Saturday, March 17, 2012

प्रकाश के प्रयोग का बक्सा Optics Experiment Box

प्रकाश के प्रयोग का बक्सा  Optics Experiment Box 
  प्रकाश मंच  optical bench
कक्षा आठ व दस के छात्र प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन के पाठ में अक्सर ये प्रश्न करते हैं कि जो आप प्रकाश की किरण(ray diagram of refraction of light को ब्लैक बोर्ड पर बनाते है वो प्रकाश की किरणे क्या हम देख सकते हैं?
यही प्रश्न वो प्रकाश मंच (optical bench) के पास प्रयोग करते समय पूछते है कि उल्टा प्रतिबिम्ब तो बन गया पर प्रकाश की किरणे फिर भी नहीं दिखी 
बात तो बच्चों की बिलकुल सही है 
वो तो प्रकाश की किरणे वैसे ही देखना चाहते हैं, 
जैसी कि मैंने श्यामपट पर बना कर दिखाई थी, 
जैसी उनकी पाठ्यपुस्तक में चित्र दिखाया गया है 
आज कल उच्च तकनिकी युक्त विद्यालयों में जहां ई-कक्षाएं शुरू हो गयी है या फिर कम्प्यूटर द्वारा पाठ्यक्रम करवाया जाता है वहाँ पर वे एनिमेशन के माध्यम से यह देख सकते है परन्तु कम सुविधाओं वाले या सुविधाविहीन विद्यालयों में कोई ना कोई नवाचार युक्त प्रयोग ही बच्चों को यह दिखा सकता है कि प्रकाश की किरणे कैसे चलती हुई दिखती है 
कैसे वो अपवर्तन refraction परावर्तन reflation को होता हुआ देख सकते है 
उत्तल लेंस, अवतल लेंस, उत्तल दर्पण, अवतल दर्पण, प्रिज्म, कांच का गुटका, समतल दर्पण से प्रकाश की किरणों के टकराने और गुजरने की प्रक्रिया को देख सकते हैं 
इस समस्या के निवारण के लिए एक प्रकाश के प्रयोग का बक्सा Optics Experiment Box बनाया गया 
इस प्रकाश के प्रयोग के बक्सा Optics Experiment Box से बच्चे संतुष्ट हुए और उन्होंने फोकस बिंदु को भी देखा
कैसे बनाएँ प्रकाश के प्रयोग का बक्सा Optics Experiment Box ?
Optics Experiment Box 
आवश्यक सामग्री व बनाने की विधि: जस्ती लोहे की चद्दर का डेढ़ फुट लंबा एक फुट चौड़ा व आधा फुट ऊँचा बाक्स, खुलने वाले ढक्कन और छत वाले फलक पर कांच की शीट लगवा लेते हैं
दो लेजर पेन्सिल टार्च,एक एक उत्तल लेंस, अवतल लेंस, उत्तल दर्पण, अवतल दर्पण, प्रिज्म, कांच का गुटका, समतल दर्पण,धूप या अगरबत्ती, सफेद कागज आदि
कांच की शीट को टेप से चिपका कर फिक्स कर लें
बाक्स के अंदर एक लेंस आदि रखने के लिए एक लकड़ी या जस्ती चद्दर का ही मंच बनवा ले
अपवर्तन refraction परावर्तन reflation को होता हुआ देखें 
उस मंच पर क्ले की सहयता से सभी लेंस व दर्पण सीधे खड़े कर लें
धूप या अगरबत्ती जला कर बाक्स के भीतर रख देते हैं थोड़ी देर में जब बाक्स के अंदर धुंआ फ़ैल जाए तो धूप या अगरबत्ती को बाहर निकाल लेते हैं   
दो पेन्सिल लेजर टार्च ले कर बारी बारी लेंस, दर्पण,स्लैब, प्रिज्म पर लेजर बीम डालें
अब आप आपतित, अपवर्तित,परावर्तित किरण फॉक्स बिंदु देख सकते हैं
कोण बदल बदल कर किरणे डालने से बाकी स्थितियां भी समझा/समझ सकते हैं 
अब बच्चों को प्रकाश के प्रयोग व अपवर्तन और परावर्तन समझ आ गयें हैं
इस बाक्स को एक प्रभावी शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में प्रयोग किया जा सकता है 
वैसे तो लेजर किरण भी नहीं दिखाई देती परन्तु धुंआ करने पर धूमित माध्यम में उस का मार्ग दिखाई देता है

देखें इस बाक्स के प्रयोग का यह विडियो
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा


            

Saturday, March 03, 2012

आकाश दर्शन के प्रेमियों के लिए मार्च महीना Sky Watching in March 2012

आकाश दर्शन के प्रेमियों के लिए मार्च महीना Sky Watching in March 2012
मार्च का महीना आकाश दर्शनार्थियों के लिए बहुत बेहतरीन दृश्य प्रस्तुत करेगा
एक नहीं दो नहीं पुरे पांच पांच ग्रह, 
वो भी नग्न आँख से देखने के लिए, 
बस पहचानने के लिए नज़र चाहिए, 
कुछ आप प्रयास करो कुछ मदद हम करते हैं 
सी.वी. रमण विज्ञान क्लब के सदस्य तो माहिर हो चुके है आकाश दर्शन में, 
शुक्र,बृहस्पति,शनि,मंगल,बुध और साथ में चंदमा की अठखेलियाँ,
खास नज़ारे .....
मार्च 2010 की मंगल की तस्वीर 
3 मार्च 2012 शनिवार यानी आज रात 1 AM से 2 AM  के बीच पृथ्वी सूर्य और मंगल के बीच से गुजरेगी यह स्तिथि 4 व 5  मार्च को भी रहेगी, इन दिनों मंगल पृथ्वी के सबसे निकट होगा और अपनी चिरपरिचित लाल चमक के साथ आकाश पर विराजमान होगा मंगल का यह अद्भुद दृश्य 7 मार्च 2012 को पूर्ण चन्द्र के साथ देखने वाला होगा 
मंगल को पहचानना आसान है 
नियम वही है तारे टिमटिमाते हैं और ग्रह नहीं, 
ग्रह ऐसे लगते है जैसे कोई बल्ब दूर रौशनी फैला रहा हो, 
मंगल ग्रह की यह स्तिथि दो वर्षों के बाद आती है 
खगोलविदों की भाषा में इस घटना को अपोजिशन आफ मार्स (an opposition of Mars) कहते है 
opposition of Mars
 10 मार्च 2012 यमुनानगर 
5 मार्च 2012 को मंगल अपने कक्ष में पृथ्वी के  100 मिलियन किलोमीटर (62 लाख मील)  नजदीक होगा और जब सन् 2013 में अपनी दीर्घ वृत्तिय कक्षा में अपनी पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होगा तो इसकी चमक आज कल की चामल से 1/9 रह जायेगी  
7 - 8 मार्च 2012 को पूर्ण चंद्रमा के साथ देखा गया मंगल ग्रह अपनी लाल चमक के साथ, 
12-13 मार्च 2012 को तैयार रहें वीनस और जुपिटर यानी शुक्र और बृहस्पति अपनी अधिकतम निकटता के साथ,  


मार्च 2012 के प्रथम व दूसरे सप्ताह में लगातार वीनस और जुपिटर यानी शुक्र और बृहस्पति नजदीक आते रहेंगे, 13 मार्च को शुक्र और बृहस्पति निकटतम होंगे 
यह नज़ारा विलक्षण है 
इसलिए इसका आनंद लें 




आज 13 मार्च का दिन है और आज ये दोनों अपनी न्यूनतम दूरी पर हैं आज क्लब सदस्यों ने इस घटना का नज़ारा लिया और इसी के साथ क्लब की यह गतिविधि पूरी होती है 
वैसे तो पूरे मार्च महीने तक सदस्य आकाश पर नजर रखेंगे और अब सब को काफी आदत हो गयी है आकाश दर्शन की
आकाश दर्शन एक नियमित गतिविधि है अब सब सदस्यों को शुक्र पारगमन के लिए थोड़ा थोड़ा प्रशिक्षण दिया जाता रहेगा 
पोस्ट को अपडेट किया जाता रहेगा   
   

Tuesday, February 28, 2012

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया National Science Day

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया National Science Day 
 स्पेक्ट्रोस्कोपी से ‘रमन प्रभाव’ की खोज  
विज्ञान से होने वाले लाभों के प्रति समाज में जागरूकता लाने और वैज्ञानिक सोच पैदा करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में हर साल २८ फरवरी को देश भर में  राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है इसलिए आज  २८ फरवरी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विधालय अलाहर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया, इस  अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया और एक विज्ञान परियोजना प्रदर्शनी लगाई गयी।
छात्रों ने इस बार की राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की मुख्य थीम ‘स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प और परमाणु सुरक्षा’ पर केंद्रित परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत की । इस अवसर पर छात्रों ने विभिन्न विज्ञान विषयों पर अपनी अपनी परियोजना प्रदर्शनी भी लगाई ।
छात्रों ने ऊर्जा के परम्परागत और गैरपरम्परागत साधनों पर चर्चा की और सोलर उर्जा, पवन उर्जा, ज्वारीय उर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर विचार प्रस्तुत किये। 
विज्ञान अध्यापक श्री दर्शन लाल 
विज्ञान अध्यापक श्री दर्शन लाल ने बताया कि हर साल भारत में २८ फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है इस दिन प्रख्यात भौतिकिशाष्त्री सर सी.वी.रमन ने १९२८ में स्पेक्ट्रोस्कोपी से ‘रमन प्रभाव’ की खोज की। 
मशहूर भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा खोजे गए रमन प्रभाव की मदद से कणों की आणविक और परमाणविक संरचना का पता लगाया जा सकता है और इसीलिए भौतिक और रासायनिक दोनों ही क्षेत्रों में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है
दररअसल रमन प्रभाव की खोज ने आइन्सटाइन के उस सिद्धांत को भी प्रमाणित कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रकाश में तरंग के साथ ही अणुओं के गुण भी कुछ हद तक पाए जाते  है। 
इससे पहले न्यूटन ने बताया था कि प्रकाश सिर्फ एक तरंग है और उसमें अणुओं के गुण नहीं पाए जाते. आइन्सटाइन ने इससे विपरीत सिद्धांत दिया और रमन प्रभाव से वह साबित हुआ ।  

 परियोजना रिपोर्ट करती छात्राएं 
इस खोज के दो साल के बाद सर सी.वी रमन को १९३० में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 
इसलिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, भारतीय विज्ञान और वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महान दिन है।
विज्ञान दिवस के अवसर पर स्कूल के बच्चो को विभिन्न विज्ञान प्रयोग करके दिखाए और बच्चो ने भी अपने द्वारा तैयार ‘बेस्ट आउट आफ वेस्ट’ प्रयोग दिखा कर विज्ञान दिवस मनाने में अपना योगदान दिया।    
श्री संजय शर्मा प्रवक्ता ने नाभकीय सयंत्रों की सुरक्षा और उनसे सुरक्षित उर्जा प्राप्ती पर अपने विचार रखे ।
इस अवसर पर दिव्या,सोनम,शिल्पा,प्रियंका,मोहित,अजय,जोनी,रजत,नेहा,दीक्षा ने भी विज्ञान के विभिन्न उपविषयों पर अपने परियोजना पेपर पढ़े ।
मुकेश रोहिल,मनोहरलाल,दर्शन लाल, राम नाथ बंसल,संदीप अध्यापकों का योगदान सराहनीय रहा ।

प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

Saturday, February 25, 2012

आज चंद्रमा, बृहस्पति और शुक्र प्रस्तुत करेंगे सुंदर नज़ारे Jupiter, Venus, crescent moon

चंद्रमा, बृहस्पति और शुक्र प्रस्तुत करेंगे सुंदर नज़ारे Jupiter, Venus, crescent moon 

सी.वी.रमण विज्ञान क्लब के सदस्य फरवरी माह के अंतिम सप्ताहंत में चंद्रमा, बृहस्पति और शुक्र के सुंदर पैटर्न्स का नज़ारा ले रहे है
नवचन्द्र के उदय के साथ ही सूर्यास्त के बाद यह नज़ारा आकाश में दृष्टिगोचर हो रहा है
अगले दो चमकते ग्रहों बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा की त्री-संयोजन की विभिन्न अवस्थाएं दिखेंगी
ये अवस्थाएं सीधी रेखा और बाद में बढ़ते हुए त्रिकोणीय अवस्था तक जायेंगी
क्लब सदस्य २५ और २६ की रात को इन तीनो की निकटता को देखेंगे और इस विलक्षण खगोलीय नज़ारे का आनंद लेंगे
क्लब सचिव ने बताया कि आम आदमी चंद्रमा से तो परिचित है परन्तु शुक्र और बृहस्पति ग्रह को कम ही लोग आकाश में पहचान सकते हैं ये दोनों ग्रह नग्न आँख से दिखाई देंगे और दूरबीन की आवश्यकता नहीं है रात्री आकाश में सब से चमकदार ये तीनो ही होंगे इसलिए इन को पहचानने में कोई परेशानी नहीं होगी
 Jupiter, Venus, crescent moon
08:30 PM 25/02/2012
शुक्र ग्रह यानि वीनस को “आकाश की रानी” कहा जाता है वीनस पृथ्वी के निकट है यह वर्षभर पृथ्वी से दृष्टिगोचर है परन्तु बृहस्पति आजकल पृथ्वी के निकट है और अब  पृथ्वी की कक्षा के बाहर जा रहा है शुक्र और बृहस्पति धीरे-धीरे करीब बढ़ रहे हैं और एक दूसरे को 13 मार्च को क्रास हो जायेंगे
यदि आपके पास दूरबीन हो तो देर रात्री मंगल और शनि ग्रह भी स्पष्ट देखे जा सकते हैं बृहस्पति पृथ्वी के नजदीक है इसलिए दूरबीन की मदद से उसे और उसके छल्ले भी अच्छी तरह से देखे जा सकते है
क्लब के इस कार्यकम से बच्चो और आम आदमी को बहुत लाभ होगा
वे ग्रह और तारों को पहचानना सीखेंगे और उनकी रूचि आकाश दर्शन व खगोलविज्ञान के प्रति बढ़ेगी
यदि आकाश साफ़ रहा तो आप भी तैयार रहिये आज रात्री को बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा की निकटता को अपनी आँखों से देखने के लिए 
अमर उजाला माय सिटी २६-०२-२०१२
२६-०२-२०१२ को चिठ्ठी का अधतन
२७-०२-२०१२ को चिठ्ठी का अधतन
२८-०२-२०१२ को चिठ्ठी का अधतन


प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

Wednesday, February 22, 2012

पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज Pascal's Mystic Hexagram

पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज Pascal's Mystic Hexagram
पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज 
बच्चो को कुछ नया जानना था आज, इसलिए उन्हें राष्ट्रीय गणित वर्ष-२०१२ बारे बताया गया कि भारत सरकार ने वर्ष २०१२ को 'राष्ट्रीय गणित वर्ष' मनाने की घोषणा की है और श्रीनिवास रामानुजन् जी के जन्म दिवस २२ दिसम्बर को 'राष्ट्रीय गणित दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा हुई है श्रीनिवास रामानुजन् जी महान भारतीय गणितज्ञ के निमित्त 'राष्ट्रीय गणित दिवस' किया गया है
अब क्लब सदस्यों ने आज गणित के बारे में ही कुछ नया जानना चाहा इसलिए उनको सबसे पहले महान गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल के बारे में बताया 
पास्कल के रहस्यमयी षट्भुज को बनाकर देखने की इच्छा जाहिर की,क्लब सदस्यों ने सूरज सिंह के नेतृत्व में उठाया परकार, पेन्सिल, स्केल, कागज और हो गए शुरू बनाना 'पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज Pascal's mystic hexagon'
आओ जाने क्या है पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज
(Pascal's mystic hexagon)?

इसे पास्कल की प्रमेय से भी जाना जाता है
कोई भी वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय, अतिपरवलय की परिधि पर छह बिंदु A,B,C,D,E,F लीजिए AB,BC,CD,DE,EF और FA को मिलाईये आमने सामने की जीवाओं को बाहर बढाइये जो कि क्रमशः P, Q, R पर मिलती हैं अब P, Q, R को मिलाने पर एक सीधी रेखा प्राप्त होती है  
इस को पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज या पास्कल की प्रमेय के नाम से गणित के इतिहास में जाना जाता है

बच्चो ने काफी कोशिश कर के एक वृत्त में पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज बनाया 
Pascal's Mystic Hexagram 
अब अगले प्रयासो में ये बच्चे दीर्घवृत्त, परवलय, अतिपरवलय में भी पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज बनाएंगे
कैसे बनाया ?
एक वृत्त ३ से.मी. त्रिज्या का बनाया
वृत्त  परिधि पर छह बिंदु A,B,C,D,E,F लिये
AB,BC,CD,DE,EF और FA को मिलाया
AB व DE को बाहर बढ़ाया जो P पर मिलती हैं
BC व EF को बाहर बढ़ाया जो Q पर मिलती हैं
CD व AF को बाहर बढ़ाया जो R पर मिलती हैं
P, Q, R को मिलाने पर एक सीधी रेखा प्राप्त हुई या P, Q, R एक ही रेखा पर स्तिथ हैं 
                                                        दीर्घवृत्त में यह कुछ ऐसा होगा 
दीर्घवृत्त में पास्कल का रहस्यमयी षट्भुज 

प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

Tuesday, January 31, 2012

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का भ्रमण National Physical Laboratory New Delhi

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का भ्रमण भाग-१ National Physical Laboratory New Delhi Part-1
National Physical Laboratory
देश की राजधानी दिल्ली मे बहुत कुछ ऐसा भी है जो विज्ञान शिक्षार्थियों,शोधार्थियों के लिए बहुत महत्व रखता है ऐसा ही एक स्थान मुझ अपने दिल्ली मे एन.पी. एल. अतिथिगृह प्रवास के दौरान देखने को मिला.
डा.आर.पी.पन्त के साथ 
यह स्थान है राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला,पूसा न्यू दिल्ली जिसके बारे मे कहा जाता है A Premier Research Laboratory in India in the Field of Physical Sciences.
9 से 12 जनवरी 2012 के दिल्ली दौरे मे मेरी NPL देखने की इच्छा पूरी हुई. मै अपने मित्र मैसूर कर्नाटक के अध्यापक महेश चंद्र और भुवनेश्वर ओडिसा के नवीन जी के साथ राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला पहुंचा.थोड़ी सी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हम पहुंचे सबसे पहले डा.आर.पी.पन्त जी की लैब 'सामग्री अभिलक्षण प्रभाग' (Materials Characterization Division) मे,जहां डा.पन्त ने हमे विस्तार से चुम्बकीय तरल पदार्थ(magnetic fluids) के बारे मे बताया.चुम्बकीय-द्रव,चुंबकीय नैनोकणों के कोलाइडयन निलंबन हैं 
ferrofluid 
इसे ferrofluid भी कहा जाता है फेरोफल्युड एक तरल है जो चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिती मे शक्तिशाली ढंग से चुम्बकीय हो जाता है यह एक  कोलाइडयन निलंबन की तरह है जो नैनोस्केल माप के फेरोमेगनेटिक कण किसी करियर द्रव मे लटके रहते हैं.इन फेरोमेगनेटिक कणों का व्यास 10 नैनोमीटर या उस से भी कम होता है.फेरोफल्युड या द्रव बनाने के लिए तीन पदार्थ चाहियें.बनाने की विधि यहाँ देखें. 
१.आर्द्रक १०%(surfactant 10%)
२.चुम्बकीय ठोस पदार्थ जैसेFeCl3,FeCl2 5 %(Magnetic Solid)  
३.कैरियर या सम्वाहक द्रव 85 % (85% Carrier)
 surfactant के रूप में oleic एसिड,और वाहक द्रव कणों निलंबित के रूप में मिट्टी के तेल का प्रयोग किया जा सकता है.
डा.आर.पी. पन्त जी ने बताया कि फेरोफल्युड के बहुत अनुप्रयोग है इसका प्रयोगों का भविष्य बहुत ही उज्जवल है.फेरोफल्युड का उपयोग कैंसर से लड़ने के लिए किया जाता है.डा.आर.पी.पन्त ने हमें बताया कि फेरोफल्युड का उपयोग कृषि मे किये जाने की अपार सम्भावनाएं हैं यदि ऐसा हो जाता है तो यह एक नयी कृषि क्रान्ति होगी.यहाँ हमने फेरोफल्युड के बारे मे और भी बहुत सी जानकारियाँ मिली. डा.पन्त ने हमें बताया कि जनवरी २०१३ मे एन.पी.एल.फेरोफल्युड पर क अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित करवाने जा रहा है जिसमे देश विदेश से वैज्ञानिक,डेलिगेटस भाग लेंगें.डा.पन्त ने हमें इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस मे भाग लेने के लिए प्रेरित किया.यदि कोई इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस मे भाग लेना चाहता है तो वो इस लिंक 13th ICMF  पर जा कर अपना पंजीकरण करवा सकता है. 
फेरोफल्युड के कुछ अन्य उपयोग...... 
१.कुछ इलेक्ट्रोनिक युक्तियों मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
२.यांत्रिक अभियांत्रिकी मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
३.अंतरिक्ष यान और विमान निर्माण तकनीक मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
४.विश्लेषणात्मक उपकरण बनाने मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
५.थर्मोमेग्नेटिक ऊष्मा संवहन मे 
६.प्रकाशिकी मे 
७.विभिन्न प्रकार की कलात्मक आकृतियाँ बनाने मे जैसे बेबिलोनियन स्तम्भ आदि   
बाकी का विवरण आगामी किस्तों मे वर्णित किया जाएगा ........ 

प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

Saturday, January 14, 2012

वैज्ञानिक सोच के लिए विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन International Conference on Science Communication for Scientific Temper

वैज्ञानिक सोच के लिए विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 
International Conference on Science Communication for Scientific Temper
                                            विज्ञान रिपोर्ट Science Reporting 

            
NASC काम्प्लेक्स PUSA,नयी दिल्ली 
NASC काम्प्लेक्स PUSA,नयी दिल्ली में 10 to 12 January 2012 तक चल रही अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस सम्पन्न हुई.
सी.एस.आई.आर.-निस्केयर,विज्ञान प्रसार,एन.सी.एस.टी.सी. नेटवर्क-DST के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय   कांफ्रेंस में देश-विदेश से आये बहुत सारे विज्ञान संचारकों,वैज्ञानिकों,शिक्षाविदों एवं सरकारी नुमाइंदों ने भाग लिया और वैज्ञानिक सोच विकसित करने में विज्ञान संचार पर अपने शोधपत्र पढ़े और महत्वपूर्ण विचार सांझे किये.  
राष्ट्रीय कृषि विज्ञान काम्प्लेक्स के ए.पी.शिंदे आडिटोरियम में १०-०१-२०११ को सुबह १० बजे इस  अंतर्राष्ट्रीय   कांफ्रेंस का उद्घाटन हुआ था    
उद्घाटन सत्र का दृश्य 
गौहर रज़ा जी, महेश भट्ट जी  
इस  उद्घाटन सत्र  को निम्न महानुभावों ने संबोधित किया 
१. श्री गौहर रज़ा
२. श्री महेश भट्ट 
३. श्री गंगन प्रताप सिंह 
४, श्री जस्टिस मारकंडेय काठ्जू
५. श्री बर्नाड स्चिएले 
६. श्री बी.एम. भार्गव
७. श्री सुबोध मोहंती 
उद्घाटन सत्र  
आडिटोरियम 
श्री जस्टिस मारकंडेय काठ्जू जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया कि सही मायने में लोकतंत्र और वैज्ञानिक सोच क्या है उनके अनुसार सही मायने में आधुनिक विज्ञान ही हमें मानव समाज को और अधिक सुखी बना सकता है आपने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान परमाणु बम भी बना सकता है और उसी को परमाणु ऊर्जा में बदल कर मानव जीवन सुखमय भी बना सकता है आपने प्राचीन भारतीय विज्ञान के विकास पर भी प्रकाश डाला दशमलव और जीरो शून्य भारत की देन है लाख,करोड़,अरब,खरब,पदम,नील,शंख तक संख्याएँ हमारी ही देन हैं. 
NASC,PUSA New Delhi का यह आडिटोरियम बहुत ही सुंदर बड़ा और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिगोचर है.इसमें एक राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्राहलय भी है जिस में बहुत ही ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी और नज़ारे हैं प्राचीन काल से लेकर आज तक के कृषि विकास का बड़ा ही नयनाभिराम नज़ारा है.सभी को यह राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्राहलय जरूर देखना चाहिए.
 डा.अरविन्द मिश्रा जी एवं मैं 
उद्घाटन सत्र  के बाद चायकाल में मै बनारस काशी से आये डा.अरविन्द मिश्रा जी से मिला आपको मै ब्लॉग के माध्यम से लगभग डेढ़ वर्षों से जानता हूँ परन्तु ! कईं बार अवसर बने भी परन्तु संयोगवश मुलाक़ात न हो सकी, आप सच में वैज्ञानिक सोच के स्वामी हैं आप नए विज्ञान संचारको के साथ सहयोगात्मक भावना और मार्गदर्शन के फलस्वरूप ही मैं   मास्टर एक विज्ञान ब्लोगर बन सका.
डा.अरविन्द मिश्रा स्वय एक सत्र की अध्यक्षता करेंगे इस सत्र में विज्ञान गल्प सम्बन्धित पेपर प्रस्तुत किये जायेंगे.संयोगवश मेरा सत्र भी ठीक उसी समयांतराल पर है जब डा. मिश्रा जी का इसलिए मै साईंस फिक्शन के इस सत्र का लाभ नहीं उठा सका.  
कांफ्रेंस हाल 
विश्वस्तरीय कांफ्रेंस हाल में आयोजन का प्रबंध किया गया था विभिन्न कांफ्रेंस हाल में १२ समानांतर सत्रों में सभी वक्ताओं ने तीनो दिन अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये. 

अब मै लखनऊ से आये एक अन्य ब्लोगर,कथाकार और विज्ञान ब्लोगर श्री जाकिर अली रजनीश जी से भी मिला इन से भी मेरी पहली बार मुलाक़ात हुई वैसे इनसे फोन पर कभी कभी बात हो जाती थी
इनके साथ मुलाकात भी यादगार रहेगी.
अब मुझे पता चला कि हमें मिलने दिल्ली के अन्य ब्लोगर साथी भी आ रहे हैं 
बात हो ही रही थी कि देखते हैं कि संतोष त्रिवेदी जी आ चुके हैं.
आप भी बहुत ही हसमुख और पेशे से अध्यापक हैं और कुशल ग्लेक्सी मोबाइल ऑपरेटर भी आपसे बहुत सी काम की बाते सीखीं.


बाएं से दायें
१. महेश चंद्र कर्नाटक से
२. डा. अरविन्द मिश्रा जी
३. मैं दर्शन लाल बवेजा
४. श्री संतोष त्रिवेदी जी
५. डा.जाकिर अली 'रजनीश' जी

फिर सब ने मिल कर चाय काफी का आनंद उठाया 
निमिष कपूर जी से बातचीत की 
निमिष जी के पास प्रेस मीडिया कवरेज का चार्ज था इसलिए वे काफी वयस्त थे .
सब ने विज्ञान ब्लोग्स के बारे में चर्चा की और ब्लोग्स के माध्यम से विज्ञान संचार को एक नयी तकनीक के तौर पर पसन्द किया गया और चर्चा की गयी की आगामी महीनो में विज्ञान ब्लोगिंग पर एक वर्कशाप करवाई जाए जिसमें नए और कार्यरत विज्ञान संचारकों को अंतर्जाल के प्रयोग में निपुण किया जाए.
हिंदी विज्ञान पत्रिका 'विज्ञान प्रगती' के प्रमुख श्री प्रदीप शर्मा जी से मुलाकात 
Development communication Chairperson : Dr Ashwini Kumar, TISS

दिनांक ११-०१-२०१२ को ट्रेनिंग हाल में सत्र -९ 
Invited Speaker: Dr. N Raghuram

      Darshan Lal:  Role of Science Blogs in Developing Scientific Temper through Digital Media 
     शीर्षक: डिजिटल मिडिया के माध्यम से वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने में विज्ञान चिट्ठाकारी की भूमिका
                  Seemin Rubab:Communicating Science through Thematic Philately
                     श्री अजय शेओपुरी जी ने CSIR-NISCAIR Tube: A novel way to communicate science के बारे ने बताया कि CSIR-NISCAIR ट्यूब फेमस YOU ट्यूब की ही तरह से है जहां आप अपने विज्ञान सम्बंधित वीडयो अपलोड कर सकते है इनका काम विशेष रूप से सराहा गया हमारा सी.वी.रमण विज्ञान क्लब भी अपने वीडियो इस टयूब पर अपलोड करेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे व बड़े भी लाभान्वित हो सकें.



 Anu Yadav E–teaching, influence of new technology on education system and in eveloping scientific temper
       Neerja Raghvan: Innovative methods & creative aids for communicating science
दिल्ली से आये मिलने के लिए श्री अविनाश वाचस्पति जी और संतोष त्रिवेदी जी 
                        ब्लोगर्स चिट्ठाकार विचार-विमर्श करते हुए और साथ में धूप का आनंद लेते हुए   
                                शहीदों को नमन करने भी गए 'अमर जवान ज्योति'India Gate
                      NPL का बेहतरीन गेस्ट हाउस,उच्च स्तरीय प्रबन्ध ठहरने में कोई परेशानी नहीं हुई  
        कर्नाटक से आये महेश  चंद्र जो कि रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं और बहुत ही क्रियात्मकता के मास्टर हैं 
 इस सम्मेलन में भाग लेने की एक और भी उपलब्धि रही कि हमने 'राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला'का भ्रमण किया 
     इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगली पोस्ट में की जायेगी यह अनुभव अविस्मणीय था आयोजको का धन्यवाद 
  श्रीमान गौहर रज़ा जी के साथ बात की विज्ञान संचार पर और आपका धन्यवाद बधाई सफल आयोजन की
                   एक महत्वपूर्ण चर्चा और विमर्श हुआ इस सत्र में अध्यक्ष थे इंजी. श्री अनुज सिन्हा जी 
        तर्कशील विचारों से भरपूर इस चर्चा में ओजस्वी विचारक हैं श्री स्यामल चक्रवर्ती कोलकाता वि.वि से 
युवा वक्ताओं को भी शामिल किया गया का. प्रवीन खान ने अपने विद्यार्थी जीवन को उद्घृत करते हुए बताया            कि आज का युवा विद्यार्थी किस प्रकार से वैज्ञानिक सोच का स्वामी बन सकता है. 
                           समापन सत्र  Valedictory Session






    श्री सुबोध मोहंती  
और इस प्रकार समापन हुआ इस वैज्ञानिक सोच के लिए विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का दिनाकं १२-०१-२०११ को .

प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा