Wednesday, February 21, 2018

उपग्रहीय तकनीकी से भू-प्रेक्षण पर कार्यशाला Workshop on Satellite Technology

उपग्रहीय तकनीकी से भू-प्रेक्षण पर कार्यशाला Workshop on Satellite Technology
जिला शिक्षा अधिकारी यमुनानगर
अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में तरक्की व करियर की अपार संभावनाएं- आनन्द चौधरी
सेटेलाइट टेक्नोलॉजी पर एकदिवसीय कार्यशाला व प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी।
डॉ मनोज यादव वरिष्ठ वैज्ञानिक
हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, हिसार के  वैज्ञानिकों ने दिया प्रशिक्षण।
विद्यालय के बच्चों व अध्यापकों में अंतरिक्ष विज्ञान में जागरूकता उत्पन्न करने व उन्हें उपग्रहीय तकनीकियों से वाकिफ करवाने के उद्देश्य से एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला  'उपग्रहीय तकनीकी से भू-प्रेक्षण' का आयोजन शहीद नवीन वैद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक मॉडल टाउन में किया गया।
यह कार्यशाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), हरियाणा स्पेस एप्लिकेशन सेंटर हिसार, हरियाणा विज्ञान एवं तकनीकी विभाग पंचकूला व जिला शिक्षा विभाग यमुनानगर के सयुंक्त तत्वाधान में आयोजित हुई। कार्यशाला का उद्घाटन जिला विज्ञान विशेषज्ञ विशाल सिंघल व जिला गणित विशेषज्ञ मोमन राम (कार्यक्रम संयोजक) ने किया।
प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम चरण में हारसेक, हिसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मनोज यादव ने उपस्थित विज्ञान व भूगोल प्राध्यापकों, विद्यार्थियों को सेटेलाइट तकनीक व उनके अनुप्रयोगों से परिचित करवाया। डॉ मनोज यादव ने पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के जरिये जीपीएस सिस्टम, रिमोट सेन्सिंग, मौसम-जलवायु मोनीटरण, अंतरिक्ष अन्वेषण, उपग्रहीय सैन्य सहायता, भारतीय मंगलयान कार्यक्रम, सेटेलाइट नेविगेशन, उपग्रह प्रक्षेपन एवं दूरसंचार के क्षेत्र में सेटलाइट टेक्नोलॉजी बारे प्रशिक्षण दिया। डॉ यादव ने अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित
जिला विज्ञान विशेषज्ञ
कार्यशाला के दूसरे चरण में एक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में 97 बच्चों ने भाग लिया। प्रश्नोत्तरी में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम व उपग्रह अनुप्रयोगों से सम्बन्धित प्रश्न पूछे गए।
इस अवसर पर एक वादविवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 22 प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्यों द्वारा सेटेलाइट तकनीकी मानवता के लिए वरदान विषय के पक्ष एवम विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किये।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में आर्यन रावमा विद्यालय बुढ़िया ने प्रथम, सिमरन शिव ओम हरि ओम पब्लिक स्कूल ने द्वितीय, याचना राकवमा विद्यालय यमुनानगर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वादविवाद प्रतियोगिता में सलीम राविमा विद्यालय व सोनाली एस डी पब्लिक स्कूल जगाधरी ने प्रथम, याचना राकवमा विद्यालय यमुनानगर  व तन्नू सोनाली एस डी पब्लिक स्कूल जगाधरी ने द्वितीय व रजत विद्यावन्ति पब्लिक स्कूल व आर्यन रावमावि बुढ़िया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जिला शिक्षाअधिकारी श्री आनन्द चौधरी व प्रधानचार्य डॉ सुनील काम्बोज ने विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। जिला शिक्षा अधिकारी आनन्द चौधरी ने अपने धन्यवाद संबोधन में कहा कि हारसेक हिसार व इसरो द्वारा इस कार्यशाला को यमुनानगर जिले में करवाने के लिए जिला शिक्षा विभाग उनका आभार व्यक्त करता है और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम यमुनानगर में करवाये जाने के लिए निमंत्रण देता है।  हिंदी प्रवक्ता अरुण कुमार कैहरबा ने उपस्थित प्राध्यापकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों व आयोजको के लिए धन्यवाद धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा।
कार्यक्रम में विशाल सिंघल, जयकुमार गोयल, सुभाष कालीरमन व दर्शन लाल बवेजा ने निर्णायक मंडल में अपनी भूमिका अदा की।
कार्यक्रम में हरियाणा स्पेस एप्लिकेशन सेंटर हिसार से सहायक वैज्ञानिक डॉ कपिल रोहिल्ला , अंकुर शर्मा व तकनीकी सहायक नंद लाल व जिले भर से 26 विद्यालयों के तीस प्राध्यापक भी मौजूद रहे।
अखबारों में



                   
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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Monday, February 12, 2018

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस National Deworming Day

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस National Deworming Day
विज्ञान क्लब सदस्य 
बच्चों को कृमिनाशक गोली बारे किया जागरूक
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर विद्यालय के  1600 बच्चों को दी जाएगी एल्बेंडाजोल की चबा कर खाएं जाने वाली गोली।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प यमुनानगर में  राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने  बच्चों को पेट में पाए जाने वाले कीड़ों (कृमियों) के कारण, हानियों व उनसे बचाव के उपायों बारे जागरूक भी किया।
विद्यालय के विज्ञान क्लब, इको क्लब व एनएसएस, एनसीसी के सदस्यों के लिए एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विचारगोष्ठी का आरम्भ विद्यालय के प्रधानाचार्य  परमजीत गर्ग ने किया। उन्होंने बताया कि देश भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नेशनल डीवार्मिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में विद्यालय के बच्चों को दस फरवरी को कृमिनाशक एलबेंडाजॉल की चबा कर खाएं जा सकने वाली एक एक गोली दी जाएगी। जिससे वो पेट के कीड़ों से बचे रहेंगे। जो बच्चे छूट गए हैं उनको 15 फरवरी को यह दवाई दी जायेगी।
विद्यालय के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बताया कि बच्चो में इनसे संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक होता है। इनसे सभी आयु वर्गों  बड़े या बच्चे, सभी को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है।  राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विद्यार्थियो को जिनकी आयु 1 वर्ष से 19 वर्ष तक है को कृमिनाशक गोलियां खिलाई जा रही है। अभी विशेषकर गोलकृमी एस्केरिस की दवाई दी जा रही है जिसको खाने से बच्चे इस कृमि के अटैक से बचे रह सकते हैं। कुपोषित बच्चे के पेट में कृमि होने की अधिक संभावना होती है। 
क्या होते हैं पेट के कीड़े?
पेट के कीड़े असल में परजीवी होते हैं जो हमारे शरीर में रह कर शरीर से ही अपना पोषण पाते हैं। गोल कृमि (एस्केरिस), फीता कृमि, हुकवार्म, लिवेरफ़्लूक, पिनवार्म, फाइलेरिया वार्म सब  परजीवी हैं जो जीवों के शरीर में रह कर अपना पोषण करते हैं और फलस्वरूप अन्य जीवों को बीमार कर देते हैं।
इनके सक्रमण के कारण।
खुले में मल त्याग, भोजन से पहले हाथों का अच्छे से ना धोया जाना, सब्जी फलों को बिना धोये खाना, नंगे पैर चलना, दूषित जल को पीना, भोजन को ढ़क कर न रखना  आदि बहुत से कारण हैं जिस वजह से इन कृमियों के अंडे मानव शरीर में पहुँच जाते हैं। जीवों के मल के साथ इनके अंडे शरीर के बाहर आते है और फिर विभिन्न माध्यमों से अन्य जीवों के शरीर में पहुँच जाते हैं।  बाजार में बिना ढके खाद्य पदार्थ भी धूल मिट्टी के कारण इनके अण्डों से दूषित हो जाते हैं। खुले में रखे पदार्थों को नहीं खाना चाहिए।
संक्रमण के लक्षण
इन कृमियों से पीड़ित बच्चों को आम तौर एनिमिक पाया जाता हैं। इनमे खून की कमी होती है। ये पेट के कीड़े ही बच्चों में खून की कमी और एनिमिया का कारण बनते है। खुराक लेने के बाद भी बच्चे कमजोर व पीतवर्ण लगते हैं। कुपोषित, चिड़चिड़ा व्यवहार प्रकट करते हैं।
बच्चों में कुछ भी खाने से पहले साबुन से हाथ धोने की आदत को विकसित किया जाना जरूरी है। सब्जियों को अच्छे से धोकर पका कर खाना चाहिए। फलों को भी धोकर खाना चाहिए।
इस अवसर पर प्रवक्ता रोहताश राणा, अरुण कुमार कैहरबा, सेवा सिंह, आलोक कुमार, चंद्रशेखर, वीरेंद्र कुमार, अनुराधा रीन, दलीप दहिया, ममता शर्मा, पंकज मल्होत्रा भी उपस्थित रहे।
मीडिया की माध्यम से भी जागरुकता संदेश प्रचारित किये गए।
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Darshan Lal Baweja
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Friday, February 02, 2018

कल्पना चावला को श्रद्धांजलीं A Tribute to Kalpana Chawla

कल्पना चावला की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलीं अर्पित की, कुरुक्षेत्र के कल्पना चावला तारामंडल में उनकी याद में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए।
दिवंगत अंतरिक्ष वैज्ञानिक व महिलाअंतरिक्ष यात्री डॉ कल्पना चावला को श्रद्धांजलि देने के लिए कल्पना चावला मेमोरियल तारामंडल कुरुक्षेत्र हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में यमुनानगर से विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व गौरव कुमार ने भाग लिया।
दोनों विज्ञान अध्यापकों ने यहां पर 'द ट्रिब्यूट टू कल्पना चावला' कार्यक्रम में श्रद्धांजलीं देने जिले भर से विद्यार्थी व अध्यापकों के साथ कल्पना चावला की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धा पुष्प अर्पित किए।
विद्यालयी बच्चों ने स्पेस, सौर मंडल, उनके जीवन व अन्तरिक्ष यात्रा पर पेंटिंग बना कर उन्हें याद किया। इस अवसर पर व्याख्यान, सरल विज्ञान प्रयोग, पावर पॉइंट प्रजेंटेशन, डॉ कल्पना चावला के जीवन से संबंधित फ़िल्म सहित अंतरिक्ष यात्री व अंतरिक्ष यात्रा संबंधित शो भी हुआ।
रिसोर्स पर्सन के रूप में दर्शन लाल बावेजा ने उपस्थित अध्यापकों व विद्यार्थियों को सरल विज्ञान प्रयोग करके दिखाए।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी रहे विद्यार्थियों, अध्यापकों को जिला शिक्षा अधिकारी कुरुक्षेत्र डॉ नमिता कौशिक व जिला विज्ञान विशेषज्ञ श्री सुरेंद्र सिंह ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। तारामंडल के क्यूरेटर सुमित कुमार व शैक्षणिक अधिकारी संजीव शर्मा ने उपस्थित बच्चों, अध्यापको व मेहमानों को कल्पना चावला के जीवनी से परिचित कराया और अंतरिक्ष, खगोल व प्राचीन भारतीय काल समय गणना के विभिन्न पहलुओं से परिचित करवाया।
अपने बच्चों को जरूर ले जाएं यहां
डॉ कल्‍पना चावला ने देश को अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से हरियाणा और देह को गौरवान्‍वित किया। कल्‍पना चावला का जन्‍म हरियाणा के करनाल में हुआ था। हरियाणा कौंसिल आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पंचकूला ने कल्‍पना चावला मेमोरियल प्‍लानेटेरियम को उनकी याद में उन्‍हे श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बनवाया था। उनकी मृत्‍यु अंतरिक्ष यात्रा से वापसी के समय एक दुर्घटना में हो गई थी। इस तारामंडल में उनके जीवन से जुड़ी कई बातों और उनके अंतरिक्ष कॅरियर के बारे में जानकारी दी गई है।इस इमारत को अति आधुनिक तरीके से अल्‍ट्रा - मॉर्डन ऑप्‍टो मैकेनिकल और डिजीटल प्रोजेक्‍ट्रर्स के हिसाब से बनाया गया है और इस तारामंडल के चारों ओर लेटेस्‍ट साउंड सिस्‍टम को लगाया गया है। यह इमारत बारह मीटर गुंबद से बनी है जहां एक दिशा में सौ से भी अधिक पर्यटक एक साथ बैठ सकते है। यह तारामंडल, पूरी तरह से वातानुकूलित है और यहां दो कार्यक्रम दिखाए जाते है जिनके नाम एस्‍ट्रोनॉट और ओसिस है जिनमें अंतरिक्ष के बारे में आम जनता को जानकारी दी जाती है।
इस तारामंडल में एक परमानेंट गैलरी है जो अंतरिक्ष के बारे में कई कार्यक्रमों को दिखाती है जैसे समय यात्रा, दिन व रात, सौरपरिवार के विभिन्न ग्रहों पर आपका भार कितना होगा, सेशन ऑन अर्थ, विश्व घड़ी, अवर एड्रेस इन यूनीवर्स, हमारा सौरपरिवार, सौरपरिवार से आगे क्या है, खगोल प्रश्नोत्तरी,विभिन्न तारा मंडल और राशि चिन्ह आदि। गैलरी का एक विशेष हिस्‍सा तस्‍वीरों से भरा पड़ा है जिसमें डा. कल्‍पना चावला के जीवन से जुडे कई पलों की तस्‍वीरें लगी हुई है।
वहां के शैक्षणिक अधिकारी व कर्मचारी बहुत लगन के साथ विभिन्न गतिविधियों को समझाते हैं।
अखबारों में


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Sunday, January 28, 2018

चन्द्रग्रहण, सुपरमून, ब्लूमून व ब्लड मून एक साथ Lunar Eclipse, Super Moon, Blue Moon and Blood Moon

'खगोलीय घटनाओं का आनंद लें इनसे डरे नही'
खगोलीय घटनाओं का सभी के लिए अपने अपने अपने मतानुसार विशेष महत्व होता है। ज्योतिषी इसे ज्योतिषिय मान्यताओं से जोड़ कर देखता है तो खगोलशास्त्री, विज्ञान शिक्षक, विद्यार्थी व वैज्ञानिक इसे अनुसंधान व ज्ञानार्जन के उद्देश्यों से देखता है।
विद्यार्थियों को समसामयिक खगोलीय घटनाओं से अपडेट रखने व उनको ये खगोलीय घटनाये दिखाने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि वो इससे जुड़े विज्ञान को समझ कर इनसे सम्बंधित काल्पनिक कथाओं व इनसे जुड़े अंधविश्वासों से मुक्त हो सकेंगे। उनकी रुचि अंतरिक्ष व खगोलविज्ञान में बढ़ेगी जिससे वो इस क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने का भी मन बना सकते हैं। क्योंकि विज्ञान की अन्य शाखाओं के मुकाबले खगोलविज्ञान व अंतरिक्ष विज्ञान  मे अभी बहुत सी नई खोजों व अविष्कारों की अपार सम्भावनाएं शेष हैं।
कक्षा पांच में ही बच्चों को पढ़ा दिया जाता है कि जब चंद्रमा पृथ्वी के पीछे उसकी  उपच्छाया व प्रच्छाया में आता है तो सूर्य का प्रकाश चन्द्रमा तक नही पहुंच पाता इस कारण चंद्रमा नही दिखाई पड़ता। इस स्थिति को चंद्रग्रहण कहते हैं। चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। चंद्रग्रहण को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है।
चंद्रमा का अपना प्रकाश नही होता वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है।
क्यों है 31 जनवरी 2018 महत्त्वपूर्ण?
खगोलीय घटनाओं ने सदा से ही मनुष्य को आकर्षित किया है। प्राचीन मानव भी हैरत में पड़ जाता था कि रोज एक ही जगह से देखने पर भी चंद्रमा के आकार परिवर्तन क्यों होता है? पूर्ण चंद्र व अमावस्या उसे अचंभित करते थे। निरन्तर अवलोकन व प्रेक्षण से मानव ने चंद्रकलाओं को समझा।
31 जनवरी को चंद्रमा की कईं सारी खगोलीय घटनाएं एक साथ घटित हो रही हैं ऐसा संयोग 35 वर्ष के बाद बन रहा है। 31 जनवरी को चन्द्रग्रहण, सूपर मून, ब्लू मून, ब्लड मून खगोलीय घटनाएं घटित होंगी। ऐसा पहले 30 दिसम्बर 1982 को घटित हुआ था। पृथ्वी के एक स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के लिए खगोलीय घटनाओं की पुनरावृत्ति बहुत लंबे समय बाद होती है इसलिए इन घटनाओं का आनन्द लेना चाहिए न कि इनसे डर कर घर में दुबकना चाहिये।
आओ सुपरमून को जानें।
चंद्रमा पृथ्वी के चारो ओर अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी के चक्कर लगाता है। परिक्रमा पथ दीर्घवृत्ताकार होने के कारण वह एक बार पृथ्वी से अधिकतम दूरी से व एक बार न्यूनतम दूरी से गुजरता है। तो एक समय ऐसा भी आता है जब चंद्रमा पृथ्वी से न्यूनतम दूरी पर स्थित होता है। यदि उस दिन पूर्णिमा भी हो  तो यह परिघटना सुपरमून कहलाती है। ऐसी स्थिति आने पर चंद्रमा उस दिन अन्य पूर्णिमाओं के अपने आकार से 14 प्रतिशत  बढ़ा व 30 प्रतिशत अधिक चमकदार दिखाई देता है। यह स्थिति एस्ट्रो फोटोग्राफर्स के लिए बेहतरीन शॉट्स लेने के लिए उत्तम होती है। सुपरमून शब्द सर्वप्रथम अमेरिकी खगोलविद रिचर्ड नोल द्वारा वर्ष 1979 में प्रयोग किया गया था। सुपरमून कोई आधिकारिक खगोलीय शब्द नहीं है।
' पूर्ण चंद्रमा का अपने परिक्रमा पथ पर पृथ्वी से न्यूनतम दूरी पर होना सुपरमून है।'
आओ जाने क्या हैं ब्लू मून?
वर्ष मास गणना के दो तरीके हैं एक सौर वर्ष व दूसरा चंद्र वर्ष। एक सौर वर्ष के 12 महीनों (365.24 दिन) में 12 चंद्र मास के कुल दिनों (354.36 दिन) से कुछ दिन (5.88 दिन) अधिक होते हैं। इसलिए प्रत्येक 2.7154 वर्ष के अंतराल पर एक मौसम खंड में 3 की बजाय 4 पूर्णिमाएँ पड़ती हैं। इस स्थिति को साधारण शब्दों में कहें तो किसी एक सौर महिने में दो बार चंद्रमा का पूरा निकलना ब्लू मून कहलाता है। इस वर्ष 2 जनवरी को पूर्णिमा थी और अब 31 जनवरी को भी पूर्णिमा है इसलिए 31 जनवरी के पूर्ण चंद्रमा को ब्लू मून नाम दिया गया। खगोल विज्ञान में फार्मर्स अल्मनक द्वारा दी गयी  ब्लू मून की इस परिभाषा को सबसे अधिक मान्यता प्राप्त है।
'ब्लू मून एक खगोलीय मौसम में एक अतिरिक्त पूर्णिमा के अस्तित्व की घटना को कहते है।'
क्यों कहते हैं ब्लड मून (ताम्र चंद्र) ?
चंद्रोदय के समय चंद्रमा जैसे ही पृथ्वी की छाया में आएगा तो उसका रंग ताम्बे के रंग जैसा (हल्का लाल) प्रतीत होता है। इस स्थिति में अंतरिक्ष मे चंद्रमा पृथ्वी की परछाई क्षेत्र में होता है तो उस तक सूर्य का प्रकाश केवल पृथ्वी के वायुमंडल से होकर पहुंचता है। मात्र क्रिश्चियन मान्यताओं में ही ब्लड मून का जिक्र है।
यह दुर्लभ नजारा लेने का समय व स्थान:
31 जनवरी से एक दिन पहले आप एक जगह निर्धारित करले जहाँ से पूर्वी दिशा में चंद्रमा को अच्छे से देखा जा सके। आपके शहर या गाँव में 31 जनवरी को चंद्रोदय जितने बजे होगा उस समय से पूर्व वहाँ पहुँच जाएं।
यमुनानगर में 31 जनवरी को चंद्रोदय का समय सायं 5 बजकर 21 मिनट है। अगर मौसम ने साथ दिया तो ये ग्रहण 31 जनवरी को 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 42 मिनट के बीच नजर आएगा। ये नजारा लेने के लिए खुले मैदान में जाकर क्षितिज के साथ से ही चन्द्रोदय के समय से ही उसे देखना होगा। इसके अवलोकन के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नही होती है। अवलोकन स्थल के आसपास ऊंचे भवन व पेड़ न हों।
इसे भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जायेगा। इसे अमेरिका के अलास्का, हवाई और कनाडा में भी अवलोकित किया जा सकेगा।
मिडिया रिपोर्टस
पंजाब केसरी व दैनिक जागरण

Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
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Saturday, December 30, 2017

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया Circumference of Earth Experiment

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया Circumference of Earth Experiment
(23 सितम्बर 2017 को)
सी वी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया गया
अर्जुन पार्क सरोजिनी कालोनी में सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्य क्लब प्रभारी दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक के नेतृत्व में एकत्र हुए और उन्होंने पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग से सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में लंबवत खड़ी छड़ी जिसे नोमोन कहते हैं की परछायी को नाप कर विभिन्न गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। 

क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 23-24 सितम्बर इक्विनॉक्स के दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन व रात बराबर होते हैं और आज के बाद दिन छोटे और रात लंबी होनी शुरू हो जाती हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं। 
अगला प्रयोग 21-22 दिसम्बर को किया जाएगा। 
आज के प्रयोग में पार्थवी, पालक, पारस, अर्श, अनुष्का, अंशिका राणा, दृष्टि, संयम, सृष्टि, अंशिका शर्मा ने भाग लिया। 





Darshan Lal Baweja
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