Monday, August 20, 2018

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस National Deworming Day


राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, बच्चों को कृमिनाशक गोली खिलाई गयी।

बच्चों की रोग मुक्त रखना ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का एकमात्र उद्देश्य : डॉ कुलदीप सिंह सीएमओ
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर विद्यालय के  1600 बच्चों को दी गयी एल्बेंडाजोल की चबा कर खाएं जाने वाली गोली।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प यमुनानगर में  राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह व वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ सुनील कुमार ने अपनी टीम सहित अपने हाथों से विद्यार्थियों को कृमिनाशी एल्बेंडाजोल की टेबलेट खिलाई।
इस अवसर पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया। इस सेमिनार में विद्यालय के विज्ञान क्लब, इको क्लब, एनएसएस, एनसीसी कैडेट्स व स्काउट-गाइड ने भाग लिया। इस विचारगोष्ठी व अभियान का शुभारम्भ विद्यालय के प्रधानाचार्य  परमजीत गर्ग ने किया।  
बच्चों को संबोधित करते हुए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार बताया कि देश भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नेशनल डीवार्मिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में विद्यालय के बच्चों को फरवरी व अगस्त महीने में  कृमिनाशक एलबेंडाजॉल की चबा कर खाएं जा सकने वाली एक एक गोली दी जाती है।  जिससे वो पेट के कीड़ों से बचे रहेंगे। आज जो बच्चे छूट गए हैं उनको 27 अगस्त को यह दवाई दी जायेगी। 
जिला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री कुलदीप सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि बच्चो में इनसे संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक होता है। इनसे सभी आयु वर्गों  बड़े या बच्चे, सभी को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है।  
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विद्यार्थियो को जिनकी आयु 1 वर्ष से 19 वर्ष तक है को कृमिनाशक गोलियां खिलाई जा रही है। अभी विशेषकर गोलकृमी एस्केरिस की दवाई दी जा रही है जिसको खाने से बच्चे इस कृमि के अटैक से बचे रह सकते हैं। कुपोषित बच्चे के पेट में कृमि होने की अधिक संभावना होती है। सीएमओ ने बच्चों को पैकेट बंद पापड़, चिप्स व स्नेक्स खाने से परहेज करना चाहिये।
डॉ बुलबुल ने  बच्चों को पेट में पाए जाने वाले कीड़ों (कृमियों) के कारण, हानियों व उनसे बचाव के उपायों बारे जागरूक किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन हिंदी प्रवक्ता अरुण कुमार कहैरबा ने किया।
विद्यालय के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने पेट के कीड़ो बारे विस्तार बताया। 
क्या होते हैं पेट के कीड़े?
पेट के कीड़े असल में परजीवी होते हैं जो हमारे शरीर में रह कर शरीर से ही अपना पोषण पाते हैं। गोल कृमि (एस्केरिस), फीता कृमि, हुकवार्म, लिवेरफ़्लूक, पिनवार्म, फाइलेरिया वार्म सब  परजीवी हैं जो जीवों के शरीर में रह कर अपना पोषण करते हैं और फलस्वरूप अन्य जीवों को बीमार कर देते हैं।
इनके सक्रमण के कारण।
खुले में मल त्याग, भोजन से पहले हाथों का अच्छे से ना धोया जाना, सब्जी फलों को बिना धोये खाना, नंगे पैर चलना, दूषित जल को पीना, भोजन को ढ़क कर न रखना  आदि बहुत से कारण हैं जिस वजह से इन कृमियों के अंडे मानव शरीर में पहुँच जाते हैं। जीवों के मल के साथ इनके अंडे शरीर के बाहर आते है और फिर विभिन्न माध्यमों से अन्य जीवों के शरीर में पहुँच जाते हैं।  बाजार में बिना ढके खाद्य पदार्थ भी धूल मिट्टी के कारण इनके अण्डों से दूषित हो जाते हैं। खुले में रखे पदार्थों को नहीं खाना चाहिए।
संक्रमण के लक्षण
इन कृमियों से पीड़ित बच्चों को आम तौर एनिमिक पाया जाता हैं। इनमे खून की कमी होती है। ये पेट के कीड़े ही बच्चों में खून की कमी और एनिमिया का कारण बनते है। खुराक लेने के बाद भी बच्चे कमजोर व पीतवर्ण लगते हैं। कुपोषित, चिड़चिड़ा व्यवहार प्रकट करते हैं।
दो आवश्यक क्रियाकलाप
बच्चों में कुछ भी खाने से पहले साबुन से हाथ धोने की आदत को विकसित किया जाना जरूरी है। सब्जियों को अच्छे से धोकर पका कर खाना चाहिए। फलों को भी धोकर खाना चाहिए।
इस अवसर पर प्रवक्ता अरुण कुमार कैहरबा, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ बुलबुल , राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम के डॉ राजकुमार, डॉ गीता सागर कुमार फार्मासिस्ट, कमलेश एएनएम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य मिशन के काउंसलर सज्जन कुमार, डॉ मधु राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के जिला समन्वयक अरुण कुमार मौके पर उपस्थित रहे।
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
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Monday, August 13, 2018

पर्शिड उल्कापात (Perseid Meteor Shower)

पर्शिड उल्कापात (Perseid Meteor Shower)
अगर आसमान साफ रहा तो आज की रात आसमान में टूटते तारों की बारिश देख पाएंगे........हम लोग
दर्शन लाल बवेजा
क्या होती हैं उल्कायें?
आसमान में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का (मेटयोर) और साधारण बोलचाल में 'टूटते तारे' (मेटीयोराइट) कहते हैं। उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं। पूरी पृथ्वी से प्रत्येक रात्रि को उल्कापात अनगिनत संख्या में देखा जा सकता हैं, किंतु इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या अत्यंत अल्प होती है। वास्तव में इनका तारे ओर उसके टूटने से कोई सम्बन्ध नही होता, टूटता तारा इसका प्रचलित नामकरण है।
क्यों जल जाती हैं उल्कायें?
बाह्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हुए इनकी स्पीड 20 किलोमीटर प्रति सेकंड होती हैं। इतनी अधिक स्पीड पर वायुमंडल की गैसों के साथ रगड़ (घर्षण) के कारण ये गर्म होकर लालतप्त हो जाती हैं और भस्म होकर विलीन हो जाती हैं। यदि कोई बचकर पृथ्वी पर गिर जाये तो उसे उल्कापिंड का नाम मिलता है।
उल्कापात की महत्वपूर्ण तिथियां।
1992 में एक पुच्छल तारा (स्विफ्ट टटल) हमारे सौरमंडल में आया था और उल्काओं के रूप में बहुत सा मलबा पृथ्वी की कक्षा में छोड़ गया था। अब जब भी पृथ्वी इस कॉमेट के मलबे में से गुजरती है तो बिखरी पड़ी ये उल्कायें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाती हैं। है। इस साल चार बार ये नजारा देखने को मिलेगा परन्तु 12-13 अगस्त को पर्शिड उल्कापात का नजारा अद्भुद होगा।  इसके बाद 21 अक्टूबर ओरिओनियड, 16 नवंबर लिओनियड व 15 दिसंबर को जेमिनियड उल्कापात (मेटियोर शॉवर)
का दुर्लभ अवसर दृश्यमान होगा।
आज रात पर्शिड उल्कापात (Perseid Meteor Shower) देखने का सुनहरी अवसर है। इस उल्कापात को अर्ध रात्रि के बाद ययाति तारामंडल की ओर देख सकते हैं।  आज रात जब पृथ्वी स्विफ्ट टटल पुच्छल तारे (Swift tuttle comet) के द्वारा छोड़े मलबे के मध्य गुज़रेगी। एक घंटे में 60 से 100 तक  उल्काये देखी जा सकती है। दावा 200 उल्कापात प्रति घंटे का भी किया जाता है।
समय व दिशा(एल्टीट्यूड) चार्ट इस प्रकार रहेगा।
रविवार 11:30 pm 32°North-northeast 5.9°
सोमवार 12:30 am 33°North-northeast 13.7°
सोमवार 1:30 am  32°North-northeast 21.5°
सोमवार 2:30 am  30°North-northeast 29.1°
सोमवार 3:30 am  25°North-northeast 35.8°
सोमवार 4:30 am  17°North-northeast 41.0°
सोमवार 5:30 am  7°North 44.2°
सोमवार 6:30 am  356°North 44.7°
गत कईं मौकों की खगोलीय घटनाएं देखने का सुअवसर बादलों व खराब मौसम की भेंट चढ़ जाता है। आज रात भी शायद ऐसा ही हो।
दर्शन लाल बवेजा

Monday, July 30, 2018

स्कूल में वर्षामापी से मापी वर्षा Rain Gauge

मानकीकृत वर्षामापी यंत्र से वर्षा मापना सीखा।
 
वर्षामापी यंत्र जानकारी
विद्यार्थियों ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प के प्रांगण में सुबह दो घंटे में 15.7 एमएम वर्षा रिकार्ड की।
सीवी रमन विज्ञान क्लब, जामुन इको क्लब, हनिबी नेटवर्क, सृष्टि डॉट ऑर्ग व हरियाणा विज्ञान मंच के सदस्यों ने विज्ञान प्रसार नेटवर्क नोयडा (साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट नई दिल्ली गवर्मेंट आफ इंडिया की ऑटोनोमस बॉडी) द्वारा प्रदत्त मानकीकृत वर्षामापी यंत्र से वर्षा को मापना सीखा।
वर्षा का मापन
 विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा के नेतृत्व में प्रेरणा, हर्षिता, रितिका, नाजिश, सुहानी, साईमा, पूजा, अंजली, नेहा पांडे, दिव्या, विकास, सौरभ, सुमित, सौरव छात्र-छात्राओं ने वर्षा को मापा।
क्या है वर्षामापी यंत्र?
किस स्थान पर कितनी वर्षा हुई है, इसे मापने के लिए एक यंत्र काम में लाया जाता है, जिसे वर्षामापी यंत्र कहते हैं। यह एक प्लास्टिक का बेलनाकार बर्तन होता है जिसका व्यास 20 सेमी और इसकी ऊंचाई 50 सेमी होती है। इसके भीतर  एक मापक बेलन रखा जाता है।  इसे एक निश्चित समय में तथा निश्चित स्थान पर वर्षा में रखकर गिरे पानी की मात्रा को माप लिया जाता है।
छात्र विकास सैनी
वर्षामापी कई तरह का होता है। अलग अलग तरीके से समझने के लिए वर्षा  इंच, सेंटीमीटर या मिलीमीटर में मापी जाती है। इसकेे ऊपर एक कीप लगी रहती है। वर्षा का पानी कीप द्वारा बोतल में भर जाता है तथा बाद में पानी को मापक स्लेंडर द्वारा माप लिया जाता है। इस यंत्र को खुले स्थान में रखते हैं, ताकि वर्षा के पानी के कीप में गिरने मे किसी प्रकार की रुकावट न हो। और यह भी ध्यान रखा जाता है की आसपास कोई भवन या ऊंचा वृक्ष न हो जो वर्षा के गिरने में रुकावट बने।
'विद्यालय वर्षा का मापन' गतिविधि से बच्चों में अपने मौसम और जलवायु को समझने की दक्षता विकसित होती है। अध्यापक का फर्ज होता है की वह अपने विद्यार्थियों को प्रत्येक उस गतिविधि से परिचित करवाये जो उसको प्रकृति को समझने व आत्मसात करने का मौका दे।
वर्षा की पैमाइश से वर्षा के प्रकार
भारी वर्षा हेवी रेन - 8mm प्रति घंटा से अधिक वर्षा को भारी वर्षा कहा जाता है।
सामान्य वर्षा- 2mm से अधिक 8 mm से कम
फुहार या शावर- 2mm प्रति घंटा से कम
*खास
1mm वर्षा का मतलब एक वर्ग मीटर पर एक लीटर पानी।
अखबारों में

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विज्ञान पर्यावरण पारितोषिक वितरण Awards for Science and Environment


विज्ञान पर्यावरण पारितोषिक वितरण Awards for Science and Environment
विज्ञान व पर्यावरण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को किया सम्मानित
एडवोकेट डीपी गोयल शिक्षा सम्मान व श्री रामनारायण पर्यावरण मित्र सम्मान की शुरआत हुई
बाल विज्ञानी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प में विज्ञान एवं पर्यावरण प्रश्नोत्तरी, साइंस मॉडल मेकिंग, साइंस डाक्यूमेंटेशन
व इनोवेटिव आइडिया प्रतियोगितायें आयोजित करवाई गई।
इन प्रतियोगिताओं को विज्ञान प्रसार नोयडा, सी वी रमन विज्ञान क्लब यमुनानगर, हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक, जामुन इको क्लब, सृष्टि अहमदाबाद, हनिबी नेटवर्क अहमदाबाद व राष्ट्रीय नवप्रवर्तन फाउंडेशन  के सौजन्य से करवाया गया। 
नवप्रवर्तनशील छात्र सौरव
विद्यालय में विज्ञान व शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए 'एडवोकेट श्री डी पी गोयल शिक्षा सम्मान'  व पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए 'श्री रामनारायण पर्यावरण मित्र सम्मान' की शुरुआत की गयी। इस समान के अंतर्गत विजेता विद्यार्थी को स्मृति चिन्ह व मैरिट प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाएगा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री परमजीत गर्ग ने सभी विजेताओं को सम्मानित किया व शुभकामनाएं दी। प्रतियोगिताओं के समन्वयक विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व निर्णायक के रूप में राकेश मल्होत्रा, चंद्रशेखर व संतोष रानी रहे। साइंस मॉडल मेकिंग, इनोवेटिव आइडिया व विज्ञान पर्यावरण प्रश्नोत्तरी में अरुण, बिट्टू, खुशी, ज्योति, मनीष, सहिल व मोहित ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
नेहा, काजल, रेखा, अर्चना, गायत्री, सौरभ, राजन ने द्वितिय स्थान प्राप्त किया।
अंजली, प्रदीप कौर, अनिता, माही, रिहाना, अरुण, सूर्यप्रकाश व सीमा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
पुरस्कार व प्रमाणपत्र पा कर बच्चो के चेहरों पर खुशी की कोई सीमा नही थी। मौके पर रोहताश राणा, दर्शन बवेजा, अनुराधा रीन, दलीप दहिया, रजनी शर्मा, राकेश मल्होत्रा, चंद्रशेखर, जीपी सिंह, मंजू शर्मा, वीरेंद्र कुमार, नरेश शर्मा, सुखजीत सिंह, ममता शर्मा, पंकज मल्होत्रा, आशीष रोहिला, मीनाक्षी, पूनम, शशि, मनदीप, अर्चना काम्बोज मौजूद रहे।
अखबारों में


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पौधागरी Paudhagri

पौधागरी Paudhagri
विद्यार्थियों को पौधे वितरित करके वृक्षारोपण के लिए किया प्रेरित
पौध वितरण
आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प मे वृक्षारोपण करके वनमहोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर जामुन इको क्लब, एन एस एस यूनिट-2, एन सी सी व सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों ने भाग लिया। समारोह में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री परमजीत गर्ग ने सभी विद्यार्थियों, अध्यापको व एसएमसी सदस्यों से   पर्यावरण संरक्षण की अपील की व अपने हाथों से 300 विद्यार्थियों को सिरस, कनेर, गुड़हल, जमोया, नीम, गुलमोहर, अर्जुन के पौधे वितरित किये। विद्यार्थियों ने भी
सम्बोधन
संकल्प लिया कि वो इन पौधों को रोपित करके उनका पालन पोषण करेंगें।
इस अवसर पर विज्ञान अध्यापक, इको क्लब व विज्ञान क्लब  प्रभारी दर्शन लाल बवेजा ने विद्यार्थियों  से कहा कि  प्रत्येक व्यक्ति को जीवन काल में कम से कम पांच पौधे अवश्य लगाना चाहिए और उनकी जिम्मेवारी तब तक लेनी  चाहिए तब तक कि वह वृक्ष न बन जाएं।
हिंदी प्रवक्ता अरुण कुमार कैहरबा ने कहा कि मनुष्य ना जाने कितने दानपुण्य के कार्य करता है परन्तु वह  यह नहीं जनता कि एक ऐसा दानपुण्य भी है जिस के अंतर्गत हम यदि प्रतिवर्ष एक पौधा लगाएं और उस को पेड़ बनने तक पहुंचा दे तो उसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ का हिसाब नहीं लगाया जा सकता वो इतना अधिक होता है।
एनएसएस प्रभारी आलोक कुमार ढ़ोंडियाल ने पुराणों के प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि जिस दम्पत्ति  पुत्र नहीं हैं, उनके लिए वृक्ष ही पुत्र हैं। वृक्षारोपण करने वाले व्यक्ति के लौकिक-पारलौकिक कर्म वृक्ष ही करते रहते हैं। एक अन्य प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि यदि कोई अश्वत्थ: (पीपल) वृक्ष लगाता है तो वही उसके लिए एक लाख पुत्रों से भी बढ़कर है।
मौलिक विद्यालय मुख्याध्यापक दलीप सिंह ने बच्चों को बताया कि सराय व पियाऊ बनवाना भी जनसेवा के काम है परन्तु वो कभी बंद हो सकते हैं और टूट भी सकते हैं परन्तु मार्ग मे लगाया गया एक भी छायादार वृक्ष सदा सदा पथिको को छाया फल फूल प्रदान करता रहेगा। 
मौके पर अरुण कुमार, आलोक कुमार, दलीप सिंह दहिया, रोहताश राणा, राकेश मल्होत्रा, आशीष रोहिला, चंद्रशेखर, सुखजीत सिंह, ज्ञान सिंह, मंजू शर्मा, अनुराधा रीन ने भी पौधारोपण किया।
अखबारों में





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