Friday, November 28, 2014

जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 22NCSC Distt level

जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस  22NCSC Distt level 
आठ टीमों का हुआ राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ चयन
बाल वैज्ञानिकों ने मौसम और जलवायु सम्बन्धित शोध पत्र प्रस्तुत किए
विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क, हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग पंचकुला व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक, जिला विज्ञान उन्नति समिति व शिक्षा विभाग यमुनानगर के सयुंक्त तत्त्वाधान मे करवाई जाने वाली जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे सम्पन्न हुई। 
जिसमे शैक्षिक समिति के समन्वयक जे एस सांगवान, प्रदीप सरीन, जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी, दर्शनलाल, सन्दीप गुप्ता ने शिरकत की और विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती अनीता काम्बोज ने कार्यक्रम की शुरुआत की और प्रधानाचार्या ने अपने सम्बोधन द्वारा बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया।
इस बाल विज्ञान सम्मेलन मे एक सौ बीस बाल वैज्ञानिकों और तीस मार्गदर्शक अध्यापको व आयोजको ने भाग लिया। 
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस का इस वर्ष का मुख्य विषय आओ मौसम और जलवायु को समझें रखा गया है। इस प्रतियोगिता में ग्रामीण और शहरी वर्ग से सभी प्रकार के विद्यालयों के बाल वैज्ञानिक भाग लेते हैं और अपने शोधपत्र पढते हैं।
प्रतियोगिता के परिणाम
छह से सात दिसम्बर को रोहतक मे

आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिये जिन बाल वैज्ञानिकों का चयन हुआ उनमे से टीम के ग्रुप लीडर केशवी स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुड्डा जगाधरी, आँचल काम्बोज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी यमुनानगर, श्रुति व यशश्वी स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुड्डा जगाधरी, विधि मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी यमुनानगर, हर्षित
राजकीय व मा वि बूड़िया, रजत राजकीय व मा वि तलाकौर, रिज़वाना राजकीय उच्च विद्यालय तेजली अपने शोध पत्रों का राज्य स्तर पर प्रस्तुतीकरण करेंगें।
इस अवसर पर मौसम एवं जलवायु थीम पर एक विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया

जिस मे दीक्षांत, शिवांग प्रथम, लविश, सत्यम द्वितीय और हेमन्त व अभिषेक तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर मौसम एवं जलवायु थीम पर एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिस मे शिवांगी प्रथम और शगुन धीमान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतियोगिता मे प्रस्तुत किये गए शोध पत्रों के शीर्षक
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि स्कूली बच्चो की पीएचडी कही जाने 
वाली इस प्रतियोगिता मे बाल वैज्ञानिकों ने मौसम बदलाव का त्वचा पर प्रभाव, मौसम के पैरामीटर्स मापने की अपनी प्रयोगशाला 

मौसम बदलने पर स्कूल मे बच्चों की हाजरियों पर पड़ने वाले प्रभाव, ठोस कचरा प्रबंधन की दुर्व्यवस्था के कारण मौसम पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन और कार्बन फूट प्रिंट और मौसम व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन, बदलते मौसम के अनुसार कपड़े पहनावे की आदतों मे बदलाव, बदल रहे मौसम मे डेंगू के मच्छरों का प्रतिरोधकता विकसित कर लेने से मानव पर प्रभावों का अध्ययन आदि शीर्षकों के अंतर्गत अपने शोधपत्र पढ़े।
इस कार्यक्रम में ज्योतिका डाँग, विकास पुंडीर, भूपिन्द्र खत्री, श्रीश बेंजवाल शर्मा, सुबुही, राजकुमार धीमान, ओम प्रकाश सैनी, गौरव, रीना मल्होत्रा, सन्दीप गुप्ता, इन्दु अरोड़ा, योगेन्द्र शर्मा, सीमा अरोड़ा, विजय कौशिक, विकास पुंडीर, गोपाल शर्मा, मनीषा का सक्रिय योगदान रहा। 
निर्णायक मंडल में डॉ॰ अमर जीत सिंह खालसा कॉलेज, श्री राजपाल पांचाल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा श्री सन्दीप गुप्ता विज्ञान अध्यापक बक्कर वाला से थे।








Saturday, November 15, 2014

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पुच्छल तारे पर उतारा स्पेसक्राफ्ट Rosetta mission’s

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पुच्छल तारे पर उतारा स्पेसक्राफ्ट Rosetta mission’s 
बहुत वर्षों से ये हसरत थी खगोल वैज्ञानिकों की कि पुच्छल तारे के वो अनखुले पन्ने भी खोले जाएं जिनको पढ़ कर ब्रह्मांड के उन रहस्यों को भी जाना जाए कि आखिर इन ग्रहों तारों का निर्माण किन किन चरणों मे हुआ है इसी जिज्ञासा वश पुच्छल तारे के नजदीक जाकर या फिर उसकी सतह पर पहुँच कर उस के बारे मे जाना जा सके इसी प्रयासों के फलस्वरूप यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने एक बहुत बड़ी कामयाबी के मुकाम को छुआ है और धूमकेतु को फतेह कर लिया है एजेंसी ने अंतरिक्ष में स्थित 67P नाम के धूमकेतु पर अपना लैंडर स्पेसक्राफ्ट उतार दिया अंतरिक्ष के अभियानों मे ऐसा ऐसा पहली बार हुआ है जब स्पेसक्राफ्ट को किसी धूमकेतु की सतह पर सुरक्षित उतारा गया है।
आज सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर के सदस्यों को क्लब समन्वयक व दर्शन लाल बवेजा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो मार्च 2004 को यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने अपना हैरतअंगेज रोजेटा मिशन लॉन्च किया था तब इसे कल्पना मात्र माना जा रहा था। रोजेटा पूर्व दस  वर्षों मे पचास  करोड़ किलोमीटर से भी अधिक लंबा फासला तय करके 67P धूमकेतु के पास पहुंचा। जहां वैज्ञानिकों ने रोजेटा के संलग्नक लैंडर स्पेसक्राफ्ट फाइली को इस राकेट से अलग किया और इस से अलग होने के बाद फाइली ने सात घंटे की यात्रा की और धूमकेतु की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग कर ली और जैसे ही लैंडिंग की सूचना मिली तो यूरोपियन स्पेस एजेंसी वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को गले मिल कर बधाइयां दी। दर्शन लाल ने बच्चो को यह भी बताया कि यूरोपियन स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों को फाइली से सिग्नल मिलने शुरू हो गए हैं पता चला है जिस पुच्छल तारे की सतह पर यह उतारा गया है उस की सतह बर्फीली है।
कितना बड़ा है 67P धूमकेतु
67P धूमकेतु जिस पर फाइली को लैंड करवाया गया है उसका आकार 4 किलोमीटर की चौड़ाई का है। जबकि लैंडर स्पेसक्राफ्ट फाइली का आकार एक कपड़े धोने की मशीन जितना है। यह पृथ्वी से इतनी दूर है कि इससे मेसेजिंग मे एक सन्देश के आने और जाने मे एक घंटे लगभग समय लगता है।
खगोल वैज्ञानिक क्या जानना चाहते है इस मिशन से?
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मनुष्य की पहुँच से दूर इस खगोलीय पिंड के अध्ययन से सौरमंडल के बहुत से अज्ञात रहस्य पता लग सकते हैं। नेपच्यून ग्रह के पथ के बाहर विशाल धूमकेतुओं का एक बहुत विशाल झुरमुट है जिसे उर्ट क्लाउड कहते हैं। वहाँ से यदा-कदा इन धूमकेतुओं परिवार से कोई धूमकेतु सूर्य की प्रभावी गुरुत्व सीमा में आ जाता है और दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करने लगता है। वैज्ञानिकों के एक बड़े वर्ग का यह भी मानना है कि भूतकाल मे पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी कच्चा माल धूमकेतुओं से ही आयातित हुआ था। फ़्रेड होइल और कुछ खगोलविद ऐसा मानते आये हैं कि अब से कोई साढ़े छह करोड़ वर्ष पहले एक विशालकाय धूमकेतु के पृथ्वी से आ टकराने से विशालकाय प्राणी डायनासोर का सफाया हुआ था और वैज्ञानिकों का मानना है कि धूमकेतु के अध्ययन करने से सौर मंडल कैसे बना यानी इसके निर्माण की पहेली को सुलझाया जा सकता है सौरमंडल के अस्तित्व से आने लेकर अभी तक इनमें खास बदलाव नहीं हुआ है।


Saturday, October 25, 2014

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 22nd NCSC Tips

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की तैयारियों की समीक्षा 22nd NCSC Tips

जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस ग्यारह नवम्बर को विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे होगी  
                
विद्यालयी बच्चो मे वैज्ञानिक दृष्टिकोण व खोजी प्रवृती उत्पन्न करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क, हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सयुंक्त तत्त्वाधान द्वारा हर वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर करवाया जाता है जिस मे स्कूली बच्चे टीम बना कर दिए गए उपविषय पर सर्वे, केस स्टडी या प्रयोगात्मक विधियों से परियोजना बनाते हैं। इससे सम्बंधित बनाये गए परियोजनाओं को प्रस्तुति पूर्व निरीक्षण हेतु आज बच्चे विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे एकत्र हुए जहां उन्होंने अपने परियोजना कार्यों को जिला समन्वयक दर्शन लाल और प्रवक्ता ज्योतिका डांग के समक्ष प्रस्तुत किया। आयोजन पूर्व इस निरीक्षण कार्यक्रम मे बच्चो को उनके विज्ञान प्रोजेक्ट्स मे सुधार व उनको और बेहतर बनाने के टिप्स दिए गए।
बच्चो द्वारा तैयार किये जा रहे विज्ञान प्रोजेक्ट  
बच्चो ने ठोस कचरा प्रबंधन और मौसम, 
मेरी अपनी मौसम प्रयोगशाला, 
मौसम परिवर्तन के  दौरान स्कूल मे विद्यार्थियों की उपस्थिति पर प्रभाव, 
मौसम परिवर्तन का त्वचा पर प्रभाव, 
सेक्टर सत्रह मे प्रवासीयो के जीवन मे मौसम व जलवायु मे परिवर्तन के प्रभाव, यातायात नियंत्रण पर मौसम का असर, 
सरोजनी कालोनी व आसपास रह रहे अन्य प्रदेशो के परिवारों का स्थानीय मौसम के साथ तालमेल व प्रभाव का अध्ययन, 
मानसून के दौरान नहर तटीय क्षेत्रों मे जलस्तर बढ़ने से होता आर्थिक नुकसान व निवारण के उपाय, 
झुग्गी बस्ती मे मौसम से बचाव के त्रिकोण का अध्ययन व सेहत पर प्रभाव, 
बदलते मौसम मे खानपान के बदलाव का सेहत व आर्थिक दशा पर प्रभाव, 
बदलते मौसम के प्रभाव से पालतू पशुओं के बचाव के देसी तरीको का अध्ययन व सुझाव, 
स्थानीय क्षेत्र मे मौसम की मार और वनस्पतियों पर प्रभाव, 
विद्यालय भवन पर मौसम परिवर्तन का प्रभाव और मुरम्मत पर वार्षिक खर्च का आंकलन व सुझाव,
स्थानीय कृषी पर वर्षा का प्रभाव व बदलाव की सम्भावना, 
दूध के उत्पादन पर मौसम का प्रभाव, 
गावं के तालाबो का जलस्तर-मानसून पूर्व व मानसून पश्चात, 
मौसम मुताबिक़ पक्षियों के व्यवहार मे परिवर्तन का अध्ययन, 
वर्षा को मापना, 
वर्तमान और भविष्य मे हुई वर्षा का तुलनात्मक अध्ययन समेत बहुत से प्रोजेक्ट पर चर्चा की गयी।
इस बार की जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस ग्यारह नवम्बर को विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे होगी। विद्यालय की प्रधानाचार्य अनीता काम्बोज व विज्ञान अध्यापक विकास पुंडीर ने इस आयोजन को लेकर बहुत उत्साह व खुशी व्यक्त की है।
जिला के भावी बाल वैज्ञानिकों केशरी, विश्वास, मेहुल, तन्वी, गर्वित, आकाश, अभिशान, पारखी, आयुष, यशस्वी, श्रुति, फिज़ा, शोभित, अर्जुन, निकुंज, हर्ष, लव, शुभम, रिया, अमीषा, साहिल, ध्रुव, अक्षित, उमंग, मयंक ने पाने विज्ञान प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किये व इनके साथ उनके मार्गदर्शक अध्यापक विकास पुंडीर, ज्योतिका डांग, गौरव, रीना व सुबुही  ने भी प्रोजेक्ट्स का जायजा लिया व सुझाव दिए ताकि बच्चे मुख्य प्रतियोगिता तक अपने प्रोजेक्ट्स को और बेहतर बना सकें।         




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Friday, October 10, 2014

जीपीएस सैटेलाइट नेविगेशन विश्व अंतरिक्ष सप्ताह World Space Week GPS Location

जीपीएस सैटेलाइट नेविगेशन व पेंटिंग प्रतियोगिता विश्व अंतरिक्ष सप्ताह World Space Week GPS Location
जीपीएस सैटेलाइट नेविगेशन से अपनी अक्षांशीय व देशांतर स्थिति ज्ञात करना सीखा

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह, प्रत्येक वर्ष विश्व अंतरिक्ष सप्ताह संगठन और संयुक्त राष्ट्र के बाह्य अंतरिक्ष मामलों के विभाग के सयुंक्त तत्वाधान में पूरी दुनिया के 80 देशो में एक साथ चार अक्टूबर से दस अक्टूबर तक मनाया जाता है। 4 अक्टूबर 1957 को पहला मानव निर्मित उपग्रह स्पुतनिक प्रथम अंतरिक्ष में भेजा गया था। इस दिन मनुष्य की अंतरिक्ष मे प्रवेश की अभिलाषा पूरी हुई थी इसलिए इस दिन की याद को स्मरण करने के उदेश्य से विश्व अंतरिक्ष सप्ताह मनाया जाता है।
इस वर्ष 2014 के लिए विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की थीम ‘अंतरिक्ष: आपका पथप्रदर्शक’ रखी गयी है। इस वर्ष यह थीम पृथ्वी ग्रह पर मानव की बेहतरी मे उपग्रहीय उपयोगिता को समर्पित है इस थीम उपग्रहों द्वारा मानव जीवन में सुधार की सम्भावनाओं की तलाश के मद्देनजर चुना गया है। 
पृथ्वी ग्रह पर मानव और पर्यावरण के हित और सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के प्रयोग और सम्बन्धित जानकारियों को विद्यार्थियों और आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर व हरियाणा विज्ञान मंच यमुनानगर इकाई के सदस्यों ने जीपीएस लोकेशन प्रणाली के द्वारा अपनी अक्षांशीय व देशांतर पोजिशन ज्ञात करना सीखा, इसी कड़ी मे सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने अपने क्लब समन्वयक दर्शन लाल बवेजा के मार्गदर्शन मे इंटरनेट व मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये यमुनानगर के विभिन्न स्थानों पर अपनी अक्षांशीय व देशांतर पोजिशन ज्ञात करके एक लोकेशन चार्ट बनाया और इस गतिविधि के जरीय वे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियगिता के हिस्सा बने।
दर्शन लाल ने बताया कि जीपीएस एक ऐसी प्रणाली है जो अंतरिक्ष में सैटेलाइट नेविगेशन के जरिए किसी भी प्रकार के मौसम में किसी की भी लोकेशन की जानकारी देता है। यह प्रणाली अंतरिक्ष मे स्थापित मात्र कुछ सैटेलाइटस के द्वारा मात्र 20 मीटर के रेंज में नेविगेशन की सुविधा प्रदान करती है परन्तु अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस दूरी को घटा कर 15 मीटर रेंज में भी यह सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयासरत हैं। जीपीएस तकनीक उपग्रहों द्वारा भेजे गए संदेशो पर काम करती है। मोबाइल में जीपीएस तकनीक के प्रयोग द्वारा प्रयोक्ता अपनी स्थिती का आसानी से पता लगा सकता है मान लीजिए आप जगाधरी रेलवे स्टेशन पर हैं और आपको जगाधरी बस स्टैंड जाना है तो आप जगाधरी बस स्टैंड का रास्ता जीपीएस तकनीक की मदद से आसानी से पता लगा सकते है। जीपीएस डिवाइस उपग्रह से प्राप्तए सिंगनल द्वारा उस जगह को नक्शे में दशार्ती रहती है। जीपीएस का प्रयोग ट्रैनों, जहाजों की स्थिती, जमीन का सर्वेक्षण करने, वाणिज्यिक कार्य, वैज्ञानिक प्रयोग, और सेना में काफी समय से किया जाता रहा है।
इस गतिविधि मे सोनाक्षी, सुमेधा गल्होत्रा, आंचल काम्बोज, अमन, पारस बतरा, पलक, पार्थवी, प्रमाद ने भाग लिया लोकेशन चार्ट बनाया।
सैटेलाइट हमारा पथप्रदर्शक विषय पर चित्रकारी प्रतियोगिता आयोजित
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2014 की थीम ‘अंतरिक्ष: आपका पथप्रदर्शक’ थीम के अंतर्गत आज सरोजिनी कालोनी के अर्जुन पार्क मे हरियाणा विज्ञान मंच और सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों ने ‘अंतरिक्ष मे सैटेलाइट है हमारा पथप्रदर्शक’ विषय पर चित्रकारी प्रतियोगिता मे भाग लिया और उपग्रह प्रणाली को दर्शाते सुंदर सुंदर चित्र बनाए। यमुनानगर के विभिन्न स्कूलों के बच्चो ने आज छुट्टी के दिन का बेहतर प्रयोग करते हुए क्लब द्वारा आयोजित इस पेंटिंग प्रतियोगिता मे भाग लेकर विश्व अंतरिक्ष सप्ताह मनाया और ८० देशों के बच्चो के साथ मिल इस इवेंट के प्रतिभागी बने।
हरियाणा विज्ञान मंच के जिला समन्वयक दर्शन बवेजा ने बताया कि इस प्रतियोगिता मे आंचल, वंशिका, सुमेधा, सुशांत, अमन, पार्थवी, अवनी, काजल, पारस, पलक, अर्श सैनी, मनप्रीत, शिवम, सुदक्ष, सुकृत, वंश, स्पर्श, विनय, सजल, सुप्रीत, अभिमन्यु, छवि आदि ने भाग लिया। पलक बतरा ने अपनी पेंटिंग मे दर्शाया कि किस प्रकार अंतरिक्ष विज्ञान का प्रयोग करके हम आने वाले आंधी तूफ़ान और चक्रवात का पहले से ही पता लगा लेते हैं और इस तकनीक का प्रयोग करके आपदा पूर्व चेतावनी जारी करके मानव को जान माल की क्षति से बचाया जा सकता है और पेंटिंग के माध्यम से यह भी बताया गया कि वास्तव मे अंतरिक्ष मे छोड़े गए मौसम मानीटरन व सुदूर सवेंदन के उपग्रह मानवो के लिए विज्ञान का वरदान साबित हुए हैं जिसने मानव जीवन को आसान और सुखमय बना दिया है। 

एक अन्य पेंटिंग मे प्रतिभागी वंशिका ने कल्पना की है कि भारत ने मंगल ग्रह पर अपने उपग्रहों की मदद से विजय पा ली है और अपना मानव मिशन कामयाबी पूर्वक मंगल पर भेज कर भारतीयों ने विश्व मे अपनी अंतरिक्ष विज्ञान की योग्यता को सिद्ध किया है। पार्थवी ने अपनी पेंटिंग मे कल्पना की है कि जब मनुष्य आने वाले समय मे अंतरिक्ष मे आसानी से यात्राएं करने लगेगा तब वो पराग्रहियों की खोज करके उनसे मित्रता करेगी व उनके ग्रह पर जायेगी।
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के भारतीय राष्ट्रीय सयोंजक श्री चन्दर देवगन ने बच्चों को विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों मे भाग लेकर देश का नाम रोशन करने के लिए बधाइयां और शुभकामनाएं दी हैं।

अख़बारों मे 



                             




Tuesday, September 30, 2014

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला Teachers Training Workshop NCSC

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला Teachers Training Workshop of NCSC
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न हुई

विद्यालयी बच्चो मे वैज्ञानिक दृष्टिकोण व खोजी प्रवृती उत्पन्न करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क, हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सयुंक्त तत्त्वाधान द्वारा हर वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर करवाया जाता है 
जिस मे स्कूली बच्चे टीम बना कर दिए गए उपविषय पर सर्वे, केस स्टडी या प्रयोगात्मक विधियों से परियोजना बनाते हैं और फिर उस प्रोजेक्ट को जिला स्तरीय विज्ञान कांग्रेस प्रतियोगिता मे प्रस्तुत किया जाता है जहां वो अपने कार्यों को निर्णयको और दर्शको से समक्ष रखते हैं व समस्या निवारण के वैज्ञानिक तरीको व भविष्य की योजनाओ को प्रकट करते हैं और जिला स्तर पर चयनित होने पर अपने शोध पत्र को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता मे प्रस्तुत करते हैं।
जिला साइंस कोर कमेटी के शैक्षिक समन्वयक जरनैल सिंह सांगवान व जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने जिले के अध्यापको को अध्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला मे भाग लेने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बुलाया है जहां अध्यापको को राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन मे बच्चों को प्रोजेक्ट तैयार करवाने का प्रशिक्षण दिया गया।
इससे सम्बंधित अध्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला स्थानीय मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे सम्पन्न हुई जिस मे विभिन्न संस्थानों से आमंत्रित रिसोर्स पर्सन्स ने जिले निजी व राजकीय स्कूलों से आये अध्यापक प्राध्यापकों को  विज्ञान प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रशिक्षित किया। 
विद्यालय की प्रधानाचार्या शशि बाटला ने उपस्थित अध्यापको को बताया कि विज्ञान शिक्षा मे परियोजना कार्य का बहुत महत्त्व है और अध्यापको को अपने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक साइंस प्रोजेक्ट करवाने चाहियें ताकि उनमे विज्ञान विषय की बेहतर समझ बन सके।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला मे खालसा कालेज के पर्यावरण विभाग से दलबीर कौर, रसायन प्रवक्ता सुमन शर्मा, जेएस सांगवान, डाक्टर विजय त्यागी, गीता मल्होत्रा, ममता वर्मा, सीमा कटारिया, प्रोफेसर के सी ठाकुर, दर्शन बवेजा ने उपस्थित अध्यापको को प्रशिक्षित किया।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी ने परियोजना शोधपत्रों मे सरलता और वास्तविकता पूर्ण तथ्यों को शामिल  करने पर बल दिया व इन परियोजनाओं को जीवन से सम्बन्धित करके उपचारात्मक उपाय बताने पर फोकस किया। 
श्री गुरुनानक खालसा कालेज के पर्यावरण विभाग से दलबीर कौर ने  अध्यापको को बताया कि हम अपनी जीवन शैली मे थोड़ा सा परिवर्तन करके पर्यावरण को बहुंच रहे बड़े बड़े खतरो से बचा सकते हैं वास्तव मे मनुष्य ही अपनी गतिविधियों से पृथ्वी के मौसम व जलवायु मे परिवर्तनों के लिए जिम्मेदार है और जिसका कि खामियाजा वह प्राकृतिक आपदाओं के रूप मे झेल रहें है। 

हरियाणा विज्ञान मंच के जिला शैक्षिक समन्वयक जरनैल सिंह सांगवान ने बताया कि विज्ञान संचार को मात्र विद्यार्थियों तक ही नहीं बल्कि जन जन तक पहुंचाना होगा ताकि अंधविश्वासो से मुक्ति पाकर मानव जाति उन्नति कर सके।
रसायन प्रवक्ता सुमन शर्मा ने मौसम और जलवायु मे बदलाव को विस्तार से समझाया और अपने आसपास के पर्यावरण को समझने के लिए व उन सूक्ष्म बदलावों को अपनी परियोजनाओं का विषय बनाने पर बल दिया। इस वर्ष के विज्ञान कांग्रेस  के मुख्य विषय  ‘‘मौसम और जलवायु की समझ’’ पर प्रशिक्षित करेंगे।
जिला समन्वयक दर्शन लाल ने अध्यापको को परियोजना रिपोर्ट लिखने व कार्य प्रणाली सम्बन्धित प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ने बताया कि इस वर्ष बच्चे मानवीय गतिविधियों द्वारा मौसम एवं जलवायु पर प्रभाव, अपने आसपास के मौसम की पहचान, मौसम, जलवायु एवं परितंत्र, मौसम, जलवायु, समाज और संस्कृति, मौसम, जलवायु और कृषि तथा मौसम, जलवायु और स्वास्थ्य जैसे छह उपविषयों पर दस से सत्रह आयुवर्ग के बच्चे जूनियर और सीनियर वर्ग में बाल विज्ञान काँग्रेस में अपने रिसर्च प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर सकेंगे। इस बार बच्चे मौसम और जलवायु से संबंधित प्रोजेक्ट बनाकर अपनी वैज्ञानिक समझ का परिचय देंगे और लघु शोध पत्र प्रस्तुत कर सीधे राज्य स्तरीय आयोजन के लिए चयनित किये जाएंगें। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला के तहत शिक्षकों को विषय से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गयी है, ताकि जिले से बेहतर प्रोजेक्ट प्रस्तुतिकरण हो सके। 
प्रोफेसर के सी ठाकुर व प्रवक्ता गीता मल्होत्रा ने जलवायु और मौसम का मानव और अन्य जीवो पर प्रभाव उपविषय पर प्रशिक्षित किया। उन्होंने यमुनानगर जिले के गौरवपूर्ण विज्ञान कांग्रेस के इतिहास पर प्रकास डाला और अध्यापको को प्रेरित किया व अध्यापको मे भी विश्वास दिलाया कि वे बहुत उत्साह से इस कार्यक्रम मे भाग लेंगे और जिले का नाम विज्ञान के क्षेत्र मे रोशन करेंगे   

शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला मे 72 अध्यापकों ने भाग लिया व जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस अक्टूबर के अंतिम सप्ताह मे सम्पन्न होगी। 

स अवसर पर स्कूल के भावी बाल वैज्ञानिकों ने मेरी अपनी मौसम प्रयोगशाला शीर्षक के अंतर्गत एक प्रदर्शनी भी लगाई जिसको प्रधानाचार्या, जिला विज्ञान विशेषज्ञ व उपस्थित प्रशिक्षुओं ने देखा और सराहा भी ज्ञात रहे ये बच्चे इस विषय पर अपनी परियोजना भी बना रहे हैं।
आज की इस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला मे जिला भर से सिल्की चड्ढा, सुमन लता, राजीव नंदा, अलका रानी, संजीत कुमार, रविंदर कुमार, इंदु अरोड़ा, इक्षा धरुपद त्यागी, रितेश पाल, अवनीश कुमार, कमाल शर्मा, सोनिया विज, कोमल चड्ढा, श्वेता चौधरी, सुमन, स्मृति शर्मा, सोमेश राजन, राजेश मेंरॉय, रेनू देवी, ओमप्रकाश, मनीषा भट्टी, ममता रानी, तरुण कुमार, डाक्टर अनुराधा धीमान, सतबीर सिंह, रंजना गुलाटी, प्रीती जैन, प्रीटी जैन, ए. सीता, हिमानी शर्मा, ज्योतिका डांग, रीना मल्होत्रा, गौरव कुमार, मुक्ता भाटिया, मंजू आर्या, रजनी पुंडीर, गीता मल्होत्रा, डाक्टर बी. के. रीन, मनीषा खेत्रपाल, वनीता गोयल, श्रीश कुमार, अजमेर शिंह संधू, मधु मेहता, सरिता, ज्योति गर्ग, रश्मी गुप्ता, पूजा, मनोज कुमार, ज्योति, विनोद, राजेन्द्र झाम्ब, दीपिका भाटला, ब्रह्म सिंह सहित अन्य अध्यापको, टीजीटी व प्राध्यापकों ने भी भाग लिया