में 

Darshan Lal Baweja
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Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
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Tuesday, March 01, 2016

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर ख़ास : दर्शन लाल बवेजा
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित
प्रगतिशील किसान धर्मवीर सिंह ने बच्चों को नवाचारी देशज विज्ञान एवं विज्ञान में नवीन आविष्कारों के बारे संबोधित किया।
धरमबीर सिंह जी के साथ 
अलाहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में रास्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कर्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेंद्र ढींगरा ने किया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा की विज्ञान प्राचीन काल से ही खोजपूर्ण, ज्ञानवर्धक, निर्णायक और भविष्य निर्माणक के रूप में मानव सभ्यता के साथ खड़ा है। विज्ञान सदा से निर्माता है विज्ञान संहारक कदापि नही हो सकता बशर्ते निति नियामको और इसके प्रयोक्ताओं की नीयत साफ़ हो।
विज्ञान पुस्तक प्रदर्शनी 
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने अपने संबोधन में कहा की इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के लिए चर्चा हेतु विषय ‘देश के विकास में वैज्ञानिक मुद्दों को सार्वजनिक प्रोत्साहन देना हो उद्देश्य’ रखा गया है। इस थीम के अंतर्गत बताया कि अब यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक हो जाता है कि विज्ञान का उपयोग मानव जाति के हित में हो। इसके लिए सभी वैज्ञानिक मुद्दों को समाज में प्रोत्साहित करके विश्वस्तरीय वैज्ञानिक समाज बनाने का दृढ़ संकल्प लेना होगा।
विज्ञान पुस्तक प्रदर्शनी 
इस अवसर पर विशेष रूप से आमंत्रित दामला के निवासी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता व प्रगतिशील किसान धर्मवीर सिंह ने विद्यालय के बाल वैज्ञानिकों के माडलों को देखा व उनको कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी प्रेरणा से बच्चों ने कागज पर बहुत से इनोवेटिव आइडिया बना कर दिखाए। उन्होंने बच्चों के द्वारा बनाए गए बहुत से नवाचारी विज्ञान माडलों को देखा और सराहा। किसान धर्मवीर सिंह ने बच्चों के साथ इनोवेशन, डिजायनिंग, फंडिंग व पेटेंट आदि बिन्दुओं पर चर्चा कि व सुझाव दिए। 
धरमबीर सिंह जी 
उन्होंने अपनी सफलता की कहानी खुद की ही  ज़ुबानी सुना कर प्रेरित किया और कहा कि आविष्कार कभी भी उच्च शिक्षा का मोहताज नहीं रहा है तुम बस सोचो और काम पर लग जाओ सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।

इस अवसर पर एक विज्ञान पुस्तक व पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गयी। इस मौके पर दर्शन लाल बवेजा, रविंदर कुमार सैनी, लवलीन कौर, संजीव कुमार, प्रदीप धीमान, संदीप कुमार, जसविन्द्र कौर, मीना काम्बोज, सुनीता काम्बोज, भगवती शर्मा, पवन कुमार, मुनीश शर्मा, रीना रानी उपस्थित रहे।
In News




Darshan Lal Baweja
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Saturday, February 20, 2016

प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन TTS-MS

विज्ञान शिक्षा लोकप्रियकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ
डाईट तेजली में विज्ञान शिक्षण की बारीकियों को सीखेंगे विज्ञान अध्यापक      
विज्ञान विषय की शिक्षण तकनीकों को सुधारने एवं गतिविधियों के जरिये विद्यार्थियों को विज्ञान की शिक्षा देने के उद्देश्य से जिले के सभी शिक्षा खण्डों से पचास विज्ञान अध्यापकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। सर्व शिक्षा अभियान, एससीईआरटी गुडगाँव, श्रीराम फाउंडेशन व आईबीएम के सयुंक्त तत्वाधान में राज्य के सभी जिलों में टीटीएस-एमएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गतिविधि आधारित विज्ञान शिक्षा, प्रायोगात्मक कार्य आधारित विज्ञान शिक्षा, डिजिटल तकनीक के साथ साथ विद्यार्थियों में दक्षता के विकास हेतु विज्ञान शिक्षण-अधिगम का प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है।
जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में कार्यक्रम समन्वयक गीता ढींगरा व प्रभारी प्रेमलता बक्शी के साथ मास्टर ट्रेनर्स दर्शन लाल बवेजा, आस्था श्रीवास्तव, विजय कुमार ने अध्यापकों को विज्ञान प्रयोगात्मक कार्यों का प्रशिक्षण दिया। इन पचास विज्ञान अध्यापकों का चयन खंड स्तर पर किया गया है। प्रत्येक महीने के अंतिम दो शनिवार को इन अध्यापकों को प्रशिक्षण हेतु डाईट तेजली में आना होगा। इस कार्यक्रम में अध्यापकों को अपने विद्यालयों में एक साइंस कार्नर विकसित करना हैं जहां विद्यार्थियों और अध्यापक द्वारा बनायी गयी टीएलएम का प्रदर्शन होगा और समय समय पर इन विद्यालयों में निरिक्षण करने का भी प्रस्ताव है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ
मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल ने बताया की इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा दूरदराज गावों में पढ़ा रहे विज्ञान अध्यापकों को अपडेट करने व उनको कम लागत के विज्ञान प्रयोगों से अधिकतम गतिविधियों को बनाना सिखाया जाएगा। इस कार्यक्रम से अध्यापकों को विज्ञान शिक्षण की बारीकियों से भी अवगत कराया जाएगा। बवेजा ने कहा की शिक्षण अधिगम सामग्री की सहयता से पढ़ाया गया पाठ विद्यार्थियों को आसानी से समझ आ जाता है इसलिए विज्ञान अध्यापको को चाहिए कि वो माध्यमिक कक्षाओं के बच्चों को अधिक से अधिक विज्ञान गतिविधियाँ करवाएं और उनको टी एल एम के प्रयोग से पढ़ायें ।

इस कार्यक्रम में खेमलाल, कश्मीरी लाल सैनी, अमृत बेदी, गुलशन कुमार, इंदरजीत सिंह, मुकेश आर्य, सुमन लता, राकेश मोहन, संजीव काम्बोज, विपिन, संजय कुमार, राकेश कुमार, रुस्तम अली, अंजू नय्यर, स्वीटी, अमित, राजेन्द्र, रवि कुमार, सुनीता आदि विज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया।
अख़बारों में 

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Sunday, December 13, 2015

बदलता मौसम बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक Research by Students

बदलता मौसम बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक
विज्ञान सम्मेलन के लिए शोध कार्य कर रहे हैं बाल विज्ञानी  
राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन की परियोजना में बाल विज्ञानियों ने केस स्टडी द्वारा जाना कि मौसम के बदलाव बच्चों को क्यों बीमार करते हैं
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल सेक्टर सत्रह जगाधरी के कक्षा छह से आठ के पांच बाल विज्ञानियों ने दो महीने से भी अधिक समय में विभिन्न केस स्टडी के जरिये यह जानने का प्रयत्न किया कि शून्य से दस वर्ष के बच्चों को मोसम व जलवायु का बदलाव किस प्रकार प्रभावित करता है श्रेया केस्वानी, अक्षिता चौहान, अंजली वर्मा, प्रभनूर कौर व अनन्या केस्वानी की टीम ने इस विज्ञान परियोजना को शुरू किया इस टीम ने सरोजिनी कालोनी, हुडा सेक्टर अट्ठारह में सर्वेक्षण करके ऐसे बच्चों को खोजा जो की अक्सर जल्दी जल्दी बीमार होते रहते हैं और उनकी हिस्ट्री अल्पसामयिक रुगणता वाली है इन बाल विज्ञानियों ने अपने केस बालक का पिछ्ला सारा मेडिकल रिकार्ड खंगाला और दिनवार डाटा एकत्र किया और उनके इलाज करने वाले से डाक्टर्स से भी मिलेइस प्रकार इन्होने बच्चे के द्वारा ली गयी दवाइयों का डाटा भी एकत्र किया और यह ज्ञात किया की उनके केस बालक ने प्रतिवर्ष कितना एंटीबायोटिक व अन्य दवाइयों को खाया व लम्बे समय तक प्रतिजैविक लेने पर उत्पन्न साइड इफैक्टस को भी पहचाना
इस टीम ने प्रत्येक बच्चे की शारीरिक गतिविधियों और आई क्यू को भी विभिन टेस्ट्स के द्वारा जांचा और बच्चे का साक्षात्कार भी लियाबालक की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को जांचा इस टीम के सदस्यों ने बच्चे के अभिभावकों का साक्षात्कार भी लिया, जिसमें उन्होंने जाना की उक्त वर्णित बालक केवल तभी बीमार पड़ता था जब मौसम में तब्दीली आती थी या फिर मौसम की अपनी चरम स्थिति होती थी इस टीम के सदस्यों ने विद्यालय में एक परामर्श बैठक का भी आयोजन किया जिस में इन्होने बताया की किस प्रकार बच्चों को मौसम में बदलाव शुरू होते ही अपने पहनावे और खानपान में भी बदलाव शुरू कर देने चाहियें  
इन्होने बताया की इन कमजोर प्रतिरक्षण वाले बच्चों के माता पिता को इनकी  खुराक में पौष्टिक व रोग प्रतिरोधक पदार्थों जैसे शहद, आंवला कैंडी, अज्वैन, इलायची, अदरक, गिलोय, बादाम, खसखस, हींग, हल्दी, तुलसी व चाय आदि का सेवन करावाना चाहिए कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम का उपभोग निश्चित समय पर ही करना चाहिएगर्मियों में डेजर्ट कूलर कमरे में नमी आद्रता को बढ़ाता जिस कारण ये बच्चे जल्दी वायरल बुखार की गिरफ्त में आ जाते हैं सर्दियों की शुरुवात में यानी कि आजकल जिस प्रकार का मौसम हैं इस मौसम में बच्चे शुरुवाती सर्दी, जुखाम, हल्का बुखार जैसे जोखिम से जकड़े जा रहे हैं वर्षा (अक्टूबर और नवम्बर की) व मानसून की शुरुआत में इस प्रकार के बच्चे वायरल बुखार व डायरिया जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं
विद्यालय की प्रधानाचार्या अनीता काम्बोज व जिला समन्वयक दर्शन लाल ने इन बच्चों की इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सुना व फिर एकत्र किये गए आंकड़ों और  निष्कर्षों की विश्वसनीयता को जांचा व इन बच्चों के द्वारा निकाले गए निष्कर्षों के आधार पर कहा कि बच्चों में इस प्रकार परियोजना उनको मूल विज्ञान व शोध आधारित कोर्सिज,  डिग्री व डिप्लोमा करने के लिए प्रेरित करता है जिसकी कि देश को बहुत आवश्यकता है इस टीम की मार्गदर्शिका अध्यापिका रीना मल्होत्रा और मिस मोर्ग्रेट ने इस टीम की कार्यप्रणाली व उत्साह की मुक्त कंठ से प्रसंशा की और टीमवर्क की सरहाना की। रास्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन बीस नवम्बर को जगाधरी स्थित नेशनल बहुतकनिकी कालेज में होगा जहां ये टीम अपनी परियोजना के शोधपत्र को प्रमाणों के साथ किया रो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए। 
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Tuesday, November 24, 2015

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस सम्पन्न Distt Level NCSC-15

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस सम्पन्न
श्रेया, प्रतीक, अक्षिता, प्रिंस की टीमें राज्यस्तरीय विज्ञान सम्मेलन के लिये चयनित
बाल वैज्ञानिकों ने मौसम और जलवायु सम्बन्धित शोध पत्र प्रस्तुत किए
नैशनल कॉलेज ऑफ पॉलिटेक्निक जगाधरी में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस सम्मलेन का आयोजन किया गया। यह विज्ञान कार्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली, एनसीएसटीसी नेटवर्क, हरियाणा राज्य
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग पंचकूला, जिला विज्ञान लोकप्रियकरण समिति, महर्षि वेद व्यास शिक्षण संस्थान तथा हरियाणा विज्ञान मंच, रोहतक के संयुक्त तत्त्वाधान में आयोजित किया गया। विज्ञान कॉंग्रेस सम्मेलन का शुभारम्भ महर्षि वेदव्यास शिक्षण संस्थानों के चैयरमैन श्री राज लूथरा और सचिव श्री धीरज लूथरा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। 
इस कार्यक्रम में जिला शैक्षिक समन्वयक जेएस सांगवान, प्रदीप सरीन, संजय गर्ग, नरेंद्र कुमार ढिंगड़ा, सुरेन्द्र कुमार गोयल, जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा, श्रीश शर्मा तथा ओमप्रकाश सैनी ने शिरकत की। प्रधानाचार्य डॉ॰ सतीश कुमार ने अपने सम्बोधन द्वारा बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया और कहा की यह कार्यक्रम बच्चों में विज्ञान शोध को बढ़ावा देता है जो कि उनकी वैज्ञानिक सोच को उन्नत करने के लिए उत्प्रेरक की तरह है।
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कार्यक्रम में 26 स्कूलों से 31 टीमों, 147 बाल वैज्ञानिकों और 30 गाइड अध्यापकों ने भाग लिया। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस सम्मेलन का इस वर्ष का मुख्य विषय मौसम और जलवायु को समझेंथा। इस प्रतियोगिता में ग्रामीण और शहरी वर्ग से सभी प्रकार के विद्यालयों के बाल वैज्ञानिक भाग लेते हैं। 
इस अवसर पर होनहार बाल वैज्ञानिक नितिन सैनी ने आपदा प्रबंधन के लिए बनायी गयी अपनी मशीन के मॉडल का भी प्रदर्शन किया और स्मार्ट सर्किट टीम के सदस्यों ने राघव व सचिन शर्मा के नेतृत्व में स्कूली बच्चों के लिए डिजाइन किये गए विज्ञान उपकरणों का भी प्रदर्शन किया।  
इस प्रतियोगिता में अक्षिता सिंघल, जिज्ञासा जिंदल, श्रेया केसवानी, स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल जगाधरी, प्रतीक, मुकन्दलाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी, प्रिंस, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बूड़िया, शिवानी, राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छछरौली, काजल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हरिपुर काम्बोज तथा गोमेद शर्मा, सरस्वती पब्लिक स्कूल जगाधरी का चयन राज्यस्तरीय विज्ञान सम्मेलन के लिये हुआ।
इस अवसर पर एक विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसमें
नितिन सैनी ने प्रथम स्थान व अभिनव धीमान ने दिवितीय तथा इतेश काम्बोज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
मौके पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी श्री आनन्द चौधरी, जिला परियोजना अधिकारी श्री रामप्रकाश तथा सर्व शिक्षा अभियान के सहायक परियोजना अधिकारी डॉ॰ धर्मवीर ने विजयी व सभी प्रतिभागी बाल वैज्ञानिकों और उनके मार्गदर्शक अध्यापकों को स्मृति चिह्न और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि सभी चयनित टीमें 28-29 नवम्बर को डीएवी मल्टीपरपज पब्लिक स्कूल सोनीपत में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने जायेंगी। निर्णायक मंडल में प्रोफेसर केसी ठाकुर, श्री सुरेन्द्र गोयल, श्रीमती सीमा अरोड़ा तथा श्री देवराज सिंह पुंडीर शामिल थे।
इस कार्यक्रम में ज्योतिका डाँग, श्रीश बेंजवाल शर्मा, राजकुमार धीमान, ओम प्रकाश सैनी, परमजीत मेहता, पूजा कालड़ा, दीपक शर्मा, सुमन शर्मा, अमृत बेदी, दीपिका देसवाल, रजनी पुंडीर, ज्योति गर्ग, धर्मेन्द्र सिंह, खुशवन्त सिंह, प्रभजोत कौर, श्वेता सिंह तथा कपिल कुमार का सक्रिय योगदान रहा।

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