Sunday, March 02, 2014

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर कार्यक्रम National Science Day Celebrations

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस National Science Day Celebrations 
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आज विज्ञानी सी वी रमन को किया याद 
‘वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा’  है इस साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर इस वर्ष दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय मुरथल हरियाणा जिला सोनीपत मे भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। हरियाणा विज्ञान मंच के निमंत्रण पर क्लब की तरफ से विज्ञान मंच के बैनर तले कम लागत के विज्ञान प्रयोगों का कार्नर लगाया गया इसके अलावा चमत्कारों का पर्दाफाश, विज्ञान मंच के प्रकाशनों का स्टाल व विशेष आमंत्रण पर पधारे प्रगति विज्ञान संस्था के श्री दीपक शर्मा व रोहणी गोले ने भी पृथ्वी की परिधि और हाइड्रोराकेट्री के माडलों का प्रदर्शन किया। समारोह के दौरान विज्ञान पेंटिंग प्रतियोगिता, विज्ञान माडल प्रदर्शनी, सेमिनार, रोबोटिक मुकाबलों का भी आयोजन किया गया।
कम लागत के विज्ञान प्रयोग
इन सब कार्यक्रमों के अलावा आयोजन विश्वविद्यालय मे होबी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था जहां पर विवि के छात्र छात्राओं द्वारा अपनी विभिन्न हाबिज़ को प्रकट करती प्रदर्शनी लगाईं हुई थी जिसमे २-२ छात्र छात्राओं ने Coin Collection सिक्के के संग्रह को प्रदर्शित किया हुआ था। उन्होंने विभिन्न देशों के व भारतीय प्राचीन व आधुनिक सिक्कों का संग्रह प्रदर्शित किया हुआ था जो कि काफी सराहा गया।हरियाणा विज्ञान मंच से सतबीर नागल, दीपा कुमारी, वेदप्रिय, ब्रह्मदेव, दर्शन लाल, अजय कुमार व प्रगति विज्ञान संस्था मेरठ से दीपक शर्मा व रोहिणी गोले ने शिरकत की व अपने हुनर से बालकों मे विज्ञान संचार  किया व वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने मे सम्मिलित प्रयासों को बढ़ावा दिया।
 चमत्कारों का पर्दाफाश
रामन  का नोबल पुरस्कार प्राप्त करना भारत की शान था          
कईं सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों और शासकों द्वारा दी गयी  गुलामी से प्रभावित रहा भारत देश का वासी जो कि प्राचीन काल मे विज्ञान और गणित का जन्मदाता व अग्रणी रहा था, उस दिन गर्वित अनुभव कर रहा था जब 28 फ़रवरी 1928  को ‘रामन प्रभाव’ की खोज हुई थी। इसी खोज के लिए वैज्ञानिक सी वी रमन वर्ष उन्नीस सौ तीस मे भौतिकी के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किये गये थे। ब्रिटिश शासित देश के लिए यह और भी बड़े सम्मान की बात थी कि उनसे पहले उस समय तक एशिया मे भी किसी वैज्ञानिक को भौतिकी मे नोबल पुरस्कार नहीं मिला था। आज स्थानीय सरोजिनी कालोनी मे सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर एक बैठक का आयोजन किया गया और मौजूदा दौर मे भारत मे वैज्ञानिक तरक्की और प्रतिभा पलायन पर रोक विषय  पर चर्चा की गयी।
 पृथ्वी की परिधि और हाइड्रोराकेट्री
कब मनाया जाता है राष्ट्रीय विज्ञान दिवस ?
1928 को सर सी वी रमन ने अपनी खोज की घोषणा की थी उसी यादगार दिन को मानाने के उद्देश्य वर्ष 1986 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार राष्ट्रीय परिषद के परामर्श पर भारत सरकार ने प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा’ रखा गया है। जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना व उनमे और जनमानस मे वैज्ञानिक नजरिया व सोच उत्पन्न करने प्रति उत्साह का संचार करना है।

राकेट लौन्चिंग 
क्या है रमन प्रभाव ?
रामन प्रभाव के बारे मे विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा ने बताया कि रामन प्रभाव मे यह होता है कि मोनोक्रोमेटिक प्रकाश किरण जब ठोस, द्रव या गैस के पारदर्शक माध्यम से गुजारी गयी और तब इसके विचलन अध्ययन करने पर पता चला कि मूल प्रकाश की किरणों के अलावा भी स्थिर अंतर पर कुछ बहुत क्षीण  तीव्रता की किरणे भी उपस्थित होती हैं। इन किरणों को रमन-किरणे नाम दिया गया। ये किरणे माध्यम के पार्टिकल्स के घूर्णन व कंपन के कारण मूल प्रकाश मे से ऊर्जा में घटत या बढ़त होने से उत्पन्न होती हैं। और इस खोज को रामन इफेक्ट नाम दिया गया रसायन, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, और कम्युनिकेशन के क्षेत्र मे अन्य खोजों और आविष्कारों मे सहायता मिली। इस खोज के इतने   वर्षों बाद भी  ‘रामन इफेक्ट’  दुनिया भर की आधुनिक प्रयोगशालाओं में ठोस,  द्रव और गैसों के अध्ययन के लिए उपयोग किया जा रहा है
रोबोटिक मुकाबलों का नजारा 
कैसे उत्पन्न  हो वैज्ञानिक सोच? 
भारत जैसे विविधिता परिपूर्ण देश मे जहां का शिक्षा व रोजगार के अवसरों बटवारा समरूप नहीं है भागौलिक व सियासी विविधता परिपूर्ण देश मे विभिन्न धर्म व मतमतान्तरों के चलते अंधविश्वासों से दूर हट कर पूर्ण वैज्ञानिक सोच युक्त हो पाना बहुत कठिन था परन्तु हमारे वैज्ञानिकों और संचारकों ने सभी मर्यादाओं के अंतर्गत किसी को भी बिना ठेस पहुंचाए बहुत हद जनता को वैज्ञानिक सोच के नज़दीक ला दिया है परन्तु फिर भी कभी कभी देखने को मिलता है कि व्यवसायीकरण के इस दौर मे धार्मिक अंधविश्वास का प्रचार भी हावी हो जाता है परन्तु अब कोई भी अंधविश्वास अधिक दिनों तक नहीं जम पाता है और यही समाज मे वैज्ञानिक चेतना का विकास दर्शाता है।
इस अवसर पर विभिन्न  बच्चो ने निबंध लेखन, पेंटिंग, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, विज्ञान सेमीनार और विज्ञान प्रदर्शनी आदि के माध्यम से अपनी क्षमता और और वैज्ञानिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
                                                        रिपोर्ट: दर्शन लाल बवेजा 
अखबार मे : पंजाब केसरी


Friday, February 14, 2014

क्लब सदस्यों ने राष्ट्रीय शिविर अहमदाबाद मे भाग लिया National Camp for VIPNET Clubs

क्लब सदस्यों ने राष्ट्रीय शिविर अहमदाबाद मे भाग लिया National Camp for VIPNET Clubs
सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर के सदस्य

सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर के सदस्यों आंचल काम्बोज, रीमा कुमार, अमन काम्बोज, मोनिका, ब्रिजपाल काम्बोज  समेत सात सदस्यों ने विपनेट क्लबों के राष्ट्रीय शिविर सम्पन्न 13-15 दिसम्बर को साइंस सिटी अहमदाबाद में भाग लिया इस कैम्प मे भाग लेने के बाद उन्होंने यहां यमुनानगर मे शेष क्लब सदस्यों को अपनी इस प्रतिभागिता के बारे मे विस्तार से बताया इस राष्ट्रीय कैम्प की विस्तृत रिपोर्ट इस प्रकार से है      
विपनेट क्लबों का राष्ट्रीय शिविर सम्पन्न 13-15 दिसम्बर को अहमदाबाद में आयोजित किया गया13-15 दिसम्बर को विज्ञान प्रसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के अर्तगत् एक स्वायत्तशासी संस्था है। इस संस्था के अंतर्गत् विपनेट कल्बों का समूह देशभर में कार्यरत है, जिसमें स्कूलों, संस्थाओं मे क्लबों का गठन किया जाता है। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में भारत के 535 से अधिक जिलों में विपनेट क्लबों की उपस्थिति है। उक्त क्लबों हेतु विज्ञान प्रचार-प्रसार को अधिक महत्व देने के लिए समय-समय पर देश के कोने-कोने में कार्यशालाएं आयोजित की जाती है। साथ ही प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित शीर्षक के अंतर्गत् विपनेट क्लबों का एक राष्ट्रव्यापी शिविर आयोजित किया जाता है। इसी कडी के तहत इस वर्ष यह शिविर, 13-15 दिसम्बर, 2013 को साइंस सिटी, अहमदाबाद में आयोजित किया गया, जिसमें देश भर में लगभग 200 से ज्यादा विद्यार्थी, क्लब कोर्डिनेटरशिक्षकों आदि ने भाग लिया। इस शिविर में क्लबों द्वारा जल विषय से सम्बंधित विभिन्न परियोजनाओं, व जागरूकता कार्यक्रमों के आधार पर प्राप्त रिपोर्टों, के अनुसार लगभग 100 क्लबों का चयन किया गया।
प्रथम दिवस 13 दिसम्बर,
प्रथम दिवस फोटो विपनेट न्यूज 
सभी विपनेट सदस्यों को 12 दिसम्बर की सायं को आने के लिए कहा गया था, जिससे कि उनकी व्यवस्था बनाने एवं कार्यक्रम को समय पर आयोजित करने में सुविधा हो। अधिकतर कल्ब सदस्य 12 दिसम्बर की सांय तक अहमदाबाद पहुंच गये थे। और अन्य सभी सदस्य 13 दिसम्बर की सुबह
तक कार्यक्रम स्थल साइंस सिटी पहुंचे। उक्त क्लब सदस्यों को  स्टेशन से हॉस्टल तक लाने के लिए परिवहन व्यवस्था की गयी थी। सभी
क्लब सदस्य श्री वी.बी. काम्बले जी के साथ 
क्लब सदस्य 
एवं अन्य कर्मचारियों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था अडालजस्थित हॉस्टल -स्टे-एन-स्टोपमें की गयी थी। यहीं पर इनके लिए सुबह का नाश्ता एवं रात्रि भोजन की व्यवस्था थी, जिसको की सभी ने खूब पसंद किया।
शिविर का पंजीकरण कार्य प्रातः 9.00 बजे से आरम्भ हुआ साथ ही 10.00 बजे बाद परम्परा अनुसार उद्घाटन कार्यक्रम आरम्भ हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में विज्ञान प्रसार के पूर्व निदेशक श्री वी.बी. काम्बलेविज्ञान प्रसार के मुख्य वैज्ञानिक अधिकरी श्री बी.के. त्यागी, गुजरात कौंसिल एवं साइंस एण्ड टैक्नोलॉजी के एडवाइजर एवं मेम्बर सेक्रेटरी श्री नरोत्तम शाहू, नर्मदा डैम परियोजना के अधिकारी श्री एस.डी. बोहरा ने भाग लिया।
स्वागत् कथन प्रस्तुत करते हुए श्री नरोत्तम शाहू ने बताया कि विपनेट कल्ब की गतिविधियां बच्चों व समुदाय में विज्ञान को लोकप्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही वर्ष 2014 में स्कूलों में नए विचारों के साथ काम किया जायेगा।
शिविर के मुख्य वक्तागण 
राष्ट्रीय शिविर के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए श्री बी.के त्यागी ने जल संरक्षण करने वाले देशों का विशेष उल्लेख किया एवं हिमालय पुरुष अनिल जोशी, मुकेश पाण्डवा-पर्यावरण मित्रा एवं अन्ना हजारे का विशेष रुप से  उल्लेख किया। उन्होंने दिन भर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के विषय में भी अवगत कराया कि आज के दिन सभी कल्ब सदस्यों को विज्ञान से परिचित कराने के लिए साइंस सिटी भ्रमण कराया जायेगा। इसमें मुख्यतौर पर 3डी. फिल्म अन्डर वाटर सी’, ‘प्लानेट अर्थ’, एवं म्यूजिकल फाउंटेन का विशेष आयोजन एवं भ्रमण किया जायेगा। इस अवसर पर विज्ञान प्रसार के पूर्व डायरेक्टर श्री वी.बी. काम्बले ने अपने उद्बोधन में कहा कि विपनेट क्लब अपने आप में जन
आंदोलन है। विज्ञान प्रसार, नई दिल्ली द्वारा विकसित प्रयोग, खगोलीय घटनाओं के लिए ग्रामीण अंचलों तक प्रेषित की गई सामग्रियों व प्रकाशित पुस्तकों से लोगों में कॉफी जागरुकता आई है। जल वर्ष, 2013 की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि पृथ्वी पर 71 प्रतिशत जल हैपर पीने योग्य मीठा जल  की उपलब्धता अत्यन्त चिंतनीय है। साथ ही जल पर निर्भर रहने वाले जीव-जन्तुओं, वनस्पतियों का नष्ट होना हमारे प्राकृतिक संतुलन की पद्वति को पूर्णतः नष्ट कर रहा है। दोपहर के भोजन से पहले श्री वी.बी. काम्बले जी ने स्लाइड प्रदर्शन के माध्यम से जल की उपलब्धता से लेकर नदियों के उद्गम व समुद्र की यात्रा तक की विभिन्न स्थितियों को स्पष्ट किया। साथ ही मीठा पानी की उपलब्धता के लिए सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी नदी नील, समुद्र का जल स्तर व साथ ही जल जन्तुओं की विलुप्तता के खतरों की स्थिति से भी सबको आगाह किया। मुख्य अतिथि श्री एस.डी. बोहरा ने विपनेटियनों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को जल सहित प्रकृति संरक्षण, संतुलन पद्वति पर ध्यान
दिए जाने की जरुरत है। सरदार सरोवर नर्मदा विकास निगम के कार्यों व ग्रामीण क्षेत्रों तक सिंचाई के लिए गठित वाटर यूजर एसोशिएसनका उल्लेख कर बताया कि जल की उपयोगिता की समझ ग्रामीणों को है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बहुत जागरूकता का परिचय दे रहे हैं। इस जागरूकता को विपनेट क्लबों द्वारा देश भर में प्रचारित करने में योगदान देना होगा। दोपहर के भोजन से पहले एक पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी द्वारा सभी विपनेट क्लबों को अन्य क्लबों द्वारा किये गये कार्यों को जानने का अवसर मिला। 
ग्रुप फोटो 
भोजन के पश्चात् श्री बी.के. त्यागी ने तीन दिवसीय शिविर की रुपरेखा प्रस्तुत की, जिसने सबको उत्साहित किया। तत्पश्चात् सभी विपनेटियन साइंस सिटी स्थित आइमैक्स में 3डी फिल्म अंडर वाटर सीदेखने गए जो कि  विशेष रूप से जल जीव-जन्तुओं पर आधारित है। इस फिल्म का विपनेटियन ने खूब आनंद लिया जो मनोरजंन के साथ ज्ञानवर्धक भी थी और सभी प्रतिभागियों को जल जीव-जन्तुओं की दुनियां से अवगत कराने में विशेष रुप से सहायक रही।
उक्त मूवी के आनंन्द के बाद क्लब सदस्यों का उत्साह चरम पर थाजिसके बाद उन सभी को साइंस सिटी स्थित प्लानेट अर्थदेखने का अवसर मिला, जो कि विशेष रुप से विज्ञान प्रचार-प्रसार आधारित कार्यक्रमों से सुसज्जित है। 
अंत में रात्रि लगभग 7.00 बजे सांइस सिटी आधारित एशिया के सबसे बड़े संगीतयमय फव्वारे को देखने का सभी को अवसर मिला। इस संगीतमय फव्वारे में विज्ञान एवं तकनीक का समायोजन भलीभांति किया गया है यहां फव्वारे की ऊंचाई लगभग 37 मीटर तक पहुंच जाती है और हिन्दी गीतों पर उन फव्वारे का झूमना सचमुच एक नई तरह के आनन्द का अनुभव था। तत्पश्चात् सभी ने भोजन किया एवं रात्रि विश्राम हेतु हॉस्टल के प्रस्थान किया। उक्त कार्यक्रम का संचालन एंव समन्वय गुजकोस्ट की कर्मचारी सुश्री धारा जी ने किया।
द्वितीय दिवस 14 दिसम्बर,
नर्मदा बांध
शिविर का द्वितीय दिवस बहुत रोमांचकारी रहा पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार सभी क्लब सदस्यों को सुबह 5.00 बजे जागने को कहा गया था, जिसके बाद सुबह जल्दी ही सभी ने नाश्ता किया। सभी ने लगभग 7.00 बजे तक तैयार होकर नर्मदा बांध के लिए यात्रा आरम्भ की जो लगभग 200 किलोमीटर की थी। लम्बे एवं थकावट भरे रास्ते के बावजूद सभी का उत्साह अपने चरम पर था। दोपहर बाद लगभग  2.00 बजे नर्मदा बांध सभी पहुंच गये थे एवं वहीं पर सभी के लिए भोजन का प्रबंध किया गया था। जिसके बाद सभी नर्मदा एवं विध्ंयाचंल की पहाडियों से होकर नर्मदा बांध देखने के लिए गए। जहां नर्मदा की निर्मल जल धारा ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया।
नर्मदा बांध के लिए सुरक्षा का मजबूत घेरा है, इसी कड़ी में नर्मदा बांध का लगभग 1.5 किलोमीटर पहाड़ के अंदर सुरंग का रास्ता नर्मदा निगम की बसों द्वारा तय किया गया। सुरंग के अंदर जाकर विशेष तौर पर बनाया गया, हाइड्रो पॉवर प्लांट देखने का अवसर सभी को मिला, जो कि पहाड़ को
काटकर लगभग 150-160 फीट तक ऊपर एवं नीचे बनाया गया था। वहां पर उपस्थित गाइड ने बताया कि टरबाइन की मरम्मत करने के लिए जब उनको उठाया जाता है तो वहां लगी हुई लिफ्ट, जो कि एक बार में 250 टन वजन तक उठा सकती है एवं उसमें लगे हुक जो कि 420 टन वजन का होता है काम में लाया जाता है। उन्होंने विशेष तौर से बताया कि उक्त बांध से जितनी बिजली पैदा होती है उसका 57 प्रतिशत मध्य प्रदेश को एवं 27 प्रतिशत महाराष्ट्र को तथा 17 प्रतिशत गुजरात को दिया जाता है। मध्य प्रदेश का हिस्सा इसलिए ज्यादा है कि अधिकतर पानी मध्य प्रदेश से ही आता है। 
नर्मदा यात्रा करते-करते लगभग सायं के 7.00 बज गये थे। पुनः रात्रि भोजन की व्यवस्था नर्मदा गेस्ट हाउस में की गयी जिसके बाद लगभग 830 बजे वापसी अहमदाबाद के लिए लगभग 200 किलोमीटर यात्रा की। रोमांच सभी के अंदर था इसलिए यह यात्रा कठिन नहीं रही। पुनः रात्रि
लगभग 2.00 बजे तक सभी वापसी अपने हॉस्टल आये।
तृतीय एवं अंतिम दिवस 15 दिसम्बर
शिविर के अंतिम दिन सुबह नाश्ता आदि से निवृत होकर पदमश्री हिमालय पुरुष श्री अनिल जोशी, श्री बी.के. त्यागी व श्री नरोत्तम शाहू जी की अगुवाई में साइंस सिटी में एक भारत श्रेष्ठ भारतथीम पर आधारित रन फॉर यूनिटीदोड़ प्रारम्भ की गयी। इसके पश्चात् 10.30 बजे सभी सभागार मे उपस्थित हुए यहां पर श्री नरोत्तम शाहू ने सभी आगन्तुक विशेषज्ञों का परिचय कराया जिसमें पदमश्रीहिमालय पुरुष के नाम से विख्यात डॉ. अनिल जोशी जी मैगशेसे पुरस्कार प्राप्त एवं जलपुरुष के नाम से विख्यात श्री राजेन्द्र सिंह जी, विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ. आर. गोपीचन्द्रन मुख्य रहे।
डॉ. अनिल जोशी ने सत्रा को सम्बोधित करते हुए विज्ञान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला एवं भारत को एक कृषि प्रधान देश बताते हुए कहा कि भारत में हजारों-लाखों गांव है, विकास के नाम पर उन्होंने गांव एवं पर्यावरण की हो रही हानि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गांवों के सभी संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग हो और उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जाए तभी विज्ञान की सार्थकता सिद्ध होगी एवं गांव का विकास होगा पर्यावरण बचेगा। यहां पर श्री बी.के. त्यागी जी ने भी सभी अतिथियों का परिचय दिया एवं विज्ञान, जल एवं प्रर्यावरण को लेकर उनके कार्यों का उल्लेख किया। 
क्लबों द्वारा गातिविधि प्रदर्शन 
इस अवसर पर विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ. आर. गोपीचन्द्रन ने कहा कि हमे अपने अंतर मन की बातों को सुनना है। प्रकृति को बचाने के लिए खुद को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रसार एक उत्कृष्ट विद्यालय हैहम अधिक से अधिक लोगों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे
और आगे भी सभी को सक्रियता से काम करना है। इस अवसर पर जलपुरुष के नाम विख्यात राजेन्द्र सिंह जी ने पर्यावरण एवं संशाधनों के प्रति प्रयासों को स्पष्ट करते हुए बताया कि 1985 के बाद से भूमि-जल के खाली होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों  व पहाडियों से बहने वाली नदियां के अस्तित्व को बचाना, प्रयावरण की संरक्षा करना, बंजर भूमि को हरियाली भूमि में बदलना हेतु आम जन में दृढ़ता की कमी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों का प्रयोग कर धरती को बचाना होगा। उन्होंने राजस्थान को अपनी संस्था द्वारा किए गए कार्यों के अनुभव को भी साझा किया।  
कार्यक्रम के अंत में कुछ चुने हुए प्रतिभागियों ने क्लब द्वारा किये गये कार्यों व शिविर के दौरान प्राप्त हुए अपने अनुभवों को बताया। कुछ क्लब सदस्यों ने तो स्वयं द्वारा तैयार क्लब कार्यों का पीपीटी द्वारा प्रस्तुतीकरण भी किया, जिससे अन्य क्लब सदस्यों ने भी प्रेरणा ली। सायं पांच बजे कार्यक्रम
को समाप्त किया गया। सभी प्रतिभागी अपने नये अनुभवों के साथ अपने-अपने घरों को विदा हो गये आगे की तैयार में जुटन के निश्चय के साथ।
रिपोर्ट : श्री बी. कु. त्यागी वैज्ञानिक    

Monday, January 20, 2014

मौसम की तीव्रता, कारण और निवारण Understanding Weather and Climate

मौसम की तीव्रता, कारण और निवारण Understanding Weather and Climate 
 Weather and Climate monitoring team jr/sr
सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने गत कुछ वर्षों से मौसम के व्यवहार मे होने वाली तीव्रता के कारणों को एक संगोष्ठी मे आपसी विचार विमर्श के जरिये जानने का प्रयत्न किया। इस संगोष्ठी का आयोजन सरोजिनी कालोनी मे किया गया। क्लब सदस्यों ने बताया कि उन्होंने खुद यह अनुभव किया कि जो भी मौसम आता है उसकी तीव्रता नाकाबिले बर्दाश्त होती है। हर वर्ष किसी ना किसी मौसम की प्रचंडता पिछले वर्ष से अधिक ही होती है।
क्लब प्रभारी विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा ने बताया कि पिछले कुछ दशकों के दौरान हुआ ऋतु परिवर्तन वाकई विस्मयकारी है। पृथ्वी पर सदा से केवल दो ही ऋतुएं जो कि स्पष्ट रूप से परिभाषित रही वो हैं गर्मी और सर्दी, इन दोनों ऋतुओं के अनुरूप ही सभी जीवों ने अपने आप को ढाल लिया है। पृथ्वी पर पिछले डेढ़ – दो सौ वर्षों के दौरान मौसम मे परिवर्तन को अधिक तेजी से नोट किया जा रहा है जिस कारण कुछ विशेष प्रजाति के पौधें और जंतु इस परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को नहीं ढाल पाए है जिस कारण या तो वे विलुप्त हो गए हैं या फिर विलुप्ति के कगार पर खड़े हैं। मानवीय और प्राकृतिक गतिविधियां इस परिवर्तन लिए जिम्मेदार है एवं वैज्ञानिकों के लिए यह चिंता का एक कारण है।
क्या हैं इस परिवर्तन के कारण? 
सदस्यों के आपसी विमर्श के दोरान मौसम मे बदलाव के कुछ कारण सामने आये जिनमे मुख्यत गत वर्षों मे मानव क्रियाकलाप जिसमे ओद्योगिक क्रियाकलाप, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि, जीवाश्म इंधनो का अत्यधिक दहन, ग्रीनहाउस गैसों का अधिक उत्पादन, लगातार घटते वन क्षेत्र, अत्याधिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण कारण सामने आये। सदस्यों ने यह भी माना कि मानवीय क्रियाकलापों के अलावा अनेक प्राकृतिक कारक भी इसके लिए उत्तरदायी हैं। उनमें से कुछ प्रमुख हैं महाद्वीपीय अपसरण, ज्वालामुखी, समुद्री लहरें, पृथ्वी का झुकाव।
क्या हैं मौसम की तीव्रता के प्रभाव? 
एक सिमित क्षेत्र के लिए मौसम की अत्याधिक तीव्रता एवं बदलाव मानव कार्य क्षमता व सम्बन्धित क्षेत्र के विकास व रोजगार को बहुत प्रभावित करती है। केदारनाथ त्रासदी इसका ताज़ा उदाहरण है अब वहां के विकास व पहले जैसी स्थिति को लाने मे वर्षों लग सकते हैं। अत्याधिक सर्दी व पूरा पूरा दिन पड़ने वाली धुंध और कम दृश्यता की स्थिति मनुष्य के जीवन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित करती है। किसी भी मोसमी प्रचंडता के कारण दुर्घटनाओं की संख्या मे बहुत वृद्धी होती है अत्याधिक सर्दी मे सड़क व अन्य यातायात दुर्घटनाएं, अत्याधिक गर्मी मे आग लगना व वर्षा की अधिकता की स्थिति मे बाढ़ आना, बादल फटना जैसी घटनाओं से जानमाल की बहुत क्षति होती है।
विद्यार्थियों को होता है अधिक नुकसान, 
क्लब सदस्य अमन ने एक खास बिंदु को उजागर करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को मौसम के इन तीव्र परिवर्तन व प्रचंडता से बहुत हानि उठानी पडती है खास तौर पर विद्यालय भवन और सडकें व स्ट्रीट लाईट आदि इन्फ्रास्ट्रक्चर सभी औसत मौसम व्यवहार को ध्यान मे रख कर बनाए जाते हैं जो कि अत्याधिक सर्दी, अत्याधिक गर्मी व वर्षा की अधिकता की स्थिति मे मौसम की मार को झेलने मे सक्षम नहीं होते जिस कारण विद्यालय कार्यदिवसों मे कटौती यानि कि छुट्टियाँ व कार्यसमय मे कटौती के कारण कक्षा मे पीरियड छोटे किये जाते हैं जिस कारण समय पर पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता, इस कारण अब यह सोचना और उसको क्रियान्वित करना जरूरी हो चुका है कि विद्यालय भवनों व शहरी निर्माणों मे वे सभी जरूरी बदलाव किये जायें जिससे बिना छुट्टिया बढ़ाए विद्यार्थी अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से कर सकें।
इस परिवर्तन मे हम सबका हाथ है,
दैनिक जीवन में इस परिवर्तन में हम सबका का हाथ है। इन बिन्दुओं पर भी गंभीरतापूर्वक विचार किया गया। मनुष्य द्वारा व्वय ऊर्जा का प्रमुख स्रोत विद्युत है। जो कि ताप (थर्मल) विद्युत संयंत्रों से उत्पन्न होती है। ये ताप विद्युत संयंत्र जीवाश्म ईंधन (मुख्यतः कोयला) से चलते हैं एवं बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैसें एवं अन्य प्रदूषकों के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। पेट्रोल अथवा डीजल, जो जीवाश्म ईंधन हैं यातायात वाहन चलाने के काम आता है हम प्लास्टिक के रूप में बहुत बड़ी मात्रा में कूड़ा उत्पन्न करते हैं जो वर्षों तक वातावरण में विद्यमान रहता है एवं नुकसान पहुँचाता है। हम विद्यालय एवं कार्यालय में कार्य के दौरान बहुत बड़ी मात्रा में कागज का उपयोग करते हैं। भवनों के निर्माण में बड़ी मात्रा में लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार हम मनुष्य लगातार दोहन की और अग्रसर हैं जिसका परोक्ष नुकसान मौसम पर पड़ता है और वो परिणाम हम भुगत भी रहे हैं।
अखबारों मे 





Tuesday, January 14, 2014

यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब Yamunanagar Philatelic Club

यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब सिखायेगा डाक टिकट संग्रह Yamunanagar Philatelic Club
 फिलाटेलिक क्लब के सदस्य 
यमुनानगर मे पहले फिलाटेलिक क्लब का गठन, क्लब सदस्य सीखेंगे डाक-टिकटों का व्यवस्थित संग्रह अर्थात ‘फिलेटली‘
आज यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब का ओपचारिक गठन किया गया व फिलेटली क्लब की पहली बैठक मे आज क्लब सदस्यों को डाक टिकट व अन्य दुर्लभ डाक सामग्री संग्रह करने के तरीके सिखाये गए। क्लब के संचालक दर्शन बवेजा ने सदस्यों को क्लब की निशुल्क सदस्यता ग्रहण करवाई व अपने सम्बोधन मे कहा कि उन्हें बचपन से ही रंग-बिरंगे डाक टिकट अच्छे लगते थे और वो डाक के लिफाफों से टिकट निकालकर सुरक्षित रख लेते थे।
डाक टिकट व
डाक सामग्री व स्टेशनरी का संग्रह 
धीरे धीरे उनका यह संग्रह विशाल रूप लेता गया और उनके संग्रह मे भारत मे डाक प्रणाली के शुरुआती दिनों के डाक लिफ़ाफ़े, पोस्टकार्ड्स, टेलीग्राम, प्रथम दिवस आवरण, विशेष आवरण, विदेशी डाक टिकट व अन्य दुर्लभ डाक सामग्री व स्टेशनरी का संग्रह है जिसे कि आज क्लब सदस्यों के अवलोकन हेतु प्रदर्शनी के रूप मे भी लगाया गया व आगामी दिनों मे इस फिलेटली प्रदर्शनी को विभिन्न स्कूलों मे भी लगाया जाएगा व विद्याथियों को फिलेटली शौंक को अपनाने की प्रेरणा दी जायेगी। क्लब गठन का उद्देश्य यह भी रहेगा कि जिले के सभी अज्ञात फिलेटली शौकीनों को एक मंच पर लाया जाएगा जिससे यमुनानगर का नाम भी फिलेटली जगत के नक्शे पर दर्ज हो सकेगा, क्लब सदस्यों को निशुल्क फिलेटलिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
क्या है फिलेटली 
फिलेटली शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द फिलोस व एटलिया से हुई। जिसमे फिलोस का मतलब है कि आकर्षण और एटलिया का मतलब है कर व शुल्क से छूट अर्थात डाक टिकट लगाने के बाद से पत्र प्राप्त करने वाले को पत्र पहुचने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। तो इस आकर्षण के चलते लोग डाक टिकट उतार कर संग्रहित कर लिया करते थे। सन अठ्ठारह सौ चौसठ में एक फ्रांसीसी जार्ज हार्पिन ने फिलेटली शब्द का इजाद किया था। इससे पूर्व इस शौंक को टिम्बरोलोजी कहा जाता था। फ्रेंच में टिम्बर का अर्थ टिकट ही होता है। एडवर्ड लुइन्स पेम्बर्टन को साइन्टिफिक फिलेटली का जनक माना जाता है। बेशक डाक टिकट एक छोटा सा कागज का रंगबिरंगा टुकड़ा होता है यह वो राजदूत है  जो खुद विभिन्न देशों सैर करता व हमे भी करवाता है और सब को अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है

किंग आफ हाबी है फिलेटली 
डाक-टिकटों का व्यवस्थित संग्रह यानि कि फिलेटली मनुष्य का सबसे लोकप्रिय शौंक है। फिलेटली को दुनिया के सभी शौंकों मे शौकों का राजा और राजाओं का शौक भी कहा जाता है। वैसे तो डाक टिकटों का संग्रह ही फिलेटली माना जाता है पर बदलते वक्त के साथ फिलेटली डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरण, विशेष आवरण, पोस्ट मार्क, डाक स्टेशनरी एवं डाक सेवाओं से सम्बन्धित साहित्य का व्यवस्थित संग्रह एवं अध्ययन बन गया है। इस शौंक ने अब बहुत लोकप्रियता प्राप्त हासिल कर ली है इसके लिए भारतीय डाक विभाग भी समय समय पर विभिन्न आकर्षक योजनाये चलाता है सदस्यों को इसकी जानकारी भी दी जायेगी।

विश्व की मशहूर हस्तियाँ भी डाक-टिकट संग्रहकर्ता
हमारे देश भारत मे आधा करोड़ से भी कुछ अधिक लोग क्रमबद्ध डाक-टिकट संग्रह करते हैं। आज विश्व में डाक-टिकटों का सबसे बड़ा संग्रह ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पास है। किंग जार्ज पंचम, महारानी एलिजाबेथ, चार्ली चेप्लिन, किंग फरौक, राजकुमार रैनिएर, फ्रेंकलिन रूजवेल्ट, जोन हेन्मुलर, जोन लेन्नों, शतरंज खिलाड़ी अनातोली कारपोव, टेनिस खिलाड़ी मारिया शरापोवा और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु आदि हस्तियाँ भी डाक-टिकट संग्रहकर्ता थे।

कौन थे डाक-टिकट के जनक 
बात उन दिनों की है जब डाक शुल्क दूरी के हिसाब से लिया जाता था तो देखा गया कि बहुत से पत्र पाने वालों ने पत्रों को लेने से इन्कार कर दिया जिस कारण अस्वीकृत पत्रों का ढेर लग जाता था इस कारण सरकारी निधि की हानि हो रही थी। सर रोलैण्ड हिल जो कि पेशे से एक अध्यापक थे उन्हें ही डाक-टिकटों का जनक कहा जाता है उन्होंने बिना दूरी की बाध्यता के एक समान व एकमुश्त शुल्क की दरों का सुझाव दिया और लिखने की बजाय चिपकाए जाने वाले लेबिल की बिक्री का क्रांतिकारी सुझाव दिया। रोलैण्ड हिल के सुझाव पर छह मई सन अठ्ठारह सौ चालीस को विश्व का पहला डाक टिकट पेनी ब्लैक ब्रिटेन मे जारी किया गया। भारत व एशिया का पहला डाक टिकट एक  जुलाई अठ्ठारह सौ बावन को सिन्ध प्रांत मे आधे आने के मूल्य का जारी किया गया, इस टिकट को सिर्फ सिन्ध राज्य हेतु जारी करने के कारण सिंदे डाक कहते हैं इसी को प्रथम सर्कुलर डाक टिकट का स्थान भी प्राप्त है।

क्या हैं इस क्लब के गठन का उद्देश्य 
विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा का कहना है कि जैसे पत्र लेखन का चलन कम होता जा रहा है और इसका स्थान एस एम एस व ई-मेल व अन्य अत्याधुनिक संचार साधनों ने ले लिया है ऐसे मे इस क्लब के जरिये क्लब सदस्यों को उनकी डाक विरासत से अवगत करवाया जाएगा। स्कूल विद्यार्थियों को फिलेटली के प्रति उत्साहित कर उनको अपनी संस्कृतिक विरासत से भी अवगत करवाया जाएगा व समय समय पर विभिन्न फिलेटलिक प्रतियोगिताए भी आयोजित करवाई जायेंगी और बच्चों को विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फिलेटलिक प्रतियोगिताओं मे भाग दिलवाया जाएगा।

संस्थापक सदस्य  
क्लब के सदस्यगण  
आज आंचल काम्बोज, पारस, पलक, स्पर्ष, अमन, शगुन, अभिजात धस्माना, पार्थवी, कार्तिक, छवि, इंदु, आरुषि, काजल, अवनी, वंशिका, पारुल, शिरीष, युक्ता गल्होत्रा, सुमेधा गल्होत्रा, टविंकल, रमन, उपहार आदि ने यमुनानगर फिलाटेलिक  क्लब की सदस्यता ग्रहण की व प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
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Monday, January 06, 2014

त्रिआयामी ठोस को बनते देखना 3D Solids

त्रिआयामी ठोस को बनते देखना 3D Solids 

आवश्यक सामग्री - 4 डी. सी.मोटर , गत्ते के वर्ग, आयत, वृत व त्रिभुज काट व विधुत सेल, गत्ते या प्लाई की शीट बेस के लिए, वायरिंगव सोल्डरिंग का सामान, फेविक्विक आदि  

कारण - जब ये आकृतियाँ घूमेंगी तो 3D बनती हुई दिखेंगी   

कैसे  बनायें - बेस वाले बोर्ड मे सुराख़ कर के चारों मोटर फिट कर लो, उस की गरारी के ऊपर गत्ते का बना वर्ग, आयत, वृत खड़े चिपका लो,  जब मोटर्स मे विद्युत चालू की जायेगी तो वृत्ताकार घूमती ये चारो आकृतिया घूमेंगी तो 3D ठोस बनाती हुई दिखेंगी  


















नोट - बच्चे किसी बिजली मिस्त्री की मदद ले सकते हैं  खास कर वायरिंग व सोल्डरिंग करवाने मे,
इस प्रकार आप अपने लिए गणित वर्किंग माडल बना सकते है। 
सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा