Thursday, March 12, 2015

सोख्ता गड्ढा बनायें और जल बचायें Soakage pit for proper disposal of waste water

सोख्ता गड्ढा  बनायेंऔर जल बचायें Soakage pit for proper disposal of waste water
हैंडपम्प, पानी पीने की जगह पर शुद्ध जल की एक बड़ी मात्रा बेकार जाती है जो की नाली में बह  जाती है या फिर वहीँ आस पास एकत्र हो कर कीचड़ बनाती है इन स्रोतों के पास वेस्ट जल एकत्र होता रहता है जो मच्छरों को खुला निमंत्रण देता है जिस कारण बीमारियाँ फैलती है

क्लब सदस्यों ने विद्यालय में ये ही समस्या देखी और फैसला लिया के जल पीने के स्थान पर एक सोख्ता गड्ढा बनाया जाएगा।

आओ जाने सोख्ता गड्ढा  क्या होता है ?
1mx1mx1m का एक खड्ढा जो की बेकार हुए शुद्ध जल को पुनः भूमि के भीतर पहुंचाने का कार्य करता है
इस को घरों में भी बनाया जा सकता है।
यह सोख्ता गड्ढा हैण्डपम्पो के पास बनाया जाए तो बहुत लाभ होता है ।
बनाने की विधि:-निम्न बिंदुओं के अनुरूप कार्य कर के हम इसको बना सकते है।

1.सोख्ता गड्ढा वहीँ बनायें जहाँ पानी वेस्ट होता हो।

soakage_pit-1 soakage_pit-2

2. सोख्ता गड्ढा की लम्बाई,चोड़ाई और गहराई =1मीx1मीx1मी  

3. इस गड्ढे के बीचो बीच 6 इंच व्यास का 15 फीट का बोर करें (उपर के दो चित्र)

soakage_pit-3 IMG_3592 soakage_pit-5

4. अब इस् बोर में पिल्ली ईंटों (नरम ईंटों) की रोड़ी भरें।
5. अब नीचे 1/4 भाग में 5 इंच x 6 इंच साईज़ के ईंटों के टुकड़े,फिर 

1/4 भाग में 4 इंच x 5 इंच साईज़ के ईंटों के टुकड़े भर देते है। (उपर के तीन चित्र)

soakage_pit-6 soakage_pit-7

6. शेष 1/4 भाग में बजरी (2इंचx2इंच साईज़) भर देते है।
7. अब 6 इंच की एक परत मोटे रेत की बना देते है। (उपर के दो चित्र)

8. एक मिट्टी का घड़ा या पलास्टिक का डिब्बा लेकर उस में सुराख कर देते है फिट उस में नारियल की जटाएं या सुतली जूट भर देते है यह इसलिए कि पानी के साथ आने वाला ठोस गंद उपर ही रह जाएगा और कभी कभी सफाई करने के लिए भी सुविधा हो जाएगी।

soakage_pit-8 soakage_pit-9

9. अब निकास नाली को इस घड़े या डिब्बे के साथ जोड़ देते है वेस्ट पानी इस में सबसे पहले आएगा।   
10. खाली बोरी से गड्ढे को ढक देते है।
11. बोरी के उपर मिट्टी डाल कर गड्ढे को ईंटों से बंद कर देते है।

12. अब तैयार हो गया सोख्ता गड्ढा (उपर के तीन चित्र)

soakage_pit-13     soakage_pit-12
अब यह गड्ढा प्रतिदिन लगभग 500 लीटर बेकार पानी को 5-6 सालों तक सोख्ता रहेगा।

soakage_pit-14   नोट : Gड्ढे की गहराई एक मीटर से कम ना हो क्यूँकी 0.9 मीटर तक जमीन में एरोबिक जीवाणु aerobic bacteria होते है ये जीवाणु वेस्ट पानी के कार्बनिक पदार्थों का विघटन करते है और पानी को स्वच्छ करते है।
खड्ढे की लम्बाई चोड़ाई बढाई जा सकती है पर गहरी 1 मी. से अधिक ना हो क्यूंकि एरोबिक जीवाणु 0.9 मी. से नीचे वायु के आभाव में जीवित नहीं रहते और तब जीवाणु द्वारा होने वाली प्रक्रिया नहीं हो पाती और गन्दा जल ही जमीन में चला जाएगा।

स्कूल के अलावा यह सोखता खड्डा नजदीकी गावं पालेवाला में भी बनाया गया जिस का वीडियो यहाँ देखें। 




दर्शन लाल बवेजा , विज्ञान अध्यापक , राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर खंड रादौर  जिला यमुना नगर,हरियाणा

Saturday, January 31, 2015

विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop

विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop
Science Kit
विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop
जिला स्तरीय विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में सम्पन्न हुई। इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले भर से आये तीस विज्ञान शिक्षको को एनसीआरटी द्वारा डिजाइन की गयी विज्ञान किट का प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया। इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन डाईट के प्रधानाचार्य श्री तेजपाल सिंह ने किया और इस कार्यशाला का संचालन संस्थान की प्रशिक्षण समन्वयक श्रीमती गीता ढींगरा ने किया। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर के रूप में विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व नरेंद्र सिंह (प्रवक्ता  रसायन) थे। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले के छह खण्डों से विभिन्न विद्यालयों से आये तीस विज्ञान अध्यापको ने भाग लिया। यह प्रशिक्षु अध्यापक अब इस कार्यशाला के तृतीय व अंतिम चरण में अपने अपने बलाक के शेष अध्यापको को प्रशिक्षण प्रदान करेंगें। कार्यशाला में एनसीआरटी द्वारा डिजाइन की गयी दोनों प्राथमिक व अपर प्राथमिक विज्ञान किट्स का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत यह किट्स विज्ञान शिक्षको को तीन वर्ष पूर्व उपलब्ध करवाई गयी थी, इन उपयोगी विज्ञान किट्स में यूजर मेनुअल के आभाव में विज्ञान शिक्षको को इस किट्स से सभी प्रकार की विज्ञान गतिविधियां करवाने में बहुत दिक्कत होती थी क्यूंकि यह विज्ञान किट्स सामान की सूची से भी वंचित थी जिस कारण इन किट्स में शामिल कुछ गैरपरम्परागत व नव डिजाइन किये गए उपकरणों के नाम तक विज्ञान शिक्षको को मालूम नहीं थे और निरिक्षण के दौरान इन उपयोगी किट्स के प्रयोग ना किये जाने के कारण पूछने पर विज्ञान शिक्षक बताते थे की इस किट का प्रशिक्षण उन्हें दिलवाया जाए तभी इन किट्स का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। यह विज्ञान किट विज्ञान पाठ्य पुस्तको में उपलब्ध सभी गतिविधियों को करवाए जा सकने के मद्देनजर डिजाइन की गयी थी परन्तु यूजर मेनुअल व सामान के नामो की लिस्ट के बगैर यह बहुउपयोगी किट विज्ञान कक्षों में बंद पडी थी।  
इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं के प्रथम चरण में एससीआरटी गुडगाँव में मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया गया जहां एनसीइआरटी और अन्य संस्थानों के विज्ञान किट्स एक्सपर्टस को आमंत्रित किया गया था। उसके बाद इस प्रशिक्षण कार्यशालाओं के द्वितीय चरण में जिला स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। बहुत ही उपयोगी व नवाचार से युक्त इन किट्स के प्रशिक्षण में एम टी दर्शन लाल व नरेंद्र सिंह ने योजनाबद्ध तरीके से पहले सभी प्रशिक्षुओं को इन दोनों किट्स में उपलब्ध करवाए गए उपकरणों के नामो व उनकी विशेषताओं से परिचित करवाया और फिर इन उपकरणों से किये जा सकने वाले विज्ञान प्रयोगों और विज्ञान गतिविधियों को सूचीबद्ध तरीके से अध्यापको को नोट करवाया।
सर्वप्रथम भौतिकी के प्रयोग व गतिविधियाँ करवाई गयी जिन में मुख्यतः प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन और विक्षेपण, विद्युत जनित्र,  विद्युत घंटी, विद्युत प्रेरण, विद्युत मोटर, स्थिर वैद्युत आवेश, चुम्बकीय बल रेखाएं, आयतन, घनत्व, आर्कमडीज का सिद्धांत, बर्नौली का नियम, बहु परावर्तन, चुम्बक के विभिन्न प्रकार, चुम्बकीय सुई, पृष्ठ तनाव आदि से सम्बंधित विभिन्न गतिविधियाँ करवाई गयी और साथ ही में रसायन विज्ञानं की गतिविधियों में डब्लू ट्यूब से कार्बन डाई आक्साइड गैस, हाइड्रोजन गैस का बनना व जल का वैद्युत अपघटन, उदासीनीकरण से सम्बंधित गतिविधियाँ व प्रयोग करवाए गए। जीव विज्ञान की गतिविधियों के अंतर्गत प्याज की झिल्ली की कोशिका, रन्ध्र व जंतु कोशिका की अस्थाई स्लाइडे बनानी सिखाई गयी व किट में उपलब्ध डाईशेक्सन माइक्रोस्कोप और सयुंक्त सूक्ष्मदर्शी के प्रयोग का भी अभ्यास करवाया गया।
इन सब के अलावा विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने कम लागत के विज्ञान प्रयोग, मेरा विज्ञान बाक्स, विज्ञान क्विज व पजल्स के माध्यम से भी विज्ञान शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण दिया। पावर पाइंट प्रस्तुतिकरण के द्वारा विज्ञान शिक्षण व विज्ञान संचार के विभिन्न नवाचारी पहलुओं से अध्यापको को रूबरू करवाया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान विज्ञान अध्यापको ने विज्ञान शिक्षण में प्रभावी सुधार विषय पर समूह चर्चा भी की जिस में निरंजन सिंह विज्ञान अध्यापक के सुझाव पर सभी विज्ञान अध्यापको ने सहमती प्रकट की जिस में कक्षा छह से दस तक विज्ञान विषय में प्रयोगात्मक कार्य करवाने के लिए प्रति सप्ताह तीन पीरियड दिए जाने की मांग राखी गयी।
विज्ञान अध्यापको को संबोधित करते हुए डाईट के प्रधानाचार्य श्री तेजपाल सिंह ने बताया की जिस प्रकार इलेक्ट्रॉन और सौरमंडल का कोई भी ग्रह चंद सेकंड भी अपनी गति को धीमा नहीं कर सकता और ना ही लेट हो सकता है ठीक उसी प्रकार अध्यापको को भी समय का पाबन्द होना चाहिए तभी समाज और शिक्षा का भला हो सकता है। जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी और जिला गणित विशेषज्ञ अनिल गुप्ता ने भी विज्ञान शिक्षको को संबोधित किया व विज्ञान की विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों व विज्ञान प्रदर्शनियों बारे अध्यापको को अवगत करवाया। जिला शिक्षा अधिकारी श्री उदय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बेहतर परीक्षा परिणामो के लिए शिक्षकों से सहयोग मांगा जिसके जवाब में अध्यापको ने भी उनको सहयोग देने का विश्वास जताया।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने अध्यापको को हॉट एयर बैलून का सिद्धांत समझाते हुए डाईट के मैदान में हॉट एयर बैलून उड़ा कर दिखाया। उन्होंने बताया की जब हवा को आग से गर्म किया जाता है तो हवा गर्म होकर हल्की हो जाती है व उपर उठती जिस कारण बैलून उपर उठता है,  अध्यापको ने इस बैलून को उड़ाने में सहयोग किया व अपने विद्यालय के बच्चों के समक्ष भी हॉट एयर बैलून गतिविधि को करवाए जाने की इच्छा जताई।
विज्ञान अध्यापको ने विज्ञान किट की गतिविधियों व प्रयोगों को अपने हाथ से करके देखा व उनका बार बार अभ्यास किया व अपने अपने विद्यालयों में इन किट्स के भरपूर उपयोग का आश्वासन दिया। इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में जिला भर से आये अध्यापको में खेम लाल, मुकेश, गुलशन, अमित, रवि, कश्मीरी लाल, सुशील, राकेशमोहन, संजीव, गिरीश, संजय, रुस्तम अली, सुरेन्द्र, विजय कुमार, परमजीत इंदरजीत सिंह, राजेश, आदेश, राजिंदर, विरेंदर, विपिन, स्वीटी, मधु मेहतासुमन, रंजना गुप्ताअनिता वर्मा, निरंजन सिंह आदि ने भाग लिया।

Friday, November 28, 2014

जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 22NCSC Distt level

जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस  22NCSC Distt level 
आठ टीमों का हुआ राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ चयन
बाल वैज्ञानिकों ने मौसम और जलवायु सम्बन्धित शोध पत्र प्रस्तुत किए
विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क, हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग पंचकुला व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक, जिला विज्ञान उन्नति समिति व शिक्षा विभाग यमुनानगर के सयुंक्त तत्त्वाधान मे करवाई जाने वाली जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे सम्पन्न हुई। 
जिसमे शैक्षिक समिति के समन्वयक जे एस सांगवान, प्रदीप सरीन, जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी, दर्शनलाल, सन्दीप गुप्ता ने शिरकत की और विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती अनीता काम्बोज ने कार्यक्रम की शुरुआत की और प्रधानाचार्या ने अपने सम्बोधन द्वारा बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया।
इस बाल विज्ञान सम्मेलन मे एक सौ बीस बाल वैज्ञानिकों और तीस मार्गदर्शक अध्यापको व आयोजको ने भाग लिया। 
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस का इस वर्ष का मुख्य विषय आओ मौसम और जलवायु को समझें रखा गया है। इस प्रतियोगिता में ग्रामीण और शहरी वर्ग से सभी प्रकार के विद्यालयों के बाल वैज्ञानिक भाग लेते हैं और अपने शोधपत्र पढते हैं।
प्रतियोगिता के परिणाम
छह से सात दिसम्बर को रोहतक मे

आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिये जिन बाल वैज्ञानिकों का चयन हुआ उनमे से टीम के ग्रुप लीडर केशवी स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुड्डा जगाधरी, आँचल काम्बोज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी यमुनानगर, श्रुति व यशश्वी स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुड्डा जगाधरी, विधि मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी यमुनानगर, हर्षित
राजकीय व मा वि बूड़िया, रजत राजकीय व मा वि तलाकौर, रिज़वाना राजकीय उच्च विद्यालय तेजली अपने शोध पत्रों का राज्य स्तर पर प्रस्तुतीकरण करेंगें।
इस अवसर पर मौसम एवं जलवायु थीम पर एक विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया

जिस मे दीक्षांत, शिवांग प्रथम, लविश, सत्यम द्वितीय और हेमन्त व अभिषेक तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर मौसम एवं जलवायु थीम पर एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिस मे शिवांगी प्रथम और शगुन धीमान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतियोगिता मे प्रस्तुत किये गए शोध पत्रों के शीर्षक
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि स्कूली बच्चो की पीएचडी कही जाने 
वाली इस प्रतियोगिता मे बाल वैज्ञानिकों ने मौसम बदलाव का त्वचा पर प्रभाव, मौसम के पैरामीटर्स मापने की अपनी प्रयोगशाला 

मौसम बदलने पर स्कूल मे बच्चों की हाजरियों पर पड़ने वाले प्रभाव, ठोस कचरा प्रबंधन की दुर्व्यवस्था के कारण मौसम पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन और कार्बन फूट प्रिंट और मौसम व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन, बदलते मौसम के अनुसार कपड़े पहनावे की आदतों मे बदलाव, बदल रहे मौसम मे डेंगू के मच्छरों का प्रतिरोधकता विकसित कर लेने से मानव पर प्रभावों का अध्ययन आदि शीर्षकों के अंतर्गत अपने शोधपत्र पढ़े।
इस कार्यक्रम में ज्योतिका डाँग, विकास पुंडीर, भूपिन्द्र खत्री, श्रीश बेंजवाल शर्मा, सुबुही, राजकुमार धीमान, ओम प्रकाश सैनी, गौरव, रीना मल्होत्रा, सन्दीप गुप्ता, इन्दु अरोड़ा, योगेन्द्र शर्मा, सीमा अरोड़ा, विजय कौशिक, विकास पुंडीर, गोपाल शर्मा, मनीषा का सक्रिय योगदान रहा। 
निर्णायक मंडल में डॉ॰ अमर जीत सिंह खालसा कॉलेज, श्री राजपाल पांचाल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा श्री सन्दीप गुप्ता विज्ञान अध्यापक बक्कर वाला से थे।








Saturday, November 15, 2014

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पुच्छल तारे पर उतारा स्पेसक्राफ्ट Rosetta mission’s

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पुच्छल तारे पर उतारा स्पेसक्राफ्ट Rosetta mission’s 
बहुत वर्षों से ये हसरत थी खगोल वैज्ञानिकों की कि पुच्छल तारे के वो अनखुले पन्ने भी खोले जाएं जिनको पढ़ कर ब्रह्मांड के उन रहस्यों को भी जाना जाए कि आखिर इन ग्रहों तारों का निर्माण किन किन चरणों मे हुआ है इसी जिज्ञासा वश पुच्छल तारे के नजदीक जाकर या फिर उसकी सतह पर पहुँच कर उस के बारे मे जाना जा सके इसी प्रयासों के फलस्वरूप यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने एक बहुत बड़ी कामयाबी के मुकाम को छुआ है और धूमकेतु को फतेह कर लिया है एजेंसी ने अंतरिक्ष में स्थित 67P नाम के धूमकेतु पर अपना लैंडर स्पेसक्राफ्ट उतार दिया अंतरिक्ष के अभियानों मे ऐसा ऐसा पहली बार हुआ है जब स्पेसक्राफ्ट को किसी धूमकेतु की सतह पर सुरक्षित उतारा गया है।
आज सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर के सदस्यों को क्लब समन्वयक व दर्शन लाल बवेजा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो मार्च 2004 को यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने अपना हैरतअंगेज रोजेटा मिशन लॉन्च किया था तब इसे कल्पना मात्र माना जा रहा था। रोजेटा पूर्व दस  वर्षों मे पचास  करोड़ किलोमीटर से भी अधिक लंबा फासला तय करके 67P धूमकेतु के पास पहुंचा। जहां वैज्ञानिकों ने रोजेटा के संलग्नक लैंडर स्पेसक्राफ्ट फाइली को इस राकेट से अलग किया और इस से अलग होने के बाद फाइली ने सात घंटे की यात्रा की और धूमकेतु की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग कर ली और जैसे ही लैंडिंग की सूचना मिली तो यूरोपियन स्पेस एजेंसी वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को गले मिल कर बधाइयां दी। दर्शन लाल ने बच्चो को यह भी बताया कि यूरोपियन स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों को फाइली से सिग्नल मिलने शुरू हो गए हैं पता चला है जिस पुच्छल तारे की सतह पर यह उतारा गया है उस की सतह बर्फीली है।
कितना बड़ा है 67P धूमकेतु
67P धूमकेतु जिस पर फाइली को लैंड करवाया गया है उसका आकार 4 किलोमीटर की चौड़ाई का है। जबकि लैंडर स्पेसक्राफ्ट फाइली का आकार एक कपड़े धोने की मशीन जितना है। यह पृथ्वी से इतनी दूर है कि इससे मेसेजिंग मे एक सन्देश के आने और जाने मे एक घंटे लगभग समय लगता है।
खगोल वैज्ञानिक क्या जानना चाहते है इस मिशन से?
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मनुष्य की पहुँच से दूर इस खगोलीय पिंड के अध्ययन से सौरमंडल के बहुत से अज्ञात रहस्य पता लग सकते हैं। नेपच्यून ग्रह के पथ के बाहर विशाल धूमकेतुओं का एक बहुत विशाल झुरमुट है जिसे उर्ट क्लाउड कहते हैं। वहाँ से यदा-कदा इन धूमकेतुओं परिवार से कोई धूमकेतु सूर्य की प्रभावी गुरुत्व सीमा में आ जाता है और दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करने लगता है। वैज्ञानिकों के एक बड़े वर्ग का यह भी मानना है कि भूतकाल मे पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी कच्चा माल धूमकेतुओं से ही आयातित हुआ था। फ़्रेड होइल और कुछ खगोलविद ऐसा मानते आये हैं कि अब से कोई साढ़े छह करोड़ वर्ष पहले एक विशालकाय धूमकेतु के पृथ्वी से आ टकराने से विशालकाय प्राणी डायनासोर का सफाया हुआ था और वैज्ञानिकों का मानना है कि धूमकेतु के अध्ययन करने से सौर मंडल कैसे बना यानी इसके निर्माण की पहेली को सुलझाया जा सकता है सौरमंडल के अस्तित्व से आने लेकर अभी तक इनमें खास बदलाव नहीं हुआ है।


Saturday, October 25, 2014

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 22nd NCSC Tips

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की तैयारियों की समीक्षा 22nd NCSC Tips

जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस ग्यारह नवम्बर को विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे होगी  
                
विद्यालयी बच्चो मे वैज्ञानिक दृष्टिकोण व खोजी प्रवृती उत्पन्न करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क, हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सयुंक्त तत्त्वाधान द्वारा हर वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर करवाया जाता है जिस मे स्कूली बच्चे टीम बना कर दिए गए उपविषय पर सर्वे, केस स्टडी या प्रयोगात्मक विधियों से परियोजना बनाते हैं। इससे सम्बंधित बनाये गए परियोजनाओं को प्रस्तुति पूर्व निरीक्षण हेतु आज बच्चे विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे एकत्र हुए जहां उन्होंने अपने परियोजना कार्यों को जिला समन्वयक दर्शन लाल और प्रवक्ता ज्योतिका डांग के समक्ष प्रस्तुत किया। आयोजन पूर्व इस निरीक्षण कार्यक्रम मे बच्चो को उनके विज्ञान प्रोजेक्ट्स मे सुधार व उनको और बेहतर बनाने के टिप्स दिए गए।
बच्चो द्वारा तैयार किये जा रहे विज्ञान प्रोजेक्ट  
बच्चो ने ठोस कचरा प्रबंधन और मौसम, 
मेरी अपनी मौसम प्रयोगशाला, 
मौसम परिवर्तन के  दौरान स्कूल मे विद्यार्थियों की उपस्थिति पर प्रभाव, 
मौसम परिवर्तन का त्वचा पर प्रभाव, 
सेक्टर सत्रह मे प्रवासीयो के जीवन मे मौसम व जलवायु मे परिवर्तन के प्रभाव, यातायात नियंत्रण पर मौसम का असर, 
सरोजनी कालोनी व आसपास रह रहे अन्य प्रदेशो के परिवारों का स्थानीय मौसम के साथ तालमेल व प्रभाव का अध्ययन, 
मानसून के दौरान नहर तटीय क्षेत्रों मे जलस्तर बढ़ने से होता आर्थिक नुकसान व निवारण के उपाय, 
झुग्गी बस्ती मे मौसम से बचाव के त्रिकोण का अध्ययन व सेहत पर प्रभाव, 
बदलते मौसम मे खानपान के बदलाव का सेहत व आर्थिक दशा पर प्रभाव, 
बदलते मौसम के प्रभाव से पालतू पशुओं के बचाव के देसी तरीको का अध्ययन व सुझाव, 
स्थानीय क्षेत्र मे मौसम की मार और वनस्पतियों पर प्रभाव, 
विद्यालय भवन पर मौसम परिवर्तन का प्रभाव और मुरम्मत पर वार्षिक खर्च का आंकलन व सुझाव,
स्थानीय कृषी पर वर्षा का प्रभाव व बदलाव की सम्भावना, 
दूध के उत्पादन पर मौसम का प्रभाव, 
गावं के तालाबो का जलस्तर-मानसून पूर्व व मानसून पश्चात, 
मौसम मुताबिक़ पक्षियों के व्यवहार मे परिवर्तन का अध्ययन, 
वर्षा को मापना, 
वर्तमान और भविष्य मे हुई वर्षा का तुलनात्मक अध्ययन समेत बहुत से प्रोजेक्ट पर चर्चा की गयी।
इस बार की जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस ग्यारह नवम्बर को विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे होगी। विद्यालय की प्रधानाचार्य अनीता काम्बोज व विज्ञान अध्यापक विकास पुंडीर ने इस आयोजन को लेकर बहुत उत्साह व खुशी व्यक्त की है।
जिला के भावी बाल वैज्ञानिकों केशरी, विश्वास, मेहुल, तन्वी, गर्वित, आकाश, अभिशान, पारखी, आयुष, यशस्वी, श्रुति, फिज़ा, शोभित, अर्जुन, निकुंज, हर्ष, लव, शुभम, रिया, अमीषा, साहिल, ध्रुव, अक्षित, उमंग, मयंक ने पाने विज्ञान प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किये व इनके साथ उनके मार्गदर्शक अध्यापक विकास पुंडीर, ज्योतिका डांग, गौरव, रीना व सुबुही  ने भी प्रोजेक्ट्स का जायजा लिया व सुझाव दिए ताकि बच्चे मुख्य प्रतियोगिता तक अपने प्रोजेक्ट्स को और बेहतर बना सकें।         




'