Saturday, September 03, 2016

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला 24th NCSC Workshop for Teachers

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला 24th NCSC Workshop for Teachers
विज्ञान गतिविधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक - अनीता काम्बोज
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न,यह बाल विज्ञान सम्मेलन अक्टूबर में होगा  
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल सेक्टर 17 जगाधरी में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की गाइड टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप आयोजित हुई जिसमे जिले के निजी व राजकीय विद्यालयों के 80 विज्ञान अध्यापकों और प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में राज्य भर से आये विभिन्न विषयों के रिसोर्स पर्सन्स ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को ‘टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीकी और नवाचार’ विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट बनाने के लिए ट्रेंड किया। 
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग द्वारा प्रायोजित इस विज्ञान सम्मेलन में बालक अपने शोधपत्रों को साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आव्हान किया की प्रत्येक विज्ञान अध्यापक/प्राध्यापक को विज्ञान शिक्षण के साथ साथ विज्ञान संचारक भी बन जाना चाहिए। देश को विज्ञान चेतना की अति आवश्यकता है। शिक्षण को मात्र रोजगार का साधन मत बनाएं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए विज्ञान को जन आन्दोलन बनाएं और विज्ञान संचार की मुहीम से जुड़ें।
विद्यालय की प्रधानाचार्या अनीता काम्बोज ने उपस्थित अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान के विभिन्न प्रोजेक्ट बनाने से बच्चे अपने आसपास की सामान्य व गंभीर समस्याओं से रूबरू होते हैं और वो उनका हल निकलने का प्रयत्न करते हैं जिससे वो विज्ञान को और नजदीकी से समझते पाते हैं। विज्ञान के प्रोजेक्ट करने से बच्चों के सर्वांगीण विकास का बेहतर पोषण होता है। प्रधानाचार्या ने हर जिले में सार्वजनिक विज्ञान पुस्तकालयों, वाचनालयों और प्रयोगशालाओं की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की हरियाणा में एक साइंस सिटी जैसा विज्ञान संग्राहलय और विज्ञान केंद्र होना चाहिए जहां बच्चों को उनकी विज्ञान सम्बंधित सभी जिज्ञासाओं का जवाब मिल सके।     
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सिविल हस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजय दहिया ने स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर दहिया ने बताया कि व्यक्तिगत स्वच्छता जितनी आवश्यक है उतनी ही आवश्यक सामुदायिक स्वच्छता भी है। समाज और कारपोरेट दोनों वर्गो को चाहिए कि चिकित्सा के सामुदायिक केन्द्रों में आवश्यक सहूलियतों को बढ़ावा देने के लिए कोंट्रीब्यूट्री विधि अपनायें। हस्पतालों को जो सुविधाएं चाहिए, स्कूलों को जो आवश्यकताएं है उनको दान या सहयोग से पूरा करें। ग्रामीण आपसी सहयोग से गांव के बीमार व्यक्तियों को आपातकालीन जैसी स्थिति में जिला स्तर या पीजीआई तक पहुंचाने की व्यवस्था कर सकते हैं जिससे बीमार की जान को बचाया जा सके। उन्होंने अध्यापकों को व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता पर सर्वे और प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट बनवाने के लिए प्रेरित किया और टिकाऊ विकास के तहत हस्पतालों और स्कूलों के भवनों की मुरम्मत को कारसेवा जैसे सामुदायिक सहयोग वाले तरीके से हल किया जाए और इसके लिए स्थानीय समितियां बने सम्बन्धित प्रोजेक्ट बच्चो को बनवाये जाए।       
हिसार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डाक्टर महावीर नरवाल ने टिकाऊ विकास और कृषि विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट करवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया की मिटटी की जांच, फसल चक्र, कीट पाठशाला, समयानुसार व मांगनुसार फसल उत्पादन, कीटनाशकों के आर्गेनिक विकल्पों, फ़ूड प्रोसेसिंग, देसी खाद, बीजों की वेरायटी और सामूहिक खेती पर बच्चों को परियोजनाएं तैयार करवाने की बहुत आवश्यकता है।   
डी ए वी गर्ल्स कालेज से डाक्टर ईनाम मुहम्मद ने खाद्य व कृषि विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर ईनाम ने दालों और तिलहन की फसलों के लिए माहौल तैयार करने सम्बंधित हरियाणा को चार जोन में बाँट कर बहुत ज्ञानवर्धक कृषि बटवारा प्रस्तुत किया। उनके अनुसार बच्चे किसानो को प्रेरित करें कि अब गैर परम्परागत खेती को अपनाना समय की मांग है और किसान देश/विदेश का कृषि पर्यटन के तहत भ्रमण करें और कृषी नवाचार को अपनाएँ।   
हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सचिव व एनसीएससी के राज्य सयोंजक श्री सतबीर नागल ने विज्ञान को बच्चों की पहुँच तक लाने में राष्ट्रिय बाल विज्ञान सम्मेलन के उद्देश्यों को अध्यापकों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस को महज प्रतियोगिता बनाकर ना देखा जाए आवश्यकता है कि इस इवेंट का प्रयोग बच्चों को विज्ञान के निकट लाने और विज्ञान को बच्चों की पहुँच तक लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने बाल विज्ञान कान्ग्रेस की नियमावली से भी अध्यापक प्रशिक्षुओं को अवगत करवाया। श्री नागल ने बताया कि हरियाणा विज्ञान मंच एक वोलियेंटरी साइंस पोपुलराईजेशन संस्था है जो आपसी सहयोग से हर फिल्ड के एक्सपर्ट विद्वानों की स्वेच्छिक सेवायें लेकर एक बेहतर वैज्ञानिक माहौल तैयार करने के लिए कार्यरत है जिससे कि मानवता की भलाई हो सके।    
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील कुमार काम्बोज ने आपदा प्रबंधन विषय पर प्रोजेक्ट बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि 14-15 जुलाई व उसके बाद की दो बरसातों ने यमुनानगर के हालात दो तीन घंटों के लिए आपातकालीन प्राकृतिक हालातों जैसे बना दिए थे जिससे लिए समाज और सम्बन्धित महकमे हतप्रभ रह गए और सोचने पर मजबूर हो गए कि भविष्य में किसी बड़ी आपदा से वो कैसे लड़ पायेंगे। उन्होंने बच्चों को शहर के बेहतर व नवाचारी मास्टर प्लान पर बच्चों को प्रोजेक्ट करवाने का आव्हान किया जिससे कि बच्चे अपनी समस्याओं का बेहतर हल प्रदान कर सकें।      
रसायन विज्ञान के अध्यापक गौरव वालिया ने ऊर्जा टिकाऊ विकास के संदर्भ में अपना व्यख्यान दिया। उन्होंने ऊर्जा के नवीकरणीय साधनों के उपयोग और दैनिक जीवन में ऊर्जा की कटौती करने पर प्रोजेक्ट वर्क करवाने के लिए अध्यापकों को प्रशिक्षित किया। 
प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा ने प्राकृतिक संसाधन और टिकाऊ विकास विषय पर बच्चो से प्रोजेक्ट बनवाने का प्रशिक्षण दिया। 
उन्होंने नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खनिज भंडारों और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और एनरिच करने की आवश्यकताओं पर बल दिया। 
उन्होंने कहा कि उतना खोदो, उतना काटो, उतना दोहो की आने वाली पीढ़ियाँ भी उन नेमतों  का उपयोग कर सकें जो प्रकृति ने सबके लिए बराबर प्रदान की हैं। 
मनुष्य अपने भविष्य को कब्रासीन न कर पाए ऐसे प्रयास किये जायें। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर प्रोजेक्ट करवाने सम्बन्धित प्रशिक्षण प्रदान किया।  
गणित अध्यापक श्रीश कुमार शर्मा ने टिकाऊ विकास में परम्परागत तरीकों और देशज विधियों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया की खाद्यानो के भंडारण, जल के उचित भंडारण, कम जल की खेती के देशज उपाय, खाद्य पदार्थों की गुणवता और उसमे मिलावट के देशी तरीके, दादी माँ के नुस्खे  और रसोईघर को बनाओ ओषधालय, आत्मरक्षा के देशज तरीके, गणनाओं के परम्परागत तरीकों पर बच्चों को परियोजनाएं बनवाने के लिए अध्यापक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया।  
गत वर्ष की विजेता ग्रुप लीडर श्रेया केसवानी ने अपनी टीम के साथ एक परियोजना की प्रस्तुती भी दी जिससे उपस्थित अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने की बारीकियां पता लग सकी।
 इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदीप सरीन, जरनैल सिंह सांगवान, डाक्टर विजय त्यागी, सुरेन्द्र गोयल, प्रोफेसर के सी ठाकुर, आर पी  गांधी, राजकुमार धीमान, दीपक शर्मा, विकास पुंडीर, ज्योतिका डांग, अश्वनी गर्ग, दीपिका देशवाल, राकेश कुमार, मंजू आर्या, पूजा कालरा का सहयोग सराहनीय रहा।   
अखबारों में  




  Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
Web Links 
     

      

हरियाणा राज्य विज्ञान संवर्धन कार्यक्रम Promotion of Science in Haryana State Program

हरियाणा राज्य विज्ञान संवर्धन कार्यक्रम Promotion of Science in Haryana State Program 
प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापकों को दिया प्रशिक्षण 
सर्व शिक्षा अभियान, एससीईआरटी गुडगाँव, श्रीराम फाउंडेशन व आईबीएम के सयुंक्त तत्वाधान में प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापको का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में हुआ। जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में कार्यक्रम अधिकारी गीता ढींगरा व प्रभारी प्रेमलता बक्शी के साथ मास्टर ट्रेनर्स दर्शन लाल बवेजा, आस्था श्रीवास्तव व जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील काम्बोज ने इस ट्रेनिग की शुरुआत की।
आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में मास्टर ट्रेनर आस्था श्रीवास्तव विज्ञान अध्यापिका ने प्रशिक्षु अध्यापको और प्राध्यापको को जंतु और पादप कोशिका के शिक्षण सम्बन्धित नवाचारी विधि से अवगत करवाया। 
मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा ने साइफन, बलो का संतुलन, जैव विविधिता, ठोस द्रव व गैसों में संपीडन, जलीय व स्थलीय भंवर का बनना और ठोस वस्तुओं का आयतन ज्ञात करने सम्बंधित नवाचारी प्रयोग करके दिखाए। 
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील काम्बोज ने परमाणु संरचना, लार्ज हेड्रान कोलाईडर प्रयोग द्वारा प्राप्त अभी तक के निष्कर्षों सम्बंधित ताज़ा ज्ञान से प्रशिक्षुओं को अपडेट किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रशिक्षुओं ने स्वयं तैयार विज्ञान नवाचारी गतिविधियों का प्रदर्शन किया। विज्ञान अध्यापक राकेश कुमार ने अंतः दहन इंजन की कार्यप्रणाली और उसमे सम्मिलित नवाचार को विस्तार से समझाया। तीसरे व अंतिम चरण में विज्ञान अध्यापकों को जैव विविधता से सम्बंधित पोस्टर दिए गए। इन पोस्टरों को प्रशिक्षु अध्यापको द्वारा समूह चर्चा विधि से प्रदर्शित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं को आगामी विज्ञान प्रदर्शनियों के आयोजन सम्बंधित एडवांस सूचना दी गयी। कक्षा छह से दस तक के मासिक टेस्टों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार व मासिक पाठ्यक्रम और प्रयोगात्मक कार्यों को सम्पन्न करवाने के के टिप्स दिए गए।
इस कार्यक्रम कश्मीरी लाल, अमृत बेदी, सतीश कुमार, रोमियो शर्मा, संजय कुमार, राकेश कुमार, राकेश मोहन, रुस्तम अली, सुधीश पाल, सुभाष काम्बोज, गीतांजली पुन्नू, मंजू वर्मा, ओमप्रकाश, राजेन्द्र आदि विज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया।

अखबारों में 

Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
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Saturday, July 16, 2016

राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का प्रशिक्षण कार्यशाला State Level Workshop

राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस की प्रशिक्षण कार्यशाला
14-15 जुलाई को आयोजित हुई विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क,

हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग व हरियाणा विज्ञान मंच के सयुंक्त तत्त्वाधान में हरियाणा में 24वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन का बिगुल बज उठा है। 14 15 जुलाई को जाट भवन रोहतक में हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक द्वारा राज्यस्तरीय संसाधन व्यक्ति हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिले से इस कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने के लिए विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल, प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा व गौरव कुमार वालिया ने भाग लिया। 
इस कार्यशाला में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विज्ञान संचारक डी रघुनन्दन, सतबीर नागल,
वेदप्रिय, डाक्टर रणवीर सिंह दहिया, डाक्टर महावीर सिंह नरवाल, दीपा कुमारी, कृष्ण वत्स सहित अन्य रिसोर्स पर्सन्स ने सभी आठों उपविषयों पर प्रशिक्षण दिया।
जिला समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि राज्य भर से आये जिला समन्वयकों और अध्यापकों ने सभी उपविषयों व संभावित परियोजनाओं पर विचार विमर्श किया। इस बार का बालविज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय " टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार" है. जिसमे आगे आठ उपविषय है।
टिकाऊ विकास, स्वपोषी विकास या समग्र विकास, विकास की वह अवधारणा है जिसमें विकास की नीतियां बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इससे मानव की न केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति हो,वरन् लम्बे समय तक मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। टिकाऊ विकास वास्तव में विकास की वह अवस्था है जिसमें मानवीय मूल्यों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रभावितों की पीड़ा को दूर करते हुए समाज में आर्थिक समानता व लम्बे समय तक प्रयोग में आने वाले आधारभूत ढाँचे से है।
डी रघुननंदन ने बताया कि किसी शहर के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुदृढ़ व्यवस्था का होना उस शहर के लिये सस्टेनेबल डेवलपमेंट है। जिस कारण लोग निजी वाहनों की निर्भरता से बचेंगें और अधिक यातायात के दुष्प्रभावों जैसे प्रदूषण, दुर्घटना आदि से भी महफूज़ रहेंगे। प्रोफेसर दीपा कुमारी ने ऊर्जा के टिकाऊ संसाधनों पर अपने विचार रखे, जिसमें बहुत सी गैर परम्परागत सतत् विकास की परियोजनाओं पर विमर्श हुआ। 
डॉक्टर महावीर सिंह नरवाल ने कृषि में सस्टेनेबल डेवलॅपमेंट के अंतर्गत कीट पाठशाला के प्रणेता दिवंगत डॉक्टर सुरेन्द्र दलाल के कार्यों पर प्रकाश डाला कि उन्होने किसानो को कीट पाठशाला के अंतर्गत इन्सेक्ट लिटरेसी में इतना ज्ञान दिया गया कि अब उन गावों के किसान (पुरूष, महिला व बच्चे) खेत मे कीटो और पत्तों में सुराख देख कर डरते नहीं हैं उन्हें पता हैं कि इस कीट का प्रकृत्तिक शत्रु इसे स्वत ही समाप्त और देगा और अगर अब कीटनाशक का छिड़काव किया तो वो मित्र व शत्रु दोनों को समाप्त कर देगा। कीट पाठशाला के अंतर्गत कीट साक्षरता कम लागत का टिकाऊ विकास है जो अनुभव हस्तांतरण के अंतर्गत पीढ़ियों तक वितरित और समृद्ध होगा। वेदप्रिय जी ने महत्त्वपूर्ण बिन्दुओ को उठाते हुए टिकाऊ विकास की अवधारणा को समझाया। डॉक्टर आर एस दहिया ने अपने वक्तव्य में बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में टिकाऊ विकास की बहुत आवश्यकता है। जहां 2000 कर्मचारियों की आवश्यकता है वहां 500 के स्टाफ से काम चलाया जा रहा है और स्वास्थ्य कर्मी काम के दबाव में है जबकि उसका सीधा सम्बन्ध लोगों की जिंदगियों से जुड़ा है। सतबीर नागल और कृष्ण वत्स ने बाल विज्ञान कांग्रेस के आयोजन और नियमो सम्बंधित बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।
प्रवक्ता सुमन शर्मा व गौरव कुमार ने बताया की गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष के टोपिक में बाल वैज्ञानिकों के पास परियोजना को करने के लिए विस्तृत दायरा है। जिला स्तरीय अध्यापक कार्यशाला का आयोजन अगस्त में किया जाना प्रस्तावित है। कार्यशाला में राज्य भर से जिला समन्वयकों और अध्यापकों ने भाग लिया।
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
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Friday, May 06, 2016

बुध का पारगमन Transit of Mercury

बुध का पारगमन Transit of Mercury

9 मई को सूरज के मुखड़े पर चमकेगी बुध ग्रह की बिंदिया 
पूर्व पारगमन की घटना को देखते हुए बच्चे –फ़ाइल फोटो
हमारे सौरमंडल में सूर्य और पृथ्वी के बीच बुध व शुक्र दो ग्रह आते हैं। अपनी अपनी कक्षा में सूर्य के चारों और चक्कर लगाते लगाते पृथ्वी-बुध-सूर्य और पृथ्वी-शुक्र-सूर्य के बीच यह स्थिति बनती है, जब भी यह दोनों ग्रह अपनी कक्षा में भ्रमण करते हुए पृथ्वी व सूर्य के बीच आते जाते हैं, तो पारगमन का नजारा देखने को मिलता है। इस वर्ष मई महीने की नो तारिख को यह स्थिति बनेगी जिसमे पृथ्वी और सूर्य के बीच से बुध सूर्य के सामने से होकर गुजरेगा। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को बुध पारगमन ट्रांजिट आफ मरकरी के रूप में हम देख सकेंगे। यह दुर्लभ नजारा बेशक सूर्यग्रहण व चन्द्रग्रहण के समान बड़ी छाया वाला नहीं होगा फिर भी सूर्य के पृष्ठ पर एक गतिमान बिंदु (डॉट) जितना बड़ा तो होगा। इस बार का बुध पारगमन 9 मई 2016 घटित होगा। 
8 नवंबर 2006 को घटित बुध ग्रह के सूर्य के पारगमन का चित्र
इस पारगमन में बुध सूर्य के पृष्ठ पर पूर्व से पश्चिम की और गतिमान प्रतीत होगा। बुध पारगमन पिछली बार 8 नवंबर 2006 में देखने को मिला था और अगली बार 11 मई 2019 घटित होगा। 11 मई 2019 वाले बुध पारगमन को भारत से नही देखा जा सकेगा इसलिए हम भारतीयों के लिए भारत भूमि से इस दुर्लभ नज़ारे के अवलोकन का यह बेहतरीन अवसर होगा। सूर्यग्रहण व चन्द्रग्रहण के दौरान सूर्य की रोशनी की तीव्रता पर प्रभाव पड़ता है परन्तु पारगमन की घटनाओं में यह स्थिति नहीं उत्पन होती। पारगमन में बुध ग्रह अपने आकार के बराबर सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक पहुचने से रोकेगा इस कारण बुध ग्रह सूर्य के विशाल पृष्ठ पर एक काले बिंदु के समान चलता हुआ नजर आयेगा जो कि देखने में बहुत ही रोमांचित करेगा। ज्ञान परिपूर्ण और रोमांचित करने वाली इन खगोलीय घटनाओं को अवश्य देखना व प्रेक्षण करना चाहिए क्यूंकि यह दोबारा बहुत लम्बे अंतराल से घटित होती हैं।
कब कब होता है बुध पारगमन 
बुध पारगमन 9 मई 2016 की ग्लोब पर टाइम के साथ स्थिति
बुध पारगमन के एक सदी (100 वर्षों) में मात्र 13 या 14 ही अवसर बनते हैं। एक सदी में शुक्र पारगमन की तुलना में बुध पारगमन की पुनरावृत्ति अधिक बार होती है। एक ख़ास बात यह कि बुध पारगमन मई या नवम्बर महीने में ही होता है। पिछले तीन बुध पारगमन 1999, 2003 और 2006 में हुए और अगला बुध पारगमन  9 मई  2016 में होगा अभी तक ज्ञात रिकार्ड के अनुसार सबसे पहली बार बुध पारगमन की घटना को 7 नवम्बर 1631 को देखा गया9 मई  2016 बुध पारगमन 11 नवम्बर 2019 को और फिर इसके बाद 13 नवम्बर 2032 को दिखाई देगा। 
जर्मन खगोलशास्त्री योहानेस केप्लर,1571-1630
किसने देखा था पहली बार 
जर्मन खगोलशास्त्री योहानेस केप्लर (1571-1630) पहले खगोलशास्त्री थे जिन्होंने बुध पारगमन घटना की भविष्यवाणी की थी और अपनी गणनाओं के आधार पर उन्होंने बुध का सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरने का समय पूर्व घोषित किया था। 
उनकी भविष्यवाणी के आधार पर ही फ्रांसीसी गणितज्ञ और खगोलशास्त्री पियरे गास्सेंदी (1592-1655) ने केपलर के देहांत के बाद यह निरीक्षण किया।
बुध पारगमन की घटित होने की कक्षीय परिस्थितियां
बुध पारगमन की घटित होने की सौरमंडलीय कक्षीय दृश्य
बुध का पारगमन पृथ्वी से तब ही दृश्यमान हो सकता है, जब बुध ग्रह अपनी अंडाकार कक्षा पथ पर आरोही या अवरोही नोड के करीब होता है और पृथ्वी व सूर्य के मध्य हो। वर्तमान कलेंडर प्रणाली के अनुरूप मई के दुसरे सप्ताह में पृथ्वी की कक्षा स्थिति के सापेक्ष बुध अपनी कक्षा के अवरोही नोड पर और नवम्बर के दूसरे सप्ताह में पृथ्वी की कक्षा स्थिति के सापेक्ष बुध अपनी कक्षा के आरोही नोड पर होता है तब यह घटना सयोंग बनता है। एक सदी में डेढ़ दिन का फर्क पड़ जाने से अट्ठारवी शताब्दी में बुध पारगमन 2 मई से 7 मई के बीच घटित होता था जबकि इक्सिवी शताब्दी में यह घटना 7 मई से 10 मई के बीच घटित होगी। 
विश्व में कहां कहां देख सकते हैं बुध पारगमन 
बुध पारगमन घटना की वैश्विक स्थिति को दर्शाता मानचित्र
विश्व भर में बुध पारगमन की घटना को दक्षिण अमेरिका, पूर्वी-उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप में पूरा देखा जा सकता है और आंशिक बुध पारगमन की घटना को पूर्वी एशिया व आस्ट्रेलिया को छोड़कर शेष दुनिया में देखा जा सकता है। सबसे बेहतरीन नजारा पश्चिमी यूरोप में दिखाई देगा। बुध पारगमन का ग्लोबल दृश्य समयातराल 11:12 UT (वैश्विक समय जो कि GMT समतुल्य है) से 18:42 UT (GMT) रहेगा और इसमें 14:57 UT (GMT) मध्यमान स्थिति होगी। बुध पारगमन का समयांतराल साढ़े सात घंटे रहेगा। आस्ट्रेलिया, चीन, जापान, कोरिया प्रायद्वीप, फिलिपिन्स, पूर्वी मलेशिया, इंडोनेशिया और अंटार्टिका के अधिकाँश भाग पर बुध पारगमन नहीं दिखेगा क्यूंकि क्योंकि सूर्य इन स्थानों से क्षितिज से नीचे है। 
मंगल ग्रह के धरातल से भी देखा जा चुका है बुध पारगमन
 यह और भी अद्भुद और आश्चर्य चकित करने वाली घटना है कि बुध ग्रह का सूर्य पारगमन मंगल ग्रह के धरातल से भी देखा (रिकार्डिड) किया जा चुका है। मार्स रोवर क्यूरोसिटी ने मंगल ग्रह की सतह से 3 जून 2014 को बुध ग्रह का सूर्य पारगमन रिकार्ड किया है। यह अन्यत्र खगोलीय पिंड से रिकार्डिड पारगमन की पहली घटना है। 
भारत में कब व कहाँ 
आओ पहले यह जाने कि भारत में किस समय यह दिखायी देगा?
भारत में यह घटना बाद दोपहर लगभग 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और सूर्यास्त तक देखी जा सकेगी। भारतीय समय के अनुसार यह घटना रात सवा 12 बजे तक जारी रहेगी, परंतु उन्हीं स्थानों से देखी जा सकेगी, जहां सूर्य नजर आएगा।
जब पारगमन शुरू होगा उस समय भारत में सूर्यास्त होने जा रहा होगा, पारगमन के आरम्भिक 2-3 घंटे ही हम नजारा ले पायेंगे।
भारत में,
पारगमन आरम्भ- 16:30 IST
एक चौथाई पारगमन- 18:30 IST  
पारगमन मध्य- 20:30 IST 
शहर
क्षेत्र
पारगमन आरम्भ
(IST)

सूर्यास्त समय (IST)
पारगमन दृश्य अवधि
इम्फाल
पूर्व
16:30
17:48
एक घंटा लगभग
भुज
पश्चिम
16:30
19:23
तीन घंटे लगभग
श्रीनगर
उत्तर
16:30
19:20
तीन घंटे लगभग
नागपुर
मध्य
16:30
18:42
दो घंटे लगभग
मदुरै
दक्षिण
16:30
18:30
दो घंटे लगभग

सारणी से सपष्ट है कि मध्य और दक्षिण भारत में बुध पारगमन का 1/4 भाग तक अवलोकन हो पायेगा। उत्तर व पश्चिमी भारत में 3/8 भाग तक का अवलोकन हो पायेगा जबकि पूर्वी भारत में कुल अवलोकन अवधि के 1/8 भाग का अवलोकन हो पायेगा। यह अवधि क्रमशः 2 घंटे, 3 घंटे व 1 घंटे तक  रहेगी। अवलोकन की इस अवधि के अंतिम एक घंटे में धुंध, बादल, धूल, क्षितिज के सापेक्ष सूर्य की परिदृश्य स्थिति पारगमन अवलोकन में बाधा डाल सकती है।  
क्या है तरीका सुरक्षित अवलोकन का 
सूर्य को कभी भी नंगी आँखों से सीधे ही देखना बहुत खतरनाक होता है, इसके सीधे अवलोकन से आँखों की रोशनी जा सकती है, तो फिर पारगमन की इस घटना का अवलोकन कैसे किया जा सकता है?
दूरबीन (टेलिस्कोप) से सूर्य का प्रतिबिम्ब प्राप्त करके
सुरक्षित सौर चश्मे (सेफ सोलर व्यूवर) से
बायनाकुलर से सूर्य का प्रतिबिम्ब प्राप्त करके
इन्टरनेट पर विभिन्न वेबसाइट्स पर सीधा प्रसारण
स्वनिर्मित और बना बनाया सौर प्रोजेक्टर द्वारा
बुध पारगमन को वैज्ञानिक तरीके से जांचे-परखे व प्रामाणित ब्लैक पोलिमर से बने सौर चश्मों के माध्यम से ही बुध पारगमन दिखाया जाए। अच्छे सोलर फ़िल्टर सूर्य के प्रकाश की तीव्रता घटाकर एक लाखवें हिस्से तक कम कर कर देते हैं, जिससे प्रेक्षक की आंखों को हानि नहीं पहुँचती।
6 जून, 2012 को देखा गया था शुक्र पारगमन 
जून, 2012 को शुक्र पारगमन पर तैयारी करते बच्चे – फ़ाइल फोटो
6 जून, 2012 को शुक्र पारगमन की दुर्लभ खगोलीय घटना को दिखाया गया था जिसमे ब्लैक पोलिमर से बने सौर चश्मों का प्रयोग किया गया था। जो लोग तब शुक्र पारगमन की खगोलीय घटना को देखने से वंचित रह गये थे वे अब बुध पारगमन को देख कर समान आनन्द की अनुभति कर सकते हैं। क्यूंकि दूरबीन के आविष्कार के बाद अब तक शुक्र पारगमन को अब तक 8 बार ही देखा जा सका है। इक्कसवीं सदी में 8 जून, 2004 में शुक्र पारगमन की घटना को पूरे 12.5 वर्षों के बाद देखा गया था और जो फिर 8 वर्ष बाद पुनः 2012 को दिखाई दिया। इस वर्ष के बाद शुक्र पारगमन 105.5 वर्ष बाद होगा और उसके बाद पुनः 8 वर्ष बाद दृष्टिगोचर होगा। शुक्र पारगमन का दोहराव बड़ा ही निराला है। शुक्र पारगमन के अगले जोड़े होंगे 11 दिसम्बर, 2117 और 8 दिसम्बर, 2125 को दिखेगा इसलिए वो अब न चूक जाएँ और बुध पारगमन की खगोलीय घटना का अवलोकन अवश्य करें।  
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
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Sunday, March 27, 2016

पृथ्वी की परिधि circumference of earth experiment

सी वी रमण विज्ञान क्लब सदस्यों ने नापी पृथ्वी की परिधि
विषुव समय-बिंदु पर  दिन और रात्रि की अवधि लगभग बराबर होती हैं।
मार्च विषुव 20 मार्च के दिन सी वी रमण विज्ञान क्लब सरोजिनी कालोनी के सदस्यों को स्थानीय अर्जुन पार्क में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया। 
मौके पर इंजीनियर सौरभ कौशल, इंजीनियर राघव व विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने क्लब सदस्यों को तापमान, आद्रता, समुद्रतल से उंचाई, अक्षांश ज्ञात करना, जीपीएस प्रणाली, सेटेलाईट कार्यप्रणाली, साधारण व जटिल इलेक्ट्रोनिक्स परिपथ, इरैटोस्थनीज विधि, उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं आदि की सैद्धान्तिक जानकारियाँ दी।
दर्शन लाल ने बताया कि इस प्रयोग को करने के लिए जमीन पर लंबवत खड़ी नोमोन (शंकु यंत्र) की परछायी को पांच पांच मिनट के अंतराल पर नाप कर दर्ज किया जाता है। छड़ी की परछायी जब घटते-घटते न्यूनतम हो जाती है तो उसे माप लेते हैं और त्रिकोणमिति के सूत्रों की सहायता से सूर्यकोण ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद विशेष प्रकार की गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर ली जाती है।
आगामी  तीन दिनों में नेशनल कालेज आफ पोलिटेक्निक जगाधरी, स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल सेक्टर सत्रह जगाधरी, होली मदर पब्लिक स्कूल जगाधरी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रादौर, राजकीय कन्यावरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पुरानी सब्जीमंडी स्कूलों के विद्यार्थी करेंगें।
इस अवसर पर आंचल, अंजली, अवनीत, सोनाक्षी, सिमरन, सिद्धार्थ, प्रमात, रोनक, प्रतीक, निश्चय, अवनी, काजल, पार्थवी, संयम, रणंजय कटारिया, दृष्टि काम्बोज, छवी, अनुष्का, जयोतिका, सुबुही सहगल, विकास पुंडीर, गौरव वालिया प्रतिभागियों ने यह प्रयोग करना सीखा और सम्बंधित गणनाएं भी की। 
अखबारों में 

Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
09416377166
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