Monday, July 03, 2017

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला कुरुक्षेत्र में हुई, 25 NCSC Resources person's training workshop kurukshetra

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला कुरुक्षेत्र में हुई। 25 NCSC Resources person's training workshop kurukshetra.
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2017 की राज्य स्तरीय (क्लस्टर-2) रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला कुरुक्षेत्र पेनोरमा साइंस सेंटर में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का उद्घाटन साइंस सेंटर पेनोरमा के प्रोग्राम कोर्डिनेटर श्रीनिवास महतो ने किया। श्री महतो ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह जानकर मुझे बहुत खुशी हुई है कि विज्ञान संचार के क्षेत्र में हरियाणा विज्ञान मंच उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। विज्ञान मंच से जुड़े अध्यापको को चाहिए कि वे अपने विद्यार्थियों के साथ साथ समाज के लिए भी विज्ञानोत्थान का कार्य करें। सेंटर के शैक्षणिक अधिकारी जितेंद्र कुमार ने विभिन्न जिलों से पधारे अध्यापको का साइंस सेंटर में स्वागत किया।
हरियाणा विज्ञान मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी व कार्यकारिणी के सदस्य श्री के के मलिक ने ऊर्जा उपविषय पर प्रशिक्षण देते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि बच्चे ऐसे प्रोजेक्ट बना कर लाएं जिससे ऊर्जा संरक्षण के लिए कोई ठोस हल निकलता हो। लोग अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाएं। इन सोलर सिस्टम की कोस्ट कम हो। हमारा सिस्टम नही ही चाहता कि इस तरह की इस तरह के उपाय लोगों तक पहुंचे इसलिए ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों को बहुत महंगा बना कर रख छोड़ा गया है।
करनाल से डॉक्टर पवन कुमार ने कहा कि एनसीएससी के मुख्य उददेश्यों को यदि सही मायनों में प्राप्त करना है तो इससे संबंधित सभी गतिविधियां समय पर शुरू की जाए। समय की कमी के कारण प्रोजेक्ट कार्य बाधित होता है और उसमें गुणवत्ता नही आ पाती है।
हरियाणा विज्ञान मंच के श्री सतबीर नागल ने गत वर्ष राज्य के प्रतिभागियों की राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित उपलब्धियों ओर कमियों से प्रतिभागियों को अवगत करवाया। कमियों को दूर करने के टिप्स दिए और हरियाणा के प्रदर्शन की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि हमारे राज्य के प्रदर्शन और परियोजनाओं की गुणवत्ता में बहुत सुधार आया है जो बाल वैज्ञानिकों और मार्गदर्शक अध्यापकों की मेहनत व लगन के कारण ही सम्भव हो सका है।
कुरुक्षेत्र जिला समन्वयक श्री राजपाल पांचाल ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और इस आयोजन का कुरुक्षेत्र में करवाने के लिए विज्ञान में मंच का धन्यवाद किया।
करनाल से श्री राजेन्द्र सिंह ने कृषि के क्षेत्र में दी जाने वाली संब्सिडियों ओर उन योजनाओं की उपयोगिताओं की सच्चाई व दिखाए गए आंकड़ों पर परियोजना करने के सुझाव दिए जिनसे इन सब्सिडी खोरों की असलियत उजागर हो सके।
जींद से रोहताश मालिक ने सस्टेनबल डेवलपमेंट की आवश्यकता ओर इसकी इम्प्लीमेंटेशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में टिकाऊ विकास को मद्देनजर रखते हुए योजनायें बनाना और उनको लागू करना अति आवश्यक है। उन्होंने गावं निधाना की कीट पाठशाला का जिक्र किया ओर बताया कि पेस्टिसाइड से कीटों को मार देने की तुलना में कीटों का ज्ञान होना किसान के लिए ज्यादा हितकारी है। इस ज्ञान से उसे मित्र और शत्रु कीटों का अंतर पता चलेगा। वास्तव में कीट अज्ञानता के चलते किसान व खेत मजदूर को पत्तो पर कीट/सुराख देखते ही डर जाता हैं और कीटनाशक के जंजाल में फस जाता है। कृषि इसीलिए भी महंगी हो गई है कि उसकी कीट अज्ञानता के चलते उसने अनावश्यक खरचे बढ़ा लिए हैं इसलिए किसानों, ग्रामीणों, गृहणियों व बच्चों को कीट ज्ञान होना अनिवार्य है।
यमुनांनागर से सुमन शर्मा ने कहा की स्टेट लेवल पर एक एक्सपर्ट का पैनल होना चहिये जिनसे बाल वैज्ञानिकों ओर मार्गदर्शक अध्यापको को प्रोजेक्ट पर काम करते समय आने वाली समस्याओं का निवारण किया जा सके।
कैथल के जिला समन्वयक श्री जयवीर सिंह ने बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट्स में एक्सपेरिमेंटल काम को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। पानीपत से एक मार्गदर्शक अध्यापक ने अपने जिले के 3 ऐसे प्रोजेक्ट का जिक्र किया जिसमे प्रशासन, एमएलए ओर स्थानीय निकायने संज्ञान लिया ओर उसका हल निकाला।
यमुनानगर से जिला शैक्षिक समन्वयक श्री गौरव कुमार ने बाल विज्ञान कांग्रेस में समुदाय की प्रतिभागिता और उनके सहयोग को बढ़ाने व उनको भी इस गतिविधि में इन्वॉल्व करने बारे अपने विचार रखे। अम्बाला से राकेश भारद्वाज ने कहा कि अध्यन के लिए बाहर से मेटीरियल ओर एक्सपर्ट बुलाये जाने चाहिए ताकि अन्य प्रदेशों में हो रहे परियोजना कार्य का भी ज्ञान हो सके। रोहतक से श्री आजाद सिंह बखेता ने कहा कि एक्स बाल वैज्ञानिक प्रतिभागी भी गाइड टीचर का काम करें।
जींद से श्री परवीन कुमार कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस में जिला स्तर पर अत्याधिक प्रतिभागिता ओर गुणवता विषय पर अपने विचार सांझा किये। उनका कहना था कि जिले से अत्याधिक प्रतिभागिता करवाने से और अधिक गुणवत्ता निकल कर सामने आने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अधिक से अधिक टीम्स को जिला स्तर पर भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
अपने वक्तव्य में सोनीपत के जिला समन्वयक के रूप में श्री के के मालिक ने कहा कि अच्छे प्रोजेक्ट बनवाने के लिए अध्यापकों से होमली एनवायरमेंट बना कर उनसे संपर्क किया जाए और उन्हें बच्चों से एक बेहतरीन प्रोजेक्ट बनवाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने क्वांटिटी को क्वालटी के आगे नकार दिया जिस पर दो जिला समन्वयकों की बाते परस्पर विरोधी हो गयी। इस मुद्दे पर बाद में चर्चा होगी कह कर टाल दिया गया।
पानीपत से आये जिला समन्वयक श्री श्रीकांत ने बताया कि अध्यापक को खुद अपनी भरपूर उर्जा का प्रयोग विद्यालयों के जीर्णोद्धार की लिए लगाये और फिर बच्चों की ऊर्जा का भी भरपूर उपयोग लें।
प्रधानाचार्य श्री रमेश कुमार ने गत वर्ष के दो बेस्ट परियोजनाओं को एक्सप्लेन किया। इसके बाद इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई।
एनसीएससी के राज्य समन्वयक श्री अजमेर सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर जाते हुए रेलवे में आने वाली दिक्कतों को रखा, जिसमे यह मांग की गई कि इस प्रकार की राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भाग लेने जाने वाले प्रतिभागियों को रेलवे टिकट रिजर्वेशन में कुछ छूट मिलनी चाहिए।
राज्य सह-संयोजक श्री कृष्ण कुमार वत्स ने पीपीटी के जरिये एक (बेस्ट 15 में से ) परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने प्रोजेक्ट मैथडोलोजी पर पावर पाइंट प्रजेंटेशन द्वारा विस्तार से समझाया।
दिवस 2
कार्यशाला के दूसरे दिन सभी जिलों को ग्रुप्स में बाट कर किसी भी टॉपिक पर प्रोजेक्ट बनाने के लिए काम दिया गया। लगभग दो घंटे के समय मे जिलावार अध्यापको और समन्वयकों ने आपसी चर्चा के जरिये मुख्य विषय, उपविषय को समझा। उन्होंने दो घण्टे में एक परियोजना तैयार की जिसमे काल्पनिक टीम ने अमुक स्थानपर परियोजना कार्य किया और काल्पनिक आंकड़ों के साथ सम्पूर्ण परियोजना का खाका तैयार किया। इस गतिविधि से नवागन्तुक अध्यापको को एक ही प्रयास से परियोजना पर काम करना आ गया। इस गतिविधि में अनुभवी अध्यापको ने विशेष मदद की।
तत्पश्चात इन परियोजनाओं को सिस्टेमेटिक तरीके से प्रस्तुत किया गया। कुछ परियोजनाएं जो समक्ष आयी इस प्रकार थी।
कुरुक्षेत्र टीम ने जीवन शैली उपविषय के अंतर्गत यंगस्टर्स ओर बच्चों पर मोबाइल और ऐप्स के प्रयोग से बिगड़ती आदतों की हानियों पर परियोजना प्रस्तुत की गई। इस परियोजना की समाप्ति पर बहुत चर्चा हुई और इस परियोजना को समयानुकूल बताते हुए बेहतर परियोजना करार दिया गया। एक अन्य प्रतिभागी ने धान की बिजाई पर एक नवाचारी परियोजना प्रस्तुत की गई। एक्सपेरिमेंटल टाइप की इस परियोजना की इम्प्लीमेंटेशन पर बहुत से प्रतिभागियों को संदेह था परंतु प्रस्तुतकर्ताओं द्वारा आगामी दिनों में इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने की तसल्ली पर सभी को संतोष करना पड़ा।
जब से जजमेंट टीम में कृषि वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ी है तब से प्रतिभागियों ने राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में पिछले 4-5 वर्षों से कृषि संबंधित परियोजनाओं की बाढ़ ही ला दी है। अधिकांश परियोजनाएं जो प्रस्तुत की गई पेस्टिसाइड, वर्मी कम्पोस्ट, वर्मी वाश, आर्गेनिक खेती ओर खरपतवार पर ही टिकी नजर आई।
जिला यमुनांनागर की टीम ने गांव चमरोड़ी में सौर ऊर्जा आधरित विद्युत उत्पादकता की संभावना एवं भविष्य विषय पर एक काल्पनिक परियोजना प्रस्तुत की। इस परियोजना को जिला समन्वयक दर्शन लाल ने प्रस्तुत किया और कहा कि परियोजना वही बेहतर होती है जो समय पर शुरू हो और अपने अंजाम तक भी पहुंचे। उन्होंने परियोजना में बताया कि गावों में लोग अपने घरों में सोलर विद्युत पैनल लगवा रहे हैं और वें ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों के बारे में सोच रहे हैं।
कार्यशाला के दौरान सभी जिलों के प्रोजेक्ट्स पर खुल कर चर्चा हुई और कुल मिला कर यह गतिविधि कार्यशाला को सम्पूर्णता की ओर ले जाती प्रतीत हुई। जिला समन्वयकों की बैठक में राज्य स्तरीय आयोजन, वित्त, शैक्षणिक समिति (कोर ग्रुप्स) के पुनर्गठन, बैठक, निर्णायकों ओर रिसोर्स पर्सन्स का चयन व जिला व राज्य स्तरीय आयोजन में काम का बटवारा आदि बिंदुओं पर चर्चा और निर्देशन कार्य सम्पन्न हुआ।
अंत मे प्रतिभागियों को कुरुक्षेत्र पेनोरमा और साइंस सेंटर को देखा। पेनोरमा में विभिन्न विज्ञान प्रयोगों को देख कर अच्छा लगा और उनसे बहुत कुछ नवाचारी सीखने को मिला।
इस प्रकार यह कार्यशाला सम्यन्न हुई और सभी जिला समन्वयक व अध्यापक नई ऊर्जा के साथ कुछ बेहतर कर दिखाने के जज्बे से अपने अपने घर को रवाना हुए।
रिपोर्टकर्ता: दर्शन लाल बवेजा
जिला समन्वयक एन सी एस सी हरियाणा विज्ञान मंच जिला यमुना नगर
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
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Saturday, July 01, 2017

खगोलीय परावर्तक दूरदर्शी निर्माण कार्यशाला Astronomical telescope refracting type making workshop

खगोलीय परावर्तक दूरदर्शी निर्माण कार्यशाला भोपाल मध्यप्रदेश में सम्पन्न Astronomical telescope refracting type making workshop, Bhopal 
आकाशीय घटनाओं और सूर्य, चाँद व तारों ने सदा से मनुष्य को आकर्षित किया है। इनको निकटता से जानने के लिए एक टेलिस्कोप की जरूरत पड़ती है।
 इस आवश्यकता समझते हुए विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग, भारत समय समय पर विज्ञान संचारकों, शौक़ीन खगोल प्रेमियों ओर विज्ञान क्लबों के प्रतिनिधियों के लिए टेलिस्कोप निर्माण की शुल्क सहित व निशुल्क कार्यशालाओं का आयोजन करवाता रहता है।
इसी कड़ी में भोपाल की मध्य प्रदेश विज्ञान सभा के संगोनी कलाँ परिसर में विगत 20 जून से नेशनल कौंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन, नई दिल्ली व विज्ञान प्रसार के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय खगोलीय दूरबीन निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
कार्यशाला गत 29 जून को सम्पन्न हुई।
                     
यमुनानगर से दर्शन लाल बावेजा व गौरव कुमार,
एन आई टी, कुरुक्षेत्र से प्रज्ज्वल चौहान, फरीदाबाद से श्रेया चावला
इस कार्यशाला में हरियाणा राज्य के यमुनानगर से दर्शन लाल बावेजा व गौरव कुमार, एन आई टी, कुरुक्षेत्र से प्रज्ज्वल चौहान, फरीदाबाद से श्रेया चावला, झारखण्ड राज्य के देवघर से डॉ प्रदीप कुमार सिंह देव व देवेन्द्र चरण द्वारी, राँची से योगेन्द्र कुमार, गढ़वा से आलोक कुमार चौधरी, लोहरदग्गा से ब्रजेश पाठक, नई दिल्ली से राजीव चौरसिया व कविता सनसंवाल, मध्य प्रदेश राज्य के शाजापुर से अजीत सिंह, पन्ना से अनुराग चौरसिया,
 सिवनी से आयुष पटेल, देवास से पराग दूबे, इंदौर से दिनेश विश्वकर्मा, ग्वालियर से डॉ दीप्ती गौर, छिंदवाड़ा से संदीप चावक, भोपाल से सुनील धनगर,  गुजरात राज्य के भावनगर से हर्षद जोशी व हितोर्थी बोरादे, राजकोट से अब्दुल भाई शेरसदा, महाराष्ट्र राज्य से अर्चना जगताप, उत्तर प्रदेश राज्य के औरैया से ब्रजेश दीक्षित तथा गोंडा से राजेश मिश्रा का चयन हुआ था जो इस कार्यशाला में दिनरात मेहनत करके अपना अपना टेलिस्कोप बना रहे हैं।
                   
कार्यशाला में प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में  पुणे के आयुका खगोलीय संस्थान के तुषार पुरोहित एवम् मप्र विज्ञान सभा द्वारा आमंत्रित टेलिस्कोप निर्माण विशेषज्ञ मुकेश सतंकर, अनिल धिमानी व विज्ञान प्रसार से विपिन सिंह रावत ने अपनी प्रशिक्षक भूमिका अदा की।
                  कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला में विज्ञान प्रसार के समन्वयक वैज्ञानिक डॉ अरविन्द सी राणाडे ने कहा कि इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को अपने हाथों से टेलिस्कोप का 125एमएम दर्पण बनाने, ऑब्जेक्ट फाइंडर फिटिंग, मैग्नीफायर फिटिंग, पेंट व पार्ट्स असेम्बलिंग का मौका दिया जाएगा जिससे वो दूरदर्शी बनाने की बारिकियों को सीख सकेंगें। यह दूरदर्शी बच्चों और समाज में खगोलीय घटनाओं बारे वैज्ञानिक सोच पैदा करने में मददगार साबित होगी।
सदियों से ब्रह्माण्ड मानव को आकर्षित करता आ रहा है। इसी आकर्षण ने खगोल वैज्ञानिकों को ब्रह्माण्डीय प्रेक्षण और ब्रह्माण्ड अन्वेषण के लिए प्रेरित किया। मनुष्य ने तारों के सूक्ष्म रहस्यों तथा ब्रह्माण्ड के विभिन्न आकाशीय पिंडों के आकार, गति, स्थिति, आकृति इत्यादि के बारे में  दूरबीन की सहायता से ही जाना हैं।
                 मप्र विज्ञान सभा के महासचिव एस आर आजाद ने कहा कि वर्षों से हमारा संस्थान मुख्यरूप से आदिवासी ओर ग्रामीण इलाकों में वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लेते हुए उनको रोजगार हेतु प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये कार्यरत है। मप्र विज्ञान सभा गत 18 वर्षों से मध्यप्रदेश के स्कूली बच्चों के लिए खगोलीय ओलिंपियाड का भी आयोजन सफलतापूर्वक कर रहा है जिससे अब भारत के सभी राज्यों के बच्चों और अध्यापकों को जोड़ने की योजना है। इसी विज्ञान सभा के विज्ञान संचार समन्वयक आशिष पारे ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न विज्ञान जागरूकता तथ्यों की जानकारी दी।
                     
कार्यक्रम के दौरान एरीज, नैनीताल से आये खगोल वैज्ञानिक श्री आर के यादव व जवाहर प्लेनेटोरिम, इलाहाबाद के निदेशक डॉ रवि किरण ने दूरबीन के संबंध ने जानकारी दी कि वर्ष 1609 में इटली के महान वैज्ञानिक गैलेलियो गैलिली ने हैंश लिपरशे द्वारा दूरबीन के आविष्कार के पश्चात् स्वयं इस यंत्र का पुनर्निर्माण किया और पहली बार खगोलीय प्रेक्षण में इसका उपयोग किया। दोनों रिसोर्स पर्सन्स ने दूरबीन के सम्बन्ध में और कई जानकारियाँ दी ।
                 
प्रतिभागियों में हरियाणा राज्य के यमुनानगर स्थित सी वी रमन विज्ञान क्लब के समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने कहा कि इस कार्यशाला में चारो ट्रेनर्स ने विस्तार पूर्वक सैद्धान्तिक और प्रायोगिक रूप से टेलिस्कोप निर्माण में जीजान से अपनी अपनी भूमिका अदा की, जिसके लिए वो आयोजकों ओर प्रशिक्षकों के धन्यवादी हैं।
                     यह दूरबीन बनाने के बाद क्लब समन्वयक को यह दूरबीन इस आशय के साथ सौपी गयी कि वो इसकी मदद से बच्चों और समाज को खगोलीय अवलोकन व जानकारियां प्रदान करने में इसका भरपूर उपयोग करेंगें। इससे संबंधित एक अंडरटेकिंग भी प्रतिभागियों से ली गई है।
समस्त कार्यशाला के दौरान उपकरणीय, भोजन, आवास, परिवहन व्यय का वहन आयोजको द्वारा किया गया।
in news




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Tuesday, March 21, 2017

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग Circumference of Earth Experiments

विज्ञान क्लब सदस्यों ने किया पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग
विषुव वर्ष का वह समय होता है, जब सूर्य विषुवत रेखा पर दोपहर के समय ऊर्ध्वाधर होता है। इस समय दोनों गोलार्द्धों में समान प्रकाश एवं ऊर्जा प्राप्त होती है। पृथ्वी पर दिन तथा रात की अवधि भी समान हो जाती है। यह स्थिति वर्ष में दो बार आती है। 20-21 मार्च तथा 23 सितम्बर इसकी दो प्रमुख तिथियाँ हैं। इस दिन सूर्य इस दिन एकदम पूर्व से उदय होकर एकदम पश्चिम में छिपता भी हैे यह दिन खगोल की भाषा में इक्विनॉक्स कहलाता है।
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर 17 जगाधरी में सी वी रमन विज्ञान क्लब व कल्पना चावला विज्ञान क्लब यमुना नगर के सदस्यों व ने सयुंक्त रूप से क्लब प्रभारी दर्शन लाल, गौरव वलिया व विकास पुंडीर  विज्ञान अध्यापकों के नेतृत्व में विषुव (इक्विनॉक्स) के अवसर पर पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग किया व सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में छड़ी ( नोमोन) की परछायी को नाप कर गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 20 मार्च के दिन इक्विनॉक्स यानी विषुव होता है इस दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन व रात बराबर होते हैं और आज के बाद दिन लम्बे और रात छोटी होनी शुरू हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं।
अगला प्रयोग 23 सितम्बर को किया जाएगा।
आज के प्रयोग में एकता, कावेरी, अलीशा, मिताली, याशिका, तुषार, अमित, नमन, भविष, ओजस्वी, अमित भारद्वाज ने भाग लिया।
In newspaper's
 




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Tuesday, February 28, 2017

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आयोजन N S D -17

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आयोजन N S D -17
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही होगा समाज का उत्थान
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर हुआ विचार गोष्ठी का आयोजन

जगाधरी के राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आज विज्ञान सेमीनार के दौरान जिले भर से आये साइंस मास्टरों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया। इस अवसर पर भारत के महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन के जीवन पर प्रकाश डाला गया और उनकी खोज रमन प्रभाव पर चर्चा की गयी। विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने  राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि देश के संविधान में प्रत्येक नागरिक के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास बारे स्पष्ट लिखा है।
भारतीय
संविधान के भाग - 4क के अनुच्छेद - 51 क (ज) के अनुसार
" भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण , मानववाद और ज्ञानर्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें "
लेकिन क्या हम इस कर्तव्य की पूर्ति कर रहे है?
 बवेजा ने कहा कि विज्ञान अध्यापक होने के नाते हमारा कर्तव्य और भी अधिक हो जाता है कि हम बच्चों और उनके अभिभावकों को अंध्विश्वासों और हानिकारक रूढ़िवादी गतिविधियों से बचाये और उनमे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करें साथ ही समाज को सही दिशा प्रदान करें। आज विज्ञान अध्यापकों को अंतर्जाल पर ब्लॉगिंग व ब्लॉग बनाने  बारे में भी प्रशिक्षण दिया ताकि वह सभी अपने अपने विज्ञान ब्लॉग बना कर विज्ञान संचार के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकें। साइंस मास्टरों को विभिन्न विज्ञान ब्लॉग्स की विजिट करवाई गयी और उनको कुछ मशहूर विज्ञान ब्लाग्स के वेबलिंक नोट कराये गये।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के इस अवसर पर कश्मीरी लाल सैनी, मुकेश आर्य, तरुण कुमार, खेम लाल सैनी, दीपक शर्मा, पवन कुमार ने भी संबोधित किया।  सभी उपस्थित साइंस मास्टरों ने चर्चा में सक्रियता से भाग लेकर अपने विचारों प्रकट किए। साइंस मास्टरों ने जिले में  विज्ञान संचार हेतु किये जा सकने वाले प्रयासों को और समृद्ध करने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव भी दिए।
इस अवसर और सुधीष पाल, निरंजन सिंह, राकेश मोहान, अनिल कुमार, संजीव कुमार, सुरेन्द्र सिंह, आस्था श्रीवास्तव, मंजू शर्मा, स्वीटी, राकेश कुमार, इंद्रजीत सिंह, सुमन लता, संजीत, किरनजीत कौर व विजय कुमार सहित 48 साइंस मास्टर मौजूद रहे।
अखबार मे
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Tuesday, December 27, 2016

पृथ्वी की परिधि नापी Circumference of Earth

पृथ्वी की परिधि नापी Circumference of Earth
सीवी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने मापी पृथ्वी की परिधि 
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर 17 जगाधरी में सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्य क्लब प्रभारी दर्शन लाल, गौरव वलिया व विकास पुंडीर  विज्ञान अध्यापक के नेतृत्व में एकत्र हुए और उन्होंने   पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग से सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में छड़ी की परछायी को नाप कर गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। 
क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 22 दिसम्बर के दिन इक्विनॉक्स यानी शरद विषुव होता है इस दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन छोटा व रात लम्बी होती हैं और आज के बाद दिन लम्बे और रात छोटी होनी शुरू हो जाती हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं। 
विद्यालय में चल रही विज्ञान कार्यशाला में भाग ले प्रतिभागियों ने भी यह प्रयोग करना सीखा।
अगला प्रयोग 21 मार्च 2017 को किया जाएगा। 
आज के प्रयोग में कुणाल, नमन, विधि, ईशा, मानसी, श्रिया, राशि, हर्षित, सार्थक, तान्या, उत्कर्ष, अनुज, सक्षम, जजवेंद्र, आरुषि, मुस्कान, अर्पित, जतिन, प्रिन्स, रितिक, ध्रुव, सुनैना, अभय, प्रज्ञा, यशपाल, विवेक ने भाग लिया।
परिणाम 


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